Siramtoli Flyover: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अबुआ प्रशासन में राज्यवासियों को एक और फ्लाईओवर की सौगात दी. सीएम हेमंत ने 5 जून को पर्यावरण दिवस के अवसर पर विधिवत पूजा-अर्चना कर मेकॉन-सिरमटोली फ्लाईओवर का उद्घाटन किया. यह ब्रिज रांची के लोगों को जाम की समस्या से निजात दिलायेगा. साथ ही शहर की यातायात व्यवस्था सुगम बनाने में भी सहायक होगा. इससे पूर्व अबुआ प्रशासन राज्य की जनता को कांटाटोली फ्लाईओवर का तोहफा दे चुकी है.
क्यों कहा पूर्वी हिंदुस्तान का सबसे बड़ा केबल स्टे ब्रिज
सिरमटोली फ्लाईओवर में रांची रेलवे लाइन व मौजूदा ओवरब्रिज के ऊपर केबल का उपयोग हुआ है. पहली बार झाररखंड में केबल का इस्तेमाल कर ब्रिज तैयार किया गया है. चूंकि, रेलवे व ओवरब्रिज के हिस्से में पिलर नहीं हो सकता था.
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ऐसे में मलेशिया से 72 केबल मंगाये गये. इनमें से 36 केबल का इस्तेमाल रेलवे लाइन व 36 केबल का इस्तेमाल ओवरब्रिज के ऊपर किया गया है. हर केबल कवर्ड है. एक कवर्ड केबल में 55 केबल है. इसके सहारे ज्यादा से ज्यादा लोड वहन किया जा सकता है. लोड के मुताबिक केबल को टाइट किया जा सकता है. इसे पूर्वी हिंदुस्तान में रेलवे लाइन के ऊपर बना सबसे बड़ा केबल स्टे ब्रिज माना जा रहा है.
आधुनिक डिजाइन और तकनीक का इस्तेमाल
इस फ्लाइओवर के निर्माण में आधुनिक डिजाइन व तकनीक का इस्तेमाल हुआ है. एलएंडटी कंपनी को यह काम ईपीसी मोड में मिला था. ऐसे में डिजाइन में उसने जरूरत के मुताबिक मोडिफिकेशन भी किया. कंपनी ने कई विशेषज्ञों को यहां लाकर इसके निर्माण में सलाह ली. बुर्ज खलीफा के निर्माण में लगे इंजीनियर भी यहां निरीक्षण करने पहुंचे थे. इस ब्रिज का निर्माण कुल 355.76 करोड़ रुपये से हुआ है, जिसकी लंबाई करीब 2.34 किमी है. इसका शिलान्यास 19 अगस्त 2022 को किया गया था.
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क्यों खास है ब्रिज
यह ब्रिज कई मायनों में खास है. इस केबल ब्रिज के निर्माण में अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया है. सड़क सुरक्षा के लिए प्री-कास्ट पाइर कैप (PRECAST PIER CAP) और प्री-कास्ट ग्रिडर (PRECAST GIRDER) से ब्रिज का निर्माण किया गया है. साथ ही पुल की नींव के लिए मोनो-पाइल फाउंडेशन (Mono-Pile Foundation) का इस्तेमाल हुआ है. यह हरमू नदी के ऊपर बना 94 मीटर लंबा एक्सट्रडोज्ड केबल-स्टे ब्रिज है. यह 42 मीटर ऊंचा है. यह फ्लाईओवर कार्तिक उरांव के नाम से जनता को समर्पित किया गया है.
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