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NEP Against Federal Structure: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले केंद्र की नरेंद्र मोदी प्रशासन और पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस प्रशासन के नेता और मंत्री एक-दूसरे पर आरोपों की बौछार कर रहे हैं. वोटिंग से पहले वोटर लिस्ट को क्लीन करने के लिए चलाये गये विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के विरोध में निर्वाचन आयोग पर लगातार हमला बोलने वाली टीएमसी के राज्यसभा सांसद ने अब नयी शिक्षा नीति को लेकर केंद्र प्रशासन पर निशाना साधा है.
एकजुट होकर एनईपी का विरोध करें आईसीएसई-आईएससी स्कूल के प्रधानाचार्य -ओब्रायन
राज्यसभा सांसद डेरेक ओब्रायन ने नयी शिक्षा नीति (एनईपी) को संघीय व्यवस्था के खिलाफ बताया है. तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओब्रायन ने आईसीएसई-आईएससी स्कूल के प्रधानाचार्यों से एकजुट होकर नयी शिक्षा नीति (एनईपी) का विरोध करने का सोमवार को आह्वान किया. उन्होंने कहा कि यह नीति संघीय ढांचे के खिलाफ है और राज्यों या प्रमुख हितधारकों से परामर्श किये बिना तैयार की गयी है.
नयी शिक्षा नीति ने संघीय ढांचे को किया कमजोर – डेरेक ओब्रायन
स्कूल प्रमुखों के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए डेरेक ओब्रायन ने कहा कि नयी शिक्षा नीति ने हिंदुस्तान के संघीय ढांचे को कमजोर कर दिया है. तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य ने कहा कि पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और कर्नाटक सहित कई राज्यों की अपनी-अपनी शिक्षा नीतियां हैं. पश्चिम बंगाल ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में वर्ष 2023 में राज्य शिक्षा नीति लागू की, जबकि तमिलनाडु की नीति और कर्नाटक की मसौदा नीति 2025 में जारी की गयी.
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NEP Against Federal Structure: एनईपी से जुड़ी परियोजनाओं का कार्यान्वयन हुआ मुश्किल – टीएमसी सांसद
तृणमूल कांग्रेस के नेता ने कहा कि हितधारकों के साथ परामर्श की कमी के कारण स्कूलों के लिए एनईपी से जुड़ी परियोजनाओं का कार्यान्वयन मुश्किल हो गया है. कोलकाता के ला मार्टिनियर गर्ल्स स्कूल में आयोजित एंग्लो-इंडियन स्कूलों के प्रधानाध्यापकों के संघ के 103वें वार्षिक सम्मेलन में 3,000 से अधिक आईसीएसई-आईएससी स्कूलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया.
एनईपी की वजह से अल्पसंख्यक स्कूलों पर हो रहा प्रतिकूल असर – डेरेक
अल्पसंख्यक-संचालित शैक्षणिक संस्थानों के प्रशासन के मुद्दे पर, टीएमसी नेता ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 30 अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और प्रशासन का अधिकार देता है. एनईपी की सेंट्रलाइज्ड व्यवस्था के कारण इस पर प्रतिकूल असर हो रहा है. उन्होंने ‘विकसित हिंदुस्तान शिक्षा अधिष्ठान विधेयक’ पर भी चिंता जतायी. कहा कि ऐसे उपाय संस्थागत स्वायत्तता को और कमजोर करते हैं.
देश के 54000 ईसाई संचालित स्कूलों में पढ़ते हैं 6 करोड़ शिशु
डेरेक ने ईसाई समुदाय के सदस्यों को ‘सकारात्मक उद्देश्यों’ से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहने के लिए प्रोत्साहित किया. उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में उनके योगदान पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि देशभर में लगभग 54,000 ईसाई-संचालित संस्थानों में प्रतिवर्ष लगभग 6 करोड़ स्टूडेंट्स दाखिला लेते हैं. इनमें से कम से कम तीन-चौथाई छात्र गैर-ईसाई समुदायों से होते हैं.
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