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बिहार पंचायत चुनाव में पूरी तरह से बदल जाएगा आरक्षण रोस्टर, परिसीमन पर भी पूरी जानकारी पढ़िए

Bihar Panchayat Elections: बिहार में पंचायत चुनाव इस बार पुराने परिसीमन के आधार पर कराए जाएंगे. राज्य में कुल 2 लाख 55 हजार 379 पदों के लिए चुनाव होना है. सबसे अहम बात यह है कि चुनाव 30 साल पुराने परिसीमन पर होंगे, लेकिन आरक्षण रोस्टर पूरी तरह बदला जाएगा. इसका सीधा असर यह होगा कि कई सीटों की श्रेणी बदल सकती है. जो सीट अभी आरक्षित है, वह सामान्य हो सकती है और सामान्य सीट आरक्षित वर्ग के खाते में जा सकती है.

पंचायत चुनाव को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं. मतदान के लिए 32 हजार से ज्यादा नए एम-3 ईवीएम खरीदे जा रहे हैं. इस पर 64 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च होगी. वर्ष 2021 में पंचायत चुनाव 11 चरणों में कराए गए थे, लेकिन इस बार चरणों की संख्या कम रखने की संभावना जताई जा रही है.

क्या होता है पंचायत परिसीमन?

लोकसभा और विधानसभा की तरह पंचायतों की भी भौगोलिक सीमाएं तय होती हैं. वार्ड सदस्य से लेकर जिला परिषद अध्यक्ष तक के लिए क्षेत्र निर्धारित किया जाता है. इस प्रक्रिया को पंचायत परिसीमन कहा जाता है. परिसीमन का उद्देश्य यह होता है कि जनसंख्या के आधार पर वार्ड और पंचायतों की सीमा तय की जाए, ताकि हर निर्वाचित प्रतिनिधि लगभग समान संख्या में लोगों का प्रतिनिधित्व कर सके.

परिसीमन क्यों जरूरी है?

समय के साथ किसी इलाके की आबादी बढ़ती या घटती है. कई बार गांवों की जनसंख्या इतनी बढ़ जाती है कि वहां नई पंचायत या नए वार्ड बनाने की जरूरत पड़ती है. परिसीमन के जरिए इन्हीं बदलावों को समायोजित किया जाता है, ताकि प्रशासनिक संतुलन बना रहे.

परिसीमन क्यों नहीं हो सका

पहले माना जा रहा था कि 2026 का पंचायत चुनाव नए परिसीमन पर होगा, लेकिन 2021 की जनगणना नहीं हो सकी. वर्तमान समय में पंचायतों की वास्तविक जनसंख्या का कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है. पिछली जनगणना 2011 में हुई थी. ऐसे में अगर अभी परिसीमन कराया जाता, तो 15 साल पुराने आंकड़ों पर निर्भर रहना पड़ता. इसी वजह से पुराने परिसीमन पर ही चुनाव कराने का निर्णय लिया गया है.

30 साल पुराना है पंचायत परिसीमन

राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार बिहार में पंचायत परिसीमन वर्ष 1994-95 में 1991 की जनगणना के आधार पर हुआ था. इसके बाद 2001, 2011, 2016 और 2021 में पंचायत चुनाव हुए, लेकिन पूर्ण परिसीमन नहीं हुआ. इस दौरान कई ग्रामीण क्षेत्र शहरी निकायों में शामिल किए गए, जिसके अनुसार छोटे-मोटे बदलाव कर चुनाव कराए जाते रहे.

बदलेगा आरक्षण रोस्टर

2026 के पंचायत चुनाव में आरक्षण रोस्टर बदला जाएगा. बिहार पंचायत राज अधिनियम के तहत हर दो लगातार चुनावों के बाद रोस्टर बदलना अनिवार्य है. पिछला रोस्टर 2016 और 2021 में लागू रहा था. नए रोस्टर के लागू होने से सीटों की स्थिति बदलेगी. कुल सीटों में से 50 फीसदी पर आरक्षण लागू होगा.

स्त्रीओं को 50% आरक्षण

पंचायती राज संस्थाओं में स्त्रीओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है. यह आरक्षण हर वर्ग में लागू होता है, यानी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग की आरक्षित सीटों में भी आधी सीटें स्त्रीओं के लिए तय होती हैं.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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