Jharkhand JPSC JSSC Protest: आज इस भ्रष्ट सिस्टम के कारण गेट क्वालिफाई करने के बाद और इतनी सारी भर्ती परीक्षा के लिए अप्लाई करने के बाद भी मेरे पास नौकरी नहीं है. मैं भूख हड़ताल पर हूं, मुझे मरने दो. मेरे मरने से अगर झारखंड के स्टूडेंट्स का भला होता है तो मुझे मरने दो. पानी तक नहीं पीऊंगा, ये कहना है JPSC-JSSC प्रोटेस्ट में भूखहड़ताल पर बैठे युवक महेंद्र प्रसाद का. महेंद्र सालों से झारखंड प्रशासनी वैकेंसी (Jharkhand Sarkari Vacancy) के लिए अप्लाई कर रहे हैं, लेकिन उनकी नौकरी अभी तक पक्की नहीं हुई.
बेरोजगारी और बढ़ती उम्र, परिवार वालों ने 2017 में करा दी शादी
महेंद्र प्रसाद ने 2015 से कई सारी प्रशासनी वैकेंसी के लिए अप्लाई किया है. कुछ वैकेंसी का एग्जाम ही नहीं आयोजित किया गया तो कुछ के लिए सेलेक्शन नहीं हुआ. महेंद्र एक बहुत ही साधारण परिवार से आते हैं. उनके पिता राजमिस्त्री और मां हाउस वाइफ हैं. महेंद्र के पास रोजगार नहीं था लेकिन उम्र बढ़ती जा रही थी. ऐसे में 2017 में उनकी शादी करा दी गई. अब महेंद्र की दो बेटियां हैं.
JPSC-JSSC से जुड़ी नियुक्तियों को लेकर चल रहे आंदोलन में भूख हड़ताल पर बैठे महेंद्र प्रसाद की आवाज में सालों से बेरोजगार होने का दर्द छुपा है. उन्होंने तो सिर्फ अपनी डिग्री और अपने संघर्ष की बात बताई. सिर्फ सिस्टम से सवाल किया. लेकिन उन सब सवालों में एक सवाल ये छुपा था कि “नौकरी कब मिलेगी?” शायद यही सवाल झारखंड के दूसरे युवा भी कर रहे हैं जो प्रशासनी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं.
पहले प्रयास में GATE क्वालिफाई किया
महेंद्र प्रसाद ने कहा कि उन्होंने कई प्रशासनी भर्तियों के लिए आवेदन किया, GATE जैसी परीक्षा भी क्वालिफाई की. लेकिन अब तक उन्हें प्रशासनी नौकरी नहीं मिली. आंदोलन के दौरान महेंद्र ने व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया में देरी को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की.
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2014 में बीटेक की डिग्री पाई और प्रशासनी भर्तियों के लिए अप्लाई करना शुरू किया
महेंद्र ने 2014 में BTech की पढ़ाई पूरी की थी. इसके बाद प्रशासनी नौकरी पाने की उम्मीद में लगातार अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं के लिए आवेदन करते रहे. उन्होंने अपने पहले प्रयास में GATE क्वालिफाई किया. इसके बावजूद वर्षों की तैयारी और कई परीक्षाओं में शामिल होने के बाद भी उन्हें स्थायी रोजगार नहीं मिल सका.
2015 में JPSC असिस्टेंट इंजीनियर का भरा था फॉर्म
2015 में JPSC असिस्टेंट इंजीनियर भर्ती के लिए आवेदन किया था. उनका दावा है कि इस भर्ती के लिए अब तक परीक्षा आयोजित नहीं की गई है. इसके अलावा उन्होंने 2014-15 में सब इंस्पेक्टर भर्ती के लिए भी आवेदन किया था.
महेंद्र के मुताबिक, वर्ष 2015 में झारखंड कक्षपाल और फॉरेस्ट गार्ड समेत कई भर्तियों के लिए आवेदन किया. उनका कहना है कि इन भर्तियों में भी प्रक्रिया लंबे समय से पूरी नहीं हो सकी है. उन्होंने झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमीशन की वर्ष 2017 की भर्ती और झारखंड ऊर्जा विभाग की JE भर्ती के लिए भी आवेदन किया था.
कोचिंग में पढ़ाकर चलाया परिवार
लंबे समय तक प्रशासनी नौकरी का इंतजार करने के दौरान महेंद्र ने कोचिंग में पढ़ाने का काम भी किया. उनका कहना है कि नौकरी की तलाश के बीच उम्र बढ़ती गई और आर्थिक स्थिति भी चुनौती बनी रही. फिर उनकी शादी भी हो गई थी तो परिवार की जिम्मेदारी भी थी.
महेंद्र एक साधारण परिवार से आते हैं. उनके पिता राजमिस्त्री हैं, जबकि मां गृहिणी हैं. रोजगार नहीं मिलने के बीच वर्ष 2017 में उनकी शादी हुई. अब उनकी दो बेटियां हैं. ऐसे में परिवार की जिम्मेदारियां भी उनके ऊपर हैं.
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