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5 बार फेल, टूटने लगी थीं उम्मीदें, पति बोले- मैं हूं, तुम पढ़ाई करो, छठे प्रयास में BPSC अधिकारी बनीं बिहार की बेटी की कहानी

BPSC Success Story: कहते हैं कि सफलता की सबसे मजबूत नींव असफलताओं पर ही खड़ी होती है. अररिया की कोमल साह की कहानी इस बात को सच साबित करती है. 70वीं बीपीएससी परीक्षा के परिणाम में जहां हजारों अभ्यर्थियों के सपने पूरे हुए, वहीं कोमल की सफलता ने उन युवाओं को नई उम्मीद दी है जो बार-बार की असफलता से निराश हो जाते हैं.

पांच बार नाकामी झेलने के बाद आखिरकार छठे प्रयास में कोमल साह ने सफलता हासिल की. उनका चयन राजस्व अधिकारी (RO) पद के लिए हुआ है. उन्होंने ओवरऑल 1720वीं और आरओ कैटेगरी में 217वीं रैंक हासिल की है.

जोगबनी की बेटी बनी राजस्व अधिकारी

कोमल साह अररिया जिले के जोगबनी नगर परिषद की रहने वाली हैं. उनके पिता मिथिलेश साह और माता कृष्णा देवी हैं. उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई सैन फ्रांसिस्को इंग्लिश स्कूल, जोगबनी से की. इसके बाद सरस्वती विद्या मंदिर, जोगबनी से मैट्रिक की परीक्षा पास की. ग्रेजुएशन फारबिसगंज कॉलेज से और पोस्ट ग्रेजुएशन पूर्णिया विश्वविद्यालय से पूरा किया. आज उनकी सफलता से जोगबनी से लेकर फारबिसगंज तक खुशी का माहौल है.

7 साल लंबा रहा संघर्ष का सफर

कोमल ने वर्ष 2019 में बीपीएससी की तैयारी शुरू की थी. लेकिन सफलता उन्हें 2026 में मिली. यानी पूरे सात साल के लंबे संघर्ष के बाद. उनका सफर आसान नहीं था.

65वीं और 66वीं बीपीएससी में वह प्रारंभिक परीक्षा भी पास नहीं कर सकीं. 67वीं में प्री निकला, लेकिन मेन्स में रुक गईं. 68वीं में फिर प्री में असफलता मिली. 69वीं में एक बार फिर प्री क्लियर हुआ, लेकिन मेन्स में सफलता नहीं मिली.

लगातार झटकों के बावजूद उन्होंने तैयारी जारी रखी. आखिरकार 70वीं बीपीएससी में पहली बार मेन्स और इंटरव्यू दोनों क्लियर किए और अधिकारी बनने का सपना पूरा कर लिया.

शादी के बाद भी नहीं रुकी तैयारी

कोमल की शादी इसी वर्ष हुई है. उनका ससुराल अररिया जिले के फारबिसगंज प्रखंड के अम्हारा गांव में है. वह बताती हैं कि शादी के बाद भी उन्हें परिवार का पूरा सहयोग मिला. ससुर दिलीप कुमार साह और सास दौलती देवी ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया. परिवार ने कभी पढ़ाई में बाधा नहीं बनने दी।

पति बने सबसे बड़े सहारा

कोमल अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपने पति विकास कुमार को देती हैं. उनके अनुसार, तैयारी के दौरान पति ने हर कदम पर साथ दिया. चाहे फॉर्म भरना हो, दस्तावेज तैयार करना हो या हिंदी और इंग्लिश के अनुवाद में मदद करनी हो, उन्होंने हर जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली. इससे कोमल को केवल पढ़ाई पर ध्यान देने का मौका मिला.

असफलता अंत नहीं, सफलता की तैयारी है

कोमल का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं का सफर लंबा होता है. इसमें धैर्य, अनुशासन और लगातार मेहनत की जरूरत होती है. वह कहती हैं कि असफलता से घबराने के बजाय उससे सीखना चाहिए. अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत जारी रहे, तो सफलता जरूर मिलती है.

युवाओं के लिए बनीं मिसाल

पांच असफलताओं के बाद भी हार न मानने वाली कोमल साह आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं. उनकी कहानी बताती है कि मंजिल उन्हीं को मिलती है जो मुश्किल रास्तों पर भी चलना नहीं छोड़ते. सात साल का संघर्ष, परिवार का भरोसा और खुद पर विश्वास… इन्हीं तीन चीजों ने जोगबनी की बेटी को राजस्व अधिकारी बना दिया.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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