घाटशिला : हाल में बंगाल के बाकुंड़ा में पुलिस के समक्ष हथियार के साथ सरेंडर करने वाले नक्सली राम प्रसाद मार्डी उर्फ सचिन ने स्वीकार किया है कि सीपीआइ माओवादी केंद्रीय कमेटी के निर्देश पर सांसद सुनील महतो की हत्या की गयी. वह तब नक्सलियों की टीम के साथ शामिल था, पर उसने खुद गोली नहीं चलायी. इससे पहले 25 जनवरी 2017 को कोलकाता पुलिस मुख्यालय में सरेंडर करने वाले प्रमुख नक्सली रंजीत पाल उर्फ राहुल ने सांसद सुनील महतो हत्याकांड की बात स्वीकारी थी. बताया था कि सांसद की हत्या क्यों कि गयी थी. बावजूद आज तक पुलिस उसे बंगाल से झारखंड नहीं ला पायी. इसके पीछे मुख्य कारण सरेंडर माना जा रहा है.
अगर गिरफ्तारी होती तो मिलता रिमांड
जानकार मानते हैं अगर गिरफ्तारी होती तो रिमांड मिलता पर सरेंडर किए जाने के कारण बंगाल से झारखंड लाना संभव नहीं हो पाया. हालांकि झारखंड पुलिस बंगाल के पूर्वी मेदनीपुर से गिरफ्तार सेंट्रल कमेटी के सदस्य और एक करोड़ के इनामी रहे असीम मंडल उर्फ आकाश को रिमांड पर लेकर झारखंड लाने की कोशिश में जुटी है. वर्त्तमान में बंगाल पुलिस उसे गिरफ्तार कर 10 दिनों की रिमांड पर लेकर कोलकाता एसटीएफ मुख्यालय में पूछताछ कर रही है. उम्मीद है झारखंड पुलिस असीम को जल्द बंगाल से झारखंड लेकर आयेंगी. क्योंकि उसके खिलाफ सर्वाधिक मामले झारखंड खासकर पूर्वी सिंहभूम के विभिन्न थाना में दर्ज है. साथ ही सांसद सुनील महतो हत्याकांड, बुरूडीह में बारूदी सुरंग विस्फोट में 11 जवानों की शहादत समेत इस इलाके में जितने बड़े नक्सली घटनाएं हुए उसका नेतृत्व कर्ता असीम मंडल ही था. उसके नाम पर नामजद प्राथमिकी कई थानों में दर्ज है.
बीस साल तक नक्सल गतिविधि में शामिल रहा सचिन
2006 में पटमदा के झुझका गांव का रहने वाला रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन नक्सल में शामिल हुआ. संगठन में उसका नाम सचिन पड़ा. 20 साल तक वह नक्सल गतिविधि में रहा. 2026 में अपनी पत्नी मीता उर्फ नयरतारा के साथ सरेंडर किया. उस पर 15 लाख और पत्नी पर 10 लाख. कुल 25 लाख अब उसे मिलेगा.
सचिन पर दर्ज हैं 44 केस
सचिन पर कुल 44 केस दर्ज हैं. वह एके 47 लेकर चलता था. वहीं, उसकी पत्नी मीता पूर्वी मेदिनीपुर के नंदीग्राम के सोनाचूरा गांव की रहने वाली है. झारखंड में उसके खिलाफ 19 केस दर्ज है. वह इंसास राइफल रखती थी. सचिन के पिता सनातन मार्डी बेटे के सरेंडर से खुश हैं. कहते हैं कई साल से बेटे को ढूंढ रहे थे. मुख्यधारा में आने से खुशी है.
2010 में सचिन ने मीता संग की थी शादी
सचिन और मीता की मुलाकात लालगढ़ आंदोलन के दौरान बेलपहाड़ी दस्ते में हुई थी. तब सचिन वहां के टॉप माओवादी नेता किशनजी के साथ था. सचिन और मीता की शादी संगठन में रहते 2010 में पुरुलिया के बांदवान थाना क्षेत्र के बुढ़ीझोर जंगल में हुई थी.
बुलू उर्फ गौरी ने किया सरेंडर तो पकड़ा गया मदन
शंकर नक्सली बुलू उर्फ गौरी ने सचिन के साथ बाकुंड़ा में सरेंडर किया तो उसके पहले उसके नक्सली पति मदन महतो कुचाई में पकड़ा गया. गिरफ्तारी के बाद ही मदन अपनी पत्नी बुलू से मुख्यधारा में लौटने की अपील की और फिर बुलू ने सरेंडर कर दिया. मदन 1998 से संगठन में शामिल था. जुलाई 2006 में मदन और गौरी उर्फ बुलू ने संगठन में रहते शादी की. उनकी शादी में माओवादी नेता कोटेश्वर राव उर्फ किशनजी, तेलुगु दीपक, असीम मंडल, कल्पना मैती और दूसरे नेता मौजूद थे.
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