लोन लेने वाले ग्राहकों के लिए Reserve Bank of India (RBI) ने ब्याज दरों को लेकर नया प्रस्ताव रखा है. केंद्रीय बैंक ने सभी रेगुलेटेड एंटिटीज (REs) के लिए लोन की ब्याज दरों पर एक समान और साफ नियम बनाने का ड्राफ्ट पेश किया है. इसका मकसद बैंकों और NBFCs में ब्याज दर तय करने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और ग्राहकों को ज्यादा साफ जानकारी देना है.
प्रस्ताव में फिक्स्ड और फ्लोटिंग रेट दोनों तरह के लोन के लिए बेंचमार्क और स्प्रेड तय करने का तरीका स्पष्ट करने की बात कही गई है. यानी ग्राहक को यह समझने में आसानी होगी कि उसके लोन की ब्याज दर आखिर कैसे तय हुई.
क्या है RBI का नया प्रस्ताव?
नए फ्रेमवर्क के तहत सभी लोन को बेंचमार्क रेट और एक तय स्प्रेड से जोड़ा जाएगा. यह स्प्रेड किसी रेगुलेटेड एंटिटी की बोर्ड-अप्रूव्ड और पारदर्शी इंटरनल पॉलिसी के आधार पर तय होगा. प्रस्ताव के मुताबिक लोन की कीमत बेंचमार्क रेट से कम नहीं रखी जा सकेगी. जेफरीज के मुताबिक कई NBFCs फिलहाल PLR से कम दर पर लोन देते हैं. ऐसे मामलों में उन्हें अपना बेंचमार्क बदलकर नए फ्रेमवर्क के मुताबिक करना पड़ सकता है.
फ्लोटिंग रेट लोन में क्या बदलेगा?
RBI ने बैंकों के फ्लोटिंग रेट पर्सनल और MSME लोन के लिए एक्सटर्नल बेंचमार्क से लिंकिंग को बरकरार रखने का प्रस्ताव दिया है. वहीं MCLR की गणना को भी एक समान करने की बात कही गई है. इसके तहत MCLR की गणना नए डिपॉजिट और बॉरोइंग की मंथली मार्जिनल कॉस्ट के 3-मंथ मूविंग एवरेज के आधार पर करने का प्रस्ताव है. इसके अलावा फ्लोटिंग रेट लोन की इंटरेस्ट रेट रीसेट पीरियॉडिसिटी को अधिकतम 3 महीने तक रखने का प्रस्ताव है.
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ब्याज की गणना कैसे होगी?
RBI ने इंटरेस्ट कैलकुलेशन को भी एक समान करने का प्रस्ताव रखा है. इसके तहत:
- ब्याज डेली रिड्यूसिंग बैलेंस के आधार पर निकाला जाएगा.
- एक्चुअल/एक्चुअल डे-काउंट कन्वेंशन लागू करने का प्रस्ताव है.
- ब्याज में मंथली रेस्ट का इस्तेमाल होगा.
- WCDL फैसिलिटीज में फिक्स्ड-टेन्योर ड्रॉडाउन को इंटरेस्ट रेट और स्प्रेड तय करने के लिए अलग लोन माना जा सकता है.
जेफरीज का मानना है कि एक्चुअल/एक्चुअल डे-काउंट कन्वेंशन लागू करने में शुरुआत में कुछ ऑपरेशनल चुनौतियां आ सकती हैं.
ग्राहकों और लेंडर्स पर क्या असर होगा?
Citi के मुताबिक RBI का कंसोलिडेटेड इंटरेस्ट रेट्स डायरेक्शंस फ्रेमवर्क ट्रांसपेरेंसी, बॉरोअर प्रोटेक्शन और रेट गवर्नेंस को मजबूत करने की दिशा में है.
प्रस्ताव के कुछ अहम बदलाव इस तरह हैं:
| प्रस्तावित बदलाव | क्या मतलब है |
| स्प्रेड रिविजन | नॉन-CRP स्प्रेड कंपोनेंट्स 3 साल तक लॉक रहेंगे; CRP में बदलाव क्रेडिट प्रोफाइल बदलने पर ही होगा |
| APR कैप | ₹50,000 तक के माइक्रोफाइनेंस और स्मॉल-वैल्यू रिटेल लोन के लिए APR की अधिकतम सीमा तय होगी |
| डे-काउंट | एक्चुअल/एक्चुअल कन्वेंशन को स्टैंडर्ड किया जाएगा |
| रीसेट पीरियड | फ्लोटिंग रेट लोन में रीसेट पीरियड अधिकतम 3 महीने होगा |
| MCLR | 3 महीने के नए डिपॉजिट और बॉरोइंग की औसत मार्जिनल कॉस्ट के आधार पर गणना होगी |
APR कैप से हाई-यील्ड स्मॉल-टिकट लोन पर निर्भर लेंडर्स की कमाई पर दबाव पड़ सकता है. साथ ही शुरुआत में कंप्लायंस कॉस्ट और कामकाज की जटिलता बढ़ सकती है. हालांकि, प्रस्ताव में 29 अप्रैल की ट्रांजिशन डेडलाइन से लेंडर्स को तैयारी के लिए समय मिलने की बात कही गई है.
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