गोरौल. भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक लोक पर्व सामा चकेवा गांवों में शुरू हो गया है. इस लोक पर्व सिर्फ भाई बहन के प्रेम का प्रतीक ही नहीं माना जाता बल्कि पर्यावरण से संबंधित पर्व भी माना जाता है. यह पर्व छठ पर्व के खरना से शुरू होता है तो कहीं परना से शुरू होता है और कार्तिक पूर्णिमा तक मनाया जाता है. शाम ढलते ही बहनों द्वारा डाला चंगेरा में सामा चकेवा को सजाकर सार्वजनिक स्थान पर टोली बनाकर बैठ जाती है और मधुर गीतों का दौर चलने लगता है. इस दौरान बहनों द्वारा चुगला यानि समाज में घृणा फैलाने बाले चुगलई करने वाले लोगो का पुतला बनाकर झांझी कुत्ता जो मिट्टी का बना होता है. उसके सामने ही चुगली करने बालो के मुंह को आग की लपटों से झुलसाया जाता है तथा भाई के दीर्घायु होने की कामना की जाती है. यह लोक पर्व उत्तरी बिहार का महत्वपूर्ण पर्वों में एक पर्व माना जाता है. यह पर्व मना रहे सान्वी कुमारी सम्भवी, कुमारी निशा, सुगंधा कुमारी, मोना कुमारी, प्रियासी कुमारी, सरिता कुमारी, स्वेता कुमारी सहित अन्य बहनों ने बताया कि वह अपने भाई के दीर्घायु के लिये यह पर्व मनाती है और सामा की पूजा कर भाई के दीर्घायु के लिए आशीर्वाद मांगती है.
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