Bihar News: बिहार प्रशासन ने विधानसभा में गुरुवार को बिहार सूक्ष्म वित्त संस्थाएं विधेयक 2026 पास हो गया है, जो सीधे तौर पर उन लोगों को सुरक्षा देगा जो ऊंचे ब्याज और रिकवरी एजेंटों की प्रताड़ना झेल रहे हैं. अब बिहार में बिना रजिस्ट्रेशन के कर्ज बांटना और डरा-धमका कर वसूली करना बहुत महंगा पड़ेगा.
अब कर्ज वसूली में मनमानी मुश्किल
बिहार में अवैध सूदखोरी और दबंगई से वसूली के खिलाफ प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है. राज्य विधानसभा ने “बिहार सूक्ष्म वित्त संस्थाएं विधेयक 2026” को ध्वनिमत से पारित कर दिया.
इस कानून के तहत अब माइक्रोफाइनेंस कंपनियों को सिर्फ हिंदुस्तानीय रिजर्व बैंक से लाइसेंस लेना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि राज्य के वित्त विभाग से पंजीकरण भी अनिवार्य होगा. बिना पंजीकरण के ऋण देना आपराधिक कृत्य माना जाएगा.
हर जिले में बनेगा विशेष कोर्ट, पीड़ितों को त्वरित राहत
विधेयक के अनुसार सूद के दबाव में आत्महत्या या उत्पीड़न से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए हर जिले में विशेष अदालत बनाई जाएगी. इन अदालतों का गठन पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की सहमति से होगा और प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी इसकी अध्यक्षता करेंगे.
इन अदालतों की कमान प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी के हाथ में होगी, जो विशेष रूप से अवैध ऋण और प्रताड़ना से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई करेंगे. इससे पीड़ितों को न्याय के लिए सालों तक कचहरी के चक्कर नहीं काटने होंगे.
अवैध कर्ज चुकाने की मजबूरी खत्म
किसी व्यक्ति ने बिना पंजीकृत संस्था से कर्ज लिया है या तय सीमा से अधिक ब्याज चुकाया है, तो उसे अतिरिक्त रकम लौटाने की कानूनी बाध्यता नहीं होगी. इतना ही नहीं, पहले चुकाई गई अतिरिक्त राशि को वह 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वापस पाने का हकदार होगा.
कोई भी सूक्ष्म वित्त संस्था या सूदखोर कर्ज वसूली के लिए आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों यानी ‘रिकवरी एजेंटों’ का सहारा लेता है, तो उसे 3 साल तक की जेल और 5 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना भरना होगा.
वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने सदन में साफ कर दिया है कि अब बच्चों के स्कूल जाकर उन्हें शर्मिंदा करना, पड़ोसियों पर दबाव डालना या सामाजिक समारोहों में खलल डालकर वसूली करने के दिन लद गए हैं. यह कानून उधारकर्ताओं के आत्मसम्मान की रक्षा के लिए एक ढाल की तरह काम करेगा.
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