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भिखारी ठाकुर के साहित्य में जीवन से जुड़ी समस्याओं की चर्चा

साहिबगंज.

भोजपुरी के शेक्सपियर पद्मश्री भिखारी ठाकुर की 138वीं जयंती का आयोजन झारखंड राज्य भाषा साहित्य अकादमी के तत्वावधान में किया गया. प्रगति भवन के सभागार में कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधानाचार्य अजय कुमार (इलाहाबाद) ने की. कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि अजय कुमार, विशिष्ट अतिथि कुलाधिपति विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ डॉ रामजन्म मिश्र, डॉ सच्चिदानंद मिश्र ने कहा कि आयोजक गौरव रामेश्वरम एवं सीमा आनंद (जवाहर नवोदय विद्यालय) ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कार्यक्रम का शुभारंभ किया. हिंदुस्तानीय लोक परंपरा में भिखारी ठाकुर का साहित्य विषयक विषय प्रवेश करते हुए वरीय शिक्षिका जवाहर नवोदय विद्यालय सीमा आनंद ने कहा कि पद्मश्री भिखारी ठाकुर के साहित्य में जीवन से जुड़ी हुई समस्याओं की चर्चा है. समाज में व्याप्त कुरीतियों, बेमेल विवाह, पलायन, गरीबी इत्यादि की चर्चा उनके साहित्य में है. भिखारी ठाकुर की रचनाओं में बिदेशिया, भाई- विरोध, बेटी वियोग, विधवा- विलाप, कलियुग प्रेम, राधेश्याम बहार, गंगा- स्नान, पुत्र- बध, गबर घिचोर, बिरहाबहार, नकल भांड़ के नेटुआ, ननद-भउजाई प्रसिद्ध हैं. इसके अतिरिक्त उन्होंने भजन-कीर्तन, गीत और कविता भी लिखी है. नाटकों में बिदेशिया इतनी प्रसिद्ध हुई कि इस पर फिल्म भी बनाया गया. हिंदुस्तान प्रशासन ने पद्मश्री इत्यादि सम्मान से सम्मानित किया. लोक जीवन से जुड़े इस कलाकार को राय बहादुर की भी उपाधि तत्कालीन समाज द्वारा दी गयी थी. संगोष्ठी के मुख्य वक्ता कुलाधिपति विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ भागलपुर डॉ राम जन्म मिश्र ने कहा कि भाषा और साहित्य के प्रबल पक्षधर, भोजपुरिया माटी एवं भोजपुरी समाज के सुख-दुख को अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज में व्याप्त कुरीतियों एवं अंधविश्वासों पर प्रहार करने वाले पद्मश्री भिखारी ठाकुर की प्रासंगिकता और उनकी रचनाधर्मिता आज भी देश और विदेश को प्रभावित कर रही है. उनकी प्रतिभा को इंगित करते हुए महापंडित राहुल सांकृत्यायन उन्हें ””””अनगढ़ हीरा”””” कहते हैं. भोजपुरी के शेक्सपियर की आज 138वीं जयंती के अवसर पर हम उन्हें श्रद्धा निवेदन करते हैं. मुख्य अतिथि अजय कुमार ने कहा कि जनता की वस्तु को जनता के सामने जनता के मनोरंजन के लिए प्रस्तुत कर पद्मश्री भिखारी ठाकुर ने बड़ी लोकप्रियता प्राप्त की है. केवल अक्षर ज्ञानवाले इस एक व्यक्ति ने भोजपुरी साहित्य का जितना प्रचार-प्रसार किया, उतना शायद ही किसी विद्वान ,लेखक या अन्य भोजपुरी के साहित्यकारों ने किया है. भोजपुरी प्रदेश में भोजपुरी कविता नाटक की धूम मचाने वाले नाटककार अभिनेता का इतना अधिक प्रचार शायद ही किसी ने किया है. भिखारी ठाकुर ने अपने निधन के पहले आत्मविश्वास के साथ कहा है कि हमारे साहित्य और हमारे नाटक की कथावस्तु की समीक्षा और प्रशंसा बाद के दिनों में होगी.आज उनकी मृत्यु के 58 वर्ष बाद भी हम उन्हें आदर के साथ स्मरण कर रहे हैं. कार्यक्रम में सचिव सरिता मिश्र, मनोरंजन भोजपुरी साहित्य परिषद शिक्षिका अनुपम शुक्ला, श्वेता, सुमन, सुधा आनंद, उपेंद्र राय, चेतन कुमार, नकुल मिश्र आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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