Bhojpur Two Youths Dies In Ladakh landslide: लेह-लद्दाख की खूबसूरत वादियों में घूमने और जिंदगी के सुनहरे सपने देखने निकले भोजपुर के दो होनहार युवकों की यात्रा मंगलवार को खारदुंगला दर्रे के पास हुए भूस्खलन के साथ हमेशा के लिए थम गयी. एक ही बाइक पर सवार अभिजीत आनंद और सोनू कुमार पहाड़ से गिरे मलबे और भारी पत्थरों की चपेट में आ गये. हादसे में दोनों की मौके पर ही मौत हो गयी. एक तरफ अभिजीत कंप्यूटर साइंस के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाने की तैयारी कर रहा था, तो दूसरी ओर सोनू का सपना सिविल सर्विस में जाने का था. परिवार को उम्मीद थी कि दोनों पढ़-लिखकर अपने सपनों को पूरा करेंगे, लेकिन लद्दाख की एक यात्रा ने दो परिवारों की जिंदगी में ऐसा खालीपन छोड़ दिया, जिसे भर पाना आसान नहीं होगा.
दस दोस्तों ने साथ शुरू की थी लद्दाख यात्रा
अभिजीत और सोनू अकेले लद्दाख घूमने नहीं गये थे. उनके साथ कुल 10 युवकों का ग्रुप था. इनमें चार युवक बिहिया के रहने वाले थे, जबकि छह युवक दिल्ली से इस यात्रा में शामिल हुए थे. सभी दोस्तों ने पहले जम्मू पहुंचने की योजना बनाई. जम्मू पहुंचने के बाद पांच बाइक किराये पर ली गयीं और पूरा ग्रुप बाइक से लेह-लद्दाख की ओर रवाना हुआ.
दोस्तों के लिए यह यात्रा लंबे समय से बनायी गयी योजना का हिस्सा थी. पहाड़, बर्फीली चोटियां, ऊंचे दर्रे और लद्दाख की प्राकृतिक सुंदरता को करीब से देखने का उत्साह सभी के बीच था. यात्रा के दौरान युवकों ने कई जगहों पर तस्वीरें भी खींचीं और यादें संजोयीं. उन्हें क्या पता था कि यही यात्रा उनके दो साथियों की जिंदगी की आखिरी यात्रा बन जाएगी.
चार बाइकों पर सवार आठ युवक बच गये
मंगलवार को जब पूरा ग्रुप खारदुंगला दर्रे के पास से गुजर रहा था, तभी अचानक पहाड़ से भूस्खलन हुआ. देखते ही देखते भारी मलबा और पत्थर सड़क की ओर आ गिरे. इस दौरान चार बाइकों पर सवार आठ युवक किसी तरह सुरक्षित बच गये, लेकिन एक बाइक पर सवार अभिजीत और सोनू मलबे की चपेट में आ गये.
हादसा इतना अचानक हुआ कि दोनों को संभलने या बचने का मौका तक नहीं मिला. भूस्खलन के मलबे और भारी पत्थरों की चपेट में आने से दोनों की मौत हो गयी. हादसे की समाचार जैसे ही उनके साथियों और स्थानीय लोगों के माध्यम से परिजनों तक पहुंची, बिहिया में मातम पसर गया.
एक साथ यात्रा पर निकले दस दोस्तों में से आठ का सुरक्षित बचना राहत की बात थी, लेकिन दो दोस्तों को हमेशा के लिए खो देने का दर्द पूरे ग्रुप और दोनों परिवारों के लिए बेहद भारी था.
दो दोस्तों के सपनों का सफर अधूरा रह गया
अभिजीत और सोनू सिर्फ यात्रा के साथी नहीं थे, बल्कि करीबी दोस्त भी थे. दोनों अलग-अलग जगहों पर पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन दोस्ती ने उन्हें एक साथ बांधे रखा था. लद्दाख की यात्रा भी इसी दोस्ती का हिस्सा थी.
एक का सपना कंप्यूटर साइंस की दुनिया में अपनी पहचान बनाना था और दूसरा सिविल सर्विस में जाकर देश और समाज की सेवा करना चाहता था. दोनों अपने-अपने क्षेत्र में आगे बढ़ने की तैयारी कर रहे थे. परिवार और दोस्तों को भरोसा था कि आने वाले वर्षों में दोनों अपने सपनों को पूरा करेंगे.
लेकिन मंगलवार का दिन उनके जीवन की आखिरी तारीख बन गया. खारदुंगला के पास अचानक हुए भूस्खलन ने न केवल दो जिंदगियां छीन लीं, बल्कि दो परिवारों के भविष्य की उम्मीदों को भी गहरा आघात पहुंचाया.
बिहिया में समाचार पहुंचते ही मचा कोहराम
हादसे की सूचना बिहिया पहुंचते ही दोनों युवकों के घरों पर लोगों की भीड़ जुटने लगी. रिश्तेदार, परिचित और स्थानीय लोग परिवार को ढांढस बंधाने के लिए पहुंचने लगे. किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि कुछ दिन पहले हंसते-मुस्कुराते हुए लद्दाख घूमने निकले दोनों युवक अब इस दुनिया में नहीं हैं.
बिहिया के लोगों के लिए भी यह घटना बेहद दुखद है. दोनों युवक कम उम्र में ही अपनी पढ़ाई और भविष्य को लेकर आगे बढ़ रहे थे. उनकी मौत की समाचार ने पूरे इलाके को शोक में डाल दिया.
गुरुवार को घर पहुंचेगा दोनों का पार्थिव शरीर
परिजनों के अनुसार, लद्दाख में आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों युवकों के पार्थिव शरीर को एंबुलेंस से दिल्ली लाया जाएगा. इसके बाद दिल्ली से पटना और फिर बिहिया स्थित उनके पैतृक आवास लाया जाएगा. परिजनों को गुरुवार तक दोनों के पार्थिव शरीर के पहुंचने की उम्मीद है.
पार्थिव शरीर के घर पहुंचने के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. परिवार के साथ-साथ बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी अंतिम दर्शन के लिए पहुंच सकते हैं.
खूबसूरत सफर की सबसे दर्दनाक तस्वीर
लद्दाख की यात्रा दोनों दोस्तों के लिए जिंदगी की खूबसूरत याद बनने वाली थी. दोस्तों का पूरा ग्रुप एक साथ निकला था, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि वही सफर दो दोस्तों की जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा.
चार बाइकों पर सवार आठ दोस्तों का सुरक्षित बच जाना जहां राहत की बात है, वहीं अभिजीत और सोनू की मौत ने पूरे ग्रुप को अंदर तक झकझोर दिया है. पहाड़ों की खूबसूरती के बीच आया अचानक भूस्खलन अपने पीछे दो परिवारों का कभी न भरने वाला दुख छोड़ गया.
अभिजीत की आंखों में कंप्यूटर साइंस के क्षेत्र में आगे बढ़ने का सपना था और सोनू सिविल सर्विस में जाने की तैयारी कर रहा था. दोनों के सपने बड़े थे, मंजिल अभी दूर थी और सफर अभी बाकी था. लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था. लद्दाख की वह यात्रा, जो जिंदगी की यादगार यात्रा बनने निकली थी, दो होनहार दोस्तों की जिंदगी का आखिरी सफर बन गयी.
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