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इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदते समय सिर्फ फीचर्स पर मत जाएं, ये 5 छिपी हुई सच्चाइयां पहले जरूर जान लें

हिंदुस्तान में इलेक्ट्रिक स्कूटर का मार्केट 2026 तक काफी तेजी से बढ़ चुका है. कीमतें भी काफी फैल चुकी हैं. लगभग 80,000 रुपये से लेकर 1.5 लाख रुपये से भी ऊपर तक जाती हैं. देखने में इतने सारे ऑप्शन अच्छे लगते हैं, लेकिन इसी वजह से बैटरी क्वालिटी, असली रेंज और सर्विस का फर्क भी काफी बड़ा हो जाता है. ये सारी ऐसी चीजें हैं जो लोग खरीदते वक्त अक्सर इग्नोर कर देते हैं. अगर आप इस साल इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने का सोच रहे हैं, तो कुछ ऐसी बातें हैं जो बाद में आपको चौंका सकती हैं. आइए जानते हैं उन बातों को.

ब्रोशर में जो रेंज दी जाती है, असल में उतनी रेंज नहीं मिलती

हिंदुस्तान में जो भी इलेक्ट्रिक स्कूटर मिलता है, उसकी रेंज आमतौर पर ARAI के IDC टेस्ट से तय होती है. लेकिन ये टेस्ट असल रोड कंडीशन जैसा बिल्कुल नहीं होता. इसमें स्कूटर को लैब में कम स्पीड, बिना ट्रैफिक, बिना पिलियन और बिल्कुल सही मौसम में चलाया जाता है. असल जिंदगी में जब आप उसे गर्मी, ट्रैफिक और कभी-कभी पीछे बैठी सवारी के साथ चलाते हैं, तो रेंज काफी कम हो जाती है. मतलब अगर स्कूटर 120 km की रेंज बताता है, तो रोजमर्रा में आपको करीब 75 से 90 km ही मिलती है.

बैटरी वारंटी की शर्तें सभी में समान नहीं होतीं

अक्सर लोग ‘3 साल की बैटरी वारंटी’ सुनकर समझ लेते हैं कि अब सब कवर हो गया, लेकिन असल में कहानी थोड़ी अलग होती है. ज्यादातर कंपनियां सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट होने पर ही बैटरी कवर करती हैं. यानी अगर बैटरी जल्दी कमजोर हो जाए लेकिन पूरी तरह खराब न हो, तो आपको क्लेम नहीं मिलता. कुछ ब्रांड्स एक कैपेसिटी लिमिट रखते हैं, जैसे 70% बैटरी हेल्थ. लेकिन अगर आपकी बैटरी 2 साल में 70% से नीचे, मान लीजिए 68% पर आ जाए, तो भी टेक्निकल वजहों से क्लेम रिजेक्ट हो सकता है. इसलिए कार खरीदने से पहले सिर्फ वारंटी का नाम मत देखिए, बल्कि बैटरी वारंटी डॉक्यूमेंट जरूर मांगिए. उसे ध्यान से पढ़िए कि किन हालात में आपको कवर मिलेगा और किन में नहीं.

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आपका घर रातभर चार्जिंग के लिए शयद तैयार न हो

ये बात बहुत सारे लोगों को खरीदने के बाद समझ आती है. ज्यादातर इलेक्ट्रिक स्कूटर के साथ एक पोर्टेबल चार्जर मिलता है जो 15-amp वाले नॉर्मल सॉकेट में चलता है. लेकिन असली सवाल ये है कि आपका घर इसे रोजाना आराम से संभाल पाएगा या नहीं. ये पूरी तरह आपके घर की वायरिंग की लाइफ, बिजली विभाग से मिले लोड और आपकी सोसाइटी के नियमों पर डिपेंड करता है. खासकर टियर-2 शहरों की पुरानी अपार्टमेंट बिल्डिंग्स में अक्सर पुरानी वायरिंग या शेयर मीटरिंग होती है, जो रात भर एक्स्ट्रा लोड के लिए बनी ही नहीं होती.

कई स्कूटर चार्जर को सही अर्थिंग वाले सॉकेट की भी जरूरत होती है. अगर अर्थिंग सही नहीं है तो MCB ट्रिप हो सकता है या चार्जिंग बीच-बीच में रुक-रुक कर एरर देने लगती है. इसलिए स्कूटर खरीदने से पहले अपनी सोसाइटी से जरूर पूछ लें कि EV चार्जिंग की परमिशन है या नहीं. साथ ही ये भी कन्फर्म कर लें कि आपके घर में कौन सा सॉकेट चार्जर के लिए सही रहेगा.

आपके इलाके में कितने सर्विस सेंटर मौजूद हैं, यह जरूर चेक करें

इलेक्ट्रिक स्कूटर के सर्विस सेंटर अभी भी ज्यादातर बड़े शहरों (metros) और कुछ चुनिंदा शहरों तक ही सीमित हैं. अगर आप टियर-2 या टियर-3 शहर में रहते हैं, तो जरा ब्रांड की वेबसाइट खोलकर देखिए कि आपके घर के आसपास कितने सर्विस पॉइंट्स सच में मौजूद हैं. कई बार दूरी इतनी ज्यादा निकल आती है कि छोटी समस्या के लिए भी काफी परेशानी हो जाती है.

अगर कंपनी बंद हो जाए तो कनेक्टेड फीचर्स बंद हो सकते हैं

आज 2026 में लगभग हर इलेक्ट्रिक स्कूटर में स्मार्टफोन कनेक्टिविटी मिलती है. जैसे ऐप से लॉक/अनलॉक करना, GPS ट्रैकिंग, रिमोट डायग्नोस्टिक्स और राइड डेटा देखना. लेकिन ये सारी सुविधाएं सिर्फ तब तक काम करती हैं जब तक कंपनी अपने सर्वर चालू रखे और समय-समय पर सॉफ्टवेयर अपडेट देती रहे.

2021 से 2023 के बीच लॉन्च हुई कई EV स्टार्टअप कंपनियां बाद में बंद हो गईं या उन्होंने अपने ऐप अपडेट करना छोड़ दिया. नतीजा ये हुआ कि कई ग्राहकों के स्कूटर में कनेक्टेड फीचर्स काम करना बंद हो गए. सॉफ्टवेयर की दिक्कतें भी ठीक नहीं हो पाईं. इसलिए स्कूटर खरीदने से पहले ये जरूर देखना चाहिए कि ब्रांड कितने समय से बाजार में है, उनके ऐप का आखिरी अपडेट कब आया था और अगर मॉडल बंद हो जाए तो कंपनी सर्विस और सपोर्ट कितनी देर तक देगी.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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