क्या यूं ही तुम्हें मारा गया है? बदमिजाज, बदहवास थे वो लोग जिन्होंने तुम्हारे ख़िलाफ नारे लगाए? नहीं. वो होश में थे. उन्होंने तुम्हारी सत्ता को नकार दिया. तुम मजबूर थे अपनी माइक से लोगो-आईडी निकालने के लिए. अपने ब्रांड का नाम छिपाने के लिए. नहीं करते ये शिशु तुम पर भरोसा.
रोना मत रोओ, तुम्हारी हस्ती खतरे में है दोस्त जिस मास ऑडियंस की शेखी तुम बघारते थे, मुंह पर पानी मारो, वो मास तुम्हारी मांस खिंचने को तैयार है. कोविड से किसान आंदोलन तक, तुम जनता की आवाज़ नहीं बने.
दलीलें, मिसालें तो खूब हैं. पहले भी सत्ता और मीडिया का संबंध ऐसा ही था. जब जिसकी गद्दी, वहां मधुमक्खी का छत्ता, मक्खियां वहीं भिनभिनाती हैं.
पर क्या खूब कही एक लड़के ने. वो पीढ़ी गई साहब जब सुबह से दोपहर, दोपहर से शाम एसएसपी ऑफिस की चौखट तकती रहती थी. खिड़की पर लगे पर्दे खिसका कर देखने का दुस्साहस नहीं करती थी. अब आपका जिनसे पाला है, वो आंसू-गैस के बुलेट की व्यवस्था है कि नहीं एसएसपी साहब से ही पूछ लेते हैं.
जिस देश में तुम जी रहे थे, वहां सिपाही देखकर किवाड़ सटा दिए जाते थे. जिस देश में तुम्हें रहना है, वहां के शिशु पुलिस देखकर कहते हैं, अंकल- vaate gunhanghayiyan
फ़र्क़ इतना है कि शास्त्रार्थ करने बैठ गए तो vaate gunhanghayiyan कोई मीम, कार्टून, मसखराबाज़ी नहीं, भगवदगीता के अध्याय 14 (गुणत्रयविभाग योग) का श्लोक 19 है.
नान्यं गुणेभ्यः कर्तारं यदा द्रष्टानुपश्यति। गुणेभ्यश्च परं वेत्ति मद्भावं सोऽधिगच्छति॥
इसका ठेठ मतलब है- हमसे बचके रहना गुरु. वरना बेआबरू करके कूचे से निकाल देंगे.
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