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शनि प्रदोष व्रत पर करें इस कथा का पाठ, शिव जी के आशीर्वाद से सभी दुख होंगे दूर

Shani Pradosh Vrat: हर महीने की त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत रखा जाता है. यह व्रत जिस दिन पड़ता है, उस दिन के आधार पर इसका नाम रखा जाता है. साल 2026 में ज्येष्ठ माह में यह व्रत 27 जून, शनिवार के दिन रखा जाएगा, जिस कारण इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जा रहा है. मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और सुख-समृद्धि आती है. विशेष रूप से संतान प्राप्ति और जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए इस व्रत का बहुत महत्व है.

पौराणिक कथा

प्राचीन समय की बात है, एक नगर में एक बहुत अमीर सेठ रहते थे. उनके पास धन-दौलत, ऐशो-आराम और हर तरह की सुख-सुविधाएँ थीं. लेकिन इतनी खुशियों के बाद भी सेठ और उनकी पत्नी (सेठानी) हमेशा उदास रहते थे. उनकी उदासी का कारण था कि उनके कोई संतान नहीं थी. संतान न होने के दुख से परेशान होकर एक दिन सेठजी ने बड़ा फैसला लिया. उन्होंने अपना पूरा कारोबार अपने वफादार नौकरों को सौंप दिया और खुद पत्नी के साथ तीर्थयात्रा पर निकल पड़े.

साधु से मुलाकात

जब सेठ और सेठानी अपने नगर से बाहर निकले, तो रास्ते में उन्हें एक पहुंचे हुए साधु दिखाई दिए, जो गहरी तपस्या में लीन थे. सेठजी के मन में विचार आया कि आगे की यात्रा शुरू करने से पहले क्यों न इन महात्मा का आशीर्वाद ले लिया जाए. दोनों वहीं शांत भाव से साधु के पास बैठ गए और उनके ध्यान से जागने का इंतजार करने लगे. जब साधु ने अपनी आँखें खोलीं, तो उन्होंने देखा कि यह दंपति काफी समय से बड़ी श्रद्धा के साथ आशीर्वाद की प्रतीक्षा कर रहा है. अपनी दिव्य दृष्टि से साधु ने सेठ-सेठानी के मन का दुख तुरंत भाँप लिया.

साधु ने मुस्कुराते हुए कहा, “मैं तुम्हारा दुख जानता हूँ. तुम दोनों संतान सुख से वंचित हो. यदि तुम इस दुख से मुक्ति चाहते हो, तो नियमपूर्वक शनि प्रदोष व्रत करो. इससे भगवान भोलेनाथ प्रसन्न होंगे और तुम्हें संतान का सुख अवश्य मिलेगा.” इसके बाद साधु ने सेठ-सेठानी को प्रदोष व्रत की पूरी विधि समझाई और भगवान शंकर की आराधना के लिए एक विशेष वंदना (मंत्र) भी बताया.

घर में गूंजी किलकारी

साधु का आशीर्वाद और उपाय पाकर सेठ-सेठानी बहुत खुश हुए. उन्होंने अपनी तीर्थयात्रा पूरी की और घर लौट आए. साधु के कहे अनुसार, दोनों ने मिलकर पूरी श्रद्धा और नियम के साथ शनि प्रदोष व्रत रखना शुरू किया. इस व्रत के चमत्कारी प्रभाव से भगवान शिव और शनि देव अत्यंत प्रसन्न हुए. कुछ ही समय बाद सेठानी ने एक बहुत ही सुंदर और स्वस्थ पुत्र को जन्म दिया. जिस घर में कल तक सन्नाटा था, वहाँ शिशु की किलकारियाँ गूंज उठीं. सेठ-सेठानी का जीवन हमेशा-हमेशा के लिए खुशियों से भर गया.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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