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September 9, 2026

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BTech CSE को झटका, इस ब्रांच को मिले सबसे ज्यादा प्लेसमेंट ऑफर

IIT कानपुर के कैंपस प्लेसमेंट में इस बार एक दिलचस्प ट्रेंड देखने को मिला है. हर साल की तरह BTech कंप्यूटर साइंस (CSE) को सबसे ज्यादा डिमांड वाली ब्रांच माना जाता है, लेकिन ताजा आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं. इस बार सबसे ज्यादा प्लेसमेंट ऑफर CSE को नहीं बल्कि इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (EE) ब्रांच के स्टूडेंट्स को मिले हैं. आइए पूरे आंकड़ों के साथ समझते हैं कि इस बार IIT कानपुर के प्लेसमेंट सीजन में किस ब्रांच ने बाजी मारी. IIT कानपुर प्लेसमेंट 2026: पूरी रिपोर्ट IIT कानपुर में इस साल कुल 1,969 स्टूडेंट्स ने प्लेसमेंट के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था. इनमें से 1,078 स्टूडेंट्स को नौकरी मिली, यानी ओवरऑल प्लेसमेंट रेट 54.8% रहा. इसके अलावा 254 स्टूडेंट्स को प्री-प्लेसमेंट ऑफर (PPO) के जरिए पहले ही जॉब मिल चुकी थी. कुल मिलाकर स्टूडेंट्स को 1,078 ऑफर्स दिए गए. BTech CSE नहीं, इस ब्रांच ने मारी बाजी अगर ब्रांच-वाइज आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे बड़ा चौंकाने वाला फैक्ट यही है कि टोटल रिक्रूटमेंट के मामले में BTech इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (BT-EE) ने BTech कंप्यूटर साइंस (BT-CSE) को पीछे छोड़ दिया. BT-EE ब्रांच से कुल 153 स्टूडेंट्स को प्लेसमेंट मिला, जबकि BT-CSE से सिर्फ 122 स्टूडेंट्स को ही जॉब मिल पाई. PPO के मामले में भी EE आगे रहा, इस ब्रांच के 63 स्टूडेंट्स को पहले से ही प्री-प्लेसमेंट ऑफर मिल चुका था, जबकि CSE में यह आंकड़ा 49 का रहा. ये भी पढ़ें: IIT ISM धनबाद में रैंक 4167 पर BTech CSE पक्का, देखें कैटेगरी वाइज सीट अलॉटमेंट प्लेसमेंट प्रतिशत में CSE अब भी आगे हालांकि टोटल ऑफर्स के मामले में भले ही CSE, EE से पीछे रह गई हो, लेकिन प्लेसमेंट प्रतिशत के मामले में CSE ने अपनी बादशाहत बरकरार रखी है. BT-CSE का प्लेसमेंट प्रतिशत 89.7% रहा, जो लिस्ट में सबसे ज्यादा है. वहीं BT-EE का प्लेसमेंट प्रतिशत 77.3% रहा. यानी सीधे शब्दों में कहें तो CSE ब्रांच में रजिस्टर्ड ज्यादातर स्टूडेंट्स को नौकरी मिल गई, लेकिन टोटल सीटों के हिसाब से EE ब्रांच ने ज्यादा स्टूडेंट्स को प्लेसमेंट दिलाई. ब्रांच कुल स्टूडेंट्स रिक्रूटेड PPO प्लेसमेंट % एवरेज CTC (LPA) BT-CSE 136 122 49 89.7% 41.84 लाख रुपये BT-EE 198 153 63 77.3% 30.07 लाख रुपये BT-CHE 107 74 13 69.2% 22.89 लाख रुपये BT-ME 157 100 24 63.7% 21.33 लाख रुपये BT-AE 56 35 6 62.5% 18.19 लाख रुपये BT-CE 135 76 5 56.3% 18.78 लाख रुपये BT-MSE 82 44 5 53.7% 21.69 लाख रुपये BT-BSBE 59 29 8 49.1% 21.74 लाख रुपये BS-SDS 29 22 12 75.9% 25.54 लाख रुपये BS-MTH 60 41 12 68.3% 29.47 लाख रुपये सैलरी पैकेज की बात करें तो BT-CSE ब्रांच के स्टूडेंट्स को सबसे ज्यादा एवरेज CTC मिला, जो 41.84 लाख रुपये प्रति वर्ष रहा. सबसे ज्यादा हाइएस्ट पैकेज भी CSE स्टूडेंट को ही मिला, जो 120 लाख रुपये रहा. वहीं BT-EE का एवरेज CTC 30.07 लाख रुपये और हाइएस्ट पैकेज 106 लाख रुपये रहा. ओवरऑल पूरे कैंपस का एवरेज CTC 24.87 लाख रुपये, मीडियन CTC 20 लाख रुपये और हाइएस्ट पैकेज 120 लाख रुपये रहा. ये भी पढ़ें: IIT Delhi का ये BTech ब्रांच बेस्ट, Microsoft और Amazon में जॉब के लिए छात्रों की पहली पसंद ओवरऑल प्लेसमेंट ट्रेंड पूरे कैंपस के सैलरी डिस्ट्रिब्यूशन को देखें तो सबसे ज्यादा 355 स्टूडेंट्स को 10-20 LPA के दायरे में पैकेज मिला. इसके बाद 219 स्टूडेंट्स को 20-30 LPA, 180 स्टूडेंट्स को 30-50 LPA और 64 स्टूडेंट्स को 50 LPA से ज्यादा का पैकेज मिला. वहीं 76 स्टूडेंट्स को 10 LPA से कम पैकेज पर संतोष करना पड़ा. इन आंकड़ों से साफ है कि इस बार IIT कानपुर के प्लेसमेंट सीजन में भले ही CSE ब्रांच सैलरी के मामले में टॉप पर रही हो, लेकिन कुल ऑफर्स के मामले में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग ब्रांच ने बाजी मार ली. ये भी पढ़ें: DTU का टॉप BTech ब्रांच, Amazon और Google में प्लेसमेंट का मौका The post BTech CSE को झटका, इस ब्रांच को मिले सबसे ज्यादा प्लेसमेंट ऑफर appeared first on Naya Vichar.

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कौन हैं Bittu Tabahi? जिन्होंने अकेले ही साफ कर डाली नदी, पद्मश्री देने की उठ रही मांग

Who Is Bittu Tabahi: बिट्टू तबाही, जिसका असली नाम सुरेंद्र सिंह चौधरी है, मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा का रहने वाला है. बिट्टू बीएससी (B.Sc) का छात्र है और सोशल मीडिया क्रिएटर भी है. उसने अपने इंस्टाग्राम के बायो में खुद को Environmental Activist (पर्यावरण कार्यकर्ता) भी बताया है. क्यों हो रही बिट्टू तबाही की इतनी चर्चा? बिट्टू तबाही की सोशल मीडिया पर इस समय सबसे अधिक चर्चा हो रही है. इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वायरल होने से पहले इंस्टाग्राम पर उसके केवल 2.8 से 3 लाख फॉलोअर्स थे, लेकिन दो से तीन दिनों में ही उसके फॉलोअर्स की संख्या बढ़कर 1.87 मिलियन (Million) से अधिक हो गई. अब आपको बताते हैं कि आखिर बिट्टू इतना फेमस क्यों हो गया. दरअसल, बिट्टू ने अजनार नदी को अकेले ही साफ कर डाला. उसने 26 जनवरी 2026 को नदी की सफाई का अभियान शुरू किया. गणतंत्र दिवस के दिन उसने संकल्प लिया कि कुछ ऐसा करना चाहिए, जिससे समाज को फायदा हो. शुरुआत में उसका साथ उसके दोस्तों ने दिया, लेकिन दिन बीतने के साथ उनका साथ छूटता चला गया. इसके बावजूद बिट्टू का हौसला नहीं टूटा. उसने सफाई अभियान जारी रखा—वह खुद नदी में उतरता और घंटों सफाई करता. View on Instagram सफाई में बिट्टू के खर्च हुए 30 हजार से अधिक रुपये मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नदी की सफाई के दौरान बिट्टू तबाही को अपनी जेब से भी पैसे खर्च करने पड़े. रिपोर्ट्स की मानें तो बिट्टू के 30 हजार रुपये से अधिक नदी को साफ करने में लग गए. बिट्टू को ताने भी सहने पड़े नदी की सफाई के दौरान बिट्टू को लोगों की तारीफ तो मिली ही, साथ में तानों और आरोपों का भी सामना करना पड़ा. बिट्टू ने नदी को साफ करते हुए अपनी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर डाले, लेकिन कुछ लोगों ने उस पर महज व्यूज और लाइक्स पाने के लिए सफाई करने का आरोप लगा दिया. हालांकि, लोगों की नकारात्मक टिप्पणियों (Negative comments) के बावजूद बिट्टू ने अपना इरादा नहीं बदला और अंततः नदी को पूरी तरह साफ कर दिया. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी हुए मुरीद, सीएम आवास बुलाकर किया सम्मानित अकेले दम पर नदी की सफाई करके बिट्टू ने न केवल अपने राज्य में, बल्कि दुनिया भर में अपनी पहचान बनाई. मध्य प्रदेश के सीएम डॉ. मोहन यादव भी उसके मुरीद हो गए और उसे सीएम आवास बुलाकर सम्मानित किया. सीएम ने बिट्टू से मुलाकात का वीडियो भी शेयर किया और अपनी पोस्ट में लिखा: “भोपाल में मुख्यमंत्री आवास पर ‘ब्यावरा’ के बेटे सुरेंद्र सिंह चौधरी ‘बिट्टू तबाही’ के साथ एक आत्मीय मुलाकात हुई. अपने अटूट संकल्प और दृढ़ निश्चय से बिट्टू ने न केवल अजनार नदी की सफाई की, बल्कि अपनी कोशिशों से समाज को यह संदेश भी दिया कि बदलाव के लिए किसी बड़ी भीड़ की जरूरत नहीं होती—बस एक सच्ची पहल ही काफी है. आपकी यह पहल ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ की भावना को भी मजबूत करती है, जिसका मुख्य उद्देश्य जन-भागीदारी से जल स्रोतों का संरक्षण और पुनरुद्धार करना है. मुझे पूरा भरोसा है कि अजनार नदी से शुरू हुआ आपका यह संकल्प राज्य के युवाओं को अपने आस-पास के जल स्रोतों की सुरक्षा के लिए प्रेरित करेगा. पूरे राज्य को आप पर गर्व है.” नीदरलैंड्स से मिला ऑफर बिट्टू अपने काम से इतना फेमस हो गया कि उसे नीदरलैंड्स से नौकरी का ऑफर मिल गया. नीदरलैंड्स की मशहूर पर्यावरण संस्था ‘द ओशियन क्लीनअप’ (The Ocean Cleanup) के सीईओ बॉयन स्लैट (Boyan Slat) ने सोशल मीडिया पर उसकी तस्वीर देखकर सीधे लिखा— “Come work for us” (आओ हमारे साथ काम करो). बिट्टू तबाही को पद्मश्री देने की मांग उठी बिट्टू तबाही के काम की तारीफ सोशल मीडिया पर जमकर हो रही है. कोई उसकी तुलना ‘दशरथ मांझी’ से कर रहा है, तो कोई उसे पद्मश्री देने की मांग कर रहा है. Being Political नाम के इंस्टा यूजर ने बिट्टू के पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “आप पद्मश्री के हकदार हैं.” वहीं Jay Bhosale 🇮🇳 ने लिखा, “महाराष्ट्र से ढेर सारा प्यार छोटे, तुम पर गर्व है.” The post कौन हैं Bittu Tabahi? जिन्होंने अकेले ही साफ कर डाली नदी, पद्मश्री देने की उठ रही मांग appeared first on Naya Vichar.

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बशीरहाट लोकसभा सीट पर उपचुनाव में देरी क्यों? इलेक्शन कमीशन ने बतायी वजह

Lok Sabha By Poll: चुनाव आयोग ने अलग-अलग समय पर खाली हुई असम की नौगांव लोकसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा कर दी. पश्चिम बंगाल की बशीरहाट और मेघालय की शिलांग लोकसभा सीटें भी रिक्त हैं. इन दोनों संसदीय क्षेत्र में उपचुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है. इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ECI) ने मंगलवार को इसकी वजह भी बता दी है. SIR और चुनावी याचिका की वजह से उपचुनाव में देरी इलेक्शन कमीशन ने कहा है कि चुनावी याचिका और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के चलते लोकसभा की 2 सीटों पर उपचुनाव में देरी हुई है, जबकि एक अन्य संसदीय सीट पर उपचुनाव की घोषणा की जा चुकी है. आयोग ने बताया है कि पश्चिम बंगाल की बशीरहाट, मेघालय की शिलांग और असम की नौगांव लोकसभा सीटें अलग-अलग तिथियों पर रिक्त हुई थीं. असम की नौगांव लोकसभा सीट पर उपचुनाव 6 अक्टूबर को निर्वाचन आयोग ने सोमवार को नौगांव लोकसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा की, लेकिन अन्य 2 सीटों के लिए कार्यक्रम घोषित नहीं किया. शिलांग और बशीरहाट लोकसभा सीटों पर उपचुनाव की घोषणा नहीं किये जाने के कारण के बारे में पूछे जाने पर निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि मेघालय में जारी एसआईआर और कलकत्ता हाईकोर्ट में लंबित चुनावी याचिका इसकी मुख्य वजह हैं. ये भी पढ़ें: बंगाल विधानसभा उपचुनाव : नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों पर 6 अक्टूबर को वोट, 9 को आयेगा रिजल्ट 25 सितंबर 2024 को हुआ बशीरहाट के सांसद का निधन बशीरहाट सीट से तृणमूल कांग्रेस के एसके नूरुल इस्लाम के निर्वाचन को चुनौती देते हुए चुनावी याचिका दायर की गयी थी. हालांकि, लोकसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के कुछ महीने बाद 25 सितंबर 2024 को उनका निधन हो गया. इसके बावजूद उनके निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका लंबित है. कोर्ट में लंबित है चुनावी याचिका चुनाव परिणाम घोषित होने के 45 दिनों के भीतर संबंधित हाईकोर्ट में किसी उम्मीदवार की जीत को चुनौती देते हुए चुनावी याचिका दायर की जा सकती है. आयोग के अधिकारियों ने बताया कि ‘दूसरी गुहार’ वाली एक चुनावी याचिका अभी लंबित है. चुनावी याचिका में दूसरी बार गुहार आमतौर पर याचिकाकर्ता या किसी अन्य उम्मीदवार को निर्वाचित घोषित करने के लिए की जाती है. पहली गुहार में निर्वाचित उम्मीदवार के निर्वाचन को अमान्य घोषित करने की मांग की जाती है. ये भी पढ़ें: बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी ने छोड़ी नंदीग्राम सीट, वोटरों से किया ये खास वादा 15 फरवरी को हुआ शिलांग के सांसद का निधन शिलांग लोकसभा सीट 19 फरवरी को वॉयस ऑफ द पीपुल्स पार्टी के सांसद रिकी एंड्रयू सिंगकॉन के निधन के बाद रिक्त हुई थी. आयोग के अधिकारियों ने बताया कि मेघालय में एसआईआर प्रक्रिया जारी है और अंतिम मतदाता सूची 21 अक्टूबर को प्रकाशित की जायेगी. प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे से रिक्त हुई थी नौगांव सीट एकमात्र लोकसभा उपचुनाव असम की नौगांव सीट पर होगा, जो कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई थी. इस सीट पर 6 अक्टूबर को मतदान होगा और मतगणना 9 अक्टूबर को की जायेगी. 2024 में जीते थे बोरदोलोई बोरदोलोई ने वर्ष 2024 में कांग्रेस के टिकट पर नौगांव लोकसभा सीट जीती थी, लेकिन इस साल मार्च में उन्होंने पार्टी छोड़ दी और असम विधानसभा चुनाव से पहले हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गये. इसके बाद उन्होंने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया तथा दिसपुर विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की. The post बशीरहाट लोकसभा सीट पर उपचुनाव में देरी क्यों? इलेक्शन कमीशन ने बतायी वजह appeared first on Naya Vichar.

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Ganesh Chaturthi Special: क्यों कहलाए भगवान गणेश ‘एकदंत’? जानें टूटे दांत की पूरी कहानी

Ganesh Chaturthi Special: गणेश चतुर्थी 2026 का पावन पर्व 14 सितंबर, सोमवार को मनाया जाएगा. नया विचार की ‘गणेश चतुर्थी स्पेशल’ सीरीज की पहली कड़ी में आपने भगवान गणेश के जन्म और उनके गजानन बनने की कहानी जानी. अब सीरीज की अगली कड़ी में जानिए कि भगवान गणेश का एक दांत कैसे टूटा और वे ‘एकदंत’ क्यों कहलाए. भगवान गणेश को गजानन, लंबोदर, विघ्नहर्ता और गणपति जैसे कई नामों से जाना जाता है. इन्हीं में एक नाम ‘एकदंत’ भी है. एकदंत का मतलब है- एक दांत वाला. भगवान गणेश की तस्वीरों और मूर्तियों में भी उनका एक दांत पूरा और दूसरा टूटा हुआ दिखाई देता है. लेकिन गणेश जी का दांत आखिर टूटा कैसे? धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में इसे लेकर अलग-अलग कथाएं मिलती हैं. इनमें एक कथा भगवान परशुराम से जुड़ी है, जबकि दूसरी कथा महाहिंदुस्तान के लेखन से संबंधित बताई जाती है. परशुराम और गणेश जी के बीच हुआ विवाद गणेश जी के एकदंत बनने की एक प्रमुख कथा ब्रह्मवैवर्त पुराण के गणेश खंड में मिलती है. इसके अनुसार, एक बार भगवान परशुराम भगवान शिव से मिलने कैलाश पहुंचे. उस समय गणेश जी माता पार्वती के कहने पर द्वार पर पहरा दे रहे थे. परशुराम भगवान शिव के भक्त थे और उनसे मिलने के लिए अंदर जाना चाहते थे. लेकिन गणेश जी ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया. उन्होंने बताया कि माता पार्वती ने उन्हें द्वार की रक्षा करने की जिम्मेदारी दी है. परशुराम ने गणेश जी को समझाने की कोशिश की, लेकिन गणेश जी अपनी बात पर अड़े रहे. देखते ही देखते दोनों के बीच विवाद बढ़ गया और बात युद्ध तक पहुंच गई. शिव के दिए फरसे से टूटा गणेश जी का दांत परशुराम के पास भगवान शिव का दिया हुआ दिव्य अस्त्र था, जिसे परशु या फरसा कहा जाता है. युद्ध के दौरान परशुराम ने उसी फरसे से गणेश जी पर वार किया. गणेश जी जानते थे कि यह फरसा उनके पिता भगवान शिव ने ही परशुराम को दिया है. इसलिए उन्होंने उस अस्त्र का सम्मान किया. उन्होंने फरसे के वार को रोकने के बजाय उसे अपने एक दांत पर ले लिया. फरसे के प्रहार से गणेश जी का एक दांत टूट गया. इसके बाद से ही उन्हें ‘एकदंत’ कहा जाने लगा. इस कथा में गणेश जी के धैर्य और संयम को खास महत्व दिया जाता है. उनके पास शक्ति होने के बावजूद उन्होंने भगवान शिव के दिए अस्त्र का अपमान नहीं किया. दांत टूटने पर क्रोधित हुईं माता पार्वती जब माता पार्वती को पता चला कि उनके पुत्र गणेश का दांत टूट गया है, तो वे बहुत क्रोधित हो गईं. इस प्रसंग से जुड़ी कथाओं में बताया जाता है कि बाद में परशुराम ने गणेश जी से क्षमा मांगी और मामला शांत हुआ. इस पूरी कथा में गणेश जी के साहस के साथ उनके धैर्य और अपनी जिम्मेदारी के प्रति समर्पण को भी देखा जाता है. उन्होंने माता पार्वती की दी हुई जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए किसी के सामने पीछे हटना स्वीकार नहीं किया. ये भी पढ़ें: Ganesh Chaturthi Special: मां पार्वती ने हल्दी से कैसे बनाए गणेश जी? जानें जन्म की पूरी कहानी क्या महाहिंदुस्तान लिखने के लिए गणेश जी ने अपना दांत तोड़ा था? गणेश जी के एकदंत स्वरूप से जुड़ी एक दूसरी बहुत प्रसिद्ध कथा महाहिंदुस्तान के लेखन से संबंधित है. लोकप्रिय मान्यता के अनुसार, महर्षि वेदव्यास महाहिंदुस्तान की रचना कर रहे थे. उन्होंने भगवान गणेश से इसे लिखने में मदद करने का अनुरोध किया. गणेश जी इसके लिए तैयार हो गए. कहा जाता है कि महाहिंदुस्तान लिखते समय उनकी कलम टूट गई. लेखन रुक न जाए, इसलिए गणेश जी ने अपना एक दांत तोड़ लिया और उसे लेखनी की तरह इस्तेमाल करते हुए महाहिंदुस्तान लिखना जारी रखा. हालांकि, इस कथा को लेकर एक बात ध्यान देने वाली है. महाहिंदुस्तान के आदि पर्व में वेदव्यास और गणेश जी के लेखन से जुड़ा प्रसंग मिलता है, लेकिन इसमें गणेश जी के अपना दांत तोड़कर लेखनी बनाने की बात नहीं कही गई है. इसलिए इसे बाद की लोकप्रिय धार्मिक परंपरा और मान्यता के रूप में देखना ज्यादा उचित माना जाता है. ‘एकदंत’ नाम का क्या मतलब है? ‘एकदंत’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है- ‘एक’ और ‘दंत’. इसका सीधा अर्थ है- एक दांत वाला. भगवान गणेश की मूर्तियों में एक दांत पूरा और दूसरा टूटा हुआ दिखाया जाता है. इसी वजह से उनका एक नाम ‘एकदंत’ पड़ा. गणेश जी के इस स्वरूप का धार्मिक परंपरा में खास महत्व माना जाता है. गणेश जी का एकदंत स्वरूप क्या सिखाता है? गणेश जी का टूटा हुआ दांत केवल उनकी पहचान नहीं है, बल्कि इससे एक खास सीख भी जुड़ी है. मान्यता है कि जीवन में किसी बड़े काम को पूरा करने के लिए कई बार त्याग करना पड़ता है. परशुराम से जुड़ी कथा में यह प्रसंग धैर्य और सम्मान से जुड़ा दिखाई देता है. वहीं, महाहिंदुस्तान से जुड़ी लोकप्रिय कथा में इसे ज्ञान और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाता है. गणेश जी का एकदंत स्वरूप हमें यह संदेश देता है कि जीवन में मुश्किलें कितनी भी आएं, हमें धैर्य और समझदारी से काम लेना चाहिए. किसी कमी या परेशानी को अपनी कमजोरी नहीं बनने देना चाहिए. मजबूत इरादे और सही सोच के साथ व्यक्ति बड़ी से बड़ी चुनौती का सामना कर सकता है. अगली कड़ी में जानिए: भगवान गणेश को चंद्रमा ने क्यों बनाया उपहास का पात्र और गणेश जी ने चंद्रमा को क्यों दिया श्राप? जानें गणेश जी और चंद्रदेव से जुड़ी यह रोचक पौराणिक कथा. The post Ganesh Chaturthi Special: क्यों कहलाए भगवान गणेश ‘एकदंत’? जानें टूटे दांत की पूरी कहानी appeared first on Naya Vichar.

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MP Kisan Yojana: किसानों को सालाना मिलते हैं ₹6000, 14वीं-16वीं किस्त को लेकर क्या है अपडेट? ऐसे करें चेक

MP Kisan Yojana : मध्य प्रदेश के किसानों के लिए मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना काफी अहम प्रशासनी योजना है. इसके तहत पात्र किसानों को राज्य प्रशासन की ओर से साल में कुल 6000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है. यह राशि तीन समान किस्तों में देने का प्रावधान है. पीएम किसान सम्मान निधि के साथ जोड़ने पर पात्र किसान परिवार को केंद्र और राज्य से मिलाकर सालाना 12 हजार रुपये की सहायता मिल सकती है. फिलहाल किसानों के बीच सबसे बड़ा सवाल योजना की अगली किस्त को लेकर है. पिछली किस्त के बाद 14वीं, 15वीं और 16वीं किस्त को लेकर किसान लगातार जानकारी खोज रहे हैं. मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना में कितने रुपये मिलते हैं? मध्य प्रदेश प्रशासन की आधिकारिक योजना जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को वर्ष में कुल 6000 रुपये तीन समान किस्तों में दिए जाते हैं. भुगतान राज्य स्तर से सिंगल क्लिक के माध्यम से किया जाता है. जानकारी विवरण योजना मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना राज्य मध्य प्रदेश सालाना सहायता ₹6000 किस्त 3 समान किस्त भुगतान DBT/सिंगल क्लिक पात्रता पीएम किसान के पात्र हितग्राही आवेदन संबंधित प्रक्रिया के अनुसार पंजीयन स्टेटस SAARA पोर्टल पर जांच की सुविधा 14वीं, 15वीं और 16वीं किस्त को लेकर क्या स्थिति है? किसानों के बीच इन किस्तों को लेकर काफी चर्चा है. उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना की पिछली किस्त अगस्त 2026 में आने के बाद अगली किस्तों को लेकर किसानों का इंतजार बना हुआ है. इसलिए अभी सबसे जरूरी बात यह है कि प्रशासन की ओर से किस्त जारी करने की आधिकारिक तारीख सामने आने तक किसी निश्चित तारीख को पक्का न मानें. किन किसानों को मिलता है लाभ? आधिकारिक जानकारी के अनुसार पीएम किसान योजना के पात्र हितग्राही मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के लिए भी पात्रता के दायरे में आते हैं. योजना के आवेदन की प्रक्रिया में संबंधित पटवारी के माध्यम से जानकारी ली जाती है. योजना का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने, कृषि में बेहतर तकनीक को बढ़ावा देने और किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करना है. पैसा अटक गया है तो क्या करें? अगर पात्र किसान को योजना की राशि नहीं मिल रही है तो सबसे पहले अपना रिकॉर्ड और बैंक से जुड़ी जानकारी जांचनी चाहिए. किसान को यह भी देखना चाहिए कि उसका पीएम किसान से संबंधित रिकॉर्ड सही है या नहीं. इसके अलावा बैंक खाता, आधार से जुड़ी जानकारी और डीबीटी से संबंधित स्थिति की भी जांच करना जरूरी है. SAARA पोर्टल पर ऐसे चेक करें जानकारी मध्य प्रदेश प्रशासन के SAARA पोर्टल पर मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना से जुड़ी हितग्राही जानकारी देखने की सुविधा उपलब्ध है. पोर्टल पर आधार नंबर, बैंक खाता या पीएम किसान आईडी के माध्यम से संबंधित जानकारी खोजने का विकल्प दिया गया है. इसलिए किसान किसी एजेंट या अनधिकृत वेबसाइट पर भरोसा करने के बजाय प्रशासनी पोर्टल से ही अपना स्टेटस जांचें. किसानों के लिए काम की बात अगर आप मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के लाभार्थी हैं तो अभी से अपना रिकॉर्ड अपडेट रखें. खासकर बैंक खाता, आधार और पीएम किसान से जुड़ी जानकारी में कोई गलती है तो उसे संबंधित विभाग के माध्यम से ठीक कराएं. The post MP Kisan Yojana: किसानों को सालाना मिलते हैं ₹6000, 14वीं-16वीं किस्त को लेकर क्या है अपडेट? ऐसे करें चेक appeared first on Naya Vichar.

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