रांची से आनंद मोहन की रिपोर्ट
Parimal Nathwani Nomination: झारखंड में राज्यसभा चुनाव के दौरान दो सीटों पर होने वाले चुनाव में हाईवोल्टेज ड्रामा जारी है. निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी के नामांकन पत्र में तकनीकी खामियों को लेकर कांग्रेस की ओर से आपत्ति जाहिर की गई. इसके बाद परिमल नाथवानी की ओर से बुधवार को रिटर्निंग ऑफिसर के पास कांग्रेस की आपत्ति के बाद जवाब दाखिल किया गया. इसके बाद उनके नामांकन को वैध करार दिया गया है. परिमल नाथवानी के उम्मीदवारी पर कांग्रेस के विधायकों का विरोध अब भी जारी है. समाचार है कि झारखंड कांग्रेस के विधायक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात करने के लिए दिल्ली जाएंगे.
कांग्रेस के विधायकों का विधानसभा में हंगामा
निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नथवानी के नामांकन पत्र को लेकर उठे विवाद के बीच बुधवार को विधानसभा परिसर में कांग्रेस और सत्ता पक्ष के नेताओं ने जमकर हंगामा किया. कांग्रेस की ओर से अपना पक्ष रखने के लिए दिल्ली से पहुंचे वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद को रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा सुनवाई में शामिल होने की अनुमति नहीं मिलने के बाद विवाद और बढ़ गया.
सलमान खुर्शी को बहस करने की अनुमति नहीं
राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्रों की जांच के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर रंजीत कुमार सुनवाई कर रहे थे. परिमल नथवानी की ओर से अधिवक्ताओं ने सुबह करीब 11 बजे से अपना पक्ष रखना शुरू किया. दूसरी ओर, कांग्रेस विधायक प्रणव झा की ओर से आपत्ति और तर्क रखने के लिए वरिष्ठ कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद विशेष रूप से दिल्ली से रांची पहुंचे थे. सलमान खुर्शीद दोपहर करीब 12.40 बजे विधानसभा पहुंचे, लेकिन रिटर्निंग ऑफिसर ने उन्हें सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखने की अनुमति नहीं दी. इस फैसले के बाद कांग्रेस नेताओं और मंत्रियों में नाराजगी फैल गई.
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कांग्रेस नेताओं ने प्रक्रिया पर उठाए सवाल
सलमान खुर्शीद को विधानसभा में सुनवाई के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर की ओर से बहस करने की अनुमति नहीं मिलने के बाद विधानसभा परिसर में कांग्रेस नेताओं का गुस्सा खुलकर सामने आया. झारखंड प्रशासन में शामिल कांग्रेस कोटे की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, दीपिका पांडेय सिंह, राधाकृष्ण किशोर समेत अन्य नेताओं ने रिटर्निंग ऑफिसर के कार्यालय के बाहर विरोध जताया और जमकर हंगामा किया. कांग्रेस नेताओं का आरोप था कि मामले में नया शपथ पत्र स्वीकार किया गया, लेकिन उनकी ओर से आए वरिष्ठ अधिवक्ता को सुनवाई में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई. उन्होंने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे पक्षपातपूर्ण बताया.
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