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ममता बनर्जी को लड़ाई, लड़ाई, लड़ाई चाई : नंदीग्राम की हार के बाद भवानीपुर में ‘फाटाफाटी खेला’, 60 हजार का टार्गेट

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Mamata Banerjee Bhabanipur Election 2026: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) की प्रमुख ममता बनर्जी के लिए नेतृत्व का मतलब सिर्फ सत्ता नहीं, निरंतर ‘संघर्ष’ (लड़ाई, लड़ाई, लड़ाई) है. 71 वर्ष की उम्र में भी उनका जोश वैसा ही है, जैसा दशकों पहले था. इस बार के विधानसभा चुनाव में उनके निशाने पर कोई एक व्यक्ति नहीं, बल्कि सीधे चुनाव आयोग है.

नंदीग्राम में ‘शांतिकुंज के मंझले बेटे’ से हारीं ममता बनर्जी

‘दीदी’ के बारे में कहा जाता है कि वह बिना लड़ाई के रह ही नहीं सकतीं. पिछले चुनाव में नंदीग्राम के संग्राम में ‘शांतिकुंज के मंझले बेटे’ (शुभेंदु अधिकारी) से मिली हार के बाद, इस बार वह अपनी ‘बड़ी बहन’ यानी भवानीपुर विधानसभा सीट से मैदान में हैं. क्या शुभेंदु अधिकारी ने इस बार यहां उनकी राह कठिन बना दी है?

नंदीग्राम का जख्म और भवानीपुर का भरोसा

ममता बनर्जी की नेतृत्वक बिसात हमेशा चौंकाने वाली होती है. 2021 में उन्होंने अचानक नंदीग्राम से लड़ने का फैसला किया था. चोटिल पैर और प्लास्टर के साथ ‘भांगा पाये स्पोर्ट्सा होबे’ का नारा दिया, लेकिन जीत शुभेंदु अधिकारी की हुई. इस बार ममता बनर्जी ने नारा बदलकर ‘फाटाफाटी स्पोर्ट्सा होबे’ कर दिया है. वह नंदीग्राम (मंझली बहन) की बजाय अब सिर्फ भवानीपुर (बड़ी बहन) पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं.

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अभिषेक बनर्जी ने तय किया टार्गेट

ममता बनर्जी भले ही एक सीट से लड़ रही हों, लेकिन राज्य की सभी 294 सीटों पर वह खुद को ही उम्मीदवार मानती हैं. उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी ने भवानीपुर में दीदी की जीत का अंतर 60 हजार वोटों का तय किया है. कार्यकर्ताओं पर ‘अदृश्य CCTV’ जैसी नजर रखी जा रही है.

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Mamata Banerjee Bhabanipur Election 2026: क्या दीदी इस बार चिंतित हैं?

नेतृत्वक गलियारों में चर्चा है कि ममता बनर्जी इस बार थोड़ी नर्वस हैं, क्योंकि चुनाव प्रक्रिया के दौरान उन्होंने भवानीपुर के बीएलए (BLA) के साथ करीब 5 बार बैठकें की हैं. उनके करीबियों का कहना है कि यह चिंता नहीं, बल्कि चुनाव के प्रति उनकी गंभीरता है. वह किसी भी लड़ाई को हल्के में नहीं लेतीं.

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अनोखी बात : परिवार के हर सदस्य का नाम ‘A’ से क्यों?

ममता बनर्जी के परिवार में नाम रखने का एक बेहद दिलचस्प और अनोखा चलन है, जो शायद ही किसी को पता हो. ममता बनर्जी ने अपने सभी भतीजे और भतीजियों के नाम अंग्रेजी वर्णमाला के पहले अक्षर ‘A’ से रखे हैं. उदाहरण के लिए- अभिषेक, आकाश, आबेश और अग्निशा. यह सिलसिला अगली पीढ़ी में भी जारी है. अभिषेक बनर्जी के बच्चों के नाम अजानिया और अयांश हैं. उनके भाई कार्तिक के पोते का नाम खुद ‘पिटी दादी’ (ममता बनर्जी) ने आदिरा रखा है.

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राज्य के कोने-कोने में विरोधियों को चुनौती दे रहीं ममता

आदिगंगा के किनारे बसी भवानीपुर की गलियों से लेकर राज्य के कोने-कोने तक, ममता बनर्जी एक बार फिर अपनी सादगी और हवाई चप्पल के साथ विरोधियों को चुनौती दे रही हैं. अब देखना यह है कि ‘फाटाफाटी स्पोर्ट्सा’ में जनता उन्हें कितना समर्थन देती है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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