Parents Loneliness: बच्चों का बड़ा होना और पढ़ाई या नौकरी के लिए घर से बाहर जाना हर परिवार के जीवन का एक बड़ा बदलाव होता है. एक तरफ शिशु अपने सपनों की ओर बढ़ते हैं, तो दूसरी तरफ माता-पिता के लिए घर पहले जैसा नहीं रहता. उनकी दिनचर्या बदल जाती है और कई बार अकेलापन भी महसूस होने लगता है. ऐसे समय में जरूरी है कि इस बदलाव को सकारात्मक तरीके से स्वीकार किया जाए.
क्यों महसूस होता है अकेलापन?
जब शिशु घर पर होते हैं तो पूरा दिन उनकी पढ़ाई, खाने-पीने और छोटी-बड़ी जरूरतों में बीत जाता है. लेकिन उनके बाहर जाने के बाद अचानक घर शांत हो जाता है. खासकर मां को यह बदलाव ज्यादा महसूस होता है. कई माता-पिता हर समय बच्चों की चिंता करते रहते हैं और उन्हें लगता है कि अब उनकी दिनचर्या अधूरी हो गई है.
क्या है एम्प्टी नेस्ट सिंड्रोम?
मनोवैज्ञानिक सलाहकार संजना श्रॉफ बताती हैं कि बच्चों के घर से दूर जाने के बाद माता-पिता जिस खालीपन और उदासी का अनुभव करते हैं, उसे एम्प्टी नेस्ट सिंड्रोम कहा जाता है. यह कोई बीमारी नहीं, बल्कि जीवन का एक सामान्य भावनात्मक बदलाव है. अगर इस दौरान खुद को व्यस्त रखा जाए और सकारात्मक सोच अपनाई जाए, तो इस दौर से आसानी से बाहर निकला जा सकता है.
अपने लिए भी समय निकालें
बच्चों की परवरिश में कई साल बीत जाते हैं और इस दौरान माता-पिता अक्सर अपने शौक भूल जाते हैं. अब समय है कि पुराने शौक फिर से शुरू किए जाएं. किताबें पढ़ना, योग करना, बागवानी, सिलाई-कढ़ाई, संगीत सुनना या नई चीजें सीखना मन को खुश रख सकता है.
बच्चों से जुड़े रहें, लेकिन जरूरत से ज्यादा चिंता न करें
आज मोबाइल और वीडियो कॉल की मदद से बच्चों से रोज बात करना आसान है. उनसे नियमित संपर्क रखें, लेकिन हर समय उनकी चिंता करने या बार-बार फोन करने से बचें. बच्चों को भी अपने नए माहौल में ढलने के लिए समय और भरोसे की जरूरत होती है.
पति-पत्नी के लिए भी है नया मौका
बच्चों के बड़े होने के बाद पति-पत्नी के पास एक-दूसरे के साथ समय बिताने का अच्छा अवसर होता है. साथ में घूमना, सुबह की सैर करना, नई जगहों की यात्रा करना या किसी नई हॉबी को अपनाना रिश्ते को और मजबूत बना सकता है.
सामाजिक गतिविधियों से बढ़ेगी खुशी
अगर खालीपन ज्यादा महसूस हो रहा है तो दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलें. किसी सामाजिक संस्था, क्लब या धार्मिक गतिविधि से जुड़ें. इससे नए लोगों से मिलने का मौका मिलेगा और मन भी खुश रहेगा.
बदलाव को खुशी से अपनाएं
हर माता-पिता चाहते हैं कि उनके शिशु जीवन में आगे बढ़ें. ऐसे में उनका घर से दूर जाना भी उसी सफर का हिस्सा है. बच्चों की सफलता पर गर्व करें और अपने जीवन को भी नई दिशा दें. जब माता-पिता खुद खुश और आत्मनिर्भर रहते हैं, तो बच्चों को भी सुकून मिलता है कि उनके अपने सुरक्षित और खुश हैं.
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