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August 31, 2026

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10 ग्राम सोना ₹10 सस्ता, चांदी ₹100 लुढ़की, 31 अगस्त को खरीदारी से पहले जान लें नया भाव

31 अगस्त को सोना और चांदी खरीदने की सोच रहे हैं तो पहले आज का ताजा भाव जान लीजिए. आज दोनों की कीमतों में हल्की गिरावट देखने को मिली है. 24 कैरेट सोना ₹1 प्रति ग्राम सस्ता हुआ है, जबकि चांदी ₹100 प्रति किलो सस्ती हुई है. हालांकि आपको बता दें कि यहां दिए गए भाव पिछले कारोबारी सेशन के बंद होने के समय और आज के उपलब्ध भाव के आधार पर हैं.  सोने का आज क्या है भाव? आज हिंदुस्तान में 24 कैरेट सोना ₹15,823 प्रति ग्राम और 22 कैरेट सोना ₹14,504 प्रति ग्राम पर है. यानी 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,58,230 है. बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए राहत की बात यह है कि इन राज्यों के प्रमुख शहरों में भी सोना कल के मुकाबले थोड़ा सस्ता हुआ है. सोने का रेट टेबल: शहर आज का भाव (24 कैरेट, 10 ग्राम) कल का भाव कितना घटा या बढ़ा पटना ₹1,58,280 ₹1,58,290 ₹10 घटा रांची ₹1,58,230 ₹1,58,240 ₹10 घटा लखनऊ ₹1,58,380 ₹1,58,390 ₹10 घटा दिल्ली ₹1,58,380 ₹1,58,390 ₹10 घटा कोलकाता ₹1,58,230 ₹1,58,240 ₹10 घटा मुंबई ₹1,58,230 ₹1,58,240 ₹10 घटा चांदी में कितनी राहत मिली? चांदी आज ₹2,54,900 प्रति किलो है. कल इसका भाव ₹2,55,000 प्रति किलो था. यानी एक दिन में चांदी ₹100 सस्ती हुई है. 100 ग्राम चांदी का भाव आज ₹25,490 और 10 ग्राम का भाव ₹2,549 है.  चांदी का रेट टेबल: शहर आज का भाव (1 किलो) कल का भाव कितना घटा या बढ़ा पटना ₹2,54,900 ₹2,55,000 ₹100 घटा रांची ₹2,54,900 ₹2,55,000 ₹100 घटा लखनऊ ₹2,54,900 ₹2,55,000 ₹100 घटा दिल्ली ₹2,54,900 ₹2,55,000 ₹100 घटा कोलकाता ₹2,54,900 ₹2,55,000 ₹100 घटा मुंबई ₹2,54,900 ₹2,55,000 ₹100 घटा कीमतों में गिरावट क्यों आई? दुनियाभर के बाजार में सोने और चांदी पर दबाव बना हुआ है. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी प्रशासनी बॉन्ड से मिलने वाले ब्याज में बढ़ोतरी का असर कीमती धातुओं की कीमतों पर पड़ा है.  ये भी पढ़ें: कहीं पेट्रोल सस्ता तो कहीं डीजल महंगा, पटना से मुंबई तक चेक करें 31 अगस्त के ताजा भाव The post 10 ग्राम सोना ₹10 सस्ता, चांदी ₹100 लुढ़की, 31 अगस्त को खरीदारी से पहले जान लें नया भाव appeared first on Naya Vichar.

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JPSC घोटाला : यूपी परीक्षा घोटाले के आरोपी से कराया JPSC में खेल, OMR शीट में गड़बड़ी कर बनायी घोटाले की योजना

रांची. JPSC नियुक्ति घोटाला और जेएसएससी सीजीएल गड़बड़ी की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. जांच में सामने आया है कि उत्तर प्रदेश में परीक्षा घोटाले में शामिल रहा मो. उस्मान ही जेपीएससी में गड़बड़ी का मास्टरमाइंड था. उस्मान को JPSC में काम करने का दिया न्योता उत्तर प्रदेश में उस्मान दूसरी कंपनी में काम करता था और वहां आयोजित परीक्षाओं में ओएमआर शीट में गड़बड़ी करता था. इसकी जानकारी टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह को हुई, जिसके बाद उन्होंने ही उस्मान को JPSC में काम करने का न्योता दिया. उसे टीडीपीएल का कर्मी बताया गया, जबकि वह मूल रूप से दूसरी कंपनी का स्टाफ था और टीडीपीएल ने उसे हायर किया था. उस्मान के साथ तीन अन्य लोगों की सहायता से जेपीएससी के अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट में गड़बड़ी करायी जाती थी. ओएमआर की पीडीएफ में छेड़छाड़ की जाती थी और मूल डेटा को भी बदला जाता था. यूपी में हुई परीक्षाओं की गड़बड़ी की भी जांच CID अब उत्तर प्रदेश में हुई परीक्षाओं में गड़बड़ी और इसमें संलिप्त लोगों की भूमिका की सत्यता की जांच कर रही है. सीआईडी यह भी जांच कर रही है कि क्या जेपीएससी परीक्षा घोटाले में सारी गड़बड़ियां टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह ही करते थे और क्या यह स्पोर्ट्स सिर्फ ओएमआर शीट तक सीमित था या मुख्य परीक्षा की कॉपियों में भी गड़बड़ी होती थी. इस मामले में गिरफ्तार उस्मान और एक अन्य आरोपी ने रामवीर सिंह पर ही सीधे आरोप लगाये हैं. जेपीएससी की उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी ने भी टीडीपीएल के निदेशक को ही मुख्य कर्ता-धर्ता बताया है. ये भी पढ़ें: अमृत हिंदुस्तान योजना से संवर रहे रांची मंडल के 15 स्टेशन, 132.5 करोड़ से हो रहा है कायाकल्प JPSC पेपर लीक में एक और आरोपी गिरफ्तार JPSC पेपर लीक मामले में सीआईडी ने रविवार को गिरिडीह से एक और आरोपी समीर कुमार को बेंगाबाद थाने से गिरफ्तार किया है. वहीं, दिल्ली से गिरफ्तार दो आरोपियों से भी सीआईडी लगातार पूछताछ कर रही है. पूछताछ में आरोपियों ने वेबेल, इससे जुड़ी संस्था आईएनएस और कुछ अन्य कंपनियों के बारे में जानकारी दी है. आरोपियों का कहना है कि वे निचले स्तर पर काम करते थे, जबकि मुख्य काम और जेएसएससी से सभी तरह की बातचीत वेबेल कंपनी के निदेशक मिथिलेश सिंह और दो अन्य व्यक्ति किया करते थे. The post JPSC घोटाला : यूपी परीक्षा घोटाले के आरोपी से कराया JPSC में स्पोर्ट्स, OMR शीट में गड़बड़ी कर बनायी घोटाले की योजना appeared first on Naya Vichar.

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FMGE एलिजिबिलिटी सर्टिफिकेट के लिए 1 सितंबर से करें अप्लाई, जानें पूरी प्रक्रिया और लास्ट डेट

FMGE 2026 Eligibility Certificate: नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) 2026 के लिए Eligibility Certificate (EC) आवेदन प्रक्रिया की डेट जारी कर दी है. एलिजिबिलिटी सर्टिफिकेट के लिए ऑनलाइन अप्लाई करने की प्रक्रिया 1 सितंबर 2026 को सुबह 10 बजे से शुरू होगी. कैंडिडेट्स NMC की ऑफिशियल वेबसाइट के जरिए अप्लाई कर सकेंगे. 1 सितंबर से शुरू होगा आवेदन FMGE 2026 के लिए Eligibility Certificate का आवेदन 1 सितंबर 2026 से शुरू होगा. कैंडिडेट 20 सितंबर 2026 को शाम 6 बजे तक आवेदन कर सकते हैं. FMGE Screening Test 2026 में शामिल होने के लिए पात्र कैंडिडेटों को पहले NMC से Eligibility Certificate प्राप्त करना जरूरी होगा. कैंडिडेट आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के बाद NMC के आधिकारिक पोर्टल application.nmc.org पर जाकर अपना फॉर्म भर सकते हैं. FMGE 2026 की परीक्षा तारीख अभी घोषित नहीं National Board of Examinations in Medical Sciences (NBEMS) आने वाले महीनों में FMGE Screening Test 2026 आयोजित करेगा. हालांकि, अभी तक परीक्षा की ऑफिशियल डेट घोषित नहीं की गई है. कैंडिडेटों को परीक्षा शेड्यूल से जुड़ी नई जानकारी के लिए NBEMS और FMGE की ऑफिशियल वेबसाइट पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है. आवेदन करते समय इन बातों का रखें ध्यान NMC ने Eligibility Certificate के लिए आवेदन करने वाले कैंडिडेटों को फॉर्म भरते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है. आवेदन फॉर्म में सभी जानकारी ध्यान से भरें. केवल एक्टिव मोबाइल नंबर ही दर्ज करें. आवेदन शुरू करने से पहले जरूरी डॉक्यूमेंट्स तैयार रखें. आवेदन की प्रक्रिया निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी करें. फॉर्म भरने से पहले NMC की ओर से जारी सभी दिशा-निर्देश ध्यान से पढ़ें. आवेदन जमा करने के बाद इसकी जानकारी सेव रखें. आवेदन का स्टेटस कैसे पता करें? कैंडिडेट अपने Eligibility Certificate आवेदन से जुड़ी जानकारी या स्टेटस के संबंध में NMC से संपर्क कर सकते हैं. इसके लिए eligibility.regn@nmc.org.in और eligibility@nmc.org.in ईमेल आईडी पर अपनी समस्या या सवाल भेजे जा सकते हैं. क्या है FMGE? FMGE यानी Foreign Medical Graduate Examination हिंदुस्तान में विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करने वाले मेडिकल ग्रेजुएट्स के लिए आयोजित स्क्रीनिंग टेस्ट है. हिंदुस्तान में मेडिकल प्रैक्टिस के लिए पात्रता प्राप्त करने की प्रक्रिया में यह परीक्षा महत्वपूर्ण है. FMGE 2026 की परीक्षा डेट और अन्य शेड्यूल से जुड़ी जानकारी NBEMS की ओर से बाद में जारी की जाएगी. कैंडिडेटों को सलाह है कि वे आवेदन और परीक्षा से जुड़ी किसी भी अपडेट के लिए NMC, FMGE और NBEMS की आधिकारिक वेबसाइट नियमित रूप से चेक करते रहें. ये भी पढ़ें: IIT Guwahati का ये BTech ब्रांच दिलाता है तगड़ा प्लेसमेंट, Microsoft से जॉब ऑफर The post FMGE एलिजिबिलिटी सर्टिफिकेट के लिए 1 सितंबर से करें अप्लाई, जानें पूरी प्रक्रिया और लास्ट डेट appeared first on Naya Vichar.

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प्यास बुझाएं या जान बचाएं: जंगली जानवरों के खौफ के बीच डेढ़ किमी दूर झरने से पानी ढो रहे चापा के ग्रामीण

प्रतिनिधि, लिट्टीपाड़ा. प्रखंड की करमाटांड़ पंचायत का चापा गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है. आदिम जनजाति पहाड़िया बहुल इस गांव के करीब 200 ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल के लिए रोजाना डेढ़ किलोमीटर दूर पहाड़ी झरने तक जाना पड़ता है. सबसे चिंता की बात यह है कि जिस झरने से ग्रामीण अपनी प्यास बुझाते हैं, उसी स्रोत पर जंगली और पालतू जानवर भी पानी पीते हैं. इसके बावजूद दूसरा विकल्प नहीं होने के कारण ग्रामीण इसी पानी के सहारे जीवन गुजारने को मजबूर हैं. तीन टोलों में बसा गांव, किसी टोले में नहीं नल-जल ग्रामीण रमेश पहाड़िया, छोटा मेंसा पहाड़िया, अर्जुन पहाड़िया, सजनी पहाड़ीन, देवी पहाड़ीन, सुरजी पहाड़ीन, डोंबा पहाड़िया (प्रधान) समेत अन्य ने बताया कि चापा गांव तीन टोलों में बसा है, लेकिन किसी भी टोले में स्वच्छ पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है. पानी के लिए स्त्रीओं, बुजुर्गों और बच्चों को प्रतिदिन करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है. प्यास बुझाने वाला झरना, जानवरों का भी सहारा ग्रामीणों के मुताबिक, झरने के पानी की शुद्धता को लेकर हमेशा चिंता बनी रहती है. इसी जलस्रोत पर जंगली और पालतू जानवर भी पानी पीते हैं. बारिश के दिनों में स्थिति और खराब हो जाती है. आसपास की गंदगी और मिट्टी पानी में मिल जाने से इसके दूषित होने का खतरा बढ़ जाता है. ग्रामीणों को आशंका है कि लंबे समय तक ऐसे पानी के इस्तेमाल से जलजनित बीमारियों का खतरा बना रहता है. पानी ढोने में बीत रहा रोज का वक्त डेढ़ किलोमीटर दूर से पानी लाने का सबसे ज्यादा असर स्त्रीओं और बच्चों पर पड़ रहा है. रोजाना पानी ढोने में काफी समय खर्च हो जाता है. इससे घरेलू कामकाज के साथ-साथ ग्रामीणों की आजीविका भी प्रभावित होती है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांव में ही स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था हो जाए तो उन्हें बड़ी राहत मिलेगी. पेयजल के साथ सड़क-बिजली भी बनी परेशानी ग्रामीणों ने बताया कि गांव में सिर्फ पेयजल ही नहीं, बल्कि सड़क, बिजली और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है. उनका कहना है कि आदिम जनजाति बहुल गांव होने के बावजूद विकास योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से गांव में जल्द स्थायी स्वच्छ पेयजल व्यवस्था कराने की मांग की है. उनका कहना है कि गांव में पेयजल सुविधा उपलब्ध होने से स्त्रीओं और बच्चों को रोजाना डेढ़ किलोमीटर की दूरी तय करने से मुक्ति मिलेगी और दूषित पानी से होने वाली बीमारियों का खतरा भी कम होगा. The post प्यास बुझाएं या जान बचाएं: जंगली जानवरों के खौफ के बीच डेढ़ किमी दूर झरने से पानी ढो रहे चापा के ग्रामीण appeared first on Naya Vichar.

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IPL 2027 Impact Player Rule: IPL 2027 से खत्म होगा Impact Player Rule? BCCI ने 10 टीमों से मांगा जवाब

IPL 2027 Impact Player Rule: IPL 2027 शुरू होने से पहले ‘इम्पैक्ट प्लेयर नियम को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. हिंदुस्तानीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने लीग की सभी 10 फ्रेंचाइजियों से इस नियम पर उनकी राय मांगी है. टीमों को अपना फीडबैक देने के लिए 31 अगस्त तक का समय दिया गया है. हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि नियम खत्म होगा या जारी रहेगा. अचानक ‘इम्पैक्ट प्लेयर रूल पर क्यों मांगी राय? IPL में फ्रेंचाइजियों से हर सीजन के बाद क्रिकेट ऑपरेशंस से जुड़े मामलों पर फीडबैक लेना सामान्य है. लेकिन इस बार ‘इम्पैक्ट प्लेयर रूल को खास तौर पर शामिल किया गया है. यही वजह है कि IPL 2027 में इस नियम के भविष्य को लेकर चर्चा तेज हो गई है. BCCI ने अपने कम्युनिकेशन में IPL 2026 कैप्टन मीटिंग का भी हवाला दिया है. इसे भी पढ़े- Dwayne Bravo Jersey Number 47 Retired: ड्वेन ब्रावो की No. 47 जर्सी हुई रिटायर, CPL में पहली बार हुआ ऐसा रोहित और अक्षर समेत कई खिलाड़ी कर चुके हैं विरोध रोहित शर्मा, हार्दिक पंड्या और अक्षर पटेल ने नियम पर उठाए सवाल ऑलराउंडर्स की भूमिका घटने को लेकर बढ़ी चिंता नियम से ऑलराउंडर्स के महत्व पर असर पड़ने की बात अक्षर पटेल ने 2026 सीजन से पहले कहा था कि वह इस नियम के पक्ष में नहीं हैं अब सवाल कि क्या इम्पैक्ट प्लेयर नियम स्पोर्ट्स का संतुलन बिगाड़ रहा है? बल्लेबाजों को फायदा, गेंदबाजों पर दबाव? इस नियम की वजह से टीमों को मैच के दौरान अपनी रणनीति बदलने का अतिरिक्त मौका मिलता है. आलोचकों का कहना है कि इससे बल्लेबाजी को फायदा और गेंदबाजों पर दबाव बढ़ सकता है. IPL 2026 में भी कई बड़े स्कोर देखने के बाद बैट और बॉल के बीच संतुलन पर बहस हुई. इसे भी पढ़े- Sri Lanka Women’s Champions Trophy 2027: श्रीलंका से छिनी विमेंस चैंपियंस ट्रॉफी 2027 की मेजबानी, क्या टीम भी होगी बाहर? IPL 2027 में क्या बदलेगा? फिलहाल ‘इम्पैक्ट प्लेयर रूल खत्म होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. BCCI अब फ्रेंचाइजियों की राय इकट्ठा करेगा और उसके बाद अगले सीजन के लिए जरूरी बदलावों पर फैसला लिया जा सकता है. यानी IPL 2027 में यह नियम पहले जैसा रहेगा, बदलेगा या खत्म होगा कि इसका जवाब अभी बाकी है. The post IPL 2027 Impact Player Rule: IPL 2027 से खत्म होगा Impact Player Rule? BCCI ने 10 टीमों से मांगा जवाब appeared first on Naya Vichar.

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Nepal Flood : जिस तरह की झील से नेपाल में आई तबाही, वैसी ही 200 ग्लेशियर लेक भारतीय सीमा में

Nepal Flood : नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर टूटने के बाद भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आयी प्रलयंकारी बाढ़ ने मध्य नेपाल में भीषण तबाही मचाई है. प्रभावित आठ जिलों से अब तक 768 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 2,500 से अधिक लोग अब भी लापता हैं. रुक-रुक कर हो रही भारी बारिश और तिब्बत में नदी के उद्गम के पास नयी अस्थायी झील के उभरने से भोटेकोशी का जलस्तर दोबारा बढ़ने लगा है, जिससे निचले इलाकों में हाइ अलर्ट जारी किया गया है. नेपाल में हुई इस त्रासदी ने हिंदुस्तानीय हिमालयी क्षेत्र में मौजूद प्राकृतिक ‘वाटर बमों’ को लेकर गंभीर खतरे की घंटी बजा दी है. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के वरिष्ठ सलाहकार डॉ भूपेंद्र मिली ने बताया कि हिंदुस्तानीय हिमालयी क्षेत्र में 11 नदी घाटियों में 28,000 ग्लेशियर झीलों में से लगभग 7,500 हिंदुस्तान में हैं. जिनमें से अकेले गंगा बेसिन में 4,700 से अधिक झीलें स्थित हैं. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने इनमें से 195 से 200 झीलों को उच्च जोखिम (ए-श्रेणी) में चिह्नित किया है. समय रहते इनका प्रबंधन नहीं किया गया, तो पहाड़ों के साथ-साथ उत्तर बिहार और उत्तर बंगाल के मैदानी क्षेत्रों में भी अभूतपूर्व जलप्रलय आ सकता है. नेपाल में क्यों हुई इतनी भीषण तबाही? – तिब्बत और नेपाल के बेहद संवेदनशील इलाकों में पर्यावरण और भौगोलिक परिस्थितियों की अनदेखी कर अनियंत्रित निर्माण हुआ. – नदियों के प्राकृतिक बहाव क्षेत्र में बस्तियां बसने और अर्ली वार्निंग सिस्टम (इडब्ल्यूएस) के समय पर काम न करने से पानी व मलबे को निकलने की जगह नहीं मिली, जिससे जान-माल का नुकसान कई गुना बढ़ गया. हिंदुस्तान में कितना है खतरा? – हिंदुस्तानीय हिमालयी क्षेत्र की 11 नदी घाटियों में मौजूद 7,500 ग्लेशियल झीलों में से 195 से 200 झीलों को एनडीएमए ने अति-संवेदनशील (उच्च जोखिम) श्रेणी में चिह्नित किया है. – ये झीलें प्राकृतिक ‘वाटर बम’ की तरह हैं, जहां अत्यधिक बारिश या भूस्खलन होने पर अचानक ग्लेशियल झील विस्फोट बाढ़ (ग्लोफ) आने का गंभीर जोखिम बना रहता है. ये भी पढ़ें: नया विचार की ग्राउंड जीरो रिपोर्ट: ‘पिता नहीं, मां नहीं… बिलख रहे शिशु’; नेपाल कांग्रेस के नेता ने चीन पर लगे आरोपों को किया खारिज हिंदुस्तान के कौन-कौन से इलाके हो सकते हैं प्रभावित? पहाड़ी राज्य : हिमाचल प्रदेश (48 झीलें), सिक्किम (40), लद्दाख (35), अरुणाचल प्रदेश (28), जम्मू एवं कश्मीर (26) और उत्तराखंड (13 झीलें). मैदानी इलाके : नेपाल या सिक्किम की झीलें फटने पर कोसी, गंडक और तीस्ता जैसी नदियों के जरिए उत्तर बिहार (सुपौल, सहरसा, मधुबनी, चंपारण) और उत्तर बंगाल (जलपाईगुड़ी, सिलीगुड़ी, दार्जिलिंग तराई) में लाखों क्यूसेक पानी व गाद आने से तटबंध टूटने का खतरा रहता है. बचाव के लिए क्या प्रबंध किए जा रहे हैं? हैजार्ड जोनिंग मैपिंग : सभी 200 संवेदनशील झीलों के खतरे का दायरा तय किया जा रहा है, ताकि असुरक्षित क्षेत्रों में निर्माण व बसावट रोकी जा सके. इंजीनियरिंग रोकथाम : झीलों के मुहाने पर चेक डैम, ड्रेनेज सिस्टम और पानी को सुरक्षित दिशा में मोड़ने के लिए डिफ्लेक्शन स्ट्रक्चर तैयार किए जा रहे हैं. दो साल में सेंसर नेटवर्क : सैटेलाइट से 24×7 निगरानी के साथ-साथ अगले दो वर्षों में सभी उच्च जोखिम वाली झीलों पर ऑटोमैटिक अर्ली वार्निंग सेंसर लगाने का लक्ष्य है. ये भी पढ़ें: नया विचार ग्राउंड रिपोर्ट: नेपाल में दो जिलों को जोड़ने वाला पुल नदी की तेज धार में बहा, उफान पर त्रिशूली नदी डेटा ग्राफिक्स : किन राज्यो में कितनी झीलों का संकट राज्य / केंद्र शासित प्रदेश उच्च जोखिम वाली झीलें प्रमुख संवेदनशील नदी बेसिन प्रमुख संवेदनशील नदी बेसिन 48 सतलुज, ब्यास, चिनाब सिक्किम 40 तीस्ता बेसिन (साउथ ल्होनक सहित) लद्दाख 35 सिंधु व ज़ांस्कर घाटी अरुणाचल प्रदेश 28 दिबांग व सुबनसिरी जम्मू एवं कश्मीर 26 झेलम व चिनाब बेसिन उत्तराखंड 13 अलकनंदा व भागीरथी बेसिन कुल चिह्नित उच्च जोखिम 195 – 200 गंगा बेसिन में अकेले 4,700 झीलें नेपाल की पनबिजली सुरंगों में 500 से अधिक लापताभोटेकोशी और त्रिशूली में आई बाढ़ से नेपाल के 14 पनबिजली संयंत्र क्षतिग्रस्त हो गये हैं, जिससे नेपाल की 431 मेगावाट (12% से अधिक) बिजली उत्पादन क्षमता ठप हो गयी है. रसुवा और त्रिशूली की भूमिगत सुरंगों में कीचड़ भरने से 500 से अधिक जलविद्युत कर्मचारी व श्रमिक लापता हैं. हिंदुस्तान से पहुंची 11 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम त्रिशूली-3ए में रेस्क्यू अभियान चला रही है. कितने मिले, कितने लापता नेपाल में कुल मौतें : 768 तिब्बत (जिरोंग) में मौतें : 07 कुल लापता : 2,500 से अधिक (कम से कम 320 विदेशी नागरिक) लापता हिंदुस्तानीय : 287 हिंदुस्तानीय व 128 हिंदुस्तानीय मूल के लोग सुरक्षित निकाले गये: 4,400 लोग (167 सुरक्षित हिंदुस्तानीय शामिल) 4.5 अरब डॉलर के नुकसान से नेपाल की 10% वित्तीय स्थिति प्रभावित बाढ़ और भूस्खलन से नेपाल को भारी आर्थिक झटका लगा है. बुनियादी ढांचे, जलविद्युत संयंत्रों, सड़कों और रिहायशी इलाकों के तबाह होने से पुनर्निर्माण पर करीब 4.5 अरब डॉलर (लगभग 37,500 करोड़ रुपये) का खर्च आने का अनुमान है, जो देश की वित्तीय स्थिति (जीडीपी) के लगभग 10वें हिस्से के बराबर है. प्रशासन ने संकट से उबरने और पुनर्निर्माण के लिए हिंदुस्तान सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बड़े आर्थिक सहयोग की अपील की है. The post Nepal Flood : जिस तरह की झील से नेपाल में आई तबाही, वैसी ही 200 ग्लेशियर लेक हिंदुस्तानीय सीमा में appeared first on Naya Vichar.

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Janmashtami 2026 Rare Planetary Yog: जन्माष्टमी पर त्रिगुणी महासंयोग, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और भाग्यशाली राशियां

Janmashtami 2026 Rare Planetary Yog: भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि को मनाई जाने वाली जन्माष्टमी का पर्व इस वर्ष बेहद खास माना जा रहा है. 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को देशभर में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा. इस बार अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग के साथ ग्रहों की अनुकूल स्थिति भी बन रही है, जिसे ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष बताया जा रहा है. अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी, रोहिणी नक्षत्र और मध्यरात्रि के निशीथ काल में हुआ था. वर्ष 2026 में अष्टमी तिथि 4 सितंबर की रात 2:25 बजे से शुरू होकर 5 सितंबर की रात 12:13 बजे तक रहने की बात कही गई है. वहीं, रोहिणी नक्षत्र 4 सितंबर की रात 12:29 बजे से रात 11:04 बजे तक रहेगा. ऐसे में जन्माष्टमी पर तिथि और नक्षत्र का संयोग इसे धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण बना रहा है. निशीथ काल में होगी विशेष पूजा जन्माष्टमी की रात लड्डू गोपाल का अभिषेक कर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाने की परंपरा है. दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार, 4 सितंबर की रात 11:56 बजे से 5 सितंबर की रात 12:41 बजे तक निशीथ पूजा का मुहूर्त रहेगा. इसकी कुल अवधि करीब 46 मिनट बताई गई है. मध्यरात्रि करीब 12:18 बजे श्रीकृष्ण जन्म का मुख्य क्षण माना गया है. व्रत रखने वाले श्रद्धालु परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार 5 सितंबर को सूर्योदय के बाद पारण कर सकते हैं. ग्रहों की स्थिति भी रहेगी खास ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस जन्माष्टमी पर कई ग्रह अनुकूल स्थिति में रहने वाले हैं. चंद्रमा वृषभ राशि में, गुरु कर्क राशि में और सूर्य सिंह राशि में स्थित बताए जा रहे हैं. शुक्र तुला राशि में रहने की बात कही गई है. मंगल और शुक्र की स्थिति से नवपंचम योग बनने का भी उल्लेख किया गया है. ये भी पढ़ें: Krishna Janmashtami 2026 Date: 4 या 5 सितंबर? जन्माष्टमी की सही तारीख को लेकर न हों कंफ्यूज! जानें मध्यरात्रि पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त मथुरा-वृंदावन में जन्मोत्सव की धूम भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में मध्यरात्रि के समय भव्य जन्मोत्सव आयोजित किया जाएगा. वृंदावन के प्रमुख मंदिरों में भी महाभिषेक, विशेष पूजा और दर्शन का आयोजन होगा. 5 सितंबर को नंदोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिलेगा. इन 4 राशियों को मिल सकता है विशेष लाभ वृषभ: मानसिक शांति के साथ धन-धान्य में वृद्धि और स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव के संकेत हैं. कर्क: करियर में प्रगति, आत्मविश्वास में वृद्धि और अचानक धन लाभ के अवसर बन सकते हैं. कन्या: कारोबार में बड़ी डील मिलने की संभावना है. रुके कार्य पूरे होने से आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है. धनु: धार्मिक यात्रा के योग बनेंगे. वैवाहिक जीवन में मधुरता और संतान पक्ष से शुभ समाचार मिल सकता है. ज्योतिषीय भविष्यवाणियां धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं. इन्हें निश्चित भविष्यवाणी के रूप में नहीं लेना चाहिए. The post Janmashtami 2026 Rare Planetary Yog: जन्माष्टमी पर त्रिगुणी महासंयोग, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और भाग्यशाली राशियां appeared first on Naya Vichar.

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रांची में 3 नए फ्लाइओवर का रास्ता साफ, इसी साल शुरू होगा निर्माण

रांची : राजधानी के तीन फ्लाइओवर निर्माण के लिए L&T, HCC, दिनेश चंद्र आर अग्रवाल (डीआरए) इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड, शिवालिया कंस्ट्रक्शन सहित अन्य कंपनियां पहुंची हैं, इन कंपनियों ने टेंडर में भाग लिया है. डीआरए ने राजधानी में दो फ्लाइओवर का काम लिया है. अभी टेंडर का तकनीकी मूल्यांकन हो रहा है, इसके बाद फाइनेंशियल बिड खोली जायेगी. तब तय होगा कि किस कंपनी को कौन सा काम मिला है. इस तरह अब तीनों फ्लाइओवर का टेंडर जल्द फाइनल होगा और इसी साल इन परियोजनाओं पर काम शुरू होगा. राजधानी में एलएंडटी ने सिरमटोली-मेकन फ्लाइओवर का निर्माण कराया है और अब हरमू फ्लाइओवर के टेंडर में भाग लिया है. इस कंपनी ने सिरमटोली-मेकन फ्लाइओवर में ही रेलवे लाइन के ऊपर केबल स्टे ब्रिज का निर्माण कराया था. वहीं DRA ने कांटाटोली फ्लाइओवर का निर्माण कराया है. अक्तूबर 2024 में इसका उद्घाटन कराया गया था. अब डीआरए कंपनी सिरमटोली कनेक्टिंग फ्लाइओवर का भी निर्माण करा रही है. अरगोड़ा, क्रमटोली-चिरौंदी और हरमू फ्लाइओवर का होना है इंजीनियरों का मानना है कि तीनों फ्लाइओवर का निर्माण कठिन है, क्योंकि इसके लिए भूमि सीमित है. साथ ही इन रूट पर ट्रैफिक भी बहुत ज्यादा है. इन सारे मामलों को देखते हुए इसके निर्माण में डिजाइन का खास ध्यान दिया जाना है. करमटोली-चिरौदी फ्लाइओवर निर्माण के लिए ट्रैफिक की बड़ी समस्या झेलनी होगी. खासकर अंतु चौक के आसपास की सड़क संकरी है और पूरा इलाका मार्केट का है. ऐसे में यहां पर काम कराना मुश्किल होगा. वहीं अरोड़ा चौक से चापुटोली के बीच ओल्ड अरगोड़ा चौक के आगे सड़क संकरी है. यहां सड़क पर पाइलिंग व पियर तैयार करना चुनौती होगी. उसी तरह हरमू रोड में अत्यधिक ट्रैफिक है. इस रूट से होकर राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मुख्य न्यायाधीश सहित वीवीआइपी का आवागमन होता है. ऐसे में यहां फ्लाइओवर का काम कराना संकट भरा होगा. पूर्व में रद्द करना पड़ा था फ्लाइओवर का टेंडर हरमू फ्लाइओवर के लिए पूर्व में भी टेंडर हुआ था, लेकिन इसमें एक ही कंपनी ने भाग लिया था. ऐसे में टेंडर को रद्द कर दिया गया था. बाद में फ्लाइओवर के डिजाइन में बदलाव किया गया. मुख्यमंत्री ने इसे अधिक उपयोगी बनाने का निर्देश दिया था. इसके तहत संशोधन कर दो माह पूर्व टेंडर जारी किया गया था, जो अब फाइनल होने की स्थिति में है. ये भी पढ़ें: वेतन गांव के नाम, ड्यूटी शहर में: प्रतिनियुक्ति के स्पोर्ट्स में गांव के स्कूल हुए शिक्षकविहीन The post रांची में 3 नए फ्लाइओवर का रास्ता साफ, इसी साल शुरू होगा निर्माण appeared first on Naya Vichar.

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Nepal Flood: सुरंग में जिंदगी की तलाश, 500 से ज्यादा मजदूर लापता, 275 भारतीयों का भी नहीं मिला सुराग

Nepal Flood: नेपाल में आई भयावह जलप्रलय के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों तक पहुंचने की है. रसुवा और नुवाकोट जिलों की जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले 500 से ज्यादा कर्मचारी और मजदूर अब भी लापता हैं. कई लोगों के परियोजनाओं की सुरंगों के अंदर फंसे होने की आशंका है. वहीं बाढ़ के बाद 275 से ज्यादा हिंदुस्तानीयों का भी अब तक पता नहीं चल पाया है. त्रिशूली-3ए की सुरंग में फंसे लोगों की तलाश तेज बाढ़ प्रभावित नुवाकोट में अपर त्रिशूली-3ए हाइट्रो प्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए नेपाली सेना ने बचाव अभियान तेज कर दिया है. सेना के इंजीनियर भारी मशीनों और विस्फोट की मदद से मलबे में दबे सुरंग के रास्ते को चौड़ा करने में जुटे हैं. नेपाल विद्युत प्राधिकरण (Nepal Electricity Authority) का अनुमान है कि 60 मेगावाट क्षमता वाली इस परियोजना में करीब 42 तकनीकी कर्मचारी भूमिगत बिजलीघर में मेंटेनेंस का काम कर रहे थे. इसी दौरान बाढ़ आने के बाद उनसे संपर्क टूट गया. सुरंग में बनाया छोटा रास्ता, लेकिन नहीं मिला जवाब नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक 90 सदस्यों वाली संयुक्त बचाव टीम घटनास्थल पर तैनात है. इसमें नेपाली सेना के 66 जवान, सशस्त्र पुलिस बल के 18 कर्मी और नेपाल पुलिस के छह जवान शामिल हैं. रविवार दोपहर तक बचावकर्मी सुरंग के मुख्य हिस्से तक पहुंचे और करीब दो गुणा तीन फुट का रास्ता बनाया. इसके बाद जवान रस्सियों के सहारे अंदर उतरे और फंसे लोगों को आवाज लगाई, लेकिन दूसरी ओर से कोई जवाब नहीं मिला. अब रास्ते को और चौड़ा करने की कोशिश की जा रही है. 9 परियोजनाओं के 537 कर्मचारी अब भी लापता नेपाल के इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के मुताबिक रसुवा और नुवाकोट की नौ जलविद्युत परियोजनाओं के 537 कर्मचारी और मजदूर अब भी लापता हैं. 26 अगस्त को आई बाढ़ के बाद इन परियोजनाओं से कुल 898 लोगों के संपर्क से बाहर होने की जानकारी सामने आई थी. इनमें से 361 लोगों को अब तक बचा लिया गया है. एक सुरंग में करीब 300 लोगों के फंसे होने की आशंका सबसे गंभीर स्थिति रसुवा में स्थित 216 मेगावाट की अपर त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में बताई जा रही है. यहां करीब 300 लोगों के परियोजना की सुरंग के अंदर फंसे होने की आशंका है. वहीं 22 मेगावाट की चिलिमे हाइड्रो प्रोजेक्ट में आठ लोगों से संपर्क नहीं हो पाया है. परियोजना अधिकारियों को आशंका है कि इनमें से छह कर्मचारी सुरंग के अंदर फंसे हो सकते हैं. इसे भी पढ़ेंः Nepal Flash Floods: बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 788 हुई, भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने से खतरा मंडराया 275 से ज्यादा हिंदुस्तानीय भी लापता नेपाल में बाढ़ के बाद हजारों लोगों से संपर्क नहीं हो पाया है. अधिकारियों के मुताबिक देश में 591 विदेशियों समेत कुल 2,502 लोग अब भी लापता हैं. हिंदुस्तान के विदेश मंत्रालय ने बताया कि 275 से ज्यादा हिंदुस्तानीय और हिंदुस्तानीय मूल के 128 लोग लापता हैं या उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है. हिंदुस्तानीय और चीनी विशेषज्ञ भी बचाव अभियान में शामिल सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के अभियान में हिंदुस्तान भी नेपाल की मदद कर रहा है. डॉक्टरों, पैरामेडिकल कर्मचारियों और सुरंग विशेषज्ञ इंजीनियरों वाली 11 सदस्यीय हिंदुस्तानीय तकनीकी टीम ने प्रभावित जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों का निरीक्षण किया है. हिंदुस्तानीय विशेषज्ञ नेपाली सेना के साथ मिलकर चिलिमे और लांगटांग क्षेत्रों में काम कर रहे हैं. इसके अलावा चीन के छह सुरंग विशेषज्ञ भी नेपाल पहुंचे हैं और नेपाली सेना की तकनीकी टीम के साथ बचाव की संभावनाओं का आकलन कर रहे हैं. बाढ़ में अब तक 788 लोगों की मौत नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ में मृतकों की संख्या बढ़कर 788 हो गई है. करीब 9,500 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है. नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हिमनद टूटने के बाद पानी, कीचड़ और मलबे का तेज बहाव नीचे की ओर आया था, जिसने कई गांवों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया. Also Read: Nepal Floods: स्कूल की ओर बढ़ रहा था सैलाब, प्रिंसिपल ने ऐसे बचाई 1,643 बच्चों की जान The post Nepal Flood: सुरंग में जिंदगी की तलाश, 500 से ज्यादा मजदूर लापता, 275 हिंदुस्तानीयों का भी नहीं मिला सुराग appeared first on Naya Vichar.

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Bajaj Pulsar N160 खरीदने का बना रहे हैं प्लान? पहले जान लें 3 फायदे और 2 नुकसान

बजाज पल्सर N160 4V SS अपडेटेड N160 रेंज का टॉप वेरिएंट है. इसमें नया 4-वाल्व इंजन, राइड-बाय-वायर टेक्नोलॉजी, 37mm का नया USD फोर्क, 5-इंच का TFT डिस्प्ले और गूगल मैप्स कास्टिंग जैसे फीचर्स दिए गए हैं. यह बाइक पुराने 2-वाल्व N160 मॉडल को बंद करने के बजाय उसके साथ ही बेची जाएगी. आइए जानते हैं कि इस बाइक में क्या खास है और किन वजहों से यह हर किसी के लिए सही नहीं हो सकती है. बजाज पल्सर N160 4V SS खरीदने के कारण Bajaj Pulsar N160 4V: स्मूथ, कंट्रोल करने में आसान और फास्टेस्ट इसका नया 4-वाल्व इंजन सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परफॉर्मेंस में एक बदलाव लाता है. 165cc क्षमता के साथ यह 9,500rpm पर 18.5hp की पावर देता है. ज्यादा पावर के बावजूद यह इंजन पुराने 2-वाल्व मॉडल की तरह ही काफी स्मूथ है और तेज स्पीड पर भी इसमें हल्का वाइब्रेशन ही महसूस होता है. इसका क्लच भी काफी हल्का है. शहर के ट्रैफिक में कम स्पीड पर इसे चलाना बेहद आरामदायक है, वहीं हाई स्पीड में यह TVS अपाचे RTR 160 4V को कड़ी टक्कर देती है. Bajaj Pulsar N160 4V: TFT डिस्प्ले और बेहतरीन फीचर्स SS मॉडल में 5-इंच का TFT डिस्प्ले मिलता है जो इस सेगमेंट में सबसे ज्यादा फीचर्स देने वाला कंसोल है. इसमें ब्लूटूथ म्यूजिक कंट्रोल, डॉक्यूमेंट स्टोरेज और गूगल मैप्स कास्टिंग जैसी सुविधाएं मिलती हैं. एंड्रॉयड फोन पर गूगल मैप्स कास्टिंग फोन की स्क्रीन ऑफ रहने पर भी आराम से काम करती है. राइड-बाय-वायर टेक्नोलॉजी की वजह से इसमें चार राइडिंग मोड्स मिलते हैं, जो 160cc सेगमेंट में पहली बार दिए गए हैं. सुरक्षा के लिए इसमें डुअल-चैनल ABS और बड़ा 300mm का फ्रंट डिस्क ब्रेक दिया गया है. Bajaj Pulsar N160 4V: किफायती और सही कीमत 1.43 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) की कीमत पर N160 4V SS TVS अपाचे RTR 160 4V के टॉप वेरिएंट से थोड़ी महंगी जरूर है, लेकिन बदले में यह ज्यादा फीचर्स पेश करती है. 4-वाल्व इंजन, राइड-बाय-वायर, USD फोर्क, डुअल-चैनल ABS और एडवांस्ड TFT डिस्प्ले को देखते हुए यह इस सेगमेंट में पैसे की पूरी कीमत वसूल कराती है. ये भी पढ़ें: Bajaj Pulsar 150 vs Suzuki Gixxer 150: इंजन, फीचर्स और कीमत के मामले में कौन-सी बाइक सबसे बेहतर? बजाज पल्सर N160 4V SS खरीदने के नुकसान Bajaj Pulsar N160 4V: थोड़ा हार्ड सस्पेंशन बड़े 37mm USD फोर्क के बावजूद इसका ओवरऑल सस्पेंशन सेटअप पुराने N160 मॉडल की तरह थोड़ा हार्ड ही रखा गया है. यह खराब सडकों को अच्छे से संभाल लेता है और मोड़ पर भी बेहतरीन स्टेबिलिटी देता है, लेकिन TVS अपाचे RTR 160 4V जितना सॉफ्ट और आरामदायक महसूस नहीं होता. जो लोग रोज लंबे सफर पर जाते हैं या बहुत खराब सड़कों पर बाइक चलाते हैं, उन्हें यह सस्पेंशन थोड़ा सख्त लग सकता है. ये भी पढ़ें: नई Bajaj Pulsar 125 अपने पुराने मॉडल से कितनी अलग है? जानें क्या-क्या हुए बदलाव Bajaj Pulsar N160 4V: ज्यादा वजन और मुड़ने में थोड़ी दिक्कत 151 किलोग्राम वजन के साथ N160 4V SS अपनी कैटेगरी की सबसे हल्की बाइक नहीं है. कम स्पीड पर शहर के ट्रैफिक में यह वजन साफ महसूस होता है. इसका टर्निंग रेडियस (मुड़ने का दायरा) भी थोड़ा कम है, जिसकी वजह से तंग गलियों या ट्रैफिक में बाइक को मोडना थोड़ा मुश्किल हो जाता है. यह कमी रोजमर्रा के इस्तेमाल में महसूस हो सकती है. The post Bajaj Pulsar N160 खरीदने का बना रहे हैं प्लान? पहले जान लें 3 फायदे और 2 नुकसान appeared first on Naya Vichar.

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