पूजा कमेटी के अध्यक्ष जगदीश महतो ने बताया कि गांव में आपसी मेल मिलाप का अभाव था. गांव दो भागों में बंटा हुआ था. लोगों में एकजुटता के लिए काली पूजा शुरू की गयी. इसके बाद से आज तक गांव में आपसी सद्भावना बनी हुई है. यहां का काली मंदिर सिद्धिदात्री के रूप में जाना जाता है. यहां मांगी गयी मनोकामना पूरी होती है. यहां अटका, मुंडरो, धरगुल्ली और आसपास पंचायत के लोग पूजा और मेले में शामिल होते हैं. इस वर्ष 20 अक्तूबर को पूजा होगी. वहीं, 21 को हवन और 22 अक्टूबर को भव्य मेले के साथ जागरण कार्यक्रम होगा. 23 को भव्य शोभा यात्रा निकालकर प्रतिमा विसर्जित की जायेगी. मूर्तिकार मां काली की प्रतिमा को अंतिम रूप देने में जुटे हैं.
चार दशकों से घंघरी में हो रही पूजा
घंघरी जीटी रोड किनारे भी चार दशकों से मां काली की पूजा की जा रही है. यहां भी चार दिनों का पूजा अर्चना व मेले का आयोजन किया जाता है. भव्य शोभा यात्रा निकालकर प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है. पूजा को सफल बनाने के लिए कमेटी का गठित की गयी है. अध्यक्ष जागेश्वर मंडल, सचिव बिनोद महतो, कोषाध्यक्ष संतोष महतो, राजकुमार, दर्शन महतो, भेखलाल महतो, उतिमचंद्र महतो, हरिलाल मरतो, अजय मंडल, उमेश महतो, राजेश तुरी, संतोष हरि, हीरामन महतो, जगरनाथ महतो, अर्जुन महतो, शंभु महतो, कामेश्वर महतो, भूषण महतो, भागीरथ महतो सदस्य हैं. हीरामन महतो ने बताया कि स्थानीय लोगों के सहयोग से मां काली की पूजा होती है. इस वर्ष भी पूजा के साथ मेले का आयोजन हो रहा है. पूजा को लेकर बेको व पश्चिमी पंचायत और आसपास गांव के लोग उत्साहित हैं.
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