20 जुलाई से शुरू हुए संसद के मानसून सत्र में अब तक पांच दिन हंगामे की भेंट चढ़ चुके हैं. NEET और अन्य परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के मुद्दे पर विपक्ष लगातार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा था. सोमवार (27 जुलाई) को सत्र का छठा दिन है और सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चल पाएगी? क्योंकि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा अब हो चुका है.
कांग्रेस समेत विपक्षी दलों का आरोप है कि प्रशासन छात्रों के भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दे पर जवाब देने से बच रही है. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी लगातार परीक्षा व्यवस्था में सुधार और जिम्मेदारी तय करने की मांग उठा रहे हैं. उनका कहना है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में प्रशासन को जवाब देना होगा. वहीं, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे भी इस मुद्दे पर प्रशासन को घेरते रहे. खरगे का कहना है कि छात्रों के साथ अन्याय हुआ है और प्रशासन को इस मामले में जवाबदेही तय करनी चाहिए.
23 जुलाई से 25 जुलाई के बीच हुए ये 3 बड़े घटनाक्रम
1. NEET पेपर लीक और देशभर में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जुलाई को एक ऐलान किया. उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए कहा कि पेपर लीक करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा. प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के युवाओं का भविष्य और उनके हित प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता है. पीएम मोदी ने बताया कि पेपर लीक जैसे मामलों में शामिल लोगों को जल्द सजा दिलाने के लिए प्रशासन फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की दिशा में काम करेगी, ताकि दोषियों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई हो सके.
2. 24 जुलाई को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रश्नपत्र लीक के मामलों पर रोक लगाने के लिए एक नए कानून के मसौदे को मंजूरी दे दी. इस प्रस्तावित कानून में पेपर लीक करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है. दोषी पाए जाने पर उन्हें जेल की सजा और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है. मसौदे में पेपर लीक से जुड़े मामलों की जल्द सुनवाई और निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का भी प्रावधान किया गया है. इसका उद्देश्य परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई करना और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करना है.
3. 25 जुलाई की दोपहर अचानक समाचार आई कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार दोपहर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने इस्तीफे की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि पिछले 10 दिनों में हुए घटनाक्रम से उनका मन “बेहद दुखी” है और यह फैसला उनके लिए किसी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का मुद्दा नहीं है. प्रधान ने कहा कि जंतर-मंतर और देश के अलग-अलग हिस्सों में बनी स्थिति का कोई गलत फायदा न उठा सके, देश की एकता बनी रहे और छात्रों का भविष्य प्रभावित न हो, इसी सोच के साथ उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा भेजा है. उन्होंने कहा कि देश के शिशु अपना समय पढ़ाई और करियर बनाने में लगा सकें, यही उनकी प्राथमिकता रही है.
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़े थे CJP कार्यकर्ता
नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) और अन्य परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर हुए आंदोलन का नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने किया. यह संगठन मई में सोशल मीडिया पर मजाक और तंज के तौर पर शुरू हुआ था और जून में दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना शुरू किया. धीरे-धीरे इस आंदोलन को देशभर के छात्रों का समर्थन मिलने लगा. CJP की तीन प्रमुख मांगें थीं, जिनमें सबसे अहम मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी. यही मांग आंदोलन का मुख्य मुद्दा बन गई थी. इस मांग का साथ विपक्ष के नेताओं ने भी दिया था.
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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष लगातार प्रशासन पर हमलावर था. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी कहा था कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद ही सदन में इस मुद्दे पर चर्चा संभव हो पाएगी. अब धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सबकी नजर विपक्ष के अगले कदम पर है. सवाल यह है कि क्या विपक्ष संसद की कार्यवाही चलने देगा या फिर अपनी अन्य मांगों को लेकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा जारी रखेगा?
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