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प्रमाणपत्र फर्जी मिलने पर होगी प्राथमिकी और वेतन की वसूली

बीपीएससी से चयनित जिले के 4000 शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की होगी जांच = डीपीओ स्थापना ने बीइओ को जारी किया आदेश प्रतिनिधि, भभुआ नगर. बीपीएससी के तहत टीआर-1, टीआर-2 एवं टीआर-3 के अंतर्गत चयनित जिले के लगभग 4000 शिक्षकों के शैक्षणिक, आवासीय एवं अन्य प्रमाणपत्रों की जांच की जायेगी. इस संबंध में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) शंभू प्रसाद सिंह ने जिले के सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश जारी किया है. आदेश में कहा है कि बीएससी के तहत चयनित सभी शिक्षकों से निर्धारित प्रमाणपत्रों की छायाप्रति एकत्र कर विभाग को उपलब्ध कराएं, ताकि उनका सत्यापन संबंधित बोर्ड एवं विश्वविद्यालयों से कराया जा सके. डीपीओ स्थापना ने जारी आदेश में स्पष्ट किया है कि बीपीएससी के माध्यम से नियुक्त सभी शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र, प्रशैक्षणिक प्रमाणपत्र, आवासीय प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, आय प्रमाणपत्र एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (इडब्ल्यूएस) प्रमाणपत्र की जांच की जायेगी. सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र के शिक्षकों से निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्रमाणपत्रों की छायाप्रति लेकर जिला कार्यालय को उपलब्ध कराएं. आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि जांच के दौरान विशेष रूप से उन स्त्री शिक्षकों के मामलों की समीक्षा की जायेगी, जो उत्तर प्रदेश की निवासी हैं, लेकिन बीपीएससी परीक्षा में बिहार की स्त्रीओं को मिलने वाले पांच प्रतिशत आरक्षण का लाभ लेकर चयनित हुई हैं. ऐसे मामलों की अलग से जांच करायी जायेगी कि संबंधित शिक्षिका बिहार की स्थायी निवासी है या नहीं और क्या उन्हें आरक्षण का लाभ नियमानुसार मिला है. इसके अलावा इडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र को लेकर भी सख्ती से जांच की जायेगी. विभाग को शिकायत मिली है कि कई ऐसी स्त्री अभ्यर्थियों ने इडब्ल्यूएस श्रेणी का लाभ लेकर नौकरी प्राप्त की है, जिनके पति पहले से प्रशासनी या निजी नौकरी में कार्यरत हैं, जो नियमों के विरुद्ध है. ऐसे सभी मामलों की जांच कर वास्तविक स्थिति का पता लगाया जायेगा. सेवा से किया जायेगा बर्खास्त डीपीओ स्थापना शंभू प्रसाद सिंह ने अपने आदेश में साफ कहा है कि यदि जांच के दौरान किसी भी शिक्षक का कोई भी प्रमाणपत्र फर्जी, गलत अथवा नियमों के विपरीत पाया जाता है, तो संबंधित शिक्षक के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करायी जायेगी. साथ ही अब तक प्राप्त वेतन की वसूली की जायेगी और सेवा से बर्खास्त करने की भी कार्रवाई की जायेगी. क्या कहते हैं डीपीओ स्थापना इस संबंध में डीपीओ स्थापना शंभू प्रसाद सिंह ने बताया कि इस जांच का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनाये रखना और नियमों के अनुरूप योग्य अभ्यर्थियों को ही सेवा में बनाये रखना है. सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इस कार्य को गंभीरता से लेकर समय पर रिपोर्ट उपलब्ध कराएं, ताकि आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके. कहा कि अगर जांच के दौरान जिस किसी भी शिक्षक का प्रमाणपत्र फर्जी पाया जाता है, तो संबंधित शिक्षक पर प्राथमिकी दर्ज कर वेतन की वसूली की जायेगी. साथ ही सेवा से बर्खास्त कर दिया जायेगा.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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