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जामताड़ा के सदर अस्पताल में डॉक्टरों की हड़ताल, बिना इलाज के गर्भवती को बैरंग लौटाने का आरोप

Jamtara News: झारखंड के जामताड़ा सदर अस्पताल में गुरुवार को एक गर्भवती स्त्री की मौत के बाद उत्पन्न विवाद शुक्रवार को और गहरा गया. अस्पताल में हुई तोड़फोड़ और चिकित्सकों के साथ अभद्र व्यवहार के विरोध में डॉक्टरों ने कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया. झारखंड मेडिकल एसोसिएशन के नेतृत्व में शुरू हुई हड़ताल को चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ का भी समर्थन मिला. इसके चलते सदर अस्पताल की ओपीडी सेवाएं पूरी तरह ठप रहीं, जबकि इमरजेंसी सेवाओं का संचालन जारी रखा गया. हड़ताल के कारण इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा.

प्रसूता की मौत के बाद अस्पताल में हुआ था हंगामा

जानकारी के अनुसार गुरुवार को शहर के प्रशासनबांध निवासी एक प्रसूता की इलाज के दौरान मौत हो गई थी. घटना के बाद परिजनों ने चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया. आक्रोशित लोगों ने अस्पताल में तोड़फोड़ की और प्रशासनी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया. इस दौरान चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार किए जाने की भी बात सामने आई. घटना के बाद अस्पताल का माहौल तनावपूर्ण हो गया, जिसके विरोध में डॉक्टरों ने अगले दिन कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया.

आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े चिकित्सक

कार्य बहिष्कार पर बैठे चिकित्सकों ने अस्पताल में तोड़फोड़ करने वालों की पहचान कर उनकी तत्काल गिरफ्तारी की मांग की. साथ ही अस्पताल परिसर में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई. सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ. मिक्की माझी ने कहा कि भय के माहौल में डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी अपना दायित्व नहीं निभा सकते. जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए जाते, तब तक सामान्य माहौल बहाल होना मुश्किल है. वहीं डॉ. अशोक चौधरी ने कहा कि डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ इस तरह की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो.

हड़ताल से मरीजों की बढ़ी परेशानी

डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार का सबसे अधिक असर इलाज के लिए आने वाले मरीजों पर पड़ा. ओपीडी बंद रहने के कारण दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे लोगों को बिना इलाज लौटना पड़ा. कई मरीज निजी अस्पतालों की ओर जाने को मजबूर हुए. अस्पताल परिसर में दिनभर मरीजों और उनके परिजनों की भीड़ लगी रही, लेकिन नियमित चिकित्सा सेवाएं बाधित रहने से लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली.

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गर्भवती को भर्ती नहीं करने का आरोप

शुक्रवार सुबह नारायणपुर थाना क्षेत्र के मोहनपुर से प्रसव पीड़ा से पीड़ित एक गर्भवती स्त्री को एंबुलेंस से सदर अस्पताल लाया गया. परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों की हड़ताल का हवाला देते हुए स्त्री को भर्ती नहीं किया गया और दूसरे अस्पताल जाने की सलाह देकर वापस भेज दिया गया. स्त्री के पति और साथ आई सहिया ने बताया कि वे सुरक्षित प्रसव की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन इलाज नहीं मिलने से निराश होकर लौटना पड़ा. हालांकि अस्पताल प्रशासन की ओर से इस आरोप पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. फिलहाल डॉक्टरों का कार्य बहिष्कार जारी है और मरीजों की परेशानियां भी लगातार बढ़ रही हैं.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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