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Author name: Vinod Jha

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सुप्रीम कोर्ट ने हुमायूं कबीर की बाबरी मस्जिद के खिलाफ दायर याचिका पर सुना दिया फैसला, Video भी देखें

Table of Contents बाबर के नाम पर मस्जिद का नाम रखने पर रोक की मांग वकील ने वापस ली याचिका, कोर्ट ने किया खारिज Babri Masjid Case: आक्रमणकारी था बाबर वकील ने कोर्ट से की थी ये मांग हिंदुस्तान पर आक्रमण करने वाले के नाम पर मस्जिद निर्माण पर रोक लगे 5 जजों की पीठ ने 2019 में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर दिया था ऐतिहासिक फैसला Babri Masjid Case: हुमायूं कबीर की बाबरी मस्जिद के निर्माण पर रोक लगाने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है. शुक्रवार को कोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलील सुनने के बाद याचिका को खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा- यह सुनने के लायक नहीं है. बाबर के नाम पर मस्जिद का नाम रखने पर रोक की मांग याचिकाकर्ता ने मुगल शासक बाबर या बाबरी मस्जिद के नाम पर किसी भी मस्जिद या धार्मिक संरचना के निर्माण या नामकरण पर रोक लगाने का निर्देश देने की अपील देश की सबसे बड़ी अदालत से की थी. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने जब यह कहा कि वह इस याचिका सुनवाई के लायक नहीं है, तो पिटीशनर के वकील ने याचिका वापस ले ली. वकील ने वापस ली याचिका, कोर्ट ने किया खारिज पीठ ने कहा कि याचिका वापस लिये जाने के कारण इसे खारिज किया जाता है. पिटीशनर के वकील ने निलंबित तृणमूल कांग्रेस विधायक हुमायूं कबीर द्वारा पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में बाबरी मस्जिद की प्रतिकृति बनाने की घोषणा का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता देश पर हमला करने वाले किसी शासक के नाम पर मस्जिदों के निर्माण के खिलाफ है. बंगाल की समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें Babri Masjid Case: आक्रमणकारी था बाबर वकील ने कहा कि हुमायूं कबीर ने इस तथ्य के बावजूद मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के निर्माण की घोषणा की थी कि बाबर एक आक्रमणकारी था. कबीर के खिलाफ कुछ कार्रवाई की जानी चाहिए. जब सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने याचिका खारिज करने की घोषणा की, तो वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी. वकील ने कोर्ट से की थी ये मांग याचिका में केंद्र प्रशासन, राज्यों और अन्य प्रशासनों को याचिकाकर्ता के मामले पर विचार करने और समूचे हिंदुस्तान में बाबर या बाबरी मस्जिद या उनसे मिलते-जुलते नामों पर किसी भी मस्जिद या धार्मिक संरचना के निर्माण, स्थापना या नामकरण पर रोक लगाने या प्रतिबंध लगाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था. हिंदुस्तान पर आक्रमण करने वाले के नाम पर मस्जिद निर्माण पर रोक लगे याचिका में अधिकारियों को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया था कि वे बाबरी मस्जिद, बाबर या हिंदुस्तान पर आक्रमण करने वाले किसी भी व्यक्ति के नाम पर किसी भी मस्जिद या धार्मिक संरचना के निर्माण पर प्रतिबंध लगाने के लिए उचित दिशा-निर्देश तैयार करने या परिपत्र और प्रशासनिक आदेश जारी करने पर विचार करें. 5 जजों की पीठ ने 2019 में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर दिया था ऐतिहासिक फैसला नवंबर 2019 में शीर्ष अदालत की 5 जजों की संविधान पीठ ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया था. कोर्ट ने अयोध्या स्थित विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया था. केंद्र प्रशासन को सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद निर्माण के लिए 5 एकड़ भूमि आवंटित करने का निर्देश दिया था. इसे भी पढ़ें शुभेंदु अधिकारी का बड़ा आरोप : बाबरी मस्जिद के लिए बांग्लादेश से हुई फंडिंग, हुमायूं कबीर ने किया पलटवार भाजपा का ममता बनर्जी पर हमला, शमिक बोले- बिगड़ चुका है बंगाल का माहौल मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की नींव रखने वाले हुमायूं कबीर आज करेंगे नयी पार्टी की घोषणा हुमायूं कबीर फरवरी में एक लाख लोगों के साथ ‘कुरान ख्वानी’ का आयोजन करेंगे The post सुप्रीम कोर्ट ने हुमायूं कबीर की बाबरी मस्जिद के खिलाफ दायर याचिका पर सुना दिया फैसला, Video भी देखें appeared first on Naya Vichar.

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‘पैट कमिंस ने ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट को बर्बाद किया’, पॉवर और अथॉरिटी के भूखे; वर्ल्ड कप झटके पर भड़का कंगारू फैन

Pat Cummins: ऑस्ट्रेलियाई टीम का टी20 विश्वकप 2026 में काफी निराशाजनक प्रदर्शन रहा. टीम पहले राउंड- ग्रुप स्टेज में ही टूर्नामेंट से बाहर हो गई. मिचेल मार्श की अगुवाई में टीम को जिम्बॉब्वे और श्रीलंका से हार का सामना करना पड़ा, जबकि जिम्बॉब्वे और आयरलैंड के मुकाबले में बारिश ने ऑस्ट्रेलिया को घर का रास्ता नापने को मजबूर कर दिया. इस शर्मनाक प्रदर्शन के लिए मिचेल मार्श नहीं बल्कि पैट कमिंस पर निशाना साधा जा रहा है. ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट के एक प्रशंसक ने कहा कि कमिंस ने ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट को बर्बाद कर दिया है. वह अंडररेटेड पॉलिटिशियन हैं, जो पॉवर और अथॉरिटी के भूखे हैं.  फैन ने क्या कहा, कौन से आरोप लगाए? ट्रॉल क्रिकेट अनलिमिटेड नाम के एक यूजर ने सोशल मीडिया एक्स पर ऑस्ट्रेलिया टीम की टी20 विश्वकप 2026 में फजीहत होने के बाद सारा ठीकरा पैट कमिंस पर फोड़ा. उसने लिखा, ‘पैट कमिंस ने काफी हद तक कई तरीकों से ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट को नुकसान पहुंचाया है, खासकर उस ताकत और अधिकार की वजह से, जो इस वक्त उनके पास है. वह एक महान गेंदबाज हैं और ऑस्ट्रेलिया के बेहतरीन क्रिकेटरों में से एक हैं, इस पर कोई सवाल नहीं. लेकिन वह एक कम आंके गए पॉलिटिशियन भी हैं, जो अपने निजी और स्वार्थपूर्ण हितों के लिए सत्ता के भूखे हैं.’ यूजर ने अपनी बात के सबूथ के तौर पर लिखा, ‘स्थायी टेस्ट कप्तानी मिलने के बाद से उन्हें पूरी ताकत, अधिकार और दबदबा मिल गया. टेस्ट टीम से जस्टिन लेंगर और टिम पेन को बाहर कराने में उनकी भूमिका रही. वह उन्हीं खिलाड़ियों में शामिल थे जिन्होंने टीम के साथ सलाह-मशविरा कर यह चाहा कि जस्टिन लैंगर को हटाया जाए, क्योंकि वह बहुत सख्त थे और उनके पास बहुत ज्यादा अधिकार थे, जो पैट्रिक को रास नहीं आता था.’ ट्रॉल क्रिकेट ने आगे कहा, ‘इसके बाद वह रॉनल्ड मैकडोनाल्ड को लाए, जो उनके अंडर केवल एक कठपुतली है. कमिंस ही वह व्यक्ति हैं, जिनकी बड़ी भूमिका जॉर्ज बेली के चेयरमैन ऑफ सेलेक्टर्स बनने में रही और सफेद गेंद क्रिकेट में मिचेल मार्श को उनका डिप्टी बनाने में भी. क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के लगभग सभी अहम फैसले पैट कमिंस से सलाह लेकर ही किए जाते हैं. आखिरी फैसला उन्हीं का होता है.’ ट्रॉल क्रिकेट ने कहा कि कमिंस भले ही अभी चोटिल हैं, लेकिन वह आईपीएल स्पोर्ट्सेंगे. उन्होंने लिखा, ‘पैट कमिंस यह भी तय करते हैं कि वह कौन-सी सीरीज़ स्पोर्ट्सेंगे और कौन-सी लीग में हिस्सा लेंगे. वह पूरे इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) सीजन के लिए 100% फिट और उपलब्ध रहेंगे और सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) की कप्तानी करेंगे. अब लोगों को सच में उनकी इन हरकतों पर सवाल उठाने की जरूरत है.’ Pat Cummins to a large extent has ruined Australian Cricket in many ways cause of the power and authority he holds right now. He is a legendary bowler and one of Australia’s finest cricketers no question on that but he is an underrated politician who is hungry for power for his… pic.twitter.com/DwZlcoOmHC — Troll cricket unlimitedd (@TUnlimitedd) February 17, 2026 हालांकि ट्रॉल क्रिकेट के  इस एनालिसिस पर कई यूजर्स असहमत नजर आए. एक यूजर ने लिखा, ‘मुझे ऐसा नहीं लगता, क्योंकि जब ऑस्ट्रेलियाई टीम अपने सबसे खराब दौर में थी, तब Pat Cummins आए और उन्होंने टीम को संभाला. उनके नेतृत्व में ऑस्ट्रेलिया ने विश्व क्रिकेट पर फिर से दबदबा बनाया. 2023 वर्ल्डकप जीता, वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2023 जीती, वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2025 के फाइनल में पहुंचे, T20 वर्ल्ड कप 2024 में दो हैट्रिक लीं. इन उपलब्धियों को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट को नुकसान पहुंचाया है.’ I don’t think so because when aus team was at their lowest point then Pat Cummins come , and conquer world cricket by winning wc 23 , wtc 23 , finalist wtc 25 , 2 hat tricks in t20 wc 24 . — StOkE.55 (@jaat36403) February 17, 2026 कमेंट में लोगों ने जताई असहमति दूसरे यूजर ने लिखा, ‘बिलकुल सही कहा. पैट कमिंस ने वही किया, जो बड़े कप्तान और बड़े खिलाड़ी करते हैं. क्रिकेट वर्ल्ड कप 2023 के फाइनल में हिंदुस्तान को उसी के घर में, एक लाख से ज्यादा दर्शकों के सामने हराना कोई छोटी बात नहीं है. हिंदुस्तान पूरे टूर्नामेंट में सबसे बेहतरीन टीम था, इसमें कोई शक नहीं. लेकिन फाइनल दबाव का स्पोर्ट्स होता है और उस दिन कमिंस ने कप्तानी, रणनीति और मानसिक मजबूती में बाजी मार ली.’ उसने आगे कहा, ‘नई गेंद से रोहित शर्मा को आउट करना, फील्ड प्लेसमेंट, गेंदबाज़ों का सही इस्तेमाल और खुद रन बनाना. हर मोर्चे पर उन्होंने मैच पलट दिया. यही वजह है कि उस दिन दिल टूटा, लेकिन सम्मान भी पैदा हुआ. क्रिकेट में भावनाएं स्वाभाविक हैं, मगर महान उपलब्धियों को मान देना भी उतना ही जरूरी है. सम्मान बनता है रोना बंद करो.’ Where were you when he defeated India in India in the WC finals. He made us cry that day, India was clearly the best team throughout the WC campaign, beating them in finals in front of the home crowd (over 100,000 fans) is a massive achievement. Respect for him. Stop crying. — DesiByte (@darshinvyas) February 17, 2026 चोटिल कमिंस पर लगे आरोप; उनकी उपलब्धियों के सामने बौने पैट कमिंस को एशेज 2025-26 से पहले से ही चोटिल थे. हालांकि, उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ 5 मैचों की इस सीरीज का तीसरा मैच स्पोर्ट्सा था. कमिंस फिलहाल पीठ के निचले हिस्से में लगी चोट (लंबर बोन स्ट्रेस) से जूझ रहे हैं. चोट के कारण ही वह टी20 विश्वकप 2026 में टीम में शामिल नहीं हो पाए. उनकी जगह बेन ड्वारशिस को टीम में शामिल किया गया. कमिंस टी20 वर्ल्ड कप के बाद और आईपीएल के पहले खुद के फिट होने की उम्मीद कर रहे हैं. उन्होंने अपनी ऑस्ट्रेलियाी टीम को कई उपलब्धियां दिलाई हैं. कमिंस ने एसआरएच को भी आईपीएल चैंपियन बनाया है. ऐसे में इस तरह के आरोप लगाना शायद एक फैन की अति उत्साही टिप्पणी ज्यादा लगती है, न कि किसी वास्तविकता के.  ये भी पढ़ें:- क्या ऑस्ट्रेलिया का हारना पाकिस्तान के लिए शुभ? वायरल दावे की हकीकत जानें ये भी पढ़ें:- ये पाकिस्तानी नहीं सुधरेंगे, सुपर-8 में

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टॉक्सिक के धांसू टीजर में इन 5 डायलॉग्स ने मचाया गदर, आप भी हो जाएंगे दीवाने

Toxic Dialogue: ‘केजीएफ’ से पैन इंडिया स्टार बने यश एक बार फिर बड़े पर्दे पर तहलका मचाने की तैयारी में हैं. उनकी अपकमिंग फिल्म ‘टॉक्सिक’ का टीजर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर छा गया है. पहले जब फिल्म की झलक सामने आई थी तो बोल्ड सीन्स को लेकर मेकर्स को ट्रोलिंग झेलनी पड़ी थी, लेकिन इस बार कहानी कुछ और है. 1 मिनट 55 सेकंड के इस टीजर ने फैंस को पूरी तरह इम्प्रेस कर दिया है. टीजर में यश का जबरदस्त एक्शन अवतार देखने को मिलता है. एडवांस स्टंट्स और स्टाइलिश प्रेजेंटेशन इसे अलग लेवल पर ले जाते हैं. लेकिन सिर्फ एक्शन ही नहीं, फिल्म के पांच डायलॉग्स भी खूब चर्चा में हैं. आइए बताता हूं… टॉक्सिक के 5 दमदार डायलॉग पहला डायलॉग एक सीन में यश का चेहरा नहीं दिखता, सिर्फ हाथ में जलती सिगरेट नजर आती है. बैकग्राउंड में आवाज गूंजती है, “इस बार जंग अलग है.” दूसरा डायलॉग गनफायर और धमाकों के बीच यश कार के पास शराब की बोतल लिए खड़े नजर आते हैं. तभी सुनाई देता है, “उनकी मक्कारी भी अलग है.” तीसरा डायलॉग ट्रेन, एयरप्लेन और जहाज से जुड़े हाई-वोल्टेज एक्शन के बीच यश का आधा चेहरा दिखता है और डायलॉग आता है, “सबसे टकराना भारी पड़ेगा.” चौथा डायलॉग शोर-शराबे के बीच दुश्मन की आवाज सुनाई देती है, “जिद छोड़ दो… Give up Raya… it’s over.” पांचवां और सबसे दमदार डायलॉग बाथटब में बैठे यश का पूरा लुक सामने आता है. वो ठंडे अंदाज में कहते हैं,“It’s over… when I say it’s over… till then have some manners… f***ng manners.” कब रिलीज होगी ‘टॉक्सिक’? यश की ‘टॉक्सिक’ 19 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज होगी. फिल्म हिंदी के अलावा तमिल, तेलुगू, मलयालम और अंग्रेजी में भी आएगी. ‘केजीएफ 2’ के बाद यश सीधे इसी फिल्म में नजर आएंगे, इसलिए फैंस की एक्साइटमेंट डबल है. बॉक्स ऑफिस पर बड़ी टक्कर दिलचस्प बात ये है कि 19 मार्च को ही रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ भी रिलीज हो रही है. ऐसे में बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त क्लैश देखने को मिल सकता है. माना जा रहा है कि 2026 की यह सबसे बड़ी टक्कर साबित हो सकती है. यह भी पढे़ें: लंबे समय बाद बडे़ पर्दे पर लौट रहे बॉबी देओल, बंदर में दिखेगा तगड़ा एक्शन ये रहा टॉक्सिक का टीजर The post टॉक्सिक के धांसू टीजर में इन 5 डायलॉग्स ने मचाया गदर, आप भी हो जाएंगे दीवाने appeared first on Naya Vichar.

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क्या केरला स्टोरी 2 के रिलीज होने से समाज में हिंदू–मुस्लिम के बीच नफरत भड़केगी, क्या है मंशा?

The Kerala Story 2 : केरला स्टोरी 2 का ट्रेलर हाल ही में जारी हुआ है और जिसके बाद विवाद शुरू हो गया है. केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन ने इस मूवी की कड़ी आलोचना की है और इसे प्रोपेगैंडा बताया है. उनका कहना है कि इस वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए सांप्रदायिक सोच को बढ़ाने और समाज में नफरत फैलाने के लिए यह फिल्म लाई जा रही है. दूसरी ओर बीजेपी के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला का कहना है कि देश में अभिव्यक्ति की आजादी की बात होती है, लेकिन जब समाज के किसी कट्टरवादी सोच का सच सामने लाया जाता है, तो कांग्रेस उसका विरोध करने लगती है.यह गलत है, समाज में अगर बुराइयां हैं, तो उसे छिपाने की जरूरत क्या है. कैथोलिक चर्च कई बार लव जिहाद की बात कर चुका है. कांग्रेस स्त्रीओं की प्रताड़ना पर आधारित फिल्म का विरोध कर रही है.  कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और केरल से सांसद शशि थरूर ने फिल्म को प्रोपेगैंडा बताया है और कहा है कि हमारा समाज ऐसा नहीं है. कुछ लड़कियों के साथ ऐसा हुआ है, लेकिन देशभर में 30-35 घटनाओं से पूरे देश का आकलन सही नहीं है. हमारे यहां सभी धर्म के लोगों को साथ रहने की सीख दी जाती है. केरला स्टोरी 2 को लेकर क्या है विवाद? आपको याद होगा कि 2023 में दि केरला स्टोरी रिलीज हुई थी. इस मूवी के रिलीज होने  के बाद भी काफी विवाद हुआ था. इस फिल्म के बारे में यह दावा किया गया था कि वह सच्ची घटनाओं पर आधारित थी और फिल्म में लव जिहाद का मामला दिखाया गया था. उसमें यह भी बताया गया था कि कैसे हिंदू लड़कियों को आईएसआईएस यानी इस्लामिक स्टेट में शामिल कर उनका शोषण किया जाता है.   अब केरला स्टोरी 2 रिलीज होने वाली है. यह मूवी 27 फरवरी को रिलीज हो रही है, लेकिन इसके ट्रेलर के आते ही बवाल मच गया है. फिल्म के निर्माता विपुल अमृतलाल शाह और निर्देशक कामाख्या नारायण सिंह हैं, जो एक नेशनल अवार्ड विनिंग निर्देशक हैं. फिल्म के बारे में यह दावा किया जा रहा है कि यह सच्ची घटनाओं पर आधारित है. इस फिल्म में लव जिहाद के जरिए लड़कियों को धोखा देने और उन्हें प्रताड़ित करने की बहुत ही इमोशनल दास्तान है. इस फिल्म के समर्थकों का कहना है कि यह सच है और इसे दिखाया जाना चाहिए, जबकि इसके विरोधियों का कहना है कि यह महज समाज में नफरत फैलाने का काम है. यह समाज में हिंदू–मुस्लिम नफरत को बढ़ाने का काम करेगा. ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने केरला स्टोरी 2 को समाज में नफरत फैलाने वाला कहा है और कहा है कि इस फिल्म गलत नरेटिव सेट कर रही है और मुसलमानों को बदनाम करने की साजिश है. यह हिंदू-मुस्लिम एकता पर खतरा है. विभिन्न विषयों पर एक्सप्लेनर और विशेष आलेख पढ़ने के लिए क्लिक करें हाईकोर्ट पहुंचा मामला? केरला स्टोरी 2 का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है. श्रीदेव नंबूदरी नाम के एक व्यक्ति ने केरल हाई कोर्ट में केरला स्टोरी 2 के खिलाफ केस दायर किया है और यह बताया है कि इस फिल्म में केरल को जिस तरीके से दिखाया गया है, वह बहुत ही चिंताजनक है. नंबूदरी ने फिल्म के रिलीज को चैलेंज किया है और बताया है कि इसके रिलीज से क्षेत्रीय सद्‌भाव पर असर पड़ सकता है. पिटीशन दाखिल होने के बाद हाईकोर्ट ने फिल्म के प्रोड्‌यूसर, इंफार्मेशन एंड ब्रॉडकास्टिंग मिनिस्ट्री और सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) को नोटिस जारी किया है. कोर्ट इस मामले की सुनवाई 24 फरवरी को करने वाला है. फिल्म को चेतावनी की तरह दिखाना बना गुस्से की वजह केरला स्टोरी 2 को एक चेतावनी के अंदाज में दिखाया गया है. ट्रेलर में देश के तीन अलग–अलग हिस्सों की कहानी दिखाई जाती है, जिसमें यह बताया जाता है कि हिंदू लड़कियों को मुसलमान लड़के प्रेमजाल में फंसाकर उनसे शादी करते हैं और फिर उन्हें जबरन मुसलमान बनाया जाता है. फिल्म में कई इमोशनल दृश्य भी है, जो लड़कियों के सपने टूटने जैसा है, मसलन उन्हें रील बनाने से रोकना, जबरदस्ती बीफ खिलाना और मन भर जाने पर उनका दूसरे से रेप करवाना. इस तरह के दृश्य लोगों के मन में आक्रोश भरते हैं. फिल्म के समर्थक और विरोधी दोनों ही पक्ष इस तरह के दृश्य से आक्रोशित होता है. ये भी पढ़ें : क्या आप जानते हैं देश में कितने आईएएस 5 साल में चुने गए और बिहार के कितने ललना डीएम हुए? स्त्री के पायजामे का नाड़ा खोलना रेप की कोशिश ही माना जाएगा, हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त किया विकसित हिंदुस्तान के सपने की ओर हनुमान कूद है एआई इंपैक्ट समिट? The post क्या केरला स्टोरी 2 के रिलीज होने से समाज में हिंदू–मुस्लिम के बीच नफरत भड़केगी, क्या है मंशा? appeared first on Naya Vichar.

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झारखंड की कोयला खदानों में मिला 30 करोड़ साल पुरानी दुनिया का सुराग, नॉर्थ कर्णपुरा में प्रमाण

नई दिल्ली से अंजनी सिंह की रिपोर्ट Jharkhand Coal Mines Fossils: झारखंड की ओपन कास्ट कोयला खदानों (ओसीपी) ने एक ऐसे प्राचीन संसार का रहस्य उजागर किया है, जो न तो इंसानों के समय का है और न ही डायनासोर के. लगभग 28-30 करोड़ वर्ष पहले अस्तित्व में रहे घने दलदली जंगलों और नदियों के जाल का प्रमाण झारखंड के नॉर्थ कर्णपुरा स्थित अशोका कोयला परियोजना की माइंस से मिले हैं. यह बहु-विषयक शोध बीरबल साहनी जीवाश्म विज्ञान संस्थान (बीएसआइपी) के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में किया गया. यह संस्थान हिंदुस्तान प्रशासन के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के अधीन स्वायत्त इकाई है. अंतरराष्ट्रीय जर्नल (इंटरनेशनल जर्नल ऑफ कोल जियोलोजी) में अध्ययन का निष्कर्ष प्रकाशित हुआ है. गोंडवाना काल का पुनर्निर्माण अध्ययन के अनुसार, उस दौर में हिंदुस्तान, अंटार्कटिक, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया मिल कर गोंडवानालैंड नामक दक्षिणी महाद्वीप का हिस्सा थे. झारखंड का यह इलाका तब घने दलदली वनों और नदियों से आच्छादित था, जिसे कभी-कभार समुद्र के भी छूने की संभावना जतायी गयी है. अशोक कोल माइंस (नॉर्थ कर्णपुरा बेसिन, झारखंड) से मिले जीवाश्मों में विलुप्त बीज-पौधों के समूह ग्लोसोप्टेरिस की भरमार पायी गयी. शेल परतों में 14 से अधिक प्रजातियों के पत्तों, जड़ों, बीजों और पराग कणों के नाजुक जीवाश्म सुरक्षित मिले हैं. सबसे महत्वपूर्ण खोज दामोदर बेसिन में पहली बार मिला ग्लोसोप्टेरिस के किशोरावस्था का नर शंकु (जुवेनााइल मेल कोन) है. इसे वनस्पति विज्ञान की ‘मिसिंग कड़ी’ माना जा रहा है, जिससे वैज्ञानिक यह समझ सकेंगे कि ये प्राचीन वृक्ष किस तरह प्रजनन करते थे. समुद्री अतिक्रमण के पुख्ता संकेत कोयले और शेल नमूनों की सूक्ष्म जांच में ‘फ्राम्बॉइडल पाइराइट’ रसभरी जैसे आकार वाले खनिज कण और उच्च सल्फर के स्तर मिले. यह संकेत देता है कि उस समय दलदली क्षेत्र में खारे पानी की स्थिति थी. ऐसा सामान्य कोयला जमाव में दुर्लभ होता है. गैस क्रोमैटोग्राफी-मास स्पेक्ट्रोमेट्री (जीसी-एमएस) विश्लेषण से पता चला कि लगभग 28–29 करोड़ वर्ष पहले पर्मियन काल में समुद्र ने पूर्वोत्तर हिंदुस्तान से होते हुए मध्य हिंदुस्तान की ओर बढ़ते हुए दामोदर बेसिन तक प्रवेश किया. आज के जलवायु संकट से जुड़ा सबक यह शोध न केवल झारखंड के भूगर्भीय इतिहास को समृद्ध करता है, बल्कि वर्तमान जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है. वैज्ञानिकों का मानना है कि जिस तरह पर्मियन काल में समुद्र स्तर बढ़ने से महाद्वीपीय भूभाग प्रभावित हुए, उसी तरह आज ध्रुवीय बर्फ के पिघलने से बढ़ता समुद्र स्तर भविष्य में तटीय और आंतरिक भू-भागों को प्रभावित कर सकता है. झारखंड की कोयला खदानों से निकले ये साक्ष्य बताते हैं कि धरती का इतिहास बार-बार बदलते पर्यावरण और समुद्री अतिक्रमण का गवाह रहा है और अतीत की यह कहानी भविष्य के लिए चेतावनी भी है. अध्ययन का मकसद नॉर्थ कर्णपुरा बेसिन स्थित अशोका कोल माइंस का अध्ययन प्राचीन वनस्पति (पैलियो वेजिटेशन), प्राचीन पारिस्थितिकी (पैलियो इकोलॉजी) और निक्षेपण परिस्थितियों को समझने के मकसद से किया गया. यह बेसिन लोअर गोंडवाना अनुक्रमों के उत्कृष्ट रूप से संरक्षित और विविध पौध जीवाश्मों का भंडार है. अपने उत्कर्ष काल में इसका पृथ्वी की सतह के लगभग 16 फीसदी क्षेत्र पर कब्जा था. यही कारण है कि यह वैश्विक पेलियोग्राफिक और भूवैज्ञानिक अध्ययनों का महत्वपूर्ण केंद्र बना. पर्मियन काल में इन भू-भागों पर ग्लोसोप्टेरिस वनस्पति अत्यंत प्रचुर मात्रा में पायी जाती थी. पर्मियन काल में दो महाविलुप्ति घटनाएं हुईं, जिससे जलवायु में बड़े उतार-चढ़ाव देखने को मिले. प्रारंभिक पर्मियन के अंत तक जलवायु परिवर्तन ने नदीय वातावरण को बढ़ावा दिया, जिससे दक्षिणी अक्षांशों में ग्लॉसोप्टरिड्स का तेजी से विकास हुआ. इसे भी पढ़ें: खोरठा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग, अनाम ओहदार ने की सांसद खीरू महतो से मुलाकात गोंडवाना विघटन के बाद बने बड़े कोयला भंडार पर्मियन काल में हिंदुस्तानीय उपमहाद्वीप 20° से 45° दक्षिण अक्षांश के बीच स्थित था. गोंडवाना के विघटन के बाद हिंदुस्तान में बड़े कोयला भंडार बने. पर्मियन काल के अंत में महाद्वीपीय विघटन, ज्वालामुखीय गतिविधियों और टेक्टोनिक परिवर्तनों के कारण वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की वृद्धि हुई, जिसके कारण हिमनद पिघलने लगे और समुद्री स्तर में वृद्धि हुई. इसे भी पढ़ें: जमशेदपुर में संस्थापक दिवस की तैयारी! 15 दिनों तक बंद रहेगा जुबिली पार्क, गाड़ियों की नो-एंट्री The post झारखंड की कोयला खदानों में मिला 30 करोड़ साल पुरानी दुनिया का सुराग, नॉर्थ कर्णपुरा में प्रमाण appeared first on Naya Vichar.

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पटना हॉस्टल कांड: सस्पेंडेड SI से 4 घंटे तक क्या-क्या पूछी CBI? पप्पू यादव ने पटना SSP पर लगाए आरोप

Patna NEET Student Death Case: पटना NEET छात्रा मौत मामले में CBI ने जांच की रफ्तार बढ़ा दी है. टीम लगातार अलग-अलग एंगल से पड़ताल कर रही है. परिवार, पुलिस अफसरों और संबंधित लोगों से दोबारा पूछताछ की जा रही है. CBI टीम ने छात्रा के एक अन्य मामा से जहानाबाद में पूछताछ की. मामी से गया में बात की गई. अधिकारियों ने घटनाक्रम की टाइमलाइन समझने की कोशिश की. परिवार से जुड़े हर व्यक्ति से अलग-अलग सवाल किए जा रहे हैं. निलंबित SI हेमंत झा से 4 घंटे सवाल-जवाब कदमकुआं थाना के निलंबित दारोगा हेमंत झा से गुरुवार को करीब चार घंटे तक पूछताछ हुई. एफएसएल रिपोर्ट के बाद सबूत जुटाने में लापरवाही के आरोप में उन्हें सस्पेंड किया गया था. इसी मामले में चित्रगुप्तनगर थाने की थानेदार रोशनी कुमारी भी निलंबित हैं. जांच एजेंसी यह जानना चाहती है कि शुरुआती कार्रवाई में क्या-क्या चूक हुई. CBI ने पूछे ये तीन बड़े सवाल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, CBI ने निलंबित SI से कई तीखे सवाल किए. उनमें ये तीन सवाल बेहद अहम रहे. सवाल 1: छात्रा के प्रभात हॉस्पिटल पहुंचने के बाद उसके कपड़े क्यों जब्त नहीं किए गए? सवाल 2: कपड़े परिजनों तक कैसे पहुंचे? पुलिस को वे किस आधार पर दिए गए? सवाल 3: पोस्टमार्टम और FSL रिपोर्ट में रेप की बात आने के बाद भी केस को सुसाइड कैसे माना गया? पप्पू यादव का SSP पर हमला पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पटना पुलिस पर निशाना साधा. उन्होंने लिखा कि SSP उन्हें बिहार आने से रोकना चाहते हैं. उनकी Y श्रेणी सुरक्षा में तैनात जवानों को वापस बुलाने का आरोप भी लगाया. फेसबुक लाइव में भी उन्होंने पटना SSP और SP की कार्यशैली पर सवाल उठाए. उन्होंने पूछा कि मनीष को किस मामले में गिरफ्तार किया गया है और हॉस्टल मालिक को अब तक क्यों नहीं पकड़ा गया. SSP पटना चाहते हैं मैं लोगों कीसेवा और मदद के लिए बिहार न आऊं! वह मेरी सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहे हैंY श्रेणी सुरक्षा के तहत BMP जवानमेरी सुरक्षा में तैनात हैं,उन्हें फोन कर वापस बुलाया गया है! मुझ से कैसी घृणा है?माफिया मुझ से परेशान हैं SSP पटना उनकी राह आसानकर रहे हैं! — Pappu Yadav (@pappuyadavjapl) February 20, 2026 परिवार अब भी हॉस्टल पर अड़ा छात्रा के चाचा ने कहा कि परिवार अपने पुराने आरोप पर कायम है. उनका कहना है कि घटना की सच्चाई पटना के शम्भू गर्ल्स हॉस्टल के अंदर ही छिपी है. परिवार शुरू से ही हॉस्टल प्रबंधन पर शक जता रहा है. उन्होंने कहा कि CBI ने पहले दिन परिवार से बात की थी. तब उन्हें सुझाव दिया गया कि हॉस्टल संचालिका, उसके बेटे और वार्डेन को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जाए. जांच का फोकस अब क्या? CBI अब मेडिकल रिपोर्ट, पुलिस की शुरुआती कार्रवाई और हॉस्टल प्रबंधन की भूमिका को जोड़कर देख रही है. सवाल यह है कि क्या शुरुआती जांच में गंभीर चूक हुई? या फिर किसी ने जानबूझकर दिशा बदलने की कोशिश की? Also Read: पटना हॉस्टल कांड: CBI खंगाल रही NEET छात्रा के भाई का मोबाइल, सस्पेंडेड दारोगा से भी हुई पूछताछ The post पटना हॉस्टल कांड: सस्पेंडेड SI से 4 घंटे तक क्या-क्या पूछी CBI? पप्पू यादव ने पटना SSP पर लगाए आरोप appeared first on Naya Vichar.

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ईरान पर हमला करने को तैयार US, अगर जंग छिड़ी तो बदल सकता है दुनिया का भूगोल; 6 पॉइंट

US Iran War Outcome: संयुक्त राज्य अमेरिका (US) और ईरान जंग के मुहाने पर खड़े हैं. अमेरिका ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारी करता हुआ दिखाई दे रहा है. हाल के हफ्तों में वॉशिंगटन ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है. अपनी नौसेना के जहाज, लड़ाकू विमान और मिडिल ईस्ट में पहले से मौजूद सैनिकों की बदौलत अमेरिका शिया मुल्क पर अपना दबाव बढ़ाता जा रहा है. अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु हथियार की आकांक्षाओं को छोड़कर एटमी वीपंस बनाने से तौबा कर ले. ईरान अपने बयानों से ऐसा करने की बात तो कहता है, लेकिन चोरी छिपे न्यूक्लियर वीपन बनाने की पूरी तैयारी कर रहा है. ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब 10 दिन का समय दिया है. अगर यह बातचीत विफल रहती है और ट्रंप हमले का आदेश देने का फैसला करते हैं, तो क्या-क्या हो सकता है?  अमेरिकी हमले के संभावित लक्ष्य तो ज्ञात हैं, लेकिन नतीजा क्या होगा, यह स्पष्ट नहीं है. ऐसे में अमेरिका और ईरान संघर्ष के यह 6 पॉसिबल आउटकम हो सकते हैं.  टारगेटेड हमला; प्रशासन गिरे और नेतृत्वक बदलाव हो जाए अमेरिका ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़े ठिकानों, मिसाइल स्थलों और उसके परमाणु कार्यक्रम के कुछ हिस्सों पर लक्षित हवाई और नौसैनिक हमले कर सकता है. इस परिदृश्य में ईरानी नेतृत्व कमजोर पड़ता है और अंततः गिर जाता है, तो लोकतंत्र की ओर बढ़ने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है. हालांकि, इराक और लीबिया में पश्चिमी हस्तक्षेपों ने शासकों को तो हटाया, लेकिन उसके बाद वर्षों तक अस्थिरता बनी रही. ईरान में अभी सर्वोच्च नेता अयातोल्लाह अली खामेनेई के सामने अभी तक कोई भी नेता सामने नहीं आया है. ईरान में धार्मिक सत्तावादी शासन है. चुने हुए नेताओं के पास शासन नहीं बल्कि सुप्रीम लीडर राज्य के प्रमुख हैं. वह सैन्य, न्याय और विदेश नीति से जुड़े मामलों पर फैसला लेते हैं. फिलहाल मसूद पेजेशकियान ईरान के राष्ट्रपति हैं. अगर अमेरिका की यह नीति सफल रहती है, तो सत्ता परिवर्तन के बाद उन्हीं के हाथ आ सकती है.  शासक हटा दिया जाए; शासन बचा रहे और नीति बदले एक अन्य संभावना यह है कि ईरान में ‘वेनेजुएला मॉडल’ लागू हो. यानी नेतृत्व सत्ता में बना रहे, लेकिन अमेरिकी सैन्य ताकत सुप्रीम लीडर (अयातोल्लाह अली खामेनेई) को ही हटा दे. इसके बाद दबाव में ईरान अपनी नीतियों में बदलाव करे. इसका मतलब यह है कि वह क्षेत्र में सशस्त्र समूहों को समर्थन कम करे, मिसाइल और परमाणु गतिविधियों को सीमित करे और घरेलू दमन में ढील दे. वेनेजुएला में बाहरी दबाव से नेतृत्व नहीं हटा, लेकिन सीमित बदलाव के लिए मजबूर हुआ है. खासकर मादुरो की गिरफ्तारी के बाद डेल्सी रोड्रिगेज राष्ट्रपति बनीं. फिर भी, ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई दशकों से ऐसे तंत्र का नेतृत्व कर रहे हैं जिसने बदलाव का विरोध किया है. हालांकि, ईरान वेनेजुएला नहीं है. यह क्षेत्रफल के लिहाज से बहुत बड़ा देश है. इसकी सेना भी बड़ी है और यह क्षेत्र अमेरिका से दूर भी है. ऐसे में ईरान में बड़े सुधार की संभावना कम है. पतन के बाद सैन्य शासन या अराजकता अगर अमेरिकी हमलों से व्यवस्था कमजोर होती है, लेकिन विरोध प्रदर्शन सत्ता पर काबिज नहीं हो पाते, तो सुरक्षा बल हस्तक्षेप कर सकते हैं. ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का नेतृत्व और व्यापार में गहरा प्रभाव है. BBC की रिपोर्ट के अनुसार, किसी भी हमले के बाद पैदा हुई अव्यवस्था में सैन्य नेतृत्व वाली प्रशासन उभर सकती है. एक और परिणाम यह हो सकता है कि नेतृत्व गिर जाए, लेकिन उसकी जगह कोई स्पष्ट सत्ता स्थापित न हो. करीब 9.3 करोड़ की आबादी वाला ईरान आंतरिक संघर्ष का सामना कर सकता है. कुर्द, बलूच और अजरबैजानी जातीय अल्पसंख्यक सत्ता के शून्य में अपने क्षेत्रों की रक्षा के लिए आगे आ सकते हैं. पड़ोसी देश अस्थिरता और संभावित शरणार्थी संकट से डरते हैं. हालांकि, अब तक विरोध प्रदर्शनों के चलते राज्य के भीतर बड़े पैमाने पर दलबदल नहीं हुआ है. सत्ता में बैठे लोगों ने नियंत्रण बनाए रखने के लिए बल का इस्तेमाल किया है. क्षेत्र में अमेरिकी बलों की बढ़ी हुई है, ऐसे में  तनावपूर्ण स्थिति के बीच दोनों संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता.  पर्शियन गल्फ में नौसैनिक टकराव खाड़ी में सीधे नौसैनिक टकराव का खतरा भी है. अमेरिका ने इस क्षेत्र में दो कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तैनात किया है, इसमें USS Gerald R Ford भी शामिल है. अमेरिका की मुख्य चिंताओं में से एक ईरान का ‘स्वार्म अटैक’ है, जिसमें ड्रोन और तेज रफ्तार नौकाएं एक साथ किसी जहाज को निशाना बनाती हैं. हालांकि इसे कम संभावना वाला माना जाता है, लेकिन यदि किसी अमेरिकी युद्धपोत को डुबो दिया गया, तो तनाव तेजी से बढ़ जाएगा.  अमेरिकी हमले के जवाब में ईरान का पलटवार; क्षेत्र में पैदा होगी बड़ी मुसीबत  ईरान ने चेतावनी दी है कि वह किसी भी अमेरिकी हमले का जवाब देगा. उसके नेतृत्व ने कहा है कि उसकी ‘उंगली ट्रिगर पर है’ और हमला होने पर अमेरिकी बलों को मुंहतोड़ जवाब देगा. ईरान खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल कर सकता है, जिनमें बहरीन, कतर और जॉर्डन शामिल हैं.  इजरायल तो उसका सबसे बड़ा दुश्मन है ही. वह भी जरूर निशाना बनेगा. खाड़ी के अन्य अरब देश भी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि किसी भी अमेरिकी कार्रवाई से उनके इलाकों पर जवाबी हमले हो सकते हैं. होर्मूज जलडमरूमध्य में बाधा; व्यापार में बाधा ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर सकता है. यह ईरान और ओमान के बीच स्थित एक संकरा जलमार्ग है. इस क्षेत्र से दुनिया का 25% ऑयल 20% नैचुरल गैस का ट्रेड होता है. ईरान के ऊपर हमला हुआ तो वह इस क्षेत्र में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछा सकता है, जिससे समुद्री यातायात में बाधा आएगी और यह रुकावट वैश्विक ऊर्जा बाजारों को प्रभावित करेगी. तेल के दाम बढ़ेंगे, दुनिया भर में महंगाई बढ़ सकती है. ईरान ने 1980 के दशक में इराक के साथ युद्ध के दौरान पहले भी जहाज मार्गों में बारूदी सुरंगें बिछाई थीं.  ये भी पढ़ें:- ईरान पर हमला करने के लिए कहां खड़ी है US आर्मी? ट्रंप ने शिया मुल्क को 10-15

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AI इंपैक्ट समिट में यूथ कांग्रेस का हंगामा, सामने आया वीडियो

Bharat Mandapam Protest : इंडियन यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने हिंदुस्तान मंडपम में विरोध प्रदर्शन किया और मोदी विरोधी नारे लगाए. इसका वीडियो सामने आया है. न्यूज एजेंसी एएनआई ने वीडियो जारी किया है. इस वीडियो में नजर आ रहा है कि कुछ लोग हाथ में टी शर्ट लेकर नरेबाजी कर रहे हैं. देखें वीडियो. Delhi Police says it is taking legal action in connection with the protest by the Indian Youth Congress. https://t.co/eygMgM5aHs — ANI (@ANI) February 20, 2026 दिल्ली पुलिस ने मामले को लेकर कहा कि वह इंडियन यूथ कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के संबंध में कानूनी कार्रवाई कर रही है. दिल्ली पुलिस के अनुसार, चार से पांच लोगों को हिरासत में लिया गया है. पुलिस यह जांच कर रही है कि वे पास या QR कोड के साथ अंदर आए थे या नहीं. Indian Youth Congress Bharat Mandapam protest | According to Delhi Police, four to five people have been detained. They are checking whether they entered with a pass or a QR code. — ANI (@ANI) February 20, 2026 यह एक चरित्रहीन, बुद्धिहीन और भावनाहीन प्रदर्शन : शहजाद पूनावाला प्रदर्शन पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस ने फिर साबित कर दिया कि उनके लिए AI का मतलब ‘अम्बिशियस इंडिया’, ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ या ‘असपिरेशनल इंडिया’ नहीं है. उनके लिए AI का मतलब है हिंदुस्तान के खिलाफ. यह अब INC नहीं, बल्कि ANC यानी एंटी-नेशनल कांग्रेस है. AI समिट को दुनियाभर में सराहा जा रहा है. राष्ट्रपति मैक्रॉन से लेकर संयुक्त राष्ट्र महासचिव और शीर्ष टेक कंपनियों के प्रमुखों तक, सैम ऑल्टमैन से सुंदर पिचाई तक, सभी इसकी प्रशंसा कर रहे हैं. #WATCH | On the protest by Indian Youth Congress workers at Delhi’s Bharat Mandapam, BJP National Spokesperson Shehzad Poonawalla says, “Congress has once again proven that for them, AI isn’t Ambitious India, Artificial Intelligence, Aspirational India. For them, AI is… pic.twitter.com/ygTASuLxC0 — ANI (@ANI) February 20, 2026 उन्होंने कहा कि यहां तक कि शशि थरूर ने भी कहा कि AI समिट उत्कृष्ट था. लेकिन राहुल गांधी के कहने पर कांग्रेस पार्टी प्रदर्शन कर रही है. यह एक बुद्धिहीन और भावनाहीन प्रदर्शन है. यह प्रदर्शन BJP के खिलाफ नहीं, प्रधानमंत्री के खिलाफ नहीं, बल्कि हिंदुस्तान की उपलब्धियों के खिलाफ है. यह भी पढ़ें : Pax Silica क्या है, जिसमें अमेरिका के साथ शामिल हुआ हिंदुस्तान? AI सप्लाई चेन से जुड़ा है मामला प्रदर्शन पर उदय भानु छिब ने क्या कहा? हिंदुस्तानीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु छिब कहते हैं कि आज युवा कांग्रेस के सदस्य AI समिट में गए और नारे लगाए, ‘PM is compromised.’ यह गुस्सा केवल हमारे युवा कांग्रेस सदस्यों का नहीं है. यह हर उस युवा का है जो आज बेरोजगार है. हर कोई जानता है कि हमारे प्रधानमंत्री समझौते में फंसे हुए हैं. अमेरिका के साथ यह व्यापार समझौता हमारे किसानों और आम लोगों को नुकसान पहुंचाएगा. सिर्फ अमेरिका को फायदा होगा. उनकी आवाज उठाना हमारा कर्तव्य है. हमारे देश में लोकतंत्र है. हम कहीं भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर सकते हैं. #WATCH | Delhi | National President of the Indian Youth Congress, Uday Bhanu Chib, says, “Today, Youth Congress members went to the AI ​​Summit and raised slogans, ‘PM is compromised.’ This anger isn’t just from our Youth Congress members. It’s from every young person who is… pic.twitter.com/SjuoRdBlGC — ANI (@ANI) February 20, 2026 The post AI इंपैक्ट समिट में यूथ कांग्रेस का हंगामा, सामने आया वीडियो appeared first on Naya Vichar.

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जेपीएससी सिविल सेवा संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा अभ्यर्थियों को राहत, फॉर्म भरने की मिली छूट

रांची से राणा प्रताप सिंह की रिपोर्ट JPSC Civil Services Exam 2025: जेपीएससी सिविल सेवा संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा 2025 में उम्र सीमा में छूट की मांग को लेकर दायर दर्जनों याचिका पर सुनवाई हुई. हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने अभ्यर्थियों को फॉर्म भरने की छूट प्रदान करते हुए राज्य प्रशासन और जेपीएससी को जवाब दायर करने का निर्देश दिया. अगली सुनवाई 1 अप्रैल को होगी. अदालत ने अपने अंतरिम आदेश में कहा है कि इन अभ्यर्थियों का रिजल्ट अदालत की अनुमति के बिना प्रकाशित नहीं की जाएगी. 13 फरवरी को 22 अभ्यर्थियों को मिली थी छूट झारखंड हाइकोर्ट से संयुक्त सिविल सेवा प्रतियोगिता परीक्षा-2025 के 22 अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है. उम्र सीमा में छूट को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने अंतरिम आदेश जारी किया है. अदालत के इस फैसले से अभ्यर्थियों को फिलहाल ऑनलाइन परीक्षा फॉर्म भरने का मौका मिल गया है. याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि वर्ष 2016 और 2017 की संयुक्त सिविल सेवा परीक्षाओं में अधिकतम उम्र सीमा में छूट दी गई थी. इसके अलावा, वर्ष 2021 की नियमावली में भी ऊपरी उम्र सीमा में छूट देने का प्रावधान है. 15 फरवरी को होगी परीक्षा जेपीएससी की ओर से झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा (सीधी भर्ती) (सिविल सेवा) प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) अब 15 मार्च को ली जायेगी. पूर्व में आयोग ने पीटी की तिथि आठ मार्च 2026 तय की थी. आयोग ने झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा (बैकलॉग भर्ती) प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) -2025 अब 12 अप्रैल को तथा झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा (बैकलॉग भर्ती) प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) 2023, 26 अप्रैल को लेने की संभावित तिथि रखी है. पूर्व में दोनों परीक्षा क्रमश: 15 मार्च और 22 मार्च को तय की गयी थी. 20 फरवरी ऑनलाइन फॉर्म भरने की लास्ट डेट परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 20 फरवरी (अपराह्न पांच बजे तक) निर्धारित की गयी है. जबकि परीक्षा शुल्क भुगतान करने की अंतिम तिथि 21 फरवरी (अपराह्न पांच बजे तक) निर्धारित की गयी है. इसे भी पढ़ें: झारखंड में बच्चा चोरी की अफवाह से हिंसक हुई भीड़, पीटे जा रहे बेकसूर 103 पदों पर होनी है नियुक्ति जेपीएससी की ओर से 103 पदों पर नियुक्ति के लिए सिविल सेवा-2025 की परीक्षा ली जा रही है. इसमें उपसमाहर्ता के 28 पद, डीएसपी के 42 पद, जिला समादेष्टा के 02 पद, प्रोबेशन पदाधिकारी के चार पद, स्त्री बाल विकास व सामाजिक सुरक्षा विभाग में सहायक निदेशक के तीन पद, कृषि व सहकारिता विभाग में सहायक निबंधक के दो पद, सहायक नगर आयुक्त के 10 पद, काराधीक्षक के दो पद व सहायक निदेशक सह जिला जनसंपर्क अधिकारी के 10 पद शामिल हैं. इसे भी पढ़ें: झारखंड में बच्चा चोरी की अफवाह से खौफ, घाटशिला बच्चों को आंगनबाड़ी नहीं भेज रहे ग्रामीण The post जेपीएससी सिविल सेवा संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा अभ्यर्थियों को राहत, फॉर्म भरने की मिली छूट appeared first on Naya Vichar.

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बर्तन धोने वाले पाकिस्तानी कप्तान पर लगा बैन, PHF अध्यक्ष का इस्तीफा

Highlights सिडनी में रास्तों पर भटके खिलाडी  कप्तान शकील बट पर दो साल का बैन  तारिक का इस्तीफा और पीएम से अपील  फंड को लेकर बोर्ड और फेडरेशन आमने-सामने  FIH प्रो लीग में पाकिस्तान का खराब प्रदर्शन  Ammad Shakeel Butt Banned: पाकिस्तान हॉकी टीम में चल रहा विवाद अब एक बडे संकट में बदल गया है. ऑस्ट्रेलिया दौरे पर हुए खराब इंतजाम के खिलाफ आवाज उठाने पर कप्तान अहमद शकील बट (Ammad Shakeel Butt) पर पाकिस्तान हॉकी फेडरेशन (PHF) ने दो साल का कडा बैन लगा दिया है. इस फैसले के तुरंत बाद फेडरेशन के अध्यक्ष तारिक बुगती (Tariq Bugti) ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.  यह मामला तब सामने आया जब सिडनी के रास्तों पर पाकिस्तानी खिलाडियों के अपने सामान के साथ खडे होने का वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ. यह पूरा विवाद खिलाडियों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं की कमी और फण्ड के गायब होने से जुडा है. सिडनी में रास्तों पर भटके खिलाडी  विवाद की जड ऑस्ट्रेलिया का वह दौरा है जहां पाकिस्तानी टीम को भारी परेशानियों का सामना करना पडा. कप्तान शकील बट ने पाकिस्तान लौटकर लाहौर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और फेडरेशन की पोल खोली. उन्होंने साफ बताया कि ऑस्ट्रेलिया में उनके रुकने का कोई इंतजाम नहीं किया गया था. होटल न मिलने के कारण पूरी टीम को अपना सामान लेकर रास्तों पर भटकना पडा. हालात इतने खराब थे कि मैच स्पोर्ट्सने जाने से पहले खिलाडियों को अपने बर्तन खुद धोने पडे. इसके साथ ही कप्तान ने यह भी बताया कि टीम को पिछले एक साल से अंतर्राष्ट्रीय दौरों पर मिलने वाला रोज का खर्चा (दैनिक भत्ता) तक नहीं दिया गया है. कप्तान शकील बट पर दो साल का बैन  इन दावों के सार्वजनिक होने के बाद पाकिस्तान हॉकी फेडरेशन ने सख्त कदम उठाया. फेडरेशन अध्यक्ष तारिक बुगती ने कप्तान शकील बट पर संस्था की छवि खराब करने का आरोप लगाया और उन पर दो साल का बैन लगा दिया. इसके अलावा, टीम के कोच ने भी कप्तान पर अनुशासनहीनता और साथी सदस्यों के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप लगाया है. इन विवादों के बीच कोच ने भी अपना पद छोडने की पेशकश कर दी है. तारिक का इस्तीफा और पीएम से अपील  कप्तान पर बैन लगाने के बाद PHF अध्यक्ष तारिक बुगती ने खुद भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने इस पूरी बदइंतजामी का दोष पाकिस्तान स्पोर्ट्स बोर्ड (PSB) पर मढा है. बुगती ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से अपील की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए. उनका कहना है कि फेडरेशन को समय पर फण्ड नहीं मिला जिसके कारण ऑस्ट्रेलिया में खिलाडियों को यह सारी परेशानी उठानी पडी. फंड को लेकर बोर्ड और फेडरेशन आमने-सामने  इस मामले में पाकिस्तान स्पोर्ट्स बोर्ड का बयान फेडरेशन के दावों से बिल्कुल अलग है. PSB का दावा है कि उन्होंने खिलाडियों के होटल और ऑस्ट्रेलिया दौरे के अन्य खर्चों के लिए एक भारी-भरकम राशि पहले ही फेडरेशन को भेज दी थी. दोनों संस्थाओं के अलग-अलग बयानों से अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिर वह पैसा गया कहां. पैसों के इस हेरफेर को लेकर स्पोर्ट्स विभाग में हडकंप मचा हुआ है और हर कोई जवाबदेही की मांग कर रहा है. FIH प्रो लीग में पाकिस्तान का खराब प्रदर्शन  इस प्रशासनिक कलह का सीधा असर पाकिस्तान हॉकी टीम के स्पोर्ट्स पर देखने को मिल रहा है. FIH प्रो लीग जैसे अहम टूर्नामेंट में पाकिस्तान का प्रदर्शन बेहद खराब रहा है. टीम अपने सभी 8 मैच हार चुकी है और टूर्नामेंट की अंक तालिका में सबसे निचले स्थान पर बनी हुई है. सुविधाओं की कमी और बोर्ड के अंदर चल रही नेतृत्व के कारण स्पोर्ट्स का स्तर लगातार गिर रहा है. इन विवादों से पाकिस्तान हॉकी और खिलाडियों के भविष्य को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंच रहा है. ये भी पढ़ें- हमसे बर्तन साफ करवाए, पाकिस्तान हॉकी टीम की बेईज्जती, कप्तान का बड़ा खुलासा क्या ऑस्ट्रेलिया का हारना पाकिस्तान के लिए शुभ? इस वायरल दावे की हकीकत जानें 41 साल के नबी का कमाल, T20WC में कनाडा के खिलाफ बनाया महारिकॉर्ड The post बर्तन धोने वाले पाकिस्तानी कप्तान पर लगा बैन, PHF अध्यक्ष का इस्तीफा appeared first on Naya Vichar.

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