प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की मुलाकात के बाद तेहरान ने हिंदुस्तान के साथ अपने रिश्तों को पुराना, ऐतिहासिक और सभ्यताओं से जुड़ा बताया है. वहीं अमेरिका ने ईरान पर लगे प्रतिबंधों को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है.
ऐसे में सवाल है कि यह मामला इतना अहम क्यों है और चाबहार बंदरगाह हिंदुस्तान के लिए इतना जरूरी क्यों है?
मोदी-पेजेशकियान की मुलाकात के बाद क्या हुआ?
- शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO के बिश्केक शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से मुलाकात की. दोनों नेताओं के बीच हिंदुस्तान-ईरान रिश्तों के साथ-साथ पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और वहां शांति कायम करने को लेकर भी चर्चा हुई.
- इस मुलाकात के कुछ दिन बाद ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने हिंदुस्तान के साथ रिश्तों को बहुत अहम बताया और उन्होंने खास तौर पर व्यापार, आर्थिक सहयोग और चाबहार बंदरगाह का जिक्र किया.
यह बयान इसलिए ज्यादा चर्चा में है क्योंकि हिंदुस्तान और ईरान के रिश्तों की बात ऐसे समय हो रही है, जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है और ईरान पर अमेरिका का दबाव भी जारी है.
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चाबहार बंदरगाह हिंदुस्तान के लिए क्यों जरूरी है?
हिंदुस्तान के लिए ईरान का चाबहार बंदरगाह सिर्फ एक बंदरगाह नहीं है. यह हिंदुस्तान के लिए दूसरे देशों तक पहुंच बनाने का एक अहम रास्ता है. इसके जरिए हिंदुस्तान पाकिस्तान को पार किए बिना अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक अपना व्यापार पहुंचाने की कोशिश कर सकता है.
हिंदुस्तान और ईरान ने मई 2024 में चाबहार के शाहिद बेहिश्ती टर्मिनल को विकसित करने और चलाने के लिए लंबे समय का समझौता भी किया था. हिंदुस्तान ने इसे दोनों देशों के रिश्तों में एक अहम कदम बताया था.
शाहिद बेहिश्ती टर्मिनल ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port) का एक मुख्य और गहरा पानी वाला (Deep-water) समुद्री टर्मिनल है.ओमान की खाड़ी के तट पर स्थित यह टर्मिनल हिंदुस्तान की वैश्विक व्यापार और रणनीतिक नीति का एक बेहद अहम हिस्सा है.
अमेरिका को हिंदुस्तान-ईरान की दोस्ती से परेशानी क्यों है?
- दरअसल, अमेरिका ने ईरान पर कई कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं. अमेरिका चाहता है कि दूसरे देश ईरान को इन प्रतिबंधों से बचने में किसी तरह की मदद न करें.
- हिंदुस्तान और ईरान के नेताओं की मुलाकात के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि उन्हें हिंदुस्तान और ईरान के बीच किसी नए व्यापार समझौते की जानकारी नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी देश ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में मदद न करे.
- द ब्रायन किलमीड शो पर एक साक्षात्कार में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्पष्ट रूप से कहा है कि किसी भी देश को ईरान को प्रतिबंधों से बचने में मदद नहीं करनी चाहिए.
हिंदुस्तान के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
- हिंदुस्तान के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने रणनीतिक हितों और दूसरे देशों के साथ रिश्तों के बीच सही संतुलन बनाए रखने की है.
- ईरान हिंदुस्तान के लिए ऊर्जा, व्यापार और मध्य एशिया तक पहुंच के लिहाज से अहम है, वहीं अमेरिका भी हिंदुस्तान का एक बड़ा रणनीतिक साझेदार है. इसलिए हिंदुस्तान अपनी जरूरत और हितों को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों के साथ रिश्ते बनाए रखने की कोशिश करता है.
- हिंदुस्तान और ईरान के रिश्तों में आई यह नई चर्चा सिर्फ दोनों नेताओं की मुलाकात तक सीमित नहीं है. इसके पीछे चाबहार बंदरगाह, मध्य एशिया तक पहुंच, पश्चिम एशिया का तनाव, अमेरिकी प्रतिबंध और हिंदुस्तान की अपनी स्वतंत्र विदेश नीति जैसे कई बड़े मुद्दे जुड़े हैं.
यही वजह है कि मोदी-पेजेशकियान की मुलाकात के बाद ईरान का बयान और अमेरिका की प्रतिक्रिया दोनों ही चर्चा में हैं.
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