पिछले कारोबारी सत्र में आई तेज बढ़त के बाद ब्रेंट क्रूड करीब 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा, जबकि WTI क्रूड 84 डॉलर प्रति बैरल से थोड़ा नीचे बना रहा. इन हालात ने दुनियाभर में तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है.
आखिर तेल की कीमतों में तेजी क्यों आई?
तेल बाजार में सबसे बड़ी चिंता मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को लेकर है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हुए हमले के बाद ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह तनाव जल्द खत्म होता नहीं दिख रहा. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बातचीत अब भी अटकी हुई है और फिलहाल सीजफायर की उम्मीद भी कमजोर नजर आ रही है. इसी वजह से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इतना अहम क्यों है?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के तेल ले जाने वाले अहम समुद्री रास्ते में से एक है.
- दुनिया के करीब 20% तेल की सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है.
- ईरान इस समुद्री मार्ग पर अपना कंट्रोल बनाए हुए है.
- सऊदी अरब ने कुछ तेल निर्यात को रेड सी तक जाने वाली ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की ओर मोड़ा है.
- हालांकि इस वैकल्पिक रास्ते पर भी खतरा बना हुआ है, क्योंकि यमन के हूती विद्रोहियों ने शिपिंग को बाधित करने की धमकी दी है.
इन परिस्थितियों ने ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंता और बढ़ा दी है.
अमेरिका के तेल भंडार से क्या संकेत मिले?
- अमेरिका का कमर्शियल क्रूड ऑयल स्टॉक 2018 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है.
- इससे संकेत मिलता है कि बाजार में कच्चे तेल की वास्तविक सप्लाई पहले के मुकाबले कम हो रही है.
- वहीं स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) लगातार 18वें हफ्ते घटा है.
- SPR का स्तर अब 1983 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है.
- घटते भंडार की वजह से वैश्विक तेल बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों को भी सहारा मिला.
आगे बाजार की नजर किस पर रहेगी?
इस महीने तेल बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. कभी अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की उम्मीद से राहत मिली, तो कभी सैन्य तनाव बढ़ने से कीमतों में तेजी आ गई.
इसी बीच इजिप्त(Egypt) के भूमध्यसागरीय (मेडिटेरेनियन) बंदरगाह दमिएटा पर प्रोजेक्टाइल हमले के बाद दो एलएनजी (LNG) जहाजों में आग लगने की समाचार ने भी ऊर्जा बाजार की चिंता बढ़ा दी है. इससे समुद्री सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा लॉजिस्टिक्स को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं.
ऐसे में आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर मिडिल ईस्ट की स्थिति और ग्लोबल ऑयल सप्लाई से जुड़े हर नए घटनाक्रम पर बनी रहेगी.
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