India Pakistan War: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद हिंदुस्तान ने मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात को पाकिस्तान के नौ आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया है. हिंदुस्तानीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत मिसाइलों के जरिए पड़ोसी देश में घुसे बिना ही आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद और लश्कर-ए-तय्यबा ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया. हिंदुस्तान की इस सैन्य कार्रवाई के बाद अब पाकिस्तान हिंदुस्तान पर जवाबी कार्रवाई करने की गीदड़ भभकी दे रहा है. उसकी इस हरकत पर रेटिंग एजेंसी मूडीज ने चेतावनी देते हुए कहा कि पाकिस्तान हिंदुस्तान के साथ कभी भी जंग बर्दाश्त कर ही नहीं सकता.
ताकत दिखाने को मिसाइल परीक्षण कर रहा पाकिस्तान
अंग्रेजी की वेबसाइट सीएनबीसी टीवी18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, हिंदुस्तान की ओर से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoJK) में स्थित आतंकी ठिकानों पर हमले के बाद हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है. इस्लामाबाद अपनी ताकत दिखाने के लिए मिसाइल परीक्षण कर रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज की रिपोर्ट पाकिस्तान की कंगाली भी उजागर की गई है. मूडीज ने 5 मई 2025 को अपने निवेशकों को भेजे एक नोट में साफ चेतावनी दी कि अगर हिंदुस्तान-पाकिस्तान के बीच तनाव और बढ़ा, तो पाकिस्तान की विदेशी वित्तीय सहायता बाधित हो सकती है. इससे उसके विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव पड़ेगा.
सिर्फ तीन महीने ही आयात कर सकता है पाकिस्तान
पाकिस्तान पहले से ही गहरे आर्थिक कंगाली के दौर से जूझ रहा है. कोविड महामारी के बाद की आर्थिक सुस्ती, रूस-यूक्रेन युद्ध से बढ़ती वैश्विक महंगाई और घरेलू नेतृत्वक अस्थिरता ने पाकिस्तान की वित्तीय स्थिति को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया है. दिसंबर 2024 के अंत तक पाकिस्तान पर 131 बिलियन डॉलर से अधिक का विदेशी कर्ज था. इतना ही नहीं, पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार महज तीन महीनों के आयात बिल कवर करने लायक है.
ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान की आर्थिक रीढ़ पर प्रहार
हिंदुस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर में बहावलपुर, मुजफ्फराबाद और मुरीदके जैसे आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया, जहां जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों का संचालन होता है. यह कार्रवाई सिर्फ आतंकवाद के खिलाफ सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि पाकिस्तान को यह भी स्पष्ट संदेश है कि हिंदुस्तान अब प्रतिकार करेगा. लेकिन, हिंदुस्तान की यह जवाबी कार्रवाई पाकिस्तान की कमजोर आर्थिक रीढ़ पर और प्रहार करती है.
हिंदुस्तान की कार्रवाई से चिंता में चीन
चीन ने हाल ही में पाकिस्तान को 2 बिलियन डॉलर का कर्ज दिया है. युद्ध जैसी स्थिति में पाकिस्तान की कर्ज चुकाने की क्षमता और घट सकती है, जो चीन जैसे कर्जदाताओं को भी जोखिम में डाल सकती है. ऐसे में पाकिस्तान के लिए किसी भी सैन्य टकराव की कीमत उसकी वित्तीय स्थिति को भारी नुकसान पहुंचा सकती है.
हिंदुस्तान की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत
मूडीज के अनुसार, हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच आर्थिक संबंध बहुत ही सीमित हैं. हिंदुस्तान के कुल निर्यात का मात्र 0.5% पाकिस्तान को जाता है. ऐसे में तनाव बढ़ने पर भी हिंदुस्तान की आर्थिक गतिविधियों पर बहुत बड़ा असर नहीं पड़ेगा. हालांकि, बढ़ा हुआ रक्षा खर्च हिंदुस्तान के राजकोषीय समेकन को धीमा कर सकता है.
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हिंदुस्तान के साथ जंग पाकिस्तान का आत्मघाती कदम
पाकिस्तान यदि हिंदुस्तान के साथ तनाव बढ़ाता है, तो यह केवल उसकी वित्तीय स्थिति को और डुबोने वाला आत्मघाती कदम साबित होगा. हिंदुस्तान ने जहां निर्णायक सैन्य कार्रवाई कर आतंकवाद को जवाब दिया है, वहीं पाकिस्तान को पहले अपनी आंतरिक आर्थिक स्थिरता पर ध्यान देना चाहिए, ना कि युद्धोन्माद को भड़काना चाहिए.
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