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जमशेदपुर : मुंह के कैंसर में 75% मामलों के पीछे गुटका-खैनी की लत, डॉक्टरों ने दी चेतावनी

जमशेदपुर से चंद्रशेखर की रिपोर्ट

Jamshedpur News : जमशेदपुर : तंबाकू, गुटका, खैनी और सिगरेट की बढ़ती लत युवाओं को गंभीर बीमारियों की ओर धकेल रही है. शहर के कैंसर विशेषज्ञों के अनुसार मुंह के कैंसर के अधिकांश मामलों के पीछे तंबाकू का सेवन प्रमुख कारण है. विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से इस आदत से दूर रहने और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने की अपील की है. ब्रह्मानंद नारायणा अस्पताल, तामोलिया के कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ अमित कुमार ने बताया कि वर्तमान में लगभग 75 प्रतिशत मुंह के कैंसर के मामले तंबाकू और गुटका सेवन से जुड़े हैं. इनमें युवाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है. अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले हर 100 कैंसर मरीजों में 30 से 40 मरीज 25 से 30 वर्ष आयु वर्ग के होते हैं. उन्होंने कहा कि कैंसर का नाम सुनकर मरीज तनाव में आ जाते हैं, जबकि बीमारी से लड़ने के लिए मानसिक रूप से मजबूत रहना जरूरी है. मुंह के कैंसर का इलाज अब विकिरण चिकित्सा पद्धति से प्रभावी ढंग से किया जा रहा है और शुरुआती चरण में मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं. 

एक साल में 136 लोगों पर कार्रवाई, 21,200 रुपये जुर्माना

जिला राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के तहत कोटपा अधिनियम-2003 के उल्लंघन पर लगातार कार्रवाई की जा रही है. पिछले एक वर्ष के दौरान सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान और तंबाकू सेवन करने वाले 136 लोगों पर धारा-4 के तहत कार्रवाई करते हुए 21,200 रुपये जुर्माना वसूला गया. सबसे अधिक 10 हजार रुपये का जुर्माना एमजीएम अस्पताल परिसर में वसूला गया. 

सदर अस्पताल का तंबाकू मुक्ति केंद्र बना सहारा

जिला तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल पदाधिकारी डॉ मृत्युंजय धाउड़िया ने बताया कि सदर अस्पताल परिसर स्थित तंबाकू मुक्ति केंद्र में पिछले एक वर्ष के दौरान 1,629 लोगों की काउंसेलिंग की गयी. इनमें 58 लोगों को नशा छोड़ने की दवा उपलब्ध कराई गई. सात लोग पूरी तरह तंबाकू की लत छोड़ने में सफल रहे. इसके अलावा, 10,619 लोगों की ओरल कैंसर जांच की गई, जिसमें पांच संदिग्ध मरीज मिले. विभाग की ओर से 74 प्रशासनी और निजी स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए गए. 

हर साल बढ़ रही कैंसर मरीजों की संख्या

मेहरबाई टाटा मेमोरियल अस्पताल के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं. वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच अस्पताल की ओपीडी में 1,01,589 कैंसर मरीज इलाज के लिए पहुंचे. अस्पताल की रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ स्नेहा झा के अनुसार, झारखंड में मुंह और गले के कैंसर के मरीजों की संख्या सबसे अधिक है, जिसके पीछे तंबाकू उत्पादों का बढ़ता सेवन प्रमुख कारण है. 

16 साल की उम्र में लगी लत, अब कैंसर से जंग

बालीगुमा निवासी सुखदेव कर्मकार (काल्पनिक नाम) की कहानी तंबाकू के दुष्परिणामों की बड़ी चेतावनी है. दोस्तों के साथ रहते हुए उन्हें 16 वर्ष की उम्र में गुटका और खैनी खाने की आदत लग गई. धीरे-धीरे सेवन बढ़कर प्रतिदिन आठ से दस पाउच तक पहुंच गया. कुछ समय बाद मुंह में घाव हुआ और जांच में कैंसर की पुष्टि हुई. आर्थिक रूप से कमजोर सुखदेव अब इलाज के लिए संघर्ष कर रहे हैं. उनका कहना है कि एक छोटी सी आदत ने पूरी जिंदगी को संकट में डाल दिया है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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