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Premanand Ji Maharaj: क्या सच में सब कुछ पहले से भाग्य में लिखा होता है? प्रेमानंद महाराज ने खोला रहस्य

Premanand Ji Maharaj: अक्सर जब किसी इंसान की जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते हैं, तो वह यह सोच लेता है कि सब कुछ पहले से ही उसके भाग्य में लिखा हुआ था. जब कुछ शुभ होता है, तो लोग बेहद प्रसन्न होते हैं, लेकिन जब कुछ अशुभ घटता है, तो वे अपने भाग्य को दोष देने लगते हैं. कई बार मन ही मन यह सवाल भी उठता है कि भगवान ने उनके भाग्य में संघर्ष और दुख क्यों लिखा. लेकिन क्या लोगों की यह धारणा सही है? क्या सच में इंसान का भाग्य पहले से लिखा होता है, जिसके अनुसार वह कर्म करता है? आइए जानते हैं इस विषय पर प्रेमानंद जी महाराज क्या कहते हैं.

क्या सब पहले से ही भाग्य लिखा है?

प्रेमानंद जी महाराज से एक युवक ने भाग्य से संबंधित सवाल पूछा था. इस पर महाराज ने उत्तर देते हुए कहा कि यह धारणा बिल्कुल गलत है कि जीवन की हर चीज भाग्य में पहले से लिखी होती है. उन्होंने बताया कि भाग्य में केवल कुछ ही बातें लिखी होती हैं, जबकि बाकी सब कुछ व्यक्ति के कर्मों का फल होता है.

प्रारब्ध के बारें में प्रेमानंद महाराज ने क्या कहा ?

प्रेमानंद जी महाराज ने आगे बताया कि शास्त्रों में प्रारब्ध के बारे में उल्लेख किया गया है. प्रारब्ध कर्मों से बनता है और यह दो प्रकार का होता है—शुभ और अशुभ. शुभ कर्म करने से सफलता, विजय और अनुकूलता प्राप्त होती है, जबकि अशुभ कर्मों का फल असफलता, रोग, दुख-दर्द, बाधाएं और कष्ट होता है. प्रारब्ध में केवल इन्हीं फलों का वर्णन किया गया है.

क्या नवकर्म से बदल सकता है भाग्य का फल?

उन्होंने कहा कि जो कर्म आप आज कर रहे हैं, वे आपके नवकर्म हैं. व्यक्ति जो भी कार्य करता है, वह पहले से भाग्य में लिखा हुआ नहीं होता, बल्कि उसकी इच्छा और प्रयास का परिणाम होता है. भाग्य पुराने कर्मों का फल होता है, जो शुभ या अशुभ परिणाम देता है. यदि नवकर्म अच्छे हों, तो वे पुराने कर्मों के अशुभ फलों को भी समाप्त कर सकते हैं. इसलिए अच्छे कर्म करना व्यक्ति के अपने हाथ में है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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