Ganesh Chaturthi 2026: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सभी देवी-देवताओं में पहले पूजे जाने वाले गणेश का जन्म भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन मध्याह्न काल (दिन के 12 बजे के आसपास) हुआ था. इसलिए गणेश चतुर्थी के दिन इस मुहूर्त में उनकी पूजा शुभ मानी गई है. पंचांग के मुताबिक इस साल गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को मनाई जाएगी. ब्रह्मवैवर्त पुराण के गणेश खंड में उनका एक नाम ‘सिंदूरवदन’ भी मिलता है. क्या आपको पता है कि भगवान गणेश यह नाम क्यों पड़ा और इससे जुड़ी कहानी क्या है?
भगवान गणेश को क्यों चढ़ाते हैं सिंदूर, कैसे पड़ा ‘सिंदूरवदन’ नाम
ब्रह्मवैवर्त पुराण (गीता प्रेस) के गणेश खंड में गणपति के एक नाम सिंदूरवदन का उल्लेख भी किया गया है. कथा के अनुसार, भगवान गणेश ने महापराक्रमी असुर ‘सिंदूर’ का वध कर उसके रक्त (खून) को अपने दिव्य अंगों पर लेप लिया. मान्यतानुसार, इस घटना के बाद से ही उनका एक नाम सिंदूरवदन प्रसिद्ध हो गया. चूंकि, आविर्भाव (प्रकट होना) के वक्त उनका मुख (मुंह) सिंदूर सा दिख रहा था. इसलिए उनकी पूजा में सिंदूर का विशेष महत्व है. भगवान गणेश की पूजा में उन्हें सिंदूर का तिलक लगाना चाहिए.
गणेश जी को स्वरुप को दर्शाने वाला स्तुति मंत्र
एकदंतं शूर्पकर्णं गजवक्त्रं चतुर्भुजम्. पाशाङ्कुशधरं देवं ध्यायेत्सिद्धिविनायकम्. दन्ताक्षमालापरशुं पूर्णमोदकधारिणम्. मोदकासक्ताशुण्डाग्र-मेकदन्तं विनायकम्.
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स्तुति मंत्र का भावार्थ
शास्त्रों के अनुसार, भगवान गणेश चतुर्बाहु (चार हाथ वाले) हैं. वे अपने तीन हाथों में पाश (एक प्रकार का अस्त्र), अंकुश (जिससे हाथी को वश में किया जाता है.), दंत (दांत) धारण किए हुए हैं.
जबकि, उनके एक हाथ में लड्डू से भरा हुआ पात्र (बर्तन) है. जिनका स्वरूप लाल है और जो लंबोदर (बड़ा पेट) हैं. जिनकी पूजा सिंदूर और लाल रंग के फूल से की जाती है. ऐसा विनायक (भगवान गणेश का एक नाम) का स्वरूप है.
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