Hot News

तालाब का कचरा बना फैशन का खजाना, जमशेदपुर के गौरव ने जलकुंभी से तैयार की ईको-फ्रेंडली साड़ी, जानें उनकी कहानी

जमशेदपुर : जिस जलकुंभी को तालाब और नदी से निकालकर लोग कचरा समझकर फेंक देते हैं, वही अब साड़ी का खूबसूरत कपड़ा बन रही है. जमशेदपुर के गौरव आनंद ने जलकुंभी में छिपी इसी संभावना को पहचाना और कॉर्पोरेट की नौकरी छोड़कर इसे फाइबर में बदलने का प्रयोग शुरू किया. इस पहल ने अब कारोबार के साथ स्त्रीओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा किए हैं.

जसकुंभी से बनाई जा रही साड़ी.

जलकुंभी से फाइबर, फाइबर से कपड़ा और फिर साड़ी

इस पूरी प्रक्रिया की कहानी भी काफी दिलचस्प है. जलकुंभी को जलस्रोतों से निकालने के बाद उससे फाइबर तैयार किया जाता है. इसके बाद फाइबर को कपास के साथ मिलाकर कपड़ा तैयार किया जाता है. यही कपड़ा आगे चलकर साड़ी और दूसरे उपयोगी उत्पादों का रूप लेता है. गौरव आनंद ने बताया – लगातार प्रयोग के बाद जलकुंभी से तैयार कपड़े को मुलायम और बेहतर गुणवत्ता वाला बनाने में सफलता मिली है. यानी तालाब से निकला एक ऐसा पौधा, जिसे आमतौर पर बेकार समझ लिया जाता है, अब फैशन उत्पाद का हिस्सा बन रहा है.

सिर्फ साड़ी नहीं, स्त्रीओं के लिए रोजगार की कहानी भी

इस पहल की खास बात केवल जलकुंभी से कपड़ा तैयार करना नहीं है. इसके साथ रोजगार का पहलू भी जुड़ा हुआ है. इस काम में स्त्रीओं को फाइबर तैयार करने, कपड़ा बनाने और उत्पाद तैयार करने जैसे अलग-अलग स्तरों पर काम के अवसर मिलने की बात कही जा रही है. इससे जलकुंभी को संसाधन में बदलने के साथ ग्रामीण और स्त्री रोजगार को बढ़ावा देने का प्रयास भी किया जा रहा है. यानी एक तरफ जलकुंभी से जलस्रोतों को होने वाली परेशानी कम करने की कोशिश, तो दूसरी तरफ उसी पौधे से आमदनी का रास्ता.

जलकुंभी से बनाई जा रही साड़ी.

‘कचरा’ नहीं, संसाधन है – यही है इस प्रयोग का संदेश

गौरव आनंद की पहल का मूल विचार यही है कि समाज जिस चीज को बेकार समझकर फेंक देता है, उसमें भी उपयोग और आर्थिक मूल्य तलाशा जा सकता है. जलकुंभी इसका एक उदाहरण है. जिस पौधे को हटाने के लिए खर्च करना पड़ता है, उसी से अगर फाइबर, कपड़ा और फैशन उत्पाद तैयार हो सकें तो यह वेस्ट से वैल्यू बनाने की दिशा में एक अलग मॉडल हो सकता है.

अब कई राज्यों तक पहुंचाने की तैयारी

जलकुंभी से फाइबर और कपड़ा तैयार करने की इस तकनीक को देश के दूसरे हिस्सों तक ले जाने की दिशा में भी काम किये जाने की बात कही गयी है. उद्देश्य यह है कि जलकुंभी जैसी समस्या को स्थानीय स्तर पर संसाधन में बदलते हुए रोजगार के अवसर तैयार किये जा सकें. गौरव आनंद की कहानी सिर्फ एक साड़ी के तैयार होने की कहानी नहीं है. यह उस सोच की कहानी है, जिसमें कचरे में भी अवसर तलाशने की कोशिश की गयी.

The post तालाब का कचरा बना फैशन का खजाना, जमशेदपुर के गौरव ने जलकुंभी से तैयार की ईको-फ्रेंडली साड़ी, जानें उनकी कहानी appeared first on Naya Vichar.

Spread the love

विनोद झा
संपादक नया विचार

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

About Us

नयाविचार एक आधुनिक न्यूज़ पोर्टल है, जो निष्पक्ष, सटीक और प्रासंगिक समाचारों को प्रस्तुत करने के लिए समर्पित है। यहां राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, तकनीक, शिक्षा और मनोरंजन से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जाता है। नयाविचार का उद्देश्य पाठकों को विश्वसनीय और गहन जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे सही निर्णय ले सकें और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

Quick Links

Who Are We

Our Mission

Awards

Experience

Success Story

© 2025 Developed By Socify

Scroll to Top