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बच्चे को गुस्से पर काबू पाना सिखाएं, पैरेंट्स के लिए ये टिप्स हैं बेहद काम के

How to Manage Child Anger: बच्चों का गुस्सा करना एक सामान्य बात है. छोटी-छोटी बातों पर रोना, चिल्लाना, चीजें फेंकना या जिद करना अक्सर उनकी भावनाओं को ठीक से व्यक्त न कर पाने का तरीका होता है. लेकिन अगर समय रहते बच्चों को अपने गुस्से को संभालना नहीं सिखाया जाए, तो आगे चलकर यह आदत उनके व्यवहार और रिश्तों पर असर डाल सकती है. ऐसे में माता-पिता की भूमिका सबसे अहम होती है. प्यार, धैर्य और सही तरीके से समझाकर शिशु को गुस्सा कंट्रोल करना सिखाया जा सकता है. 

How to Manage Child Anger: सबसे पहले गुस्से की वजह समझें

जब बच्चा गुस्सा करे, तो उसे डांटने या चुप कराने की बजाय यह जानने की कोशिश करें कि आखिर वह नाराज क्यों है. कई बार भूख, थकान, नींद पूरी न होना या अपनी बात न कह पाना भी गुस्से की वजह बन जाता है. कारण समझने के बाद समस्या का हल निकालना आसान हो जाता है. 

शिशु को अपनी भावनाएं बताना सिखाएं

शिशु को समझाएं कि गुस्सा आना गलत नहीं है, लेकिन उसे सही तरीके से जाहिर करना जरूरी है. उसे बोलना सिखाएं कि “मुझे गुस्सा आ रहा है” या “मुझे यह बात पसंद नहीं आई.” जब बच्चा अपनी भावनाएं शब्दों में व्यक्त करना सीखता है, तो उसका गुस्सा धीरे-धीरे कम होने लगता है. 

How to Manage Child Anger: खुद बनें अच्छे उदाहरण

शिशु वही सीखते हैं जो अपने माता-पिता को करते हुए देखते हैं. अगर घर में हर छोटी बात पर चिल्लाने या गुस्सा करने की आदत होगी, तो बच्चा भी वही अपनाएगा. इसलिए कोशिश करें कि किसी भी परिस्थिति में शांत रहकर बात करें. आपका व्यवहार ही शिशु के लिए सबसे बड़ी सीख है. 

गहरी सांस लेने की आदत डालें

जब शिशु को गुस्सा आए, तो उसे धीरे-धीरे गहरी सांस लेने के लिए कहें. आप इसे स्पोर्ट्स की तरह भी सिखा सकते हैं. जैसे 5 तक गिनते हुए सांस अंदर लें और 5 तक गिनते हुए बाहर छोड़ें. इससे बच्चा शांत महसूस करेगा और उसका ध्यान गुस्से से हटेगा. 

गुस्से में तुरंत सजा न दें

अगर बच्चा बहुत गुस्से में है, तो उसी समय उसे डांटना या सजा देना सही तरीका नहीं है. पहले उसे थोड़ा शांत होने का समय दें. जब उसका गुस्सा कम हो जाए, तब प्यार से समझाएं कि उसका व्यवहार क्यों गलत था और अगली बार उसे क्या करना चाहिए. 

शिशु की अच्छी आदतों की तारीफ करें

जब भी बच्चा बिना गुस्सा किए अपनी बात समझाए या किसी मुश्किल स्थिति को शांत होकर संभाले, तो उसकी तारीफ जरूर करें. आपकी सराहना शिशु का आत्मविश्वास बढ़ाती है और वह दोबारा भी वैसा ही व्यवहार करने की कोशिश करता है. 

स्क्रीन टाइम और रूटीन पर रखें ध्यान

ज्यादा मोबाइल, टीवी या वीडियो गेम भी कई बार बच्चों के चिड़चिड़ेपन की वजह बन सकते हैं. इसलिए स्क्रीन टाइम सीमित रखें. साथ ही, शिशु की नींद, स्पोर्ट्सकूद और खाने-पीने का समय नियमित रखें. अच्छी दिनचर्या शिशु के मूड को बेहतर बनाए रखने में मदद करती है. 

यह भी पढ़ें: क्या आपका बच्चा प्लेट में खाना छोड़ देता है? इन तरीकों से सिखाएं रोटी-चावल की अहमियत

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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