Siwan Violence : बिहार के सीवान जिले मे 25 जुलाई को हुए प्रदर्शन का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में बिहार पुलिस ने कई अहम जानकारी दी है. बिहार पुलिस ने खुलासा किया है कि भीड़ में फंसे जवान ने AK-47 से 4 गोलियां चलाई थी. साथ ही पुलिस ने यह भी बताया है कि प्रदर्शन के दौरान हुए पथराव में 20 पुलिसकर्मी घायल हुए थे.
सुप्रीम कोर्ट में बिहार पुलिस ने क्या कहा ?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि, प्रदर्शनकारियों के पथराव के बीच भीड़ में फंसे डिस्ट्रिक्ट इंटेलिजेंस यूनिट यानी DIU के एक कॉन्स्टेबल ने अपनी AK-47 से हवा में चार राउंड फायर किया था. पुलिस ने साफ किया है कि इन गोलियों से कोई घायल नहीं हुआ. एक अन्य पुलिसकर्मी ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए 9एमएम पिस्तौल से दो राउंड फायर किया था.
25 जुलाई को सीवान में कैसे बिगड़े हालात
बिहार पुलिस की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जवाबी हलफनामे के अनुसार, 25 जुलाई 2026 को AISA और RYA यानी CPI(ML) के छात्र एवं युवा संगठनों के प्रदर्शनकारी सीवान के गांधी मैदान में जुटे थे. इसके बाद प्रदर्शनकारी JP चौक की ओर मार्च करने लगे. पुलिस के मुताबिक, दोपहर करीब 12:30 बजे प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बल पर पथराव शुरू कर दिया. इसके बाद मैरवा रोड और गोपालगंज रोड की ओर से आए उपद्रवी भी पत्थरबाजी में शामिल हो गए. देखते ही देखते स्थिति हिंसक हो गई.
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20 पुलिसकर्मी हुए घायल
हलफनामे के अनुसार, पथराव की घटना में सीवान के पुलिस अधीक्षक समेत 20 पुलिसकर्मी घायल हुए. इनमें दो SDPO, दो इंस्पेक्टर, दो सब-इंस्पेक्टर और 13 कॉन्स्टेबल शामिल हैं. हिंसा के दौरान पुलिस की दो गाड़ियों और बड़ी संख्या में ट्रैफिक ट्रॉलियों को भी नुकसान पहुंचने की बात कही गई है.
हालात काबू करने के लिए वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल
पुलिस ने बताया कि हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले का इस्तेमाल किया गया. कानून-व्यवस्था की स्थिति को संभालने के लिए अलग-अलग विभागों और पुलिस लाइनों में तैनात अधिकारियों एवं जवानों को भी मौके पर बुलाया गया.
82 लोगों के खिलाफ छह FIR
बिहार पुलिस के मुताबिक, हिंसा से जुड़े मामलों में कुल 82 लोगों के खिलाफ छह FIR दर्ज की गई हैं. इनमें से 17 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. पुलिस ने मामले की जांच जारी रहने की जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी है.
भीड़ में फंस गया DIU का कॉन्स्टेबल
हलफनामे में पुलिस ने बताया कि तैनात बल कम पड़ने के कारण अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को बुलाया गया था. इसी दौरान JP चौक के पास DIU में काम करने वाला एक कॉन्स्टेबल भीड़ में फंस गया. पुलिस के अनुसार, इसी स्थिति में कॉन्स्टेबल ने अपनी AK-47 से हवा में चार राउंड फायर किया.
पुलिस ने कहा- AK-47 की गोली से कोई घायल नहीं हुआ
बिहार पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि AK-47 से की गई फायरिंग में कोई घायल नहीं हुआ. पुलिस का दावा है कि जिन तीन प्रदर्शनकारियों को गोली लगने से मामूली चोटें आईं, उनकी चोटें AK-47 की गोली से नहीं लगी थीं. पुलिस के मुताबिक, ये तीनों उस स्थान पर भी मौजूद नहीं थे जहां से कॉन्स्टेबल ने AK-47 से फायरिंग की थी.
हाथी चौक पर भी चली पिस्तौल
हलफनामे के मुताबिक, JP चौक से करीब 1.5 से 2 किलोमीटर दूर हाथी चौक पर एक अन्य ASI ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए अपनी 9mm पिस्तौल से दो राउंड फायर किए. पुलिस ने घटनास्थल से .315 बोर के दो और 7.65 mm का एक फायर किया हुआ कारतूस बरामद होने की भी जानकारी दी है.
तीन प्रदर्शनकारियों को लगी थी गोली
पुलिस के अनुसार, हिंसा के दौरान तीन प्रदर्शनकारियों को गोली लगने से मामूली चोटें आई थीं. उन्हें सीवान सदर अस्पताल में इलाज के बाद बेहतर उपचार के लिए पटना के मेदांता अस्पताल भेजा गया. पुलिस का कहना है कि इलाज के बाद तीनों घायलों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.
AK-47 फायरिंग की बैलिस्टिक जांच जारी
बिहार पुलिस ने कहा है कि फायरिंग में इस्तेमाल हथियार, गोली चलाने की दूरी और फायरिंग के एंगल समेत अन्य पहलुओं का पता लगाने के लिए बैलिस्टिक जांच कराई जा रही है. जांच पूरी होने के बाद फायरिंग से जुड़ी परिस्थितियों को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी.
AK-47 चलाने वाले कॉन्स्टेबल पर हुई कार्रवाई
हलफनामे में पुलिस ने बताया कि AK-47 से फायरिंग करने वाले कॉन्स्टेबल को कथित गलत व्यवहार के लिए निलंबित कर दिया गया है. उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की गई है. पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि AK-47 प्लाटून स्तर का हथियार है और इसका इस्तेमाल विशेष अभियानों में किया जाना चाहिए.
कानून-व्यवस्था में AK-47 के इस्तेमाल को लेकर DGP ने जारी किए निर्देश
राज्य पुलिस के अनुसार, पुलिस महानिदेशक ने 1 अगस्त को AK-47 के इस्तेमाल को लेकर विस्तृत निर्देश जारी किए थे. पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इस संबंध में पहले भी निर्देश जारी किए जा चुके हैं. पुलिस के मुताबिक, कानून-व्यवस्था की सामान्य स्थिति में इस तरह के हथियार के इस्तेमाल से बचना चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट में अब जांच पर नजर
25 जुलाई की हिंसा और पुलिस फायरिंग को लेकर दाखिल हलफनामे में बिहार पुलिस ने घटनाक्रम और अपने स्तर पर की गई कार्रवाई की जानकारी दी है. AK-47 से हुई फायरिंग को लेकर बैलिस्टिक जांच और कॉन्स्टेबल के खिलाफ विभागीय कार्रवाई आगे की महत्वपूर्ण कड़ियां हैं.
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