Dhanbad News: आइआइटी आइएसएम में शनिवार से द्वितीय आइइइइ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कम्यूनिकेशन और कंप्यूटर्स (एलेक्सकॉम-2025) शुरू हो गया. यह तीन दिवसीय सम्मेलन टेक्समिन स्मार्ट कक्ष, आइटूएच भवन में हो रहा है. उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि एम वेल्लई पांडी, महानिदेशक, स्टैंडर्डाइजेशन टेस्टिंग एंड क्वालिटी सर्टिफिकेशन (एसटीक्यूसी), इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, हिंदुस्तान प्रशासन थे. अपने संबोधन में श्री पांडी ने कहा कि इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, संचार और कंप्यूटर विज्ञान जैसे क्षेत्रों का तीव्र एकीकरण हो रहा है. पहले अलग-अलग माने जाने वाले ये क्षेत्र अब सूचना प्रौद्योगिकी आधारित एकीकृत प्रणालियों के रूप में विकसित हो चुके हैं. उन्होंने क्वांटम कंप्यूटिंग, एआइ, एमआइ, स्वायत्त प्रणालियां, सेमीकंडक्टर डिजाइन और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी उभरती तकनीकों को भविष्य की दिशा बताया.
तकनीकों के विस्तार के साथ सुरक्षा संबंधी चुनौतियां भी बढ़ रहीं
उन्होंने कहा कि इन तकनीकों के विस्तार के साथ सुरक्षा संबंधी चुनौतियां भी तेजी से बढ़ रही हैं. उन्होंने शोध और तकनीकी विकास में मानकीकरण की अनिवार्यता पर बल देते हुए आइएसओ/आइइसी 23837, इटीएसआइ के क्वांटम कुंजी वितरण मानक, एफआइपीएस 203, 204 और 205 जैसे पोस्ट–क्वांटम क्रिप्टोग्राफी मानकों तथा ओडब्ल्यूएएसपी के कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग संवेदनशीलता प्रोटोकॉल का उल्लेख किया. उन्होंने ‘सिक्योरिटी–बाय–डिजाइन’ को हर स्तर पर अपनाने की आवश्यकता बतायी. साथ ही, सिस्टम–ऑन–चिप आयात और इंटरनेट ऑफ थिंग्स सुरक्षा से जुड़ी राष्ट्रीय चिंताओं पर प्रकाश डाला.
इन्होंने किया संबोधित
उद्घाटन सत्र में संयोजक प्रो हिमांशु बी मिश्रा ने स्वागत भाषण दिया. जनरल चेयर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार अभियांत्रिकी विभागाध्यक्ष प्रो आरके गंगवार ने टिप्पणी प्रस्तुत की. सम्मेलन के संरक्षक एवं निदेशक प्रो धीरज कुमार ने सम्मेलन के उद्देश्यों और समाजोन्मुख तकनीकी विकास में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला. धन्यवाद ज्ञापन प्रो जे सिंह टी ने किया. सम्मेलन के दौरान विद्युत प्रणालियों, संचार प्रौद्योगिकी, वीएलएसआइ और एम्बेडेड सिस्टम, कंप्यूटिंग आर्किटेक्चर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा साइबर सुरक्षा जैसे विषयों पर तकनीकी सत्र, विशेषज्ञ व्याख्यान और शोध प्रस्तुत किये जायेंगे. सम्मेलन का उद्देश्य शिक्षा जगत, शोध संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग को सुदृढ़ करना है.
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