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स्टार वॉर्स जैसा ‘स्पेस एयरक्राफ्ट कैरियर’: चीन का नया पैंतरा या सिर्फ एक सपना?

China Space Aircraft Carrier: चीन एक बार फिर दुनिया को हैरान करने की कोशिश कर रहा है. समंदर में तैरने वाले जहाजों के बाद अब चीन की नजरें आसमान के उस छोर पर हैं जहाँ से अंतरिक्ष (Space) शुरू होता है. चीन ने ‘लुआननियाओ’ (Luanniao) नाम के एक भीमकाय ‘स्पेस एयरक्राफ्ट कैरियर’ का कॉन्सेप्ट पेश किया है. आसान भाषा में कहें तो यह एक ऐसा उड़ने वाला किला होगा जो अंतरिक्ष की दहलीज पर तैरते हुए वहीं से फाइटर जेट्स और मिसाइलें लॉन्च कर सकेगा.

क्या है यह ‘लुआननियाओ’ और कितना बड़ा है?

चीन की प्रशासनी मीडिया CCTV द्वारा जारी किए गए एक वीडियो के अनुसार, यह कोई मामूली जहाज नहीं है. इसकी बनावट किसी हॉलीवुड फिल्म के ‘स्टार वॉर्स’ शिप जैसी है.

साइज में महाबली: इसकी लंबाई 242 मीटर और चौड़ाई 684 मीटर बताई जा रही है.

तुलना: यह दुनिया के सबसे बड़े समुद्री एयरक्राफ्ट कैरियर ‘यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड’ से दोगुना लंबा और तीन गुना चौड़ा है.

वजन का भारी गेम: इसका वजन करीब 1 लाख 20 हजार टन होगा. इसका पंख (wingspan) 2,000 फीट से भी ज्यादा बड़ा होगा.

‘साउथ हेवनली गेट’: चीन का सीक्रेट प्रोजेक्ट

यह विशालकाय कैरियर चीन के ‘नानतियानमेन प्रोजेक्ट’ (Nantianmen Project) का हिस्सा है, जिसका मतलब है ‘दक्षिण स्वर्ग का द्वार’.

कब शुरू हुआ: इस प्रोजेक्ट की चर्चा साल 2017 में तब शुरू हुई जब चीन के विमानन उद्योग निगम (AVIC) ने इसके आइडिया शेयर किए.

हथियार और जेट्स: ‘लुआननियाओ’ अपने साथ 88 ‘शुआन नु’ (Xuan Nu) नाम के स्टील्थ (गायब होने वाले) फाइटर जेट्स ले जा सकेगा. ये जेट्स दुनिया के किसी भी कोने में हाइपरसोनिक मिसाइलें दागने में सक्षम होंगे.

एडवांस टेक: इस सिस्टम में ‘बेदी’ (Baidi) नाम के फाइटर जेट, लेजर गन और पार्टिकल बीम जैसे हथियारों की बात कही गई है, जो AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से चलेंगे.

क्या यह हकीकत बनेगा या सिर्फ एक प्रोपेगेंडा है?

चीन का दावा है कि यह कैरियर साल 2045 या 2055 तक हकीकत बन सकता है. लेकिन दुनिया भर के एक्सपर्ट्स इसे फिलहाल ‘साइंस फिक्शन’ (फिल्मों जैसी कल्पना) मान रहे हैं.

फिजिक्स के नियम: एक्सपर्ट्स का कहना है कि इतने भारी जहाज को अंतरिक्ष में ले जाने के लिए ऐसी तकनीक चाहिए जो आज की तारीख में मौजूद ही नहीं है.

इतिहास का सबक: इसकी तुलना सोवियत संघ के ‘कैस्पियन सी मॉन्स्टर’ से की जा रही है, जो पानी के थोड़ा ऊपर उड़ता था लेकिन भारी खर्च और सुरक्षा कारणों से बंद कर दिया गया. चीन का यह कॉन्सेप्ट उससे कहीं ज्यादा बड़ा और पेचीदा है.

एक्सपर्ट्स और सोशल मीडिया की राय

चीन के मिलिट्री कमेंटेटर सोंग झोंगपिंग के अनुसार, यह कॉन्सेप्ट भविष्य की अंतरिक्ष की लड़ाइयों के हिसाब से एकदम फिट है. वहीं, सोशल मीडिया पर लोग इसे चीन की ताकत दिखाने और ताइवान जैसे मुद्दों पर अमेरिका को डराने का एक तरीका (प्रोपेगेंडा) बता रहे हैं.

मशहूर पत्रकार चार्ल्स आर. स्मिथ ने तो यहाँ तक कह दिया कि चीन CGI (कंप्यूटर ग्राफिक्स) की वीडियो दिखा रहा है, जबकि असलियत में उनकी सेना के बड़े जनरल भ्रष्टाचार और आपसी खींचतान की वजह से पद खो रहे हैं.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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