Beauty : खूबसूरत दिखने के लिए आज की युवतियों में लिप फिलर कराने, चीकबोन्स को लिफ्ट कराने और बोटॉक्स का इस्तेमाल करने जैसे विकल्प उतने ही आम हो गये हैं, जितना कि फेशियल कराना या एक ट्रेंडी हेयरकट लेना. सुंदरता को निखारनेवाले ये ट्वीकमेंट (बनावट में सुधार) कराने से पहले अक्सर स्त्रीएं इसके लॉन्ग टर्म इफेक्ट्स पर ध्यान देना भूल जाती हैं. आप अगर होठों की खूबसूरती को बढ़ाने या झुर्रियों से निजात पाने के लिए ऐसा कोई ट्वीकमेंट कराने का मन बना रही हैं, तो पहले इनसे जुड़ी बारीकियां समझें…
जानें ब्यूटी ट्वीकमेंट के बारे में
सबसे पहले तो आप यह जान लें कि ट्वीकमेंट में लोकप्रिय फिलर और बोटॉक्स दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं. अक्सर लोग इन्हें एक ही समझ बैठते हैं. बोटॉक्स में न्यूरोटॉक्सिन का उपयोग होता है, जिससे चेहरे की मांसपेशियों को अस्थायी रूप से सुन्न कर माथे वे चहरे की झुर्रियों एवं सिलवटों को मिटाया जा सकता है. वहीं, डर्मल फिलर में हाइलूरोनिक एसिड का उपयोग किया जाता है. फिलर मुख्य रूप से होंठों को निखारने और गहरी रेखाओं या गड्ढों को भरने के लिए इंजेक्ट किये जाते हैं.
जरूरी है सही प्रक्रिया व एक्सपर्ट का चयन
कोई भी ब्यूटी ट्वीकमेंट लेने से पहले उसके प्रभाव एवं उसे लेने के बाद बरती जानेवाली सावधानियों के बारे में जानना बेहद जरूरी है. आप अगर फिलर लेने का मन बना रही हैं, तो यह जान लें कि फिलर्स तीन प्रकार के होते हैं- टेंपेररी, सेमी परमानेंट और परमानेंट. सही ट्वीकमेंट के लिए एक अच्छे एक्सपर्ट का चयन करना भी बेहद महत्वपूर्ण है.
कराना होता है एलर्जी टेस्ट : ट्वीकमेंट में इनजेक्ट किया जानेवाला केमिकल आपको सूट कर रहा है या नहीं, इसके लिए एक्सपर्ट ट्वीकमेंट से पहले एलर्जिक टेस्ट करते हैं.
दर्द व अस्थायी नीले दाग से घबराएं नहीं : होंठों पर, जहां वचा पतली होती है और रक्त वाहिकाएं अधिक होती हैं. ऐसे में इस एरिया में फिलर कराने पर दर्द व नीले धब्बे पड़ सकते हैं. जो कुछ समय में ठीक हो जाते हैं.
परिणाम दिखने में लग सकते हैं कुछ दिन : फिलर को पूरी तरह त्वचा में सेटल होने में एक सप्ताह तक का समय लग सकता है.
कुछ समय के लिए बन सकती हैं गांठें : प्रक्रिया के बाद कुछ समय के लिए गांठ जैसा महसूस हो सकता है.
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डिजॉल्व कराने का है विकल्प
आप अगर अपने फिलर ट्वीकमेंट से खुश नहीं हैं या आपको कोई परेशानी महसूस हो रही है, तो आप इसे कभी भी डिजॉल्व करा सकती हैं. फिलर को हटवाने का कोई निश्चित समय नहीं होता. लेकिन विशेषज्ञ 21 वर्ष से कम उम्र की युवतियों को इन प्रक्रियाओं को लेने की सलाह नहीं देते. यदि आप इसे बार-बार करवाते रहते हैं, तो सुई से होने वाली चोट के कारण ऊतकों में कुछ हद तक कड़ापन आ सकता है, जिसे फाइब्रोसिस कहा जाता है. हालांकि, यह बहुत गंभीर नहीं होता.
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