सुप्रीम कोर्ट ने अपने नवंबर 2025 के आदेश में बदलाव करने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि अस्पताल, स्कूल, कॉलेज, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने का फैसला पहले जैसा ही लागू रहेगा.
Supreme Court refuses to modify its November 2025 order to remove stray dogs from public institutions like hospitals, schools, colleges, bus stations, railway stations etc. pic.twitter.com/sG8H975iug
— ANI (@ANI) May 19, 2026
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा पशुओं पर पशु कल्याण बोर्ड की SOP को चुनौती देने वाली सभी याचिकाएं खारिज कर दीं. कोर्ट ने साफ कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को संभालने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में लगातार ढिलाई बरती है.
सम्मान के साथ जीने का मतलब सुप्रीम कोर्ट ने बताया
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ‘पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम’ देशभर में ठीक से लागू नहीं हो रहा है. कहीं फंड की कमी है, तो कहीं व्यवस्था कमजोर है, और अलग-अलग जगहों पर इसे अलग तरीके से चलाया जा रहा है. इससे समस्या बनी हुई है. कोर्ट ने कहा कि सम्मान के साथ जीने का हक मतलब सिर्फ जीना नहीं, बल्कि बिना डर के जीना भी है. इसमें कुत्तों के हमलों के डर से मुक्त होकर खुलकर और सुरक्षित तरीके से जीवन जीने का अधिकार भी शामिल है.
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