Prashant Kishor: रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, इंफ्रास्ट्रक्चर समेत कई विकास के मुद्दों के साथ प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में उतरी थी. लेकिन उस वक्त एक भी सीट पर पार्टी की जीत नहीं हो पाई. इन्हीं मुद्दों के साथ जन सुराज बांकीपुर उपचुनाव 2026 में उतरी. लेकिन इस बार पार्टी ने जीत दर्ज कर ली. ऐसे में अब सवाल है कि 9 महीनों में ऐसा क्या बदल गया कि पीके को जनता ने चुना? आखिर बीजेपी का गढ़ जिस विधानसभा को कहा जाता था, उसी में वह हार कैसे गई. पीके की जीत तेजस्वी यादव और पूरे राजद के लिए खतरा हो सकता है और प्रशांत किशोर की आगे की रणनीति क्या हो सकती है… पढ़िए पूरी रिपोर्ट… बीजेपी के कैंडिडेट नीरज सिन्हा को 19,324 वोटों से हराने के बाद जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर 11 अगस्त के बाद शपथ ग्रहण करेंगे. इसके बाद औपचारिक रूप से विधायक के तौर पर प्रशांत किशोर काम करना शुरू कर देंगे. 11 तारीख से ही प्रशांत किशोर बांकीपुर विधानसभा के कई वार्ड में घूमने की प्लानिंग कर चुके हैं. इस दौरान वे लोगों से बातचीत करेंगे, उनकी परेशानियों को जानेंगे और उसी के आधार पर विकास का ब्लूप्रिंट तैयार करेंगे. आगे क्या हो सकती है पीके की रणनीति? बांकीपुर में जीत के बाद प्रशांत किशोर ने कहा था कि 3 महीने में इस विधानसभा में बदलाव दिखने लगेगा. इस दावे को वह पूरा करने पर काम कर सकते हैं. इतना ही नहीं, बिहार में होने वाले पंचायत चुनाव को लेकर भी उन्होंने प्लानिंग कर ली है. प्रशांत किशोर के मुताबिक, जन सुराज आगे आने वाले चुनावों पर भी अब फोकस करेगी और इसके लिए अभी से ही तैयारी शुरू कर दी गई है. पीके की तरफ से यह कहा गया है कि जन सुराज सभी जिला परिषदों और वार्डों में अपने कैंडिडेट उतारेगी. इस तरह से अभी से ही प्रशांत किशोर ने पंचायत चुनाव में उतरने का मूड सेट कर लिया है. कहा जा रहा है कि प्रशांत किशोर बांकीपुर उपचुनाव की तरह आगे के चुनावों में जातिगत मॉडल को छोड़ विकास के मॉडल पर काम कर सकते हैं. जन सुराज के संगठन को और मजबूत करने और बिहार की आगामी नेतृत्व में अपनी पार्टी को एक व्यापक विकल्प के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर सकते हैं. राजद और तेजस्वी के लिए प्रशांत किशोर बन सकते हैं खतरा बिहार की सियासत में अब तक राजद को मुख्य विपक्ष का चेहरा माना जाता था. लेकिन बांकीपुर में प्रशांत किशोर की जीत के बाद तेजस्वी यादव और राजद के लिए मुश्किलें खड़ीं हो सकतीं हैं. नेतृत्वक जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में प्रशांत किशोर मजबूत विपक्ष का चेहरा बन सकते हैं. इस बार के चुनाव में राजद के ‘एमवाई समीकरण’ में भी कहीं ना कहीं प्रशांत किशोर ने सेंध लगाई. नेतृत्वक विश्लेषकों का मानना है कि अगर विपक्षी मतदाताओं को नया नेतृत्व चाहिए, तो प्रशांत किशोर उस भूमिका में उभर सकते हैं. प्रशांत किशोर लगातार सक्रिय नेतृत्व करते हैं, जबकि तेजस्वी यादव की नेतृत्वक सक्रियता पर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं. बिहार विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान तेजस्वी यादव गायब रहे. साथ ही चुनाव के दौरान भी कुछ ऐसी ही स्थिति रही. राजद कैंडिडेट रेखा गुप्ता के लिए सिर्फ दो दिन उन्होंने चुनाव प्रचार किया. इस बीच प्रशांत किशोर की जीत के बाद मजबूत विपक्ष के चेहरे के तौर पर खुद को साबित करने के लिए तेजस्वी यादव को मेहनत करना पड़ सकता है. 11 से 19 अगस्त के बीच इन वार्डों में घूमेंगे पीके 11 अगस्त- वार्ड नंबर: 15, 18, 40 12 अगस्त- वार्ड नंबर: 19, 22, 23, 26 13 अगस्त- वार्ड नंबर: 29, 16, 39 14 अगस्त- वार्ड नंबर: 17, 38, 25 16 अगस्त- वार्ड नंबर: 30, 24, 27 17 अगस्त- वार्ड नंबर: 28, 31, 35, 21 18 अगस्त- वार्ड नंबर: 37, 42, 36 19 अगस्त- वार्ड नंबर: 41 Also Read: MLC Deepak Prakash: सिर्फ 7 महीने के लिए खत्म हुआ उपेंद्र कुशवाहा का टेंशन, फिर बेटे की मंत्री कुर्सी पर संकट The post 11 अगस्त के बाद क्या करेंगे प्रशांत किशोर? बांकीपुर उपचुनाव में BJP क्यों हारी और RJD के लिए कैसे बढ़ा खतरा appeared first on Naya Vichar.