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Author name: Vinod Jha

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Dual Citizenship: क्या एक साथ ले सकते हैं दो देशों की नागरिकता? जानें कानून

Dual Citizenship: हर साल लाखों हिंदुस्तानीय विदेश जाते हैं, कुछ पढ़ाई के लिए तो कुछ नौकरी और व्यापार के लिए. हिंदुस्तानीय प्रवासी खासतौर पर अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और मिडिल ईस्ट जैसे देशों में बसते हैं. आमतौर पर विकसित देशों में बसने वाले हिंदुस्तानीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए वहां की नागरिकता ले लेते हैं, जिससे उन्हें हिंदुस्तानीय नागरिकता छोड़नी पड़ती है. इसके बाद जब भी उन्हें हिंदुस्तान आना होता है, तो वीजा लेना जरूरी हो जाता है. इस समस्या को हल करने के लिए हिंदुस्तान प्रशासन ओसीआई (ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया) कार्ड जारी करती है. हालांकि, इसे दोहरी नागरिकता नहीं माना जाता. आइए जानते हैं कि हिंदुस्तान में दोहरी नागरिकता का क्या नियम है और ओसीआई कार्ड कैसे काम करता है. हिंदुस्तान में दोहरी नागरिकता की स्थिति दुनिया के कई देशों जैसे अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, स्वीडन, नॉर्वे, ब्रिटेन, आयरलैंड, फिनलैंड और न्यूजीलैंड में दोहरी नागरिकता की अनुमति है. लेकिन हिंदुस्तान में ऐसा नहीं है. हिंदुस्तानीय संविधान दोहरी नागरिकता को मान्यता नहीं देता. नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 7ए के अनुसार, हिंदुस्तान प्रशासन केवल हिंदुस्तानीय मूल के कुछ लोगों को ओसीआई कार्ड जारी करती है, जिससे वे हिंदुस्तान से जुड़े रह सकें. ओसीआई कार्ड क्या है? ओसीआई कार्ड एक ऐसी विशेष सुविधा है, जो उन लोगों के लिए बनाई गई है, जिन्होंने किसी अन्य देश की नागरिकता ले ली है लेकिन हिंदुस्तान से उनका भावनात्मक और पारिवारिक संबंध बना हुआ है. पहले, 2003 में हिंदुस्तान प्रशासन ने पीआईओ (पर्सन ऑफ इंडियन ओरिजिन) कार्ड जारी किया था, जो 10 साल तक मान्य होता था. लेकिन 2006 में ओसीआई कार्ड योजना शुरू की गई और 2015 में पीआईओ कार्ड को समाप्त कर दिया गया. क्या ओसीआई कार्ड दोहरी नागरिकता है? कई लोग यह मान लेते हैं कि ओसीआई कार्ड प्राप्त करना दोहरी नागरिकता लेने के बराबर है, लेकिन ऐसा नहीं है. ओसीआई कार्ड केवल हिंदुस्तान में रहने और यात्रा की सुविधाएं देता है, यह हिंदुस्तानीय नागरिकता नहीं देता. ओसीआई कार्ड होल्डर को लाइफटाइम वीजा की सुविधा मिलती है, जिससे वह बिना वीजा के हिंदुस्तान आ सकता है. लेकिन वह हिंदुस्तान का पूर्ण नागरिक नहीं माना जाता और कुछ अधिकारों से वंचित रहता है. इसे भी पढ़ें: पाकिस्तानी लड़कियों को चाहिए हिंदुस्तानी दूल्हा? धर्म बदलने को तैयार ओसीआई कार्ड कौन प्राप्त कर सकता है? हिंदुस्तान प्रशासन ओसीआई कार्ड उन्हीं लोगों को जारी करती है, जिन्होंने 26 जनवरी 1950 के बाद हिंदुस्तानीय नागरिकता रखी हो या जिनके माता-पिता हिंदुस्तानीय नागरिक रहे हों. हालांकि, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, अफगानिस्तान और ईरान के नागरिकों को यह सुविधा नहीं दी जाती. ओसीआई कार्ड होल्डर्स को हिंदुस्तान में रहने, काम करने और आर्थिक लेन-देन की अनुमति होती है. यह कार्ड जीवनभर मान्य रहता है. ओसीआई कार्ड होल्डर्स के लिए प्रतिबंध ओसीआई कार्ड होल्डर्स को कई अधिकार मिलते हैं, लेकिन कुछ प्रतिबंध भी लगाए गए हैं: वे हिंदुस्तान में चुनाव नहीं लड़ सकते. उन्हें हिंदुस्तान में वोट डालने का अधिकार नहीं होता. वे प्रशासनी नौकरी या संवैधानिक पद पर नियुक्त नहीं हो सकते. वे हिंदुस्तान में खेती की जमीन नहीं खरीद सकते. इसे भी पढ़ें: 5000 मौत, हिंदू इलाका और एक काली रात, जिंजीरा नरसंहार की दर्दनाक कहानी ओसीआई कार्ड होल्डर और एनआरआई में अंतर कई लोग एनआरआई (अनिवासी हिंदुस्तानीय) और ओसीआई कार्ड होल्डर को एक जैसा मान लेते हैं, लेकिन दोनों अलग हैं. एनआरआई वह व्यक्ति होता है, जिसके पास हिंदुस्तानीय पासपोर्ट होता है लेकिन वह विदेश में रहता है. अगर कोई व्यक्ति किसी वित्तीय वर्ष में 183 दिनों से अधिक विदेश में रहता है, तो उसे एनआरआई माना जाता है. एनआरआई को हिंदुस्तान में वोट डालने का अधिकार होता है, जबकि ओसीआई कार्ड होल्डर को नहीं. हिंदुस्तान में दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं है, लेकिन विदेशों में बसे हिंदुस्तानीयों को हिंदुस्तान से जोड़े रखने के लिए ओसीआई कार्ड की सुविधा दी गई है. यह कार्ड उन्हें हिंदुस्तान आने और यहां रहने की विशेष अनुमति देता है. हालांकि, वे हिंदुस्तानीय नागरिकों के समान सभी अधिकारों का उपयोग नहीं कर सकते. ओसीआई कार्ड हिंदुस्तान प्रशासन द्वारा प्रवासी हिंदुस्तानीयों को उनके हिंदुस्तानीय मूल से जोड़ने के लिए उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है. इसे भी पढ़ें: 2900 का LPG गैस, 1200 रुपए किलो मांस, टमाटर, प्याज, केला सब महंगा, देखें लिस्ट The post Dual Citizenship: क्या एक साथ ले सकते हैं दो देशों की नागरिकता? जानें कानून appeared first on Naya Vichar.

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सरहुल की तरह रामनवमी के दिन नहीं होनी चाहिए बिजली कटौती, JBVNL को हाईकोर्ट का आदेश

High Court on Power Cut: आदिवासियों के महापर्व सरहुल के दिन झारखंड की राजधानी रांची में घंटों पावर कट पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जतायी है. साथ ही जेबीवीएनएल को निर्देश दिया है कि सरहुल की तरह रामनवमी के दिन रांची में बिजली कटौती नहीं होनी चाहिए. झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव और जस्टिस दीपक रोशन की बेंच ने बृहस्पतिवार 3 अप्रैल को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) को पावर कट के लिए कड़ी फटकार लगायी. कोर्ट ने कहा कि अत्यधिक खराब मौसम और इमरजेंसी की स्थिति न हो, तो सरहुल की तरह रामनवमी के दिन पावर कट नहीं होनी चाहिए. इतना ही नहीं, कोर्ट ने राज्य प्रशासन से कहा है कि वह रामनवमी जुलूस के आयोजकों को बता दें कि निश्चित ऊंचाई से बड़े झंडे न निकालें. इस आदेश का सख्ती से पालन भी प्रशासन करवाये. सरहुल के दिन 5 से 10 घंटे तक गुल रही थी बिजली सरहुल के दिन राजधानी रांची में करीब 5 से 10 घंटे तक बिजली काट दी गयी थी. झारखंड हाईकोर्ट में इस मामले में एक जनहित याचिका दाखिल की गयी थी, जिस पर बृहस्पतिवार को चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली 2 सदस्यीय बेंच में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान एडवोकेट जनरल ने कोर्ट को बताया कि 1 अप्रैल 2025 को सरहुल के दिन रांची के अलग-अलग हिस्सों में 5 से 10 घंटे तक के लिए बिजली काटी गयी थी. एडवोकेट जनरल ने कहा कि दिन में 1 बजे से रात के 11 बजे के बीच बिजली कटौती की गयी. गर्मी में बिजली कटौती से लोगों को होती है परेशानी एडवोकेट जनरल की दलील सुनने के बाद चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि बिजली की सप्लाई आवश्यक सेवा है. गर्मी का मौसम आ गया है. ऐसे में जेबीवीएनएल की ओर से बिजली सप्लाई काटने की वजह से शहर के अधिकतर बुजुर्ग, बीमार और छोटे बच्चों के साथ-साथ परीक्षा देने वाले विद्यार्थी और गर्भवती स्त्रीओं को परेशानी होती है. इतना ही नहीं, व्यापारियों को भी इसकी वजह से नुकसान होता है. प्रशासनी और निजी अस्पतालों में मरीजों का इलाज प्रभावित होता है. झारखंड की ताजा समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें एजी बोले- दुर्घटनाओं को रोकने के लिए बिजली कटौती जरूरी इससे पहले एडवोकेट जनरल ने कोर्ट के सामने दलील दी कि सरहुल के दिन बिजली की कटौती अनिवार्य थी, क्योंकि लोग बड़े-बड़े झंडे लेकर शोभायात्रा में शामिल होते हैं. इससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. उन्होंने कोर्ट को बताया कि वर्ष 2000 में सरहुल महोत्सव के दौरान ऐसी एक घटना हो चुकी है, जिसमें 29 लोगों की मौत हो गयी थी. एडवोकेट जनरल ने कोर्ट में कहा कि 6 अप्रैल 2025 को रामनवमी और 6 जुलाई 2025 को मुहर्रम के दिन भी ऐसे ही पावर कट की जरूरत होगी. दुर्घटनाओं के डर से लोग यात्रा करना नहीं छोड़ते – झारखंड हाईकोर्ट चीफ जस्टिस की बेंच ने कहा कि यात्रा के दौरान कई बार हादसे हो जाते हैं, जब लोग सड़क, ट्रेन या हवाई जहाज से यात्रा करते हैं. इसकी वजह से कोई यात्रा करना नहीं छोड़ दिया. इसलिए दुर्घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की जरूरत है. शोभायात्रा निकालने की अनुमति देने वाले प्रशासनी प्राधिकारों को झंडे की ऊंचाई तय करनी चाहिए, ताकि वे जेबीवीएनएल के द्वारा लगाये गये बिजली के तार के संपर्क में न आ सकें. शोभायात्रा में झंडे की ऊंचाई तय करें – कोर्ट हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि शोभायात्रा निकालने वालों को यह भी सूचित कर देना चाहिए कि एक निश्चित ऊंचाई से ज्यादा ऊंचे झंडे लेकर जाने की अनुमति नहीं दी जायेगी. चीफ जस्टिस ने कहा कि राज्य प्रशासन कानूनी एजेंसियों के द्वारा इसका अनुपालन सुनिश्चित कराये. कोर्ट ने कहा कि समय रहते आयोजकों को इसकी जानकारी दे दें और यह स्पष्ट कर दें कि उन्हें इसका पालन करना ही होगा. 9 अप्रैल 2025 को होगी केस की सुनवाई चीफ जस्टिस की बेंच ने जेबीवीएनएल को निर्देश दिया कि जब तक बहुत जरूरी नहीं हो, तब तक 1 अप्रैल 2025 की तरह रामनवमी के दिन 6 अप्रैल 2025 को बिजली की कटौती नहीं करे. कोर्ट ने सभी पक्षों को 9 अप्रैल तक इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया. इसके साथ ही चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव ने केस की सुनवाई की अगली तारीख 9 अप्रैल 2025 मुकर्रर कर दी. इसे भी पढ़ें 3 अप्रैल को आपको कितने में मिलेगा 14 किलो का एलपीजी सिलेंडर, एक-एक शहर की कीमत यहां चेक करें रांची के रास्ते बिहार, महाराष्ट्र और दक्षिण हिंदुस्तान जाने वाली 4 ट्रेनें रहेंगी रद्द, यहां चेक करें डिटेल पलामू पुलिस की बड़ी सफलता, टीएसपीसी के 1 लाख के इनामी उग्रवादी जीबलाल यादव को किया गिरफ्तार रामनवमी से पहले हेमंत सोरेन से मिला महावीर मंडल का प्रतिनिधिमंडल The post सरहुल की तरह रामनवमी के दिन नहीं होनी चाहिए बिजली कटौती, JBVNL को हाईकोर्ट का आदेश appeared first on Naya Vichar.

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Darbhanga News- समस्तीपुर मंडल द्वारा दरभंगा रेलवे स्टेशन पर 5 अप्रैल को विशेष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन

नया विचार समस्तीपुर– समस्तीपुर मंडल, महावीर इंटरनेशनल, दिल्ली के सहयोग से दरभंगा रेलवे स्टेशन पर एक विशेष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन करने जा रहा है। यह शिविर शनिवार, 5 अप्रैल 2025 को रेलवे स्टेशन के वीआईपी रूम में आयोजित किया जाएगा। सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलने वाले इस स्वास्थ्य शिविर में सभी रेल कर्मचारियों तथा रेलवे में अनुबंध पर कार्य कर रहे कर्मचारियों को विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं की निःशुल्क सुविधा प्रदान की जाएगी।इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का उद्घाटन हिंदुस्तानीय राजस्व सेवा (आईआरएस) अधिकारी एवं हिंदुस्तानीय पैकेजिंग संस्थान, मुंबई के निदेशक तथा अतिरिक्त महानिदेशक (विदेश व्यापार) श्री राजेश कुमार मिश्रा द्वारा किया जाएगा। इस स्वास्थ्य जांच शिविर में स्वास्थ्य सेवाओं के अंतर्गत विभिन्न चिकित्सा जांच, परामर्श सेवाएं प्रदान की जाएंगी एवं जागरूकता कार्यक्रमों का संचालन किया जाएगा।इस कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि मंडल रेल प्रबंधक, समस्तीपुर, श्री विनय श्रीवास्तव होंगे। मंडल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक श्री सुनील कुमार सहित अन्य वरिष्ठ डॉक्टर एवं अधिकारी भी इस स्वास्थ्य शिविर में भाग लेंगे और अपनी सेवाएं प्रदान करेंगे।स्वास्थ्य शिविर का उद्देश्य रेल कर्मचारियों तथा रेलवे में अनुबंध पर कार्य कर रहे सभी कर्मचारियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना, चिकित्सा सेवाओं की समय पर पहुंच सुनिश्चित करना तथा स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यह पहल सभी कर्मचारियों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी।

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Zomato layoffs: फूड डिलीवरी कंपनी ने इतने कर्मचारियों को नौकरी से निकाला! सामने आई ऐसी वजह

Zomato layoffs in Hindi: फूड डिलीवरी कंपनी Zomato ने अपने कस्टमर सपोर्ट डिपार्टमेंट से सैकड़ों कर्मचारियों की छंटनी की है. यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब कंपनी की ग्रोथ धीमी हो रही है और उसके क्विक डिलीवरी प्लेटफॉर्म Blinkit को नुकसान झेलना पड़ रहा है. कंपनी की ओर से लगभग 600 कर्मचारियों को निकाला गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फूड कंपनी Zomato ने हाल ही में अपना AI-बेस्ड कस्टमर सपोर्ट सिस्टम ‘Nugget’ लॉन्च किया और यह हर महीने लाखों कस्टमर इंटरेक्शन को संभाल रहा है. यह सिस्टम कई मामलों को बिना किसी मानवीय सहायता के हल कर सकता है और इससे कंपनी की लागत कम हो रही है.  इस आधार पर नौकरियों से निकाला गया (Zomato layoffs News) गुरुग्राम स्थित फर्म ने एक साल पहले अपने जोमैटो एसोसिएट एक्सेलेरेटर प्रोग्राम (ZAAP) के तहत कस्टमर सपोर्ट के लिए 1,500 से अधिक लोगों को हायर किया गया था. मनीकंट्रोल के मुताबिक, जिन पूर्व और वर्तमान कर्मचारियों से बात की तो जानकारी सामने आई कि प्रभावित कर्मचारियों को मुआवजे के रूप में एक महीने का वेतन देने की पेशकश की गई और खराब प्रदर्शन और खराब समय की पाबंदी जैसे कारण बताते हुए बगैर नोटिस अवधि के उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया. यह भी पढ़ें- CBSE Exam 2025: सीबीएसई ने इन स्टूडेंट्स के लिए जारी की 10वीं-12वीं की नई डेटशीट, देख लें परीक्षाओं की तारीख एआई-आधारित सपोर्ट सिस्टम तनावपूर्ण माहौल (Zomato layoffs News) कर्मचारियों ने यह भी कहा कि जोमैटो के एआई-आधारित सपोर्ट सिस्टम की वजह से लोगों की नौकरियों पर संकट है और माहौल तनावपूर्ण है. इससे पहले दिसंबर 2022 में भी जोमैटो ने 100 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला था. टैब ड्रॉ प्रोडक्ट्स, टेक, आर्किटेक्चर और मार्केटिंग डिपार्टमेंट में शामिल थे. नोट- जोमेटो कंपनी ने इस छंटनी के बारे में कोई ऑफिशियल अनाउंसमेंट नहीं किया है. The post Zomato layoffs: फूड डिलीवरी कंपनी ने इतने कर्मचारियों को नौकरी से निकाला! सामने आई ऐसी वजह appeared first on Naya Vichar.

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Waqf Act: नये वक्फ कानून से गरीबों को मुख्यधारा से जोड़ने में मिलेगी मदद

Waqf Act: वक्फ संशोधन विधेयक लंबी चर्चा के बाद लोकसभा से पारित हो चुका है. विधेयक पर राज्यसभा में चर्चा जारी है. राज्यसभा से पारित होने के बाद विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा और फिर यह कानून बन जायेगा. इस विधेयक का विरोध तमाम विपक्षी दल और कई मुस्लिम संगठन कर रहे हैं. वहीं प्रशासन का कहना है कि संशोधन विधेयक का मकसद वक्फ बोर्ड के कामकाज में पारदर्शिता लाना और गरीब मुसलमानों को मदद करना है. केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय के अनुसार वक्फ का मकसद हमेशा से गरीबों को शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, आवास और सहायता प्रदान करके समुदाय की मदद करना रहा है. लेकिन कुप्रबंधन, भ्रष्टाचार और अक्षमता जैसी समस्याओं के कारण वक्फ की संपत्तियों का उन लोगों तक लाभ नहीं पहुंचा, जिन्हें इसकी आवश्यकता है. वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 का मकसद वक्फ बोर्ड की प्रणाली को अधिक पारदर्शी, कुशल और गरीबी को कम करने पर केंद्रित करके इसे ठीक करना है. वक्फ प्रबंधन में एक बड़ी समस्या पारदर्शिता की कमी रही है. इससे भ्रष्टाचार और धन का दुरुपयोग होता है. नया विधेयक सभी वक्फ संपत्तियों को रिकॉर्ड करने के लिए एक डिजिटल पोर्टल तैयार करेगा. इससे उन्हें ट्रैक करना और ऑडिट करना आसान होगा. नये विधेयक का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि धन का दुरुपयोग न हो और गरीबों की मदद पर खर्च किया जाए. अनिवार्य वित्तीय ऑडिट और डिजिटल रिकॉर्ड के बल पर यह परिवर्तन भ्रष्टाचार को कम करेगा और वक्फ प्रबंधन को लोगों के प्रति अधिक जवाबदेह होगा.विधेयक यह सुनिश्चित करता है कि वक्फ की संपत्ति और धन का उपयोग गरीबों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए किया जाए. गरीबों की करेगा मदद नये विधेयक में प्रावधान किया गया है कि मुफ्त या कम लागत वाली स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए वक्फ की भूमि पर क्लीनिक और अस्पताल स्थापित करना. चिकित्सा सहायता कार्यक्रमों को निधि देने के लिए चैरिटी के साथ साझेदारी करना. गरीब क्षेत्रों में दवाइयों और आवश्यक उपचारों का विस्तार करना. बेहतर प्रबंधन होने पर अधिक लोगों को स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच मिलेगी, जिससे चिकित्सा की लागत कम होगी और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार होगा. शिक्षा गरीबी से लड़ने का एक महत्वपूर्ण तरीका है. विधेयक यह सुनिश्चित करता है कि वक्फ फंड का उपयोग स्कूलों और मदरसों का निर्माण और रखरखाव, गरीब छात्रों को छात्रवृत्ति और वित्तीय सहायता प्रदान करने, रोजगार संबंधी कौशल सिखाने के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्रों का समर्थन करना, शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करके, यह विधेयक गरीब पृष्ठभूमि के लोगों को बेहतर रोजगार पाने और उनके जीवन को बेहतर बनाने में मदद करेगा. कई गरीब लोग आवास के लिए संघर्ष करते हैं. यह विधेयक वक्फ बोर्डों को किफायती आवास के लिए संपत्ति का उपयोग करने की अनुमति देता है. विधेयक की धारा 32(4) के तहत गरीबों के लिए कम लागत वाले आवास का निर्माण, बेघर लोगों के लिए आश्रय प्रदान करना, कम आय वाले परिवारों के लिए रियायती किराए के कार्यक्रम बनाना. विधेयक यह सुनिश्चित करता है कि वक्फ संपत्तियों का उपयोग लोगों की मदद के लिए किया जाए, न कि उन्हें बेकार छोड़ दिया जाए या अवैध रूप से कब्जा कर लिया जाए. बढ़ईगीरी, सिलाई और डिजिटल साक्षरता जैसे कौशल के लिए प्रशिक्षण केंद्र स्थापित होंगे, लोगों को व्यवसाय शुरू करने में मदद करने के लिए छोटे ऋण दिए जायेंगे और प्रशिक्षित श्रमिकों को विभिन्न रोजगारों से जोड़ा जाएगा. अवैध कब्जे पर लगेगी रोक वक्फ संपत्तियों के साथ एक बड़ा मुद्दा अवैध कब्जे का है. वामसी पोर्टल के अनुसार लगभग 58898 वक्फ संपत्तियों पर अवैध रूप से कब्जा किया गया है. विधेयक में मजबूत कानूनी उपाय किए गए हैं. जैसे सामाजिक कल्याण परियोजनाओं के लिए अवैध रूप से कब्ज़ा की गई वक्फ भूमि को पुनः प्राप्त करना, जिला कलेक्टरों को वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा के लिए अधिक शक्ति देना, अनधिकृत दावों को रोकना जो गरीबों के लिए बने संसाधनों को छीन लेते हैं. ये कदम यह सुनिश्चित करेंगे कि वक्फ संपत्तियों का उपयोग जरूरतमंदों की मदद के लिए सही तरीके से किया जाए. यह विधेयक निष्पक्षता और समावेशिता भी सुनिश्चित करता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि सहायता सभी जरूरतमंद समुदायों तक पहुंचे. यह गरीब लोगों को प्राथमिकता देता है और वक्फ संसाधनों के बारे में बेहतर निर्णय लेने के लिए डेटा का उपयोग करता है. इसके अतिरिक्त विधेयक में गैर-मुस्लिमों की भूमि पर विवादों को रोकने के उपाय शामिल हैं, ताकि कल्याणकारी प्रयासों में बाधा न आए. वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025, केवल संपत्तियों के प्रबंधन के बारे में नहीं है. यह गरीबों की मदद करने के लिए वक्फ को एक मजबूत माध्यम बनाने के बारे में है. पारदर्शिता बढ़ाने, भ्रष्टाचार को रोकने, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा में सुधार करने, किफायती आवास प्रदान करने और रोजगार का समर्थन करके, विधेयक यह सुनिश्चित करता है कि वक्फ अपने वास्तविक उद्देश्य को पूरा करें. वंचितों का समर्थन करके और एक निष्पक्ष तथा अधिक न्यायपूर्ण समाज स्थापित करने जैसे सुधारों के माध्यम से वक्फ अपने मूल मिशन को पूरा करने में सक्षम होगा. The post Waqf Act: नये वक्फ कानून से गरीबों को मुख्यधारा से जोड़ने में मिलेगी मदद appeared first on Naya Vichar.

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Bihar Best College: बिहार की इस यूनिवर्सिटी से निकले कई दिग्गज IAS-IPS, कहलाता है UPSC टॉपर फैक्ट्री

Bihar Best College: सिविल सर्विस को लेकर जुनून अगर देखना है तो बिहार के छात्रों से मिल लें. यही वजह है कि वर्षों से यूपीएससी सिविल सर्विस में बिहार के छात्रों ने इतिहास रचा है. इस कड़ी में आइए जानते हैं कि बिहार की किस यूनिवर्सिटी से सबसे ज्यादा आईएएस ऑफिसर निकले हैं. हालांकि इस यूनिवर्सिटी का रिकॉर्ड पिछले कुछ वर्षों में कम होता नजर आया है, लेकिन एक दौर था जब हर साल सिविल सर्वेंट यहीं से निकलते थे. Bihar Best College: पटना यूनिवर्सिटी सबसे अव्वल पटना यूनिवर्सिटी का नाम बिहार के टॉप कॉलेजों की लिस्ट में शामिल है. इस यूनिवर्सिटी की स्थापना वर्ष 1917 में हुई थी. इस यूनिवर्सिटी से संबद्ध कॉलेजों से कई दिग्गज निकल चुके हैं. पटना यूनिवर्सिटी से कई IAS और IPS भी निकल चुके हैं. ऐसे में इस यूनिवर्सिटी को UPSC टॉपर्स फैक्ट्री कहना गलत नहीं होगा. आइए इस यूनिवर्सिटी से निकले दिग्गज IAS-IPS के बारे में जानते हैं. IAS सुनील कुमार बरनवाल सुनील कुमार बरनवाल बिहार के सीनियर आईएएस अधिकारी हैं, जिन्होंने यूपीएससी परीक्षा में टॉप किया था. उनका जन्म 20 अगस्त 1970 को बिहार के गया जिले में हुआ था. सुनील कुमार की प्रारंभिक शिक्षा गया जिले में ही हुई है. इसके बाद उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की. इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से एमबीए की डिग्री प्राप्त की. IAS Rajiv Gauba: पूर्व कैबिनेट सेक्रेटरी हिंदुस्तान के कैबिनेट सेक्रेटरी रह चुके IAS राजीव गौबा भी पटना यूनिवर्सिटी के ही छात्र हैं. राजीव गौबा पटना यूनिवर्सिटी से बीएससी फिजिक्स में गोल्ड मेडलिस्ट रह चुके हैं. राजीव गौबा साल 2019 से कैबिनेट सेक्रेटरी के पद पर तैनात थें. पिछले साल वो इस पद से रिटायर हुए हैं. बता दें कि राजीव गौबा पटना यूनिवर्सिटी के पटना साइंस कॉलेज के छात्र रह चुके हैं. आचार्य किशोर कुणाल पूर्व आईपीएस आचार्य किशोर कुणाल ने पटना यूनिवर्सिटी से इतिहास और संस्कृत में ग्रेजुएशन किया. हाल ही में उनका निधन हो गया. आचार्य किशोर कुणाल अयोध्या मंदिर ट्रस्ट के संस्थापकों में से एक थे. वे 1972 में गुजरात कैडर से हिंदुस्तानीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी बने. साल 2000 में पुलिस से रिटायर होने के बाद उन्होंने केएसडी संस्कृत यूनिवर्सिटी दरभंगा के कुलपति का पद संभाला. IPS मेधा भूषण यूपीएससी सिविल सर्विस परीक्षा रैंक 185 प्राप्त करने वाली IPS मेधा भूषण भी पटना यूनिवर्सिटी की स्टूडेंट रही हैं. इन्होंने पटना विमेंस कॉलेज से इतिहास विषय से ग्रेजुएशन किया. उनके पिता एसबीआई में मैनेजर और माता दूरदर्शन में एंकर रह चुकी हैं. मेधा ने साल 2019 की यूपीएससी परीक्षा शानदार रैंक से हासिल की है. बिहार में UPSC टॉपर्स फैक्ट्री के नाम से मशहूर पटना यूनिवर्सिटी ने कई दिग्गजों को जन्म दिया है. इस यूनिवर्सिटी से असम के राज्यपाल रह चुके श्रीनिवास कुमार सिन्हा, बिहार के डिप्टी सीएम अनुग्रह नारायण सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान समेत कई हस्तियों ने पढ़ाई की है. ये भी पढ़ें: कितनी पढ़ी-लिखी हैं RBI की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता? World Bank और IMF में भी कर चुकी हैं काम The post Bihar Best College: बिहार की इस यूनिवर्सिटी से निकले कई दिग्गज IAS-IPS, कहलाता है UPSC टॉपर फैक्ट्री appeared first on Naya Vichar.

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Defense: भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए सेना को अपनानी होगी आधुनिक तकनीक

Defense: सेना कमांडरों का सम्मेलन नयी दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है. इस आयोजन में मौजूदा सुरक्षा स्थिति, सीमाओं पर हालात और मौजूदा सुरक्षा तंत्र के समक्ष चुनौतियों पर सेना के शीर्ष अधिकारियों का मंथन चल रहा है. सम्मेलन में संगठनात्मक पुनर्गठन, रसद, प्रशासन, मानव संसाधन प्रबंधन, स्वदेशीकरण के माध्यम से आधुनिकीकरण, आधुनिक तकनीक को शामिल करने और विभिन्न मौजूदा वैश्विक स्थितियों के प्रभाव के आकलन से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की गयी. सेना कमांडरों का सम्मेलन 1-4 अप्रैल तक चलेगा.  गुरुवार को सम्मेलन को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश के नागरिकों का सेना पर अटूट भरोसा है. सीमाओं की रक्षा करने और आतंकवाद से लड़ने के अलावा नागरिक प्रशासन को हर समय सहायता प्रदान करने में सेना ने अहम भूमिका निभाई है.  राष्ट्र निर्माण में हिंदुस्तानीय सेना की भूमिका अतुलनीय रक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्र निर्माण और समग्र राष्ट्रीय विकास में हिंदुस्तानीय सेना की भूमिका अतुलनीय है. राष्ट्र, वीर सैनिकों और उनके परिवार द्वारा किए गए बलिदानों का ऋणी है. उन्होंने मौजूदा भू-रणनीतिक अनिश्चितताओं और जटिल वैश्विक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि वर्तमान विश्व एक दूसरे से जुड़ा हुआ है और ऐसी घटनाएं चाहे हमारे पड़ोस में हो या दूर के देशों में सभी को प्रभावित करती है. हाइब्रिड युद्ध सहित अपरंपरागत और असममित युद्ध, भविष्य के पारंपरिक युद्धों का हिस्सा होंगे. साइबर, सूचना, संचार, व्यापार और वित्त सभी भविष्य के संघर्षों का अभिन्न अंग बन गए हैं. ऐसे में सशस्त्र बलों को योजना और रणनीति बनाते समय इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखना होगा.  भविष्य के लिए सेना को तैयार करना जरूरी उत्तरी सीमाओं पर मौजूदा स्थिति को लेकर रक्षा मंत्री ने सैनिकों पर भरोसा जताया. साथ ही बीआरओ के कठिन परिस्थितियों में काम करते हुए पश्चिमी और उत्तरी दोनों सीमाओं पर सड़क संपर्क सुविधाओं में सुधार के लिए सराहना की. पश्चिमी सीमाओं की मौजूदा स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने सीमा पार आतंकवाद को लेकर हिंदुस्तानीय सेना के कड़े रुख की सराहना की साथ ही जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खतरे से निपटने में अर्धसैनिक बलों, पुलिस बलों और सेना के बीच बेहतरीन तालमेल की प्रशंसा की.  तकनीकों के साथ सामंजस्य बनाने की जरूरत स्वदेशीकरण के माध्यम से आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता का लक्ष्य हासिल करना जरूरी है. रक्षा कूटनीति, स्वदेशीकरण, सूचना युद्ध, रक्षा ढांचा और सेना के आधुनिकीकरण से संबंधित मुद्दों पर ऐसे मंच पर विचार-विमर्श किया जाना चाहिए. सेना को भविष्य के लिए तैयार करने के लिए जब भी जरूरत हाे सैद्धांतिक परिवर्तन किया जाना चाहिए. उन्होंने उभरती हुई तकनीकों के साथ सशस्त्र बलों को सामंजस्य बनाने को कहा.  The post Defense: भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए सेना को अपनानी होगी आधुनिक तकनीक appeared first on Naya Vichar.

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हिंदुस्तान में वक्फ बोर्ड के पास 9.40 लाख एकड़ जमीन तो पाकिस्तान के पास कितनी?

India Pakistan Waqf Board Land: हिंदुस्तान में वक्फ बोर्डों के पास लगभग 9.4 लाख एकड़ भूमि है, जो विभिन्न धार्मिक, शैक्षिक और चैरिटेबल उद्देश्यों के लिए समर्पित है। इसमें 1,40,108 एकड़ जमीन पर खेती-बाड़ी की जाती है. 33056 एकड़ जमीन पर दरगाह, मजार और मकबरे बने हैं और 2042 एकड़ पर स्कूल और मकतब बने हैं. कहा जाता है कि हिंदुस्तान में रेलवे और रक्षा विभाग के बाद वक्फ बोर्ड के पास तीसरा सबसे अधिक जमीन है. वक्फ बोर्ड की सबसे अधिक संपत्ति उत्तर प्रदेश में है, जहां उसकी करीब 2,14,707 संपत्तियां हैं. इस बीच, सवाल यह भी पैदा होता है कि सन् 1947 में हिंदुस्तान से अलग हुए पाकिस्तान के वक्फ बोर्ड के पास कितनी संपत्ति है? आइए, उसके बारे में भी जानते हैं. पाकिस्तान में वक्फ बोर्ड को क्या कहते हैं? पाकिस्तान में वक्फ बोर्ड को औकाफ डिपार्टमेंट कहते हैं. पाकिस्तान में वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन प्रांतीय स्तर पर होता है. पंजाब प्रांत: पाकिस्तान की प्रशासनी वेबसाइट auqaf.punjab.gov.pk के अनुसार, पंजाब औक़ाफ़ विभाग के अधीन कुल 74,964 एकड़ भूमि है, जिसमें 29,907 एकड़​ उपजाऊ और 45,057 एकड़​ अनुपजाऊ भूमि है. कमर्शियल में 6,179​ दुकानें और 1,426​ घर हैं. सिंध औकाफ डिपार्टमेंट: सिंध के औकाफ डिपार्टमेंट के पास 10,823 एकड़​ कृषि भूमि, 2,226​ दुकानें, 19​ गोदाम, 810 फ्लैट्स हैं. सन् 2024 में इन संपत्तियों से विभाग ने 103 मिलियन रुपये का राजस्व प्राप्त किया. खैबर पख्तूनख्वा औकाफ डिपार्टमेंट: खैबर पख्तूनवा औकाफ डिपार्टमेंट के पास कुल 65,108 कनाल (लगभग 8,138 एकड़) भूमि है. बलूचिस्तान औकाफ डिपार्टमेंट: बलूचिस्तान में औकाफ विभाग ETPB के अधीन केवल 2 एकड़ भूमि है. इसे भी पढ़ें: लालू यादव के पास कितनी है संपत्ति, हर महीने कितना पाते हैं पेंशन? वक्फ बोर्ड से काफी कम है औकाफ डिपार्टमेंट की जमीन अब अगर उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर तुलना करें, पाकिस्तान के चारों प्रांत पंजाब, सिंध, खैबर पख्तूनवा और बलूचिस्तान के औकाफ डिपार्टमेंट के पास उतनी जमीन नहीं है, जितनी हिंदुस्तान के वक्फ बोर्ड के पास है. पाकिस्तान के सबसे बड़े प्रांत पंजाब के औकाफ डिपार्टमेंट की जो जमीन है, उससे तीन गुना अधिक अकेले उत्तर प्रदेश के पास है. इसे भी पढ़ें: प्रशासनी कर्मचारियों को 23 अप्रैल को मिल सकती है बड़ी समाचार, प्रशासन करेगी बड़ा ऐलान! The post हिंदुस्तान में वक्फ बोर्ड के पास 9.40 लाख एकड़ जमीन तो पाकिस्तान के पास कितनी? appeared first on Naya Vichar.

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Sanjiv Goenka Net Worth: लखनऊ सुपर ज्वाइंट के मालिक संजीव गोयनका के पास कितनी संपत्ति है? भारत के अमीर उद्योगपतियों में हैं शामिल

LSG Owner Sanjiv Goenka Net Worth in Hindi: हिंदुस्तान के बड़े उद्योगपतियों में संजीव गोयनका का नाम भी शामिल है. संजीव गोयनका इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) टीम के मालिक हैं. उन्होंने अपनी व्यावसायिक सोच से एक बड़ा बिजनेस इंपायर खड़ा किया. उनकी कुल संपत्ति, शानदार घर और बड़े-बड़े बिजनेस प्रोजेक्ट्स शामिल है. आइए जानते हैं कि संजीव गोयनका के पास कितनी संपत्ति है और उनकी आमदनी के स्रोत क्या हैं? संजीव गोयनका के पास कितनी संपत्ति है? (Sanjiv Goenka Net Worth) लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) के मालिक संजीव गोयनका व्यापार और स्पोर्ट्स जगत का बड़ा नाम हैं. फोर्ब्स के मुताबिक, संजीव गोयनका एक अरबपति बिजनेसमैन हैं, जिनकी कुल संपत्ति 4 बिलियन डॉलर है. उनकी ज्यादातर कमाई एक बड़े बिजनेस ग्रुप से होती है और इसका मुख्य ऑफिस कोलकाता में है. इसके अलावा वे कई और कंपनियों के भी मालिक हैं. यह भी पढ़ें- लालू यादव के पास कितनी है संपत्ति, हर महीने कितना पाते हैं पेंशन? संजीव गोयनका की कंपनियां कौन सी हैं? (Sanjiv Goenka Net Worth) संजीव गोयनका का सबसे बड़ा बिजनेस ग्रुप आरपी संजीव गोयनका ग्रुप है. इसका मुख्यालय कोलकाता में है और इसकी मौजूदगी पूरे हिंदुस्तान समेत कई अन्य देशों में भी है. इस ग्रुप की सबसे पुरानी और प्रमुख कंपनी कलकत्ता इलेक्ट्रिक सप्लाई कॉरपोरेशन (CESC) है जो 1897 में बनी थी और बिजली आपूर्ति का काम करती है. इस ग्रुप ने बड़ा बदलाव करते हुए इसे चार अलग-अलग कंपनियों में बांटा है- हल्दिया एनर्जी लिमिटेड धारीवाल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड इंटीग्रेटेड कोल माइनिंग लिमिटेड. 2024 में हिंदुस्तान के 65वें सबसे अमीर व्यक्ति (फोर्ब्स) संजीव गोयनका सुपरमार्केट चेन स्पेंसर और टू यम्म स्नैक ब्रांड के भी मालिक हैं. उनके बेटे शास्वत गोयनका टू यम्म ब्रांड को संभालते हैं. फोर्ब्स के अनुसार, संजीव गोयनका 2024 में हिंदुस्तान के 65वें सबसे अमीर व्यक्ति हैं और दुनिया के सबसे अमीर अरबपतियों की सूची में 949वें स्थान पर हैं.  यह भी पढ़ें- Donald Trump Net Worth: सत्ता में वापसी और खजाना भी फुल, ट्रंप की दौलत में बंपर उछाल, क्रिप्टो और मीडिया का बड़ा स्पोर्ट्स The post Sanjiv Goenka Net Worth: लखनऊ सुपर ज्वाइंट के मालिक संजीव गोयनका के पास कितनी संपत्ति है? हिंदुस्तान के अमीर उद्योगपतियों में हैं शामिल appeared first on Naya Vichar.

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थाईलैंड में PM मोदी का संदेश: ‘विस्तारवाद नहीं, विकासवाद’, भूकंप पीड़ितों के प्रति व्यक्त की संवेदना

Thailand PM Modi Message: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को बिम्सटेक (बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल) के छठे शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए थाईलैंड पहुंचे. इस यात्रा के दौरान उन्होंने थाईलैंड की प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनवात्रा से मुलाकात की. दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने को लेकर चर्चा हुई. हिंदुस्तान-थाईलैंड सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने पर जोर प्रधानमंत्री मोदी ने इस मुलाकात के दौरान हिंदुस्तान और थाईलैंड के बीच आर्थिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई. उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान ‘आसियान एकता’ और ‘आसियान केंद्रीयता’ का पूर्ण समर्थन करता है. इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्वतंत्र, खुली और नियम-आधारित व्यवस्था को कायम रखना हिंदुस्तान और थाईलैंड दोनों की प्राथमिकता है. पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि हिंदुस्तान ‘विस्तारवाद’ के बजाय ‘विकासवाद’ की नीति में विश्वास रखता है. उन्होंने यह भी बताया कि हिंदुस्तान के पूर्वोत्तर राज्यों और थाईलैंड के बीच पर्यटन, संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है. हिंदुस्तान-थाईलैंड संबंधों को रणनीतिक साझेदारी तक ले जाने का निर्णय प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की कि हिंदुस्तान-थाईलैंड संबंधों को अब रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाया जाएगा. उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और हिंद-प्रशांत दृष्टिकोण में थाईलैंड की महत्वपूर्ण भूमिका है. हिंदुस्तान और थाईलैंड के सांस्कृतिक संबंधों को मिली नई पहचान हिंदुस्तान और थाईलैंड के बीच सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंध प्राचीन समय से चले आ रहे हैं. इस कड़ी में प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के अवसर पर थाईलैंड प्रशासन ने ‘रामायण’ के भित्ति चित्रों पर आधारित विशेष डाक टिकट जारी किया. प्रधानमंत्री मोदी ने इसके लिए थाईलैंड प्रशासन का आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक पहल हिंदुस्तान-थाईलैंड के सांस्कृतिक संबंधों की गहराई को दर्शाती है. #WATCH | Bangkok, Thailand: PM Narendra Modi says, “India and Thailand’s centuries-old relations are connected through our deep cultural and spiritual ties. The spread of Buddhism has connected our people. From Ayutthaya to Nalanda, there has been an exchange of intellectuals.… pic.twitter.com/kjFG0S4Cgm — ANI (@ANI) April 3, 2025 थाईलैंड भूकंप पीड़ितों के प्रति पीएम मोदी ने जताई संवेदना अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में थाईलैंड और म्यांमार में आए भूकंप के कारण हुए जानमाल के नुकसान पर गहरी संवेदना व्यक्त की. उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान की जनता की ओर से वह पीड़ित परिवारों के प्रति सहानुभूति प्रकट करते हैं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करते हैं. #WATCH | Bangkok, Thailand: PM Narendra Modi says, “On behalf of the people of India, I express deep sympathies for the loss of lives in the earthquake that hit on 28th March. We pray for the speedy recovery of those who were injured.” (Video: ANI/DD) pic.twitter.com/fAaCQqLCK9 — ANI (@ANI) April 3, 2025 बिम्सटेक सम्मेलन में पीएम मोदी का सम्मान थाईलैंड में पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भव्य स्वागत किया गया. उन्हें ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया. इसके अलावा, उन्होंने थाईलैंड की पारंपरिक रामायण प्रस्तुति ‘रामकियेन’ का भी आनंद लिया. प्रधानमंत्री की इस यात्रा को हिंदुस्तान और थाईलैंड के बीच संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. इसे भी पढ़ें: 5000 मौत, हिंदू इलाका और एक काली रात, जिंजीरा नरसंहार की दर्दनाक कहानी इसे भी पढ़ें: पाकिस्तानी लड़कियों को चाहिए हिंदुस्तानी दूल्हा? धर्म बदलने को तैयार The post थाईलैंड में PM मोदी का संदेश: ‘विस्तारवाद नहीं, विकासवाद’, भूकंप पीड़ितों के प्रति व्यक्त की संवेदना appeared first on Naya Vichar.

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