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हैदराबाद के विधायक ने PM मोदी से की अपील: राम मंदिर की तरह भोजशाला मंदिर भी बनवाएं

Bhojshala Temple: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर 15 मई को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया. कोर्ट ने यह माना कि भोजशाला मां सरस्वती या मां वाग्देवी का है. हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार दिया और यह कहा कि यह परिसर राजा भोज का है. पूर्व भाजपा नेता टी राजा सिंह ने शुक्रवार को हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि एक सदी से अधिक लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार यह निर्णय हिंदू समुदाय के पक्ष में आया है. फैसले के महत्व पर न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि अयोध्या में राम मंदिर की तरह इस स्थल पर भी एक भव्य मंदिर’ का निर्माण कराया जाए.

हैदराबाद के गोशामहल से विधायक टी राजा सिंह ने कहा, ‘हिंदुस्तान को आजादी मिलने के बाद भी हिंदू संगठनों ने कई वर्षों तक संघर्ष किया. लगभग 124 साल बाद आज भोजशाला का मामला हिंदुओं के समर्थन में आया है और फैसला भी सुनाया गया है. पूरे मंदिर परिसर का 98 दिनों तक सर्वे किया गया.’ एमपी हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में इस परिसर के लिए पांच याचिकाएं और तीन इंटरवेंशन दाखिल की गई थीं. 15 मई को जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने यह फैसला सुनाया है.

फायरब्रांड नेता टी राजा सिंह ने इस कानूनी फैसले पर खुशी जताते हुए इसे श्रद्धालुओं के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया. उन्होंने कहा, ‘आज अदालत ने हिंदुओं के पक्ष में फैसला दिया है… मैं हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी से अनुरोध करना चाहता हूं कि जिस तरह आपने राम मंदिर बनवाया है, उसी तरह भोजशाला मंदिर का भी भव्य निर्माण कराया जाए. सिर्फ हिंदुस्तान ही नहीं, विदेशों से भी लोग वहां दर्शन करने आएंगे…’

यह भी पढ़ें:- कैसे हाईकोर्ट ने भोजशाला को मंदिर घोषित किया? नमाज पढ़ने के ऑर्डर को क्यों किया रद्द? 

हिंदू पक्ष के वकील क्या बोले?

हिंदू पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने अदालत के आदेश के बाद मीडिया से बात करते हुए इस फैसले को ऐतिहासिक बताया. जैन ने कहा, ‘इंदौर हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है… अदालत ने हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार दिया है और भोजशाला परिसर को राजा भोज का माना है.’ हाईकोर्ट ने भोजशाला परिसर के संरक्षण का अधिकार हिंदुस्तानीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को ही दिया है. हालांकि, अब यहां पर हिंदू पक्ष को यहां पूजा का अधिकार भी दे दिया है, जबकि नमाज पर पाबंदी लगा दी गई है.

वकील ने आगे बताया कि अदालत ने उस प्रतिमा की वापसी की मांग पर भी विचार किया, जो फिलहाल लंदन के एक संग्रहालय में रखी हुई है. उन्होंने कहा, ‘लंदन के संग्रहालय में रखी गई प्रतिमा की वापसी की हमारी मांग पर अदालत ने प्रशासन को इस अनुरोध पर विचार करने का निर्देश दिया है. अदालत ने यह भी कहा कि मुस्लिम पक्ष भी प्रशासन के सामने अपना पक्ष रख सकता है. इसके अलावा अदालत ने प्रशासन से मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक भूमि आवंटित करने पर भी विचार करने को कहा है.’

क्या था विवाद, कैसे सुलझा मामला? पूरी टाइमलाइन

1995 में पहली बार इस परिसर में हिंदुओं को मंगलवार को पूजा करने और मुस्लिमों को शुक्रवार को नमाज की इजाजत दी गई थी. लेकिन विवाद बढ़ने पर इसे रोक दिया गया. 2003 में इस व्यवस्था को फिर से लागू किया गया. मुस्लिम पक्ष भोजशाला को कमाल मौला की मस्जिद मानता है. मुस्लिम पक्ष को 1935 में धार रियासत की ओर से इस परिसर में शुक्रवार को नमाज पढ़ने की इजाजत दी गई थी. 1997 में फिर विवाद की स्थिति बनी, तो हिंदू पक्ष के पूजा के अधिकार को रोक दिया गया. हालांकि, इसी साल हिंदुओं के लिए फिर से पूजा का अधिकार बहाल कर दिया गया. इस बार वसंत पंचमी के दिन भी पूजा करने की इजाजत दी गई. 

हिंदू और मुस्लिम पक्ष के बीच विवाद की स्थिति 2013 और 2016 में बनी, जब वसंत पंचमी और शुक्रवार एक ही दिन पड़ा. प्रशासन को इसके लिए अलग से व्यवस्था बनानी पड़ी. 2022 में हिंदू पक्ष से याचिकाएं दायर की गई थीं. जिसके बाद कोर्ट ने वैज्ञानिक सर्वे का आदेश दिया था. 2024 में यहां पर 98 दिन तक सर्वे किया गया. हिंदू पक्ष के एक वकील मनीष गुप्ता के अनुसार, कोर्ट ने इस मामले पर 24 दिन तक लगातार सुनवाई करते हुए 12 मई अपना फैसला सुरक्षित रखा था और 15 मई को हिंदुओं के पक्ष में यह फैसला सुनाया है.

ये भी पढ़ें:- भोजशाला परिसर का 2003 का समझौता क्या था?

हिंदू पक्ष के वकील बोले- ‘अब वहां केवल पूजा होगी’

वहीं, दूसरे पक्ष के समाधान के प्रयास में हिंदू पक्ष के वकील जैन ने कहा कि अदालत ने मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक जमीन देने का सुझाव दिया है. उन्होंने आगे कहा, ‘अदालत ने हमें पूजा-अर्चना करने का अधिकार दिया है और प्रशासन को स्थल के प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी है. ASI का पहले वाला आदेश, जिसमें नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी, उसे पूरी तरह निरस्त कर दिया गया है. अब वहां केवल हिंदू पूजा ही होगी.’

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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