Israel’s Deputy Foreign Minister : इजराइल की डिप्टी विदेश मंत्री शैरेन हैस्केल ने अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता को लेकर ईरान के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखकर इस वार्ता से ज्यादा उम्मीद नहीं है. एएनआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, हैस्केल ने ईरान को एक हिंसक और आक्रामक शासन वाला देश बताया है. उन्होंने कहा कि ईरान पर आसानी से भरोसा नहीं किया जा सकता है.
ईरान पर पहले भी लगा है क्षेत्र में तनाव बढ़ाने का आरोप
इजराइल की ओर से ईरान पर पश्चिम एशिया में अस्थिरता फैलाने, हथियारबंद संगठनों को समर्थन देने और अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के आरोप लगाता रहा है. इसी वजह से दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम और उससे जुड़े तनावों को लेकर करीब चार दशकों (40 साल) से अधिक समय से संघर्ष चल रहे हैं, जिसकी शुरुआत 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद हुई थी. अभी अप्रैल 2026 में हुए संघर्ष विराम के बाद, जून 2026 (करीब 2 महीने बाद) यह संघर्ष-विराम टूट गया. इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव और हमले की घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर चिंता का सबब बना हुआ है.
#WATCH | Tel Aviv, Israel | “I don’t have a lot of optimism with what I see…Iran is a violent and aggressive regime. India should be alarmed as well,” says Israel’s Deputy Foreign Minister Sharren Haskel, over the ongoing US-Iran negotiations. pic.twitter.com/T3gWQ4IyiC
— ANI (@ANI) July 1, 2026
हिंदुस्तान का संतुलित रुख, दोनों देशों से बनाए रखे हैं संबंध
हिंदुस्तान के ईरान और इज़राइल दोनों के साथ महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक संबंध हैं. एक ओर हिंदुस्तान इजराइल के साथ रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ा रहा है, वहीं ईरान हिंदुस्तान की ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाओं के लिए भी अहम साझेदार है. ऐसे में हिंदुस्तान अब तक पश्चिम एशिया के मुद्दों पर संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति अपनाता रहा है.
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US-ईरान वार्ता पर दुनिया की नजर
अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत का उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव कम करना और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े विवादों का समाधान तलाशना है. हालांकि इजराइल लगातार इस वार्ता पर संदेह जता रहा है. इजराइली डिप्टी विदेश मंत्री शैरेन हैस्केल ताजा बयान भी इसी रुख को दोहराता है, जिसमें उन्होंने कहा कि केवल बातचीत नहीं, बल्कि ईरान के व्यवहार में वास्तविक बदलाव ही भरोसे की असली कसौटी होगा.
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