Dipika Chikhlia: हिंदुस्तानीय टेलीविजन इतिहास में कुछ किरदार ऐसे हैं जो समय के साथ भी लोगों के दिलों से नहीं मिटते. रामानंद सागर के ऐतिहासिक धारावाहिक ‘रामायण’ में माता सीता का किरदार निभाकर दीपिका चिखलिया ने ऐसी ही अमिट छाप छोड़ी है. अपनी सादगी और सशक्त अभिनय से उन्होंने न सिर्फ घर-घर में पहचान बनाई, बल्कि दर्शकों के मन में एक पवित्र छवि के रूप में बस गईं. आज भी उन्हें लोग ‘सीता माता’ के रूप में ही याद करते हैं, जबकि उन्होंने फिल्मों और टेलीविजन के साथ-साथ अपने करियर में कई अलग-अलग भूमिकाएं निभाकर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया है.
बचपन से अभिनय की ओर रहा रुझान
दीपिका चिखलिया का जन्म 29 अप्रैल 1965 को मुंबई में हुआ था. बचपन से ही उन्हें अभिनय में गहरी रुचि थी और वे स्कूल के नाटकों में भाग लेती थीं. एक समय कोलकाता में रहने के दौरान उन्हें प्रसिद्ध अभिनेता उत्तम कुमार ने एक फिल्म में बाल कलाकार के रूप में काम करने का प्रस्ताव दिया था, हालांकि परिवार की अनुमति न मिलने से यह अवसर नहीं मिल सका.
फिल्मों से लेकर टीवी तक का सफर
दीपिका ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत राजश्री प्रोडक्शन की फिल्म ‘सुन मेरी लैला’ से की थी, जिसमें उन्हें मुख्य भूमिका मिली और पहचान भी बनी. इसके बाद उन्होंने हिंदी के साथ-साथ कन्नड़, मलयालम, तमिल और बंगाली फिल्मों में भी अभिनय किया. टीवी की दुनिया में उन्होंने धारावाहिक ‘पेइंग गेस्ट’ और ‘विक्रम बेताल’ जैसे शोज में भी अपनी प्रतिभा दिखाई.
नेतृत्व में भी आजमाई किस्मत
दीपिका चिखलिया ने अभिनय के अलावा नेतृत्व में भी कदम रखा और सार्वजनिक जीवन में अपनी सक्रियता दिखाई. हालांकि उन्हें असली लोकप्रियता ‘रामायण’ की सीता के किरदार से ही मिली, जिसने उनके व्यक्तित्व को एक अलग ही पहचान दी.
वर्क फ्रंट और लोकप्रियता
दीपिका ने अपने करियर में ‘भगवान दादा’, ‘घर का चिराग’, ‘चीख’, ‘खुदाई’ और ‘पत्थर’ जैसी कई फिल्मों में काम किया है. लेकिन ‘रामायण’ का किरदार आज भी उनके करियर का सबसे मजबूत स्तंभ माना जाता है.
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