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हाईकोर्ट के फैसले के बाद भोजशाला में हुई पूजा-अर्चना, श्रद्धालु बोला- बिना रोक टोक हुए दर्शन, अब हर दिन…

Bhojshala Temple: मध्य प्रदेश के धार जिले स्थित भोजशाला परिसर में शनिवार को श्रद्धालुओं ने प्रवेश कर पूजा-अर्चना की. इंदौर स्थित मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की बेंच द्वारा विवादित भोजशाला-कमाल मौला परिसर केस में 15 मई को अपना फैसला सुनाया. इसमें कोर्ट ने पूरे परिसर को मंदिर घोषित किया और हिंदू पक्ष को वहां पूजा करने का अधिकार दिया. अदालत के आदेश के बाद आज 16 मई को कुछ श्रद्धालु परिसर में पहुंचे और वहां पूजा-अर्चना की.

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने शुक्रवार को अपना फैसला सुनाते हुए हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार दिया और परिसर को राजा भोज से संबंधित माना. हिंदुस्तानीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की ओर से पैरवी कर रहे वकील अविरल विकास खरे ने फैसले के कानूनी पक्ष को समझाते हुए कहा कि इस आदेश की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भोजशाला स्थल को ‘संरक्षित स्मारक’ घोषित किया गया है और यह दर्जा उसे वर्ष 1904 से प्राप्त है. इसका मतलब है कि इस स्मारक का पूरा प्रशासन और नियंत्रण केवल हिंदुस्तानीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के पास रहेगा. संक्षेप में कहें तो इस स्थल की निगरानी पूरी तरह ASI के अधीन होगी.’

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि विवादित स्थल मूल रूप से देवी वाग्देवी को समर्पित एक मंदिर है, जिसका संबंध भोज-परमार वंश के काल से है. साथ ही अदालत ने ASI के पुराने आदेश को भी निरस्त कर दिया. एक श्रद्धालु ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि अब वे बिना किसी रोक-टोक के दर्शन कर पा रहे हैं. उन्होंने मीडिया से कहा, ‘कई वर्षों बाद हमें बिना किसी बाधा के दर्शन करने का मौका मिला है. अदालत ने बहुत अच्छा फैसला दिया है. मैं अब यहां हर दिन पूजा करने आऊंगा.’

मुस्लिम पक्ष को नमाज पढ़ने पर लगाई गई रोक

वकील खरे ने कहा, ‘अदालत ने इस स्थल के स्वरूप को तय करते हुए माना कि ऐतिहासिक रूप से यहां देवी वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर था और इसका निर्माण भोज/परमार वंश के शासनकाल में हुआ था. इसी आधार पर हिंदू समुदाय को यहां पूजा का अधिकार दिया गया है. इसके अलावा ASI का वह पुराना आदेश भी संशोधित किया गया है, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार के दिन एक निश्चित समय तक नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी. हालांकि परिसर का नियंत्रण ASI के पास ही रहेगा.’

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सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकता है मुस्लिम पक्ष

इस बीच, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा विवादित परिसर को मंदिर घोषित किए जाने के कुछ ही घंटों बाद सुप्रीम कोर्ट में दो कैविएट याचिकाएं दाखिल की गई हैं. माना जा रहा है कि मुस्लिम पक्ष के लोग इस फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दे सकते हैं. मामले के अंतिम निपटारे तक राज्य प्रशासन ने धार्मिक गतिविधियों को लेकर साझा व्यवस्था लागू कर रखी थी, जबकि पूरा परिसर हिंदुस्तानीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की निगरानी में था. ASI ने ही इस परिसर का सर्वेक्षण भी कराया था.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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