Hot News

August 8, 2026

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

बंगाल में टीएमसी के पूर्व विधायक सनत डे गिरफ्तार, रंगदारी के जरिए जमीन हड़पने समेत लगे हैं कई आरोप

नैहाटी : तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक सनत डे पुलिस के शिकंजे में हैं. तृणमूल के पूर्व विधायक को जबरन वसूली और धमकी देकर दूसरों की जमीन हड़पने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. उन्हें शनिवार को दोपहर बाद अदालत में पेश किया जाएगा. कई आरोपों के बाद हुई गिरफ्तारी नैहाटी के पूर्व विधायक सनत डे पर लंबे समय से जबरन वसूली के आरोप लगे हैं. उन पर जमीन हड़पने के भी आरोप हैं. इसके अलावा, 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद उन पर चुनाव के बाद हिंसा करने के आरोप भी लगे थे. इसी आरोप में नैहाटी पुलिस स्टेशन ने पूर्व विधायक सनत डे को गिरफ्तार किया है. उन्हें शनिवार दोपहर बाद को बैरकपुर अदालत में पेश किया जाएगा. पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें गुस्साये लोगों ने फेंके थे अंडे सनत डे ने 2024 के उपचुनाव में नैहाटी विधानसभा सीट जीतकर विधायक का पद हासिल किया. उन पर कई आरोप लगे. राज्य में आने के बाद उन्हें जनता के गुस्से का सामना करना पड़ा. जून में, जब वे नैहाटी स्थित पार्टी कार्यालय जा रहे थे, तब उन पर अंडे फेंके गए. चोर चोर के नारे लगाए गए. स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि सनत डे ने नैहाटी में आतंकवाद का रूप धारण कर लिया है. चुनाव परिणाम घोषित होने से पहले ही उन्होंने लोगों को धमकी दी थी. Also Read: बंगाल में होगी जाति प्रमाणपत्रों की जांच, अब तक 45,000 लोग संदिग्ध सूची में The post बंगाल में टीएमसी के पूर्व विधायक सनत डे गिरफ्तार, रंगदारी के जरिए जमीन हड़पने समेत लगे हैं कई आरोप appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

सलमान खान के घर के बाहर तैनात सुरक्षाकर्मी की मौत, ड्यूटी के दौरान अचानक आया हार्ट अटैक

Cop Died Salman Khan: बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान की सुरक्षा में तैनात एक पुलिसकर्मी गणेश रायते की अचानक मौत हो गई. रिपोर्ट के अनुसार ड्यूटी में अचानक तबियत बिगड़ने से उनकी मौत हुई हैं. What is the Incident: क्या है मामला मुंबई पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, 41 वर्षीय कॉन्स्टेबल गणेश रायते सलमान खान के घर के बाहर सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात थे. ड्यूटी के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और वह बेहोश होकर गिर पड़े. साथ मौजूद पुलिसकर्मी उन्हें तुरंत पास के अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. पुलिस के मुताबिक, उनकी मौत हार्ट अटैक से हुई. गणेश उन पुलिसकर्मियों में शामिल थे जो अभिनेता सलमान खान की सुरक्षा में तैनात थे. सलमान खान को लगातार मिल रही धमकियों के चलते उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई है. Salman Khan’s Security Tightened Due to Laurence Bishnoi: लॉरेंस  बिश्नोई के कारन बढ़ी सुरक्षा  सलमान खान की सुरक्षा पिछले कुछ समय से बढ़ा दी गई है. इसकी वजह जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से मिली धमकियां हैं. बिश्नोई का दावा है कि वह 1990 के दशक में काले हिरण शिकार मामले को लेकर सलमान से बदला लेना चाहता है. पिछले साल सलमान खान ने मुंबई के बांद्रा में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि कड़ी सुरक्षा के साथ हर जगह जाना कभी-कभी उनके लिए मुश्किल हो जाता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें धमकियों से डर नहीं लगता और उन्होंने अपनी सुरक्षा भगवान पर छोड़ दी है. सलमान ने कहा था, “भगवान, अल्लाह सब उन्हीं पर है. जितनी उम्र लिखी है, उतनी ही मिलेगी. बस कभी-कभी इतनी सुरक्षा के बीच घूमना मुश्किल हो जाता है.” About Laurence Bishnoi: लॉरेंस बिश्नोई के बारे में  लॉरेंस बिश्नोई 2022 में पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद चर्चा में आया था. उसने कई बार सार्वजनिक रूप से सलमान खान को धमकी दी है और उन पर ‘हम साथ-साथ हैं’ की शूटिंग के दौरान कथित काले हिरण शिकार मामले में शामिल होने का आरोप लगाया है. साल 2024 में मुंबई के बांद्रा स्थित सलमान खान के घर ‘गैलेक्सी अपार्टमेंट’ के बाहर बाइक सवार दो लोगों ने कई राउंड फायरिंग की थी. बाद में जांच में सामने आया कि इस घटना का मकसद अभिनेता को डराना था. पुलिस के अनुसार, इस फायरिंग की साजिश लॉरेंस बिश्नोई के कहने पर रची गई थी. Salman Khan Work Front: सलमान खान वर्कफ्रंट वर्कफ्रंट की बात करे तो सलमान खान इन फिल्मों में  मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ में नजर आएंगे. अपूर्व लाखिया के निर्देशन में बनी इस फिल्म बॉलीवुड एक्ट्रेस चित्रांगदा सिंह लीड रोल में हैं. यह भी पढ़ें: असम में बाढ़ पीड़ितों के लिए मसीहा बने सलमान खान: ‘Global Sikhs’ संग शुरू की ‘आशियाना’ पहल, बेघरों को मिलेंगे शेल्टर The post सलमान खान के घर के बाहर तैनात सुरक्षाकर्मी की मौत, ड्यूटी के दौरान अचानक आया हार्ट अटैक appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

पत्नी के नाम 6 बीघा जमीन, 40 लाख के जेवर, आलीशान घर, DPO अजीत अमर के ठिकाने पर EOU की रेड में क्या-क्या मिला?

DPO Ajit Amar: आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने सहरसा जिले में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) अजीत अमर के चार ठिकानों पर शुक्रवार को छापेमारी की. उनके पास आय से 72.35 प्रतिशत अधिक की संपत्ति का खुलासा हुआ है. ईयूओ की टीम ने छापेमारी के दौरान कई डॉक्युमेंट्स खंगाले. वेतन मद में मात्र 38 लाख रुपये डीपीओ ने सीवान जिले के दरौंदा थाना के रैनी में पैतृक जमीन पर 40 लाख से अधिक राशि खर्च कर आलीशान मकान बनवा रखा है. इसके अलावा 40 लाख के जेवर और पत्नी के नाम से 41.50 लाख रुपये की खरीदी गई 6 बीघा जमीन के डॉक्युमेंट्स मिले हैं. अजीत ने लगभग साढ़े चार साल के कार्यकाल में वेतन मद में मात्र 38 लाख रुपये प्राप्त किए. भव्य मकान से मिले 40 लाख के आभूषण दरौंदा में बने भव्य मकान की तलाशी में मकान निर्माण से संबंधित तीस बिल भी मिले हैं. उनके पैतृक गांव के निजी आवास से 40.05 लाख रुपये के जेवर मिले. अजीत और उनकी पत्नी पूजा कुमारी के नाम पर कुल चार बैंक खाते पाए गए हैं. इतना ही नहीं, निवेश के कागजात भी मिले हैं. पत्नी के नाम जमीन के मिले दस्तावेज जानकारी के मुताबिक, छपरा में प्रशासनी आवास से पत्नी के नाम पर सारण के परसागढ़ में 23 मई 2025 को खरीदी गई 6 बीघा 9 कट्टा 8 धूर जमीन के दस्तावेज मिले हैं. 24 अप्रैल 2023 को खरीदी गई 15,34,998 रुपये की महिंद्रा स्कॉर्पियो क्लासिक और बाइक भी पाए गए. इसके साथ ही 27 लाख के आभूषण क्रय की रसीद मिली. अवैध धन कमाने का लगा आरोप बताया जा रहा है कि अजीत चार फरवरी 2022 को सेवा में आए और सहरसा में योगदान किया. डीपीओ प्लानिंग एंड एकाउंट छपरा में प्रतिनियुक्ति के दौरान उन पर अवैध धन कमाने का आरोप लगा. इसकी जिला प्रशासन ने जांच कराई. ऐसे में शुक्रवार को डीपीओ के सीवान के पैतृक आवास और निजी मकान, सहरसा नया बाजार में किराए का आवास, सहरसा में प्रशासनी कार्यालय कक्ष और छपरा गंडक कॉलोनी के प्रशासनी आवास पर ईओयू ने छापेमारी की. Also Read: 11 अगस्त के बाद क्या करेंगे प्रशांत किशोर? बांकीपुर उपचुनाव में BJP क्यों हारी और RJD के लिए कैसे बढ़ा खतरा The post पत्नी के नाम 6 बीघा जमीन, 40 लाख के जेवर, आलीशान घर, DPO अजीत अमर के ठिकाने पर EOU की रेड में क्या-क्या मिला? appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

हेमंत सरकार के साथ अभ्यर्थियों की डेढ़ घंटे चली वार्ता, 10 अगस्त को विधानसभा घेराव पर सस्पेंस

Jharkhand Students Protest, रांची : जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं में अनियमितताओं के विरोध में 14 दिन से चल रहे छात्र आंदोलन में प्रशासन के साथ बातचीत का रास्ता खुल गया. प्रशासन की आपत्ति के बाद बातचीत के लिए छात्रों द्वारा बनायी गयी 11 सदस्यीय कमेटी से तीन गैर छात्रों को हटा दिया गया. इसके बाद प्रशासन की ओर से भी कोई देरी नहीं हुई और करीब 7.50 बजे बातचीत शुरू हुई, जो लगभग डेढ़ घंटे तक चली. मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि सौहाद्रपूर्ण वातावरण में बातचीत हुई है. छात्रों ने अपनी मांगें रखी प्रशासन उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर रही है. ठोस निर्णय नहीं हुआ तो विधानसभा घेराव तय वार्ता में शामिल छात्र प्रतिनिधि रविंद्र पासवान ने बताया कि हम लोगों ने अपना मांग पत्र प्रशासन को सौंप दिया है. मंत्रियों ने आश्वस्त किया है कि उनकी मांगों से सीएम को अवगत कराया जायेगा. मंत्रियों ने माना कि यह केवल वर्तमान छात्रों का नहीं, बल्कि आनेवाली पीढ़ियों के भविष्य से भी जुड़ा है. रविंद्र ने कहा कि उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं हुआ तो 10 अगस्त को निर्धारित विधानसभा घेराव का कार्यक्रम होगा. तब तक आंदोलन जारी रहेगा, स्टेट गेस्ट हाउस में छात्रों के साथ वातों के बाद चारों मंत्री सीधे कांके रोड स्थित सीएम आवास पहुंचे. मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने बताया कि वार्ता के बाद सीएम को पूरी जानकारी दे दी गयी है. मंत्री ने बताया कि छात्रों के साथ अच्छी बातचीत हुई है. छात्र जेपीएससी से संबंधित कुछ तकनीकी मामले उठा रहे थे. उन पर छात्रों से कहा गया है कि वे अगले दिन इसे लिखित दें. मंत्री ने कहा कि दूसरे दौर की वार्ता भी संभावित है. ये भी पढ़ें: स्थानांतरण आदेश पर झारखंड राज्य चिकित्सा एवं जन-स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने उठाए सवाल, प्रशासन से पुनर्विचार की मांग छात्र प्रशासन को अपना सुझाव दें : हेमंत सोरेन सीएम हेमंत सोरेन ने शुक्रवार को छात्रों के मुद्दे पर कहा कि छात्र प्रशासन को अपना सुझाव दें. उन्होंने कहा कि प्रशासन ने छात्रों को अपनी बात रखने के लिए सभी जरूरी मंच उपलब्ध कराये हैं. राज्य प्रशासन उनकी हर समस्या समझना चाहती है. प्रशासन का दरवाजा खुला है. सीएम ने यह बात विधानसभा में पत्रकारों के सवालों के जवाब में कही. सीएम ने कहा कि प्रशासन छात्रों की उम्मीदों पर खरा उतरना चाहती है और छात्रों को आगे ले जाने की दिशा में काम कर रही है. प्रशासन उनकी जरूरतों के हिसाब से चिंताओं और उम्मीदों को पूरा करने के लिए बड़े सुधार की दिशा में काम कर रही है. सीएम ने कहा है कि रांची में मेरे युवा साथियों के साथ-साथ, राज्य के विभिन्न जिलों में रहनेवाले युवाओं और छात्रों के सुझाव भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं. इसलिए प्रशासन सभी जिलों के छात्र-छात्राओं की राय और सुझाव प्राप्त करेगी, ताकि समाधान व्यापक और समावेशी हो. शीघ्र ही राज्य और देशभर के छात्रों, शिक्षाविदों तथा नीति-निर्माताओं के सुझाव एकत्रित कर, समयबद्ध तरीके से आवश्यक सुधारों और सकारात्मक बदलावों की दिशा में ठोस कदम उठाये जायेंगे. ये भी पढ़ें: RIMS में विभागाध्यक्षों के रोटेशन पर ब्रेक, 60 डॉक्टरों ने स्वास्थ्य मंत्री और सचिव को लिखा पत्र The post हेमंत प्रशासन के साथ अभ्यर्थियों की डेढ़ घंटे चली वार्ता, 10 अगस्त को विधानसभा घेराव पर सस्पेंस appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

रूस से तेल-गैस खरीदा तो 100% तक टैरिफ! भारत समेत 5 देशों पर खतरा, अमेरिकी सीनेट से बिल पास

अमेरिकी सीनेट ने रूस से बड़े पैमाने पर तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने से जुड़े एक प्रतिबंध विधेयक को मंजूरी दे दी है. प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को हिंदुस्तान और चीन समेत रूसी ऊर्जा के प्रमुख खरीदार देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है. यह विधेयक सीनेट में 86 के मुकाबले 11 वोट से पारित हुआ है. अब इसे अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से मंजूरी लेनी होगी. इसके बाद ही यह राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए जाएगा. यानी फिलहाल हिंदुस्तान या चीन पर नया 100 प्रतिशत टैरिफ लागू नहीं हुआ है. खास बातें अमेरिकी सीनेट में विधेयक 86-11 वोट से पारित हुआ. हिंदुस्तान और चीन समेत रूस से सबसे ज्यादा ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लग सकता है. टैरिफ अपने आप लागू नहीं होगा, अंतिम फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति और कानून में तय शर्तों पर निर्भर करेगा. विधेयक का मकसद रूसी तेल और गैस से होने वाली कमाई पर दबाव डालना है. बिल को अभी अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से पारित होना बाकी है. नए प्रस्ताव का हिंदुस्तान-अमेरिका व्यापार वार्ता पर क्या असर होगा, इसे लेकर अभी स्थिति साफ नहीं है. क्यों लाया गया यह विधेयक? अमेरिकी सांसदों का कहना है कि रूस को तेल और गैस की बिक्री से मिलने वाली आमदनी यूक्रेन युद्ध में उसकी आर्थिक ताकत को बनाए रखने में मदद कर रही है. इसी राजस्व को कम करने के मकसद से उन देशों पर दबाव बनाने का प्रस्ताव है, जो बड़ी मात्रा में रूसी ऊर्जा खरीदते हैं. रूस के पांच बड़े तेल खरीदारों पर अमेरिका की नजर रिपोर्ट के अनुसार हिंदुस्तान, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल हैं. अमेरिकी विधेयक का निशाना इन्हीं बड़े खरीदारों पर है, ताकि रूस को ऊर्जा बेचने से हासिल आय को सीमित किया जा सके और यूक्रेन युद्ध के लिए मॉस्को पर आर्थिक दबाव बढ़ाया जाए. पहले 500% अब 100% तक टैरिफ का प्रस्ताव इस विधेयक के पुराने संस्करण में रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों के खिलाफ 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था. संशोधित मसौदे में इसे नरम करते हुए सबसे बड़े खरीदार देशों के लिए अधिकतम टैरिफ सीमा 100 प्रतिशत तक रखी गई है. इसका मतलब यह नहीं है कि विधेयक कानून बनते ही हिंदुस्तान या चीन पर सीधे 100 प्रतिशत शुल्क लग जाएगा. अमेरिकी राष्ट्रपति को परिस्थितियों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर इस अधिकार का इस्तेमाल करना होगा. रूस से सीधे आने वाले सामान पर भी सख्ती का प्रावधान प्रस्तावित कानून में अमेरिका में आयात होने वाले कुछ रूसी उत्पादों पर बहुत अधिक शुल्क लगाने के लिए राष्ट्रपति को अतिरिक्त अधिकार देने का भी प्रावधान बताया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे अधिकार एक तय अवधि तक लागू रह सकते हैं. इसका उद्देश्य रूस के निर्यात राजस्व को और सीमित करना है. ईरान से जुड़े प्रतिबंध भी विधेयक में शामिल विधेयक का दायरा केवल रूस तक सीमित नहीं है. इसमें ईरान से जुड़े मौजूदा अमेरिकी प्रतिबंध कानूनों को आगे बढ़ाने का प्रावधान भी शामिल है. इसके तहत ईरान के साथ कुछ प्रकार का कारोबार करने वाली गैर-अमेरिकी कंपनियों पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं. हिंदुस्तान-अमेरिका व्यापार वार्ता पर क्या होगा असर? सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर यह विधेयक कानून बनता है तो इसका हिंदुस्तान और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार बातचीत पर क्या असर पड़ेगा. व्हाइट हाउस की राष्ट्रीय आर्थिक परिषद के निदेशक केविन हैसेट से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने साफ जवाब नहीं दिया. यह वार्ताकारों पर निर्भर करता है- केविन हैसेट, निदेशक, व्हाइट हाउस राष्ट्रीय आर्थिक परिषद हैसेट के बयान से संकेत मिलता है कि रूसी तेल से जुड़े संभावित प्रतिबंधों और हिंदुस्तान-अमेरिका व्यापार समझौते को दोनों देशों की बातचीत करने वाली टीमें ही आगे तय करेंगी. हिंदुस्तान-अमेरिका के बीच पहले से चल रही टैरिफ पर बातचीत हिंदुस्तान और अमेरिका के बीच व्यापार और टैरिफ को लेकर पहले से बातचीत चल रही है. दोनों देश बाजार पहुंच बढ़ाने, व्यापार बाधाएं कम करने के साथ-साथ ऊर्जा और तकनीकी क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं. ऐसे में रूसी तेल खरीद पर नया अमेरिकी प्रतिबंध कानून इस बातचीत में एक नया और संवेदनशील मुद्दा जोड़ सकता है. अभी हिंदुस्तान पर 100% टैरिफ नहीं यह समझना जरूरी है कि अमेरिकी सीनेट से विधेयक पारित होने का मतलब हिंदुस्तान पर तत्काल 100 प्रतिशत टैरिफ लगना नहीं है. सबसे पहले इसे प्रतिनिधि सभा से मंजूरी मिलनी होगी. इसके बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर जरूरी होंगे. कानून बनने के बाद भी प्रस्तावित टैरिफ लागू करने के लिए अलग से कार्यकारी और कानूनी प्रक्रिया अपनानी पड़ सकती है. आगे क्या होगा? अब सबकी नजर अमेरिकी प्रतिनिधि सभा पर है. अगर वहां भी विधेयक पारित हो जाता है और राष्ट्रपति इसे मंजूरी देते हैं, तो रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर अमेरिकी आर्थिक दबाव काफी बढ़ सकता है. हिंदुस्तान के लिहाज से इसका असर केवल रूसी तेल आयात तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अमेरिका के साथ चल रही ट्रेड डील वार्ता, हिंदुस्तानीय निर्यात और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों पर भी पड़ सकता है. Also Read: ट्रंप का दावा- ज्यादा समय तक नहीं टिक पाएगा ईरान, घट रही तेहरान की ताकत इजराइली मीडिया का दावा: ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की हालत नाजुक, अस्पताल में हुए भर्ती The post रूस से तेल-गैस खरीदा तो 100% तक टैरिफ! हिंदुस्तान समेत 5 देशों पर खतरा, अमेरिकी सीनेट से बिल पास appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

11 अगस्त के बाद क्या करेंगे प्रशांत किशोर? बांकीपुर उपचुनाव में BJP क्यों हारी और RJD के लिए कैसे बढ़ा खतरा

Prashant Kishor: रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, इंफ्रास्ट्रक्चर समेत कई विकास के मुद्दों के साथ प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में उतरी थी. लेकिन उस वक्त एक भी सीट पर पार्टी की जीत नहीं हो पाई. इन्हीं मुद्दों के साथ जन सुराज बांकीपुर उपचुनाव 2026 में उतरी. लेकिन इस बार पार्टी ने जीत दर्ज कर ली. ऐसे में अब सवाल है कि 9 महीनों में ऐसा क्या बदल गया कि पीके को जनता ने चुना? आखिर बीजेपी का गढ़ जिस विधानसभा को कहा जाता था, उसी में वह हार कैसे गई. पीके की जीत तेजस्वी यादव और पूरे राजद के लिए खतरा हो सकता है और प्रशांत किशोर की आगे की रणनीति क्या हो सकती है… पढ़िए पूरी रिपोर्ट… बीजेपी के कैंडिडेट नीरज सिन्हा को 19,324 वोटों से हराने के बाद जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर 11 अगस्त के बाद शपथ ग्रहण करेंगे. इसके बाद औपचारिक रूप से विधायक के तौर पर प्रशांत किशोर काम करना शुरू कर देंगे. 11 तारीख से ही प्रशांत किशोर बांकीपुर विधानसभा के कई वार्ड में घूमने की प्लानिंग कर चुके हैं. इस दौरान वे लोगों से बातचीत करेंगे, उनकी परेशानियों को जानेंगे और उसी के आधार पर विकास का ब्लूप्रिंट तैयार करेंगे. आगे क्या हो सकती है पीके की रणनीति? बांकीपुर में जीत के बाद प्रशांत किशोर ने कहा था कि 3 महीने में इस विधानसभा में बदलाव दिखने लगेगा. इस दावे को वह पूरा करने पर काम कर सकते हैं. इतना ही नहीं, बिहार में होने वाले पंचायत चुनाव को लेकर भी उन्होंने प्लानिंग कर ली है. प्रशांत किशोर के मुताबिक, जन सुराज आगे आने वाले चुनावों पर भी अब फोकस करेगी और इसके लिए अभी से ही तैयारी शुरू कर दी गई है. पीके की तरफ से यह कहा गया है कि जन सुराज सभी जिला परिषदों और वार्डों में अपने कैंडिडेट उतारेगी. इस तरह से अभी से ही प्रशांत किशोर ने पंचायत चुनाव में उतरने का मूड सेट कर लिया है. कहा जा रहा है कि प्रशांत किशोर बांकीपुर उपचुनाव की तरह आगे के चुनावों में जातिगत मॉडल को छोड़ विकास के मॉडल पर काम कर सकते हैं. जन सुराज के संगठन को और मजबूत करने और बिहार की आगामी नेतृत्व में अपनी पार्टी को एक व्यापक विकल्प के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर सकते हैं. राजद और तेजस्वी के लिए प्रशांत किशोर बन सकते हैं खतरा बिहार की सियासत में अब तक राजद को मुख्य विपक्ष का चेहरा माना जाता था. लेकिन बांकीपुर में प्रशांत किशोर की जीत के बाद तेजस्वी यादव और राजद के लिए मुश्किलें खड़ीं हो सकतीं हैं. नेतृत्वक जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में प्रशांत किशोर मजबूत विपक्ष का चेहरा बन सकते हैं. इस बार के चुनाव में राजद के ‘एमवाई समीकरण’ में भी कहीं ना कहीं प्रशांत किशोर ने सेंध लगाई. नेतृत्वक विश्लेषकों का मानना है कि अगर विपक्षी मतदाताओं को नया नेतृत्व चाहिए, तो प्रशांत किशोर उस भूमिका में उभर सकते हैं. प्रशांत किशोर लगातार सक्रिय नेतृत्व करते हैं, जबकि तेजस्वी यादव की नेतृत्वक सक्रियता पर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं. बिहार विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान तेजस्वी यादव गायब रहे. साथ ही चुनाव के दौरान भी कुछ ऐसी ही स्थिति रही. राजद कैंडिडेट रेखा गुप्ता के लिए सिर्फ दो दिन उन्होंने चुनाव प्रचार किया. इस बीच प्रशांत किशोर की जीत के बाद मजबूत विपक्ष के चेहरे के तौर पर खुद को साबित करने के लिए तेजस्वी यादव को मेहनत करना पड़ सकता है. 11 से 19 अगस्त के बीच इन वार्डों में घूमेंगे पीके 11 अगस्त- वार्ड नंबर: 15, 18, 40 12 अगस्त- वार्ड नंबर: 19, 22, 23, 26 13 अगस्त- वार्ड नंबर: 29, 16, 39 14 अगस्त- वार्ड नंबर: 17, 38, 25 16 अगस्त- वार्ड नंबर: 30, 24, 27 17 अगस्त- वार्ड नंबर: 28, 31, 35, 21 18 अगस्त- वार्ड नंबर: 37, 42, 36 19 अगस्त- वार्ड नंबर: 41 Also Read: MLC Deepak Prakash: सिर्फ 7 महीने के लिए खत्म हुआ उपेंद्र कुशवाहा का टेंशन, फिर बेटे की मंत्री कुर्सी पर संकट The post 11 अगस्त के बाद क्या करेंगे प्रशांत किशोर? बांकीपुर उपचुनाव में BJP क्यों हारी और RJD के लिए कैसे बढ़ा खतरा appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

अरुणाचल पर चीन की ‘नाम बदलो’ साजिश को भारत ने दिया जवाब, 27 प्रमुख जगहों की मैपिंग

हिंदुस्तान ने शुक्रवार (7 अगस्त) को अरुणाचल प्रदेश के 27 प्रमुख स्थानों और भौगोलिक क्षेत्रों को सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक नक्शों पर दर्ज किया. यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब चीन लगातार अरुणाचल प्रदेश के कई स्थानों के नाम बदलने की कोशिश करता रहा है. अधिकारिक बयान के मुताबिक, यह पूरी कवायद अरुणाचल प्रदेश प्रशासन से सलाह-मशविरा के बाद की गई है. इसका मकसद इन स्थानों की सही पहचान सुनिश्चित करना और उनके बारे में आम लोगों की जानकारी व जागरूकता बढ़ाना है. “हिंदुस्तान प्रशासन ने अरुणाचल प्रदेश प्रशासन के साथ सलाह-मशविरा कर राज्य में स्थित कुल 27 स्थानों और भौगोलिक क्षेत्रों को सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक नक्शों पर उनके मानक नामों के साथ दर्ज किया है.”- गृह मंत्रालय प्रशासन ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश के इन 27 स्थानों को सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक नक्शे पर दर्ज करने का मुख्य उद्देश्य उनकी सही और स्पष्ट पहचान सुनिश्चित करना है. इसके साथ ही, इस कदम से आम लोगों को इन स्थानों के बारे में जानकारी मिलेगी. चीन अरुणाचल प्रदेश को कहता है ‘जंगनान’ इस घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में चीन की वह कोशिश है, जिसके तहत वह समय-समय पर अरुणाचल प्रदेशके अलग-अलग स्थानों के लिए अपने बताए हुए ‘मानकीकृत नाम’ (standardised names) जारी करता रहा है. चीन अरुणाचल प्रदेश को ‘जंगनान’ (Zangnan) कहता है और इस क्षेत्र पर अपना दावा करता है. ये भी पढ़ें: पीएम मोदी ने अरुणाचल को दिया 5125 करोड़ का तोहफा, कांग्रेस पर बोला करारा हमला अरुणाचल प्रदेश हिंदुस्तान का अभिन्न हिस्सा नई दिल्ली ने चीन की इस तरह की कवायद को लगातार खारिज किया है. हिंदुस्तान का कहना है कि चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम बदलने की कोशिश का राज्य पर हिंदुस्तान की संप्रभुता पर कोई असर नहीं पड़ता और अरुणाचल प्रदेश हिंदुस्तान का अभिन्न हिस्सा है.  The post अरुणाचल पर चीन की ‘नाम बदलो’ साजिश को हिंदुस्तान ने दिया जवाब, 27 प्रमुख जगहों की मैपिंग appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

ममता बनर्जी सरकार के नियमों के तहत होगी बंगाल में शिक्षक भर्ती, समझें क्या है एसएससी विवाद

पश्चिम बंगाल स्कूल सर्विस कमीशन (SSC) आगामी शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को वर्ष 2025 में ममता बनर्जी प्रशासन के कार्यकाल में बनाये गये नियमों के अनुसार ही संपन्न करेगा. कलकत्ता हाईकोर्ट में भर्ती से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान शुक्रवार को आयोग ने अपना रुख साफ कर दिया है. आयोग की ओर से अदालत को आश्वस्त किया गया है कि नये नियमों के तहत पारदर्शी तरीके से भर्ती होगी और राज्य प्रशासन भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस (Zero Tolerance) की नीति के साथ आगे बढ़ेगी. हाईकोर्ट के निर्देश पर बना था नया नियम पश्चिम बंगाल में टीएमसी शासन के दौरान एसएससी भर्ती में बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप लगे थे. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वर्ष 2016 के पूरे पैनल को रद्द कर दिया गया था. पारदर्शी तरीके से नयी भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया था. अदालत के रुख को देखते हुए आयोग ने वर्ष 2025 में भर्ती के नये नियम तैयार किये. उम्मीदवारों ने नये नियम को दी थी चुनौती उम्मीदवारों ने नये नियमों को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था. याचिकाकर्ताओं की मांग थी कि वर्ष 2016 की भर्ती को 2016 के पुराने नियमों के आधार पर ही पूरा किया जाये, न कि वर्ष 2025 के नये नियमों से. राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले पर नयी प्रशासन और एसएससी से उनका आधिकारिक रुख मांगा था. इस पर एसएससी ने यह जवाब दिया. ये भी पढ़ें: शिक्षक भर्ती घोटाला मामले में बढ़ी पार्थ चटर्जी की मुश्किलें, ED ने कोलकाता आवास पर मारा छापा हाईकोर्ट में राज्य प्रशासन और SSC ने रखी अपनी बात शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा की पीठ के समक्ष राज्यस्तरीय चयन परीक्षा (SLST) भर्ती से जुड़ी याचिका पर सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान राज्य प्रशासन की ओर से पेश सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल नीलांजन भट्टाचार्य ने कहा- प्रशासन का एक ही स्पष्ट रुख है, भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस. हम इसे हर हाल में सुनिश्चित करेंगे. द्वितीय SLST भर्ती प्रक्रिया वर्ष 2025 के नये नियमों के आधार पर ही संपन्न की जायेगी. नियमों से जुड़ी आपत्तियों पर दें ध्यान : हाईकोर्ट मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने आयोग को याद दिलाया कि नयी भर्ती नियमावली में आयु सीमा में छूट, रिक्त पदों की संख्या बढ़ाने और अंकों से जुड़े कई प्रावधानों को लेकर आपत्तियां दर्ज करायी गयी हैं. पीठ ने निर्देश दिया कि आयोग को इन सभी कानूनी पहलुओं और अभ्यर्थियों की जायज आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए ही कदम उठाना होगा. ये भी पढ़ें: बंगाल में एसएससी और बोर्ड के अध्यक्ष बदले, सिद्धार्थ और रामानुजा ने दिया इस्तीफा OBC आरक्षण की जटिलता पर 21 अगस्त को सुनवाई सुनवाई के दौरान अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण का संवेदनशील मुद्दा भी उठा. पूर्व में राज्य में ओबीसी के लिए 17 प्रतिशत सीटें आरक्षित थीं. हाईकोर्ट द्वारा वर्ष 2010 के बाद जारी लगभग 5 लाख ओबीसी प्रमाण पत्रों और कई जातियों की सूची को रद्द किये जाने के बाद स्थिति जटिल हो गयी है. नये नियम में ओबीसी आरक्षण को घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया है. जस्टिस सिन्हा ने कहा कि यह मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण है. राज्य प्रशासन तथा एसएससी को आपस में बैठकर समन्वय के साथ ओबीसी नीति को अंतिम रूप देना चाहिए, ताकि कोई कानूनी अड़चन न आये. अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त तय कर दी. The post ममता बनर्जी प्रशासन के नियमों के तहत होगी बंगाल में शिक्षक भर्ती, समझें क्या है एसएससी विवाद appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट में सबसे ज्यादा रन और विकेट लेने वाले भारत के ‘टॉप-3’ दिग्गज, देखें लिस्ट में कौन-कौन है शामिल

Ind vs SL : हिंदुस्तान और श्रीलंका के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज का आगाज 15 अगस्त से होने जा रहा है. पहला मुकाबला गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम में स्पोर्ट्सा जाएगा, जबकि दूसरा टेस्ट 23 अगस्त से कोलंबो में होगा. शुभमन गिल की कप्तानी में हिंदुस्तानीय टीम श्रीलंका पहुंच चुकी है और सीरीज से पहले तैयारियों में जुट गई है. हिंदुस्तान के लिए यह सीरीज वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2027 के लिहाज से भी काफी अहम होनी वाली है. सचिन ने बनाए है सबसे ज्यादा रन श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में हिंदुस्तान का रिकॉर्ड कई दिग्गज खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन से भरा रहा है. अगर श्रीलंका के खिलाफ सबसे ज्यादा टेस्ट रन बनाने वाले हिंदुस्तानीय बल्लेबाजों की बात करें तो इस सूची में सबसे ऊपर महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर हैं. सचिन ने 1990 से 2010 के बीच श्रीलंका के खिलाफ 25 टेस्ट मैचों की 36 पारियों में 60.45 की औसत से 1995 रन बनाए है. सचिन के बाद दूसरे नंबर पर राहुल द्रविड़ तो तीसरे नंबर पर वीरेंद्र सहवाग का नाम आता है. श्रीलंका के खिलाफ हिंदुस्तान के टॉप-3 बल्लेबाज खिलाड़ी मैच रन शतक अर्धशतक सर्वोच्च स्कोर सचिन तेंदुलकर 25 1995 9 6 203 राहुल द्रविड़ 20 1508 3 9 177 वीरेंद्र सहवाग 11 1239 5 3 293 बॉलिंग में स्पिनरों का रहा है जलवा गेंदबाजी में हिंदुस्तान की ओर से श्रीलंका के खिलाफ सबसे ज्यादा विकेट लेने का रिकॉर्ड अनिल कुंबले के नाम है. हिंदुस्तानीय दिग्गज लेग स्पिनर ने 18 टेस्ट मैचों में 74 विकेट चटकाए है. कुंबले के बाद आर अश्विन का नंबर आता है. अश्विन ने श्रीलंका के खिलाफ महज 11 टेस्ट मैचों में 62 विकेट हासिल किए हैं और तीन बार पारी में पांच विकेट लिए हैं. वहीं हरभजन सिंह ने 16 टेस्ट में 53 विकेट लेकर इस सूची में तीसरा स्थान हासिल किया. Also Read: मुझे अपने फैसले पर कोई पछतावा नहीं, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद रहाणे ने बताया आगे का प्लान श्रीलंका के खिलाफ हिंदुस्तान के टॉप-3 गेंदबाज खिलाड़ी मैच विकेट 5 विकेट (पारी) सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन अनिल कुंबले 18 74 4 7/59 आर अश्विन 11 62 3 6/46 हरभजन सिंह 16 53 2 7/62 15 से स्पोर्ट्सा जाना है पहला टेस्ट मैच हिंदुस्तान और श्रीलंका के बीच 15 अगस्त से दो मैचों की टेस्ट सीरीज शुरू होने जा रही है. पहला मुकाबला गॉल में स्पोर्ट्सा जाएगा, जबकि दूसरा टेस्ट 23 अगस्त से कोलंबो में होगा. शुभमन गिल की कप्तानी में हिंदुस्तानीय टीम श्रीलंका पहुंच चुकी है और अभ्यास में जुट गई है. सीरीज में हिंदुस्तानीय टीम की नजरें जीत के साथ वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2027 की दौड़ में अपनी स्थिति मजबूत करने पर होंगी. Also Read:ईशान किशन और तिलक वर्मा की शर्टलेस तस्वीर हुई वायरल, साथ में आइस बाथ लेते नजर आए दोनों The post श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट में सबसे ज्यादा रन और विकेट लेने वाले हिंदुस्तान के ‘टॉप-3’ दिग्गज, देखें लिस्ट में कौन-कौन है शामिल appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

कभी गर्दन तो कभी उंगली, 10 महीने में शुभमन गिल को कब-कब लगी चोट?

Shubman Gill injury: श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज शुरू होने से पहले टीम इंडिया को बड़ा झटका लगा है. हिंदुस्तानीय टेस्ट टीम के कप्तान शुभमन गिल अभ्यास सत्र के दौरान चोटिल हो गए हैं. गिल के दाहिने हाथ की उंगली में चोट लगी है, जिसके कारण वह श्रीलंका XI के खिलाफ स्पोर्ट्से जा रहे वार्म-अप मुकाबले के पहले दिन मैदान पर नहीं उतरे. उनकी गैरमौजूदगी में उपकप्तान केएल राहुल ने हिंदुस्तानीय टीम की कमान संभाली. हिंदुस्तानीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने शुक्रवार को गिल की चोट को लेकर मेडिकल अपडेट जारी किया. बोर्ड के मुताबिक, गुरुवार को टीम इंडिया के प्रैक्टिस सेशन के दौरान गिल के दाहिने हाथ की छोटी उंगली में चोट लगी. सावधानी के तौर पर उन्हें श्रीलंका XI के खिलाफ अभ्यास मैच के पहले दिन मैदान से दूर रखा गया है. BCCI की मेडिकल टीम लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है. 15 अगस्त से गाले में पहला टेस्ट हिंदुस्तान और श्रीलंका के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज का पहला मुकाबला 15 अगस्त से गाले इंटरनेशनल स्टेडियम में स्पोर्ट्सा जाएगा. इसके बाद दूसरा टेस्ट 23 अगस्त से कोलंबो में होगा. यह सीरीज हिंदुस्तान के लिए ICC वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 के लिहाज से भी अहम है. BCCI ने 28 जुलाई को घोषित 15 सदस्यीय टीम में गिल को कप्तान और केएल राहुल को उपकप्तान बनाया था. ऐसे में गिल की उंगली की चोट का समय हिंदुस्तानीय टीम के लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं है. हालांकि फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक चोट को गंभीर नहीं माना जा रहा है और गिल के 15 अगस्त से शुरू होने वाले पहले टेस्ट तक फिट होने की उम्मीद बनी हुई है. लेकिन अंतिम फैसला उनकी फिटनेस और मेडिकल टीम की रिपोर्ट के आधार पर ही होगा. वार्म-अप मैच में राहुल ने संभाली कप्तानी श्रीलंका XI के खिलाफ अभ्यास मैच हिंदुस्तान के लिए टेस्ट सीरीज से पहले अपनी तैयारियों को परखने का महत्वपूर्ण मौका है. इसी मुकाबले में गिल को चोट के कारण बाहर बैठना पड़ा. टॉस के समय उनकी जगह केएल राहुल हिंदुस्तानीय टीम के कप्तान के तौर पर मैदान पर उतरे. श्रीलंका XI ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया. पहले दिन हिंदुस्तानीय गेंदबाजों को श्रीलंका XI के बल्लेबाजों के खिलाफ काफी मेहनत करनी पड़ी. ऐसे में टीम मैनेजमेंट के लिए इस अभ्यास मैच का मकसद सिर्फ नतीजा नहीं, बल्कि खिलाड़ियों की परिस्थितियों के अनुकूल तैयारी और फिटनेस को परखना भी है. गिल के लिए पिछले कुछ महीनों में चोट बनी चुनौती शुभमन गिल के लिए पिछले करीब 10 महीनों में फिटनेस से जुड़ी परेशानियां लगातार सामने आई हैं. नवंबर 2025 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ कोलकाता टेस्ट के दौरान उन्हें गर्दन में स्पाज्म और चोट की समस्या हुई थी. वह उस टेस्ट के बाकी हिस्से में नहीं स्पोर्ट्स सके थे. BCCI ने बाद में बताया था कि उन्हें अस्पताल में जांच के लिए ले जाया गया था और उनकी मेडिकल टीम निगरानी कर रही थी. गिल ने बाद में खुद बताया था कि गर्दन में समस्या के पीछे डिस्क से जुड़ी परेशानी भी थी, जिसके कारण उन्हें दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अगला टेस्ट और इसके बाद की वनडे सीरीज भी मिस करनी पड़ी थी. इसके बाद भी अलग-अलग मौकों पर फिटनेस संबंधी समस्याओं ने उनकी उपलब्धता को प्रभावित किया. अब श्रीलंका दौरे पर उंगली की चोट ने एक बार फिर टीम इंडिया की चिंता बढ़ा दी है. नवंबर 2025: गर्दन में चोट ने किया था परेशान दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ ईडन गार्डन्स टेस्ट में गिल सिर्फ कुछ गेंद स्पोर्ट्सने के बाद गर्दन में परेशानी के कारण रिटायर्ड हर्ट हो गए थे. BCCI ने उस समय इसे गर्दन में स्पाज्म (ऐंठन) बताया था और बाद में उन्हें टेस्ट से बाहर कर दिया गया था. चोट की वजह से उन्हें अस्पताल में भी निगरानी में रखा गया था. यह चोट गिल के लिए काफी अहम साबित हुई थी क्योंकि वह हिंदुस्तानीय टेस्ट टीम के कप्तान के तौर पर टीम की अगुआई कर रहे थे. दिसंबर 2025 से अगस्त 2026 तक भी फिटनेस पर नजर नवंबर की गर्दन की समस्या से वापसी के बाद गिल ने दोबारा क्रिकेट में वापसी की. हालांकि इसके बाद भी अलग-अलग समय पर उन्हें फिटनेस से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा. यही वजह है कि श्रीलंका के खिलाफ मौजूदा टेस्ट सीरीज से पहले उनकी उंगली की चोट पर टीम मैनेजमेंट अतिरिक्त सावधानी बरत रहा है. गिल हिंदुस्तानीय टेस्ट बल्लेबाजी के प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल हैं. कप्तान होने के कारण उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है. ऐसे में टीम मैनेजमेंट किसी भी तरह का जोखिम लेकर उन्हें वार्म-अप मैच में उतारने के बजाय उनकी फिटनेस को प्राथमिकता दे रहा है. क्या 15 अगस्त को गिल स्पोर्ट्स पाएंगे? फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या शुभमन गिल 15 अगस्त को गाले में होने वाले पहले टेस्ट में हिंदुस्तानीय टीम की कप्तानी कर पाएंगे. अभी तक BCCI ने उन्हें टेस्ट से बाहर किए जाने की कोई घोषणा नहीं की है. बोर्ड ने सिर्फ वार्म-अप मैच के पहले दिन उन्हें एहतियातन आराम देने और मेडिकल टीम द्वारा निगरानी की बात कही है. इससे संकेत मिलता है कि फिलहाल गिल की टेस्ट उपलब्धता को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन तत्काल तौर पर उन्हें टेस्ट से बाहर मानना जल्दबाजी होगी. आने वाले कुछ दिनों में उनकी फिटनेस में सुधार और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर तस्वीर साफ हो सकती है. गिल की गैरमौजूदगी में राहुल सबसे बड़ा विकल्प अगर किसी कारण से गिल पहले टेस्ट के लिए उपलब्ध नहीं हो पाते हैं, तो केएल राहुल टीम इंडिया के लिए सबसे स्वाभाविक नेतृत्व विकल्प होंगे. राहुल को पहले ही टेस्ट टीम का उपकप्तान बनाया गया है और श्रीलंका XI के खिलाफ वार्म-अप मैच में उन्हें गिल की अनुपस्थिति में कप्तानी की जिम्मेदारी भी दी गई. हालांकि हिंदुस्तानीय टीम चाहेगी कि गिल समय रहते पूरी तरह फिट हो जाएं. टेस्ट सीरीज के पहले मुकाबले में कप्तान के साथ-साथ शीर्ष क्रम के प्रमुख बल्लेबाज की मौजूदगी हिंदुस्तान के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी. टीम इंडिया के लिए सिर्फ कप्तानी नहीं, बल्लेबाजी का भी सवाल गिल की चोट का असर सिर्फ कप्तानी तक सीमित

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

About Us

नयाविचार एक आधुनिक न्यूज़ पोर्टल है, जो निष्पक्ष, सटीक और प्रासंगिक समाचारों को प्रस्तुत करने के लिए समर्पित है। यहां राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, तकनीक, शिक्षा और मनोरंजन से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जाता है। नयाविचार का उद्देश्य पाठकों को विश्वसनीय और गहन जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे सही निर्णय ले सकें और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

Quick Links

Who Are We

Our Mission

Awards

Experience

Success Story

© 2025 Developed By Socify

Scroll to Top