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Author name: Vinod Jha

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Sahitya Akademi: मैथिली अनुवाद के लिए केष्कर ठाकुर को साहित्य अकादमी पुरस्कार

Sahitya Akademi: पटना. साहित्य अकादमी ने अनुवाद पुरस्कार 2024 की शुक्रवार को घोषणा की. साहित्य अकादमी के अध्यक्ष माधव कौशिक की अध्यक्षता में अकादमी के कार्यकारी मंडल की बैठक में 21 अनुवादकों को अनुवाद पुरस्कार के लिए अनुमोदित किया गया. पटना के केष्कर ठाकुर को मैथिली, प्रसिद्ध आलोचक मदन सोनी को हिंदी और अनीसुर रहमान को अंग्रेजी के लिए साहित्य अकादमी का वर्ष 2024 का अनुवाद पुरस्कार दिये जाने की घोषणा शुक्रवार को की गयी. केष्कर को विभूति भूषण बंदोपाध्याय के बांग्ला उपन्यास आरण्यक के मैथिली अनुवाद के लिए यह पुरस्कार मिलेगा. केष्कर मूल रूप से मधुबनी के समौल हैं और वर्तमान में पटना में रहते हैं. संताली भाषा के लिए नाजीर हेंब्रम को मिला पुरस्कार संताली में इसबार संताल परगना के पाकुड़ जिला, महेशपुर प्रखंड अंतर्गत चंदालमारा गांव के रहने वाले नाजीर हेंब्रम को साहित्य अकादमी अनुवाद पुरस्कार मिला को मिला है. उन्हें यह पुरस्कार नीलोत्पल मृणाल द्वारा लिखित हिंदी उपन्यास डार्क हार्स के संताली अनुवाद पुस्तक हेंदे सादोम के लिए मिला. नाजीर हेंब्रम पेशे से प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी हैं और वे महेशपुर प्रखंड में पदास्थापित हैं. हेंदे सादोम के अलावे उन्होंने कई पुस्तकें लिखी है. इनमें सेदाय काथा (कहानी-2013 ), बांदोंग (कविता संग्रह-2020), कोरोम कोपाल (कविता संग्रह-2022),हेंदे सादोम (अनुवाद पुस्तक-2022) आदि प्रमुख हैं. मदन सोनी को हिंदी के लिए हुआ चयन प्रसिद्ध आलोचक मदन सोनी को हिंदी के लिए तथा अनीसुर रहमान को अंग्रेजी के लिए साहित्य अकादमी का वर्ष 2024 का अनुवाद पुरस्कार दिए जाने की घोषणा शुक्रवार को यहां की गई. हिंदी में अनुवाद के लिए मदन सोनी को यशोधरा डालमिया की अंग्रेजी पुस्तक के हिंदी अनुवाद ‘सैयद हैदर रज़ा: एक अप्रतिम कलाकार की यात्रा’ के लिए पुरस्कृत किया गया है. अंग्रेजी में यह पुरस्कार अनीसुर रहमान को उनके द्वारा अनूदित पुस्तक हजारों ख्वाहिशें ऐसी (द वंडरफुल वर्ल्ड ऑफ उर्दू गजल्स) को दिया गया है. पंजाबी के लिए चंदन नेगी को पुस्तक ‘तेरे लैई’ के अनुवाद तथा बांग्ला के लिए बासुदेब दास को ‘सदगरेर पुत्र नौका बेय जय’ पुस्तक के अनुवाद हेतु पुरस्कृत किया गया है. Also Read: देश को भाया नीतीश कुमार का बिहार मॉडल, स्कूली शिक्षा व्यवस्था में आया बुनियादी बदलाव The post Sahitya Akademi: मैथिली अनुवाद के लिए केष्कर ठाकुर को साहित्य अकादमी पुरस्कार appeared first on Naya Vichar.

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Magadha Empire : अजातशत्रु के शासनकाल में महात्मा बुद्ध ने त्यागा था देह, राजगृह में बना है स्तूप

Table of Contents पिता की हत्या के बाद अपराधबोध से ग्रसित था अजातशत्रु बिम्बिसार और गौतम बुद्ध के संबंध अजातशत्रु के शासनकाल में बुद्ध का महापरिनिर्वाण अजातशत्रु का जन्म और मृत्यु गौतम बुद्ध मगध साम्राज्य के किस राजा के समकालीन थे? किस राजा के शासनकाल में बुद्ध का महापरिनिर्वाण हुआ? Magadha Empire 4 : मगध साम्राज्य के संस्थापक और हर्यक वंश के प्रथम राजा बिम्बिसार और गौतम बुद्ध के बीच घनिष्ठ होने की बात बौद्ध साहित्य बताते हैं. बिम्बिसार का शासनकाल 544 ईसा पूर्व से 492 ईसा पूर्व तक कायम रहा. इतिहासकार इस बात पर एकमत नहीं हैं कि बिम्बिसार ने बौद्ध धर्म अपनाया था या नहीं,लेकिन यह बात सभी मानते हैं कि समकालीन होने और गौतम बुद्ध के राजगृह आने की वजह सेदोनोंके  बीच मैत्रीपूर्ण संबंध थे. पिता की हत्या के बाद अपराधबोध से ग्रसित था अजातशत्रु बौद्ध साहित्य यह मानते हैं कि बिम्बिसार की हत्या के बाद अजातशत्रु को बहुत पछतावा हुआ. अपराधबोध में ही उसने गौतम बुद्ध की शरण ली, तो उन्होंने उससे अहिंसा और करुणा का मार्ग अपनाने को कहा. जिसके बाद अजातशत्रु ने बौद्ध धर्म अपनाया और बौद्ध संगति का आयोजन किया. हरमन ओल्डेनबर्ग जैसे इतिहासकार यह मानते हैं की अजातशत्रु ने बौद्ध धर्म स्वीकार नहीं किया, वह धर्म से ज्यादा नेतृत्व पर ध्यान देता था, लेकिन वे यह मानते हैं कि अजातशत्रु ने बौद्ध धर्म का संरक्षण किया, क्योंकि उसके पिता बिम्बिसार ने भी बौद्ध धर्म को संरक्षित किया था. रोमिला थापर और डीडी कोसांबी जैसे इतिहासकार भी यह नहीं मानते हैं अजातशत्रु ने बौद्ध धर्म को स्वीकारा था. पढ़ें नया विचार की प्रीमियम स्टोरी :Women’s Day 2025 : मुस्लिम समाज देता है स्त्रीओं को संपत्ति पर हक, लेकिन बेटों के मुकाबले मिलता है आधा Magadha Empire : बिम्बिसार ने अपनी सुदृढ़ प्रशासनिक व्यवस्था से मगध को किया सशक्त, ऐसे हुआ पतन Magadha Empire : राजा अजातशत्रु ने क्यों की थी पिता की हत्या? नगरवधू आम्रपाली का इससे क्या था कनेक्शन विभिन्न विषयों पर एक्सप्लेनर पढ़ने के लिए क्लिक करें बिम्बिसार और गौतम बुद्ध के संबंध बिम्बिसार-और-गौतम-बुद्ध बौद्ध साहित्य यह बताते हैं कि बिम्बिसार और गौतम बुद्ध के पिता शुद्धोधन के बीच नेतृत्वक संबंध थे. हालांकि इतिहासकार यह मानते हैं कि दोनों समकालीन थे इसलिए व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध दोनों में थे. संन्यास के बाद जब गौतम बुद्ध राजगृह आए तो बिम्बिसार ने उनसे मुलाकात की और उन्हें अपने यहां रहने और पद देने का प्रस्ताव दिया था, जिसे बुद्ध ने ठुकरा दिया था. लेकिन ज्ञान प्राप्ति के बाद वे अपने वादे के अनुसार बिम्बिसार के राज्य आए थे. तब बिम्बिसार ने उनका स्वागत किया था और उन्हें सहायता भी दी. बिम्बिसार ने राजगृह में पहला बौद्ध विहार भी बनवाया था. यानी यह कहा जा सकता है कि बिम्बिसार के समय से ही गौतम बुद्ध के संबंध मगध साम्राज्य से थे. अजातशत्रु के शासनकाल में बुद्ध का महापरिनिर्वाण अजातशत्रु के शासनकाल में बुद्ध का महापरिनिर्वाण हुआ. गौतम बुद्ध का महापरिनिर्वाण 483 ईसा पूर्व में हुआ था. उस वक्त अजातशत्रु ने उनके प्रति सम्मान दिखाते हुए उनकी अस्थियों को लेकर राजगृह की पहाड़ी पर स्तूप बनवाया था. जो यह साबित करता है कि वह गौतम बुद्ध का अनुयायी रहा था. लेकिन बौद्ध भिक्षु वह नहीं बना क्योंकि उसका लक्ष्य मगध को हिंदुस्तान का सबसे शक्तिशाली राज्य बनाना था. अजातशत्रु ने अपनी सीमा का इतना विस्तार किया कि उसने अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लिया. उसने अपने साम्राज्य को आधुनिक बिहार, उत्तर प्रदेश,बंगाल, ओडिशा, झारखंड, मध्यप्रदेश और नेपाल तक विस्तार दे दिया था. उसने वैशाली के साथ 16 वर्षों तक युद्ध किया था और इसी युद्ध की सफलता के लिए उसने पाटलिपुत्र में अपनी छावनी भी बनाई थी जो आगे चलकर मगध की राजधानी बना. अजातशत्रु का जन्म और मृत्यु बौद्ध साहित्य कहते हैं कि उसके जन्म के वक्त यह आशंका हुई थी कि वह अशुभ साबित हो सकता है, इसलिए उसकी मां वैदेही ने उसका त्याग कर दिया था. लेकिन बिम्बिसार ने उसे अपनाया और बचपन में नाम दिया था कुणिका. वहीं उसकी मौत के बारे में यह कहा जाता है कि उसके अपने बेटे उदयन ने अवंती नरेश के बहकावे में उसकी हत्या कर दी थी. लेकिन इतिहासकार यह मानते हैं कि अजातशत्रु की मौत लगभग 462 से 460 ईसा पूर्व में हुई.  पढ़ें नया विचार की प्रीमियम स्टोरी :Magadha Empire : सुनिए मगध की कहानी, एक था राजा बिम्बिसार जिसने साम्राज्य विस्तार के लिए वैवाहिक गठबंधन किया गौतम बुद्ध मगध साम्राज्य के किस राजा के समकालीन थे? गौतम बुद्ध मगध साम्राज्य के बिम्बिसार और अजातशत्रु के समकालीन थे. किस राजा के शासनकाल में बुद्ध का महापरिनिर्वाण हुआ? अजातशत्रु The post Magadha Empire : अजातशत्रु के शासनकाल में महात्मा बुद्ध ने त्यागा था देह, राजगृह में बना है स्तूप appeared first on Naya Vichar.

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Bihar ITI: बिहार आईटीआई एंट्रेंस एग्जाम के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू, ऐसे करें रिप्लाई

Bihar ITI: बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगी परीक्षा बोर्ड (BCECEB) ने बिहार औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान प्रतियोगी प्रवेश परीक्षा (ITICAT 2025) के लिए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कर दी है. यह परीक्षा राज्य के विभिन्न औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में प्रवेश के लिए आयोजित की जाती है. इच्छुक उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट bceceboard.bihar.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होगा. पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों को अपने व्यक्तिगत विवरण, शैक्षणिक योग्यता और अन्य आवश्यक जानकारी दर्ज करनी होगी. इसके साथ ही, आवेदन शुल्क का भुगतान भी ऑनलाइन मोड में करना होगा. उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे आवेदन भरने से पहले आधिकारिक अधिसूचना को ध्यानपूर्वक पढ़ लें, जिससे वे पात्रता मानदंड, आवश्यक दस्तावेज और महत्वपूर्ण तिथियों की पूरी जानकारी प्राप्त कर सकें. ITICAT 2025 परीक्षा के माध्यम से योग्य उम्मीदवारों को बिहार के विभिन्न प्रशासनी और निजी आईटीआई संस्थानों में प्रवेश मिलेगा. इस परीक्षा में सफल होने के लिए उम्मीदवारों को परीक्षा पैटर्न और सिलेबस को अच्छी तरह समझकर तैयारी करनी चाहिए. आवेदन की अंतिम तिथि और परीक्षा से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण अपडेट के लिए नियमित रूप से आधिकारिक वेबसाइट चेक करते रहें. क्या है योग्यता ? बिहार आईटीआईसीएटी 2025 के लिए पात्रता मानदंड निर्धारित किए गए हैं. आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB), केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) या किसी अन्य मान्यता प्राप्त बोर्ड से कक्षा 10वीं उत्तीर्ण होना आवश्यक है. इसके अलावा, उम्मीदवार का हिंदुस्तान का नागरिक होना जरूरी है. आयु सीमा के अनुसार, अभ्यर्थी की आयु 1 अगस्त 2025 तक कम से कम 17 वर्ष होनी चाहिए. कितना है आवेदन शुल्क ? बिहार आईटीआईसीएटी 2025 के लिए पंजीकरण शुल्क श्रेणी के अनुसार अलग-अलग निर्धारित किया गया है. सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों को 750 रुपये का भुगतान करना होगा, जबकि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के उम्मीदवारों के लिए यह शुल्क 100 रुपये रखा गया है. वहीं, विकलांग (PwD) उम्मीदवारों को 430 रुपये का भुगतान करना होगा. अभ्यर्थी अपने पंजीकरण शुल्क का भुगतान क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग या यूपीआई के माध्यम से ऑनलाइन कर सकते हैं. क्या है परीक्षा पैटर्न ? बिहार आईटीआईसीएटी 2025 परीक्षा का आयोजन ऑफलाइन मोड में किया जाएगा. परीक्षा की कुल अवधि 2 घंटे 15 मिनट होगी, जिसमें अभ्यर्थियों को 150 प्रश्नों को हल करना होगा। प्रश्न पत्र को तीन सेक्शन में विभाजित किया गया है—गणित, सामान्य विज्ञान और सामान्य ज्ञान. यह परीक्षा कुल 300 अंकों की होगी. प्रत्येक सही उत्तर के लिए उम्मीदवार को 2 अंक दिए जाएंगे, जबकि गलत उत्तरों के लिए कोई नकारात्मक अंकन नहीं होगा. Naya Vichar Premium Story: झारखंड में परीक्षाओं में धांधली को लेकर केंद्र से भी सख्त कानून, फिर भी थमने का नाम नहीं ले रहे पेपर लीक के मामले The post Bihar ITI: बिहार आईटीआई एंट्रेंस एग्जाम के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू, ऐसे करें रिप्लाई appeared first on Naya Vichar.

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Patna Road Accident : पटना में भीषण सड़क हादसा, दो घायलों ने तड़प कर तोड़ा दम, वीडियो बनाते रहे लोग

Patna Road Accident : पटना. शुक्रवार की देर शाम पटना में एक भीषण सड़क हादसा हुआ है, जिसमें दो लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई. इस हादसे में दो अन्य लोगों की हालत गंभीर है. घटना पटना के जगदेव पथ की है. मिली जानकारी के अनुसार घटना होते ही घटनास्थल पर लोगों की भीड़ जमा हो गई, लेकिन लोग तमाशबीन बनकर मोबाइल से वीडियो बनाते रहे, लेकिन किसी ने उन घायलों को अस्पताल पहुंचाने की पहल नहीं की. इस वजह से दो लोगों की घटना स्थल पर ही मौत हो गई. The post Patna Road Accident : पटना में भीषण सड़क हादसा, दो घायलों ने तड़प कर तोड़ा दम, वीडियो बनाते रहे लोग appeared first on Naya Vichar.

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Bulldozer Action: पटना के इस इलाके में होगा बुलडोजर एक्शन, ध्वस्त होंगे 72 स्ट्रक्चर

Bulldozer Action: पटना. यूपी की तरह अब बिहार में भी प्रशासन बुलडोजर एक्शन करने जा रही है. सड़क पर कब्जा करनेवाले लोगों पर राजधानी पटना में ये बुलडोजर कार्रवाई होने जा रही है. राजधानी पटना को जाम से निजात दिलाने के लिए तमाम तरह के प्रयास किए जा रहे हैं. बेऊर मोड़ से पटना एम्स के बीच एलिवेटेड सड़क का निर्माण होना है. इसको लेकर इस इलाके में आने वाले 72 स्ट्रक्चर को तोड़ा जाएगा. पटना जिला प्रशासन ने इसकी तैयारियां पूरी कर ली है. मंत्रालय से प्रस्तावित डिजाइन को मंजूरी का इंतजार पटना जिला प्रशासन ने अनीसाबाद से एम्स के बीच सड़क के दोनों तरफ किए गए अतिक्रमण को चिन्हित कर लिया है. बेऊर मोड़ से पटना एम्स के बीच बननेवाले एलिवेटेड रोड के निर्माण के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से इसकी डिजाइन को मंजूरी मिलना है. मंजूरी मिलने के बाद बिहार राज्य पथ विकास निगम इस प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू कर देगा. मंजूरी मिलने के बाद टेंडर की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. तोड़े जायेंगे 72 बड़े स्ट्रक्चर विभागीय जानकारी के अनुसार अब तक चिन्हित इमारतों में 72 बड़े स्ट्रक्चर शामिल हैं, जिन्हें ध्वस्त करने की तैयारी शुरू कर दी गई है. इसके अलावा इस मार्ग में पड़ने वाले उन घरों पर भी बुलडोजर चलेगा, जिनके छज्जे और अन्य अवैध अतिक्रमण किए गए हैं. जिला प्रशासन की ओर से जो बड़े स्ट्रक्चर तोड़े जाने हैं उनके मालिकों को सूचना दिया जा रहा है. उम्मीद की जा रही है कि यह कार्रवाई अगले दो माह के अंदर होगी. Also Read: देश को भाया नीतीश कुमार का बिहार मॉडल, स्कूली शिक्षा व्यवस्था में आया बुनियादी बदलाव The post Bulldozer Action: पटना के इस इलाके में होगा बुलडोजर एक्शन, ध्वस्त होंगे 72 स्ट्रक्चर appeared first on Naya Vichar.

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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर प्रभात खबर कार्यालय में परिचर्चा, आर्थिक आत्मनिर्भरता की वकालत

International Women’s Day 2025: धनबाद-अंतरराष्ट्रीय स्त्री दिवस की पूर्व संध्या पर नया विचार कार्यालय कोलाकुसमा में वर्तमान परिवेश में स्त्रीओं की चुनौतियां विषय पर परिचर्चा आयोजित की गयी. हर सेक्टर में कार्यरत स्त्रीओं के साथ गृहिणियां भी इसका हिस्सा बनीं. सबने खुलकर अपने विचार रखे. स्त्रीओं ने एक सुर में कहा कि जब स्त्री-पुरुष बराबर हैं, तो असमानता की बात कहां से आती है. आज के संदर्भ में उनका आत्मनिर्भर होना बेहद जरूरी है. कार्यक्षेत्र में स्त्रीओं को हर कदम पर चुनौतियां मिलती हैं. इसका सामना करना पड़ता है. खुद को साबित करना पड़ता है. मौजूदा परिस्थिति को देखते हुए यह जरूरी है, स्त्रीएं एक दूजे का साथ दें, सहयोग करें, पर आत्मनिर्भरता बेहद जरूरी है. ग्रामीण क्षेत्र की स्त्रीओं को शिक्षित करने के साथ ही उनके हुनर को बाजार व पहचान दिलाने की दिशा में शहरी क्षेत्र की स्त्रीओं को समय देने की जरूरत है. चिकित्सक हो या अधिवक्ता, शिक्षिका हो या व्यवसायी, होम मेकर हो या समाजसेवी, सभी ने स्त्री शिक्षा को प्राथमिकता दी. अधिकार के प्रति सजगता के लिए उनका शिक्षित होना जरूरी है. स्त्रीएं घर की होम मिनिस्टर होती हैं. जो बातें सामने आयीं कार्य क्षेत्र में हर कदम पर चुनौतियों का सामना करती हैं स्त्रीएं.स्त्रीओं का आत्मनिर्भर होना बेहद जरूरी है.ग्रामीण क्षेत्र की स्त्रीओं को शिक्षित करने के साथ हुनर को बाजार व पहचान दिलाने की जरूरत.अधिकारों के प्रति आधी आबादी को करना होगा जागरूकस्त्रीएं कमजोर नहीं होतीं, न ही उन्हें स्पेशल ट्रीटमेंट की जरूरत हैस्त्रीएं एक ही समय में कई मोर्चे को बखूबी संभाल रहीं परिचर्चा में क्या बोलीं स्त्रीएं? स्त्रीएं अपने को कमजोर मानकर स्वयं भेदभाव पैदा करती हैं. हम ही पुरुष प्रधान समाज बनाते हैं. हम बराबरी की हकदार हैं. ये आत्मविश्वास हमें जगाना होगा. आज के समय में आत्मनिर्भरता जरूरी है. पति पर आश्रित रहनेवाली स्त्री ही पिछड़ती है. स्त्रीएं कमजोर नहीं होती न ही उन्हें स्पेशल ट्रीटमेंट की जरूरत है. सेल्फ रेस्पेक्ट जगायें.जया कुमार, क्रिमिनल लॉयर आज के समय में स्त्रीओं का शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ होने के साथ ही आर्थिक रूप से स्वतंत्र होना भी जरूरी है. स्त्रीएं आत्मनिर्भर होकर ही आत्मसम्मान से जी सकती हैं. इसके लिए उनका शिक्षित होना जरूरी है. इतने बदलाव के बाद भी आज बेटा-बेटी को लेकर भेदभाव है. दोनों को संस्कारित करेंडॉ रूपा प्रसाद, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ बदलते हालात में स्त्रीएं दोहरी जिम्मेवारी के साथ आगे बढ़ रहीं हैं. घर और बाहर के बीच बैलेंस बनाकर चलने में परेशानी हो रही है. उनके लिए जीवन का हर पल चुनौती भरा है. सबका ध्यान रखते खुद का ध्यान नहीं रख पा रही हैं. अपना ख्याल खुद रखना होगा. वह स्वस्थ रहेंगी, तभी परिवार खुशहाल होगा.संगीता श्रीवास्तव, शिक्षिका क्रेडो वर्ल्ड स्कूल स्त्रीएं और चुनौतियां दोनों साथ साथ चलते हैं. अब तो चुनौतियों की आदत पड़ गयी है. कभी-कभी बदलाव सुखद होता है. परिवर्तन से घबड़ायें नहीं. कुछ नहीं मिलेगा, तो अनुभव, तो होगा. आधी-आबादी चुनौतियों को न सिर्फ साथ लेकर चलती है, बल्कि उनसे लड़ना भी जानती हैं. हार नहीं मानती है.रेणु लाल, व्यवसायी स्त्रीएं घरवालों के सपोर्ट से ही आगे बढ़ती हैं. आधी आबादी की पहली प्राथमिकता घर परिवार है, लेकिन उनकी समाज में अपनी पहचान हो इसके लिए भी प्रयासरत है. आज की आधी आबादी दोहरी चुनौतियों के साथ आगे बढ़ रही है. हर क्षेत्र में उनकी धमक है बदलते समाज का यह सुखद एहसास है.राखी जैन, होम मेकर आज की स्त्रीओं के लिए आत्मनिर्भरता जरूरी है. आत्मनिर्भर होकर स्त्री न सिर्फ खुद की पहचान बनाती है, बल्कि परिवार समाज को भी उन्नति के पथ पर ले जाती है. हमें समस्या की जगह समाधान पर फोकस करने की जरूरत है. समय प्रतिकूल हो या अनुकूल, जीवटता के साथ कदम आगे बढ़ाने की जरूरत है.सुषमा प्रसाद, व्यवसायी आज की आधी-आबादी मल्टी टैलेंटेड है. एक ही समय में कई मोर्चे को बखूबी संभाल रही है. समाज की चुनौतियों से लड़ने के लिए तैयार है. आज का समय तेजी से भाग रहा है. समय के साथ सामंजस्य बिठाना मुश्किल हो रहा है. बावजूद इसके स्त्रीएं अपना दायित्व बखूबी निभा रही हैं. उन्हें एक दूसरे का हाथ थाम कर हर हाल में आगे बढ़ना होगा.रमा सिन्हा, आरोग्य हिंदुस्तानी, प्रांत प्रमुख मौजूदा परिवेश की स्त्रीएं अपने हुनर को पहचान दिला रहीं. हर सेक्टर में वे काम कर रही हैं. हमें रिजर्वेशन नहीं चाहिए. अपनी काबिलियत के बल पर समाज में पहचान बनाना है, दूसरों को भी राह दिखानी है. ग्रामीण क्षेत्र की स्त्रीएं सुंदर हस्तनिर्मित वस्तुएं तैयार करती है. इनके हुनर के लिए कोई बाजार नहीं है.पिंकी गुप्ता, सोशल वर्कर हम स्त्रीओं को हर कदम पर खुद को प्रूफ करना होता है. लड़कियां पढ़ रहीं है. डिग्रियां ले रही है. ये अच्छी बात है, पर उन डिग्रियों से कैसे लाभ लें, उन्हें यह समझाने की जरूरत है. मेरा मानना है चुनौतियां जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं. स्त्रीएं व्यस्त रहें. सकारात्मक सोच रखें और आगे बढ़ें.सुभद्रा झा, होम मेकर स्त्रीओं को आत्मनिर्भरता की दिशा में रुचि जगानी होगी. ग्रामीण क्षेत्र में जागरूकता के अभाव में अभिभावक बेटियों की शिक्षा के प्रति उदासीन रहते हैं. सामूहिक प्रयास से उन तक शिक्षा की मशाल जलेगी, हम स्त्रीएं विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानती हैं. समय के साथ अनुभव मिलता जाता है, कामयाब होती जाती हैं.रीता चौधरी, सोशल वर्कर स्त्रीएं नकारात्मक विचार न पालें. न ही चुनौतियों से घबड़ायें. स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें. आपके पास, जो हुनर है उसे निखारें. लाइफ स्टाइल में बदलाव लायें. सकारात्मक सोच के लिए मेडिटेशन करें. साथ ही सबसे पहले खुद का सम्मान करना सीखें. 21वीं सदी की नारी स्वतंत्र है, आत्मनिर्भर हैं. उसे आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता.सुष्मिता प्रसाद, डेंटिस्ट मौजूदा परिवेश में हर क्षेत्र में स्त्रीओं की उपस्थिति है. वे बदलते समय को देख रही हैं. समझ रहीं हैं. पर ग्रामीण स्त्रीओं में न तो जागरूकता है और न ही अपने अधिकार की जानकारी, उन तक प्रशासनी योजनाओं की जानकारी पहुंचानी होगी. स्त्रीएं एक दूसरे का साथ लेकर आगे बढ़ें. चुनौती से घबड़ायें नहीं.प्रीति चौधरी, व्यवसायी स्त्री सशक्तीकरण के दौर में स्वाभिमानी व आत्मविश्वासी बनें. अपना अस्तित्व स्वयं तलाशना, तराशना होगा. अब पहले जैसी सोच नहीं रही. बदलते समय के साथ स्त्रीएं

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Bihar IAS : संजीव हंस को बड़ा झटका, स्पेशल कोर्ट से जमानत याचिका खारिज

Bihar IAS : पटना. जेल में बंद आईएएस अधिकारी संजीव हंस की मुश्किलें बढ़ गयी हैं. आईएएस अधिकारी संजीव हंस की जमानत याचिका खारिज हो गई है. ईडी की विशेष कोर्ट से शुक्रवार को हंस को बड़ा झटका लगा है. स्पेशल कोर्ट ने संजीव हंस को जमानत देने से इनकार कर दिया है. बेउर जेल में बंद संजीव हंस का जेल से बाहर आने की जो उम्मीद की जा रही थी, वो तत्काल खत्म हो गयी है. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने दिया फैसला IAS अधिकारी संजीव हंस को ED की विशेष कोर्ट से आज नाउम्मीदगी हासिल हुई है. स्पेशल कोर्ट ने लगातार पांच दिनों तक इस मामले में तमाम दलीलों को सुनने के बाद 21 फरवरी 2025 को फैसला सुरक्षित रख लिया था. ED के तरफ से आज शुक्रवार को दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वकील ने कोर्ट के सामने दलील रखी. इसके बाद विशेष अदालत ने जेल में बंद हिंदुस्तानीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी संजीव हंस को जमानत देने से मना कर दिया. मनी लॉन्ड्रिंग के केस में हैं आरोपित पिछले साल 18 अक्टूबर को IAS अधिकारी संजीव हंस को केंद्रीय जांच एजेंसी ED ने पटना से गिरफ्तार किया था. बिहार कैडर के IAS संजीव हंस फिलहाल पटना स्थित बेउर जेल में कैद हैं. संजीव हंस पर भ्रष्ट तरीके से अकूत संपत्ति अर्जित करने और मनी लॉन्ड्रिंग का केस है. ईडी ने संजीव हंस के खिलाफ 20 हजार पन्नों की पहली चार्जशीट 16 दिसंबर 2024 को दाखिल की थी. Also Read: देश को भाया नीतीश कुमार का बिहार मॉडल, स्कूली शिक्षा व्यवस्था में आया बुनियादी बदलाव The post Bihar IAS : संजीव हंस को बड़ा झटका, स्पेशल कोर्ट से जमानत याचिका खारिज appeared first on Naya Vichar.

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Jamshedpur News : गोपाल मैदान में गूंजे मांदर-नगाड़े, राष्ट्रीय मागे महोत्सव में झूमे संस्कृति के रंग

इन्हें मिला पुरस्कार प्रथम पुरस्कार- आदिवासी हो समाज हेसाहातु सरायकेला- खरसावां द्वितीय पुरस्कार- हो ट्रेडिशनल डांस ग्रुप हरिगुट्टू चाईबासा तृतीय पुरस्कार- पुदगल हो हयम ऑल पडाओसुसुन दुरंग इनितुंगकोडोतुईबिर चाईबासा Jamshedpur News : बिष्टुपुर स्थित गोपाल मैदान में शुक्रवार को देशभर के विभिन्न राज्यों से आये आदिवासी समुदाय के लोग अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को साकार करते नजर आये. रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजे आदिवासी कलाकारों ने मांदर और नगाड़ों की थाप पर नृत्य प्रस्तुत किया. यह नृत्य और संगीत केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके माध्यम से वे प्रकृति के प्रति प्रेम, आपसी एकता और संस्कृति की अखंडता का संदेश दे रहे थे. हर थाप, हर लय में जल, जंगल, जमीन और आदिवासियत के अस्तित्व को बचाने की गूंज थी. यह आयोजन जोहार ट्रस्ट और आदिवासी हो समाज महासभा पूर्वी सिंहभूम द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय मागे महोत्सव का हिस्सा था, जिसने पूरे क्षेत्र को उत्सव के रंग में रंग दिया. नृत्य के दौरान कलाकारों की मुद्राएं और भाव-भंगिमाएं इतनी आकर्षक थीं कि दर्शक भी मंत्रमुग्ध होकर ताल मिलाने लगे. आदिवासी समाज का तेजी से हो रहा धर्म परिवर्तन, इस पर रोक लगाने की जरूरत : चंपाई सोरेन जमशेदपुर. राष्ट्रीय मागे महोत्सव पर शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि राज्यसभा सांसद प्रदीप वर्मा, जुगसलाई तोरोप परगना दशमत हांसदा, माझी बाबा सुखराम किस्कू, सोनाराम बोदरा, माेगदा दिग्गी व रामदास टुडू शामिल हुए. मौके पर चंपाई सोरेन ने कहा कि झारखंड में तेजी से आदिवासियों को बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है. स्वशासन व्यवस्था के प्रमुख, समाज के अगुवा व बुद्धिजीवी इस पर कड़ा कदम उठावें और इस पर अविलंब रोक लगावें, अन्यथा आदिवासी समाज पर अस्तित्व का खतरा मंडराने लगेगा. वहीं दूसरी ओर संताल परगना क्षेत्र में बांग्लादेशी घुसपैठिए आदिवासी स्त्रीओं से शादी करके उनकी जमीन पर कब्जा कर रखे हुए हैं, इसलिए जो भी धर्म परिवर्तन कर रहे हैं या गैर आदिवासी से शादी कर रहे हैं, उनको आरक्षण का लाभ बिलकुल नहीं मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि आदिवासी स्वशासन व्यवस्था बहुत ही मजबूत व सशक्त व्यवस्था है. इस पर समाज के तमाम लोगों को आस्था रखना चाहिए. साथ अपने समाज को आगे बढ़ाने में अपनी सक्रिय भूमिका को अदा करना चाहिए. बिरसा मुंडा, पोटो हो, ताना भगत, बाबा तिलका माझी, सिदो-कान्हू आदि महापुरुषों ने जल, जंगल व जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष किया और समाज के अस्तित्व को भी बचाने का काम किया, लेकिन वर्तमान समय में जल, जंगल व जमीन को लूटने का काम किया जा रहा है. इस पर तमाम आदिवासियों को फिर से एकजुट होकर जल, जंगल व जमीन पर बुरी नजर रखने वालों के खिलाफ हूल करने की जरूरत है. अखड़ा मागे सुसुन व मेगा आर्ट फेस्ट आज शनिवार को अखड़ामागेसुसुन पारंपरिक नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन होगा. इसमें देशभर से आयीं सर्वश्रेष्ठ नृत्य मंडलियां अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगी. विजेता मंडली को 81 हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया जायेगा. इसके साथ ही स्कूल और कॉलेज के 2000 से अधिक छात्र-छात्राएं मेगा आर्ट फेस्ट में अपनी कला का जादू बिखेरेंगे. इस रंगारंग प्रतियोगिता में विजेता प्रतिभागियों को एक लाख रुपये का नकद पुरस्कार प्रदान किया जायेगा. यह आयोजन न सिर्फ कला और संस्कृति को बढ़ावा देगा, बल्कि युवाओं को अपनी प्रतिभा निखारने और अपनी जड़ों से जुड़ने का भी अवसर देगा. पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल पर उमड़ी भीड़ जमशेदपुर के राष्ट्रीय मागे महोत्सव में इस बार 200 से अधिक स्टॉल लगाये गये हैं, जहां आदिवासी व्यंजन, परिधान, पुस्तकें, कला एवं शिल्प, फर्नीचर, डेकोरेशन आइटम, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, कार एवं बाइक जैसी विविध वस्तुएं प्रदर्शित की गयी हैं. महोत्सव में आदिवासी पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉलों पर खासा उत्साह देखा गया.जिलु खिचड़ी, जिलु लेटो, जिलु पीठा, रोस्टेड फिश, डुसका और गुड़पीठा जैसे विशेष व्यंजनों का स्वाद लेने के लिए खरीदारों की भीड़उमड़पड़ी. महोत्सव में पहुंचे लोगों ने जहां सांस्कृतिक झलकियों का आनंद लिया, वहीं पारंपरिक पकवानों का स्वाद भी चखा. पूरे आयोजन स्थल पर संस्कृति, स्वाद और परंपरा का संगम देखने को मिला. इन दलों ने नृत्य किया प्रस्तुत – हो ट्रेडिशनल डांस क्रू हरिगुटू, चाईबासा -पदुगल हो हयम ओल पढ़ावसुसुनदुरंइनितुडंमोडो तुईबर, चाईबासा -आदिवासी कला एंव संस्कृति भवन, सोनुवा -ऑल इंडिया हो समाज, डेबरा, पश्चिम बंगाल -चिरगालेनमे हो समाज आदिवासी, चकड़ी, ओडिशा -आदिवासी हो समाज, हेसा हातु, सरायकेला-खरसावां -सिदा होरा सुसुनअखड़ामरसाल बड़ेडीह, ओडिशा -एभेन मार्शल क्लब राधानगर, ओडिशा -नेशन न्यू ब्वॉयज क्लब बालियाडिपा, ओडिशा -दमा दुमंगछोलागोड़ा The post Jamshedpur News : गोपाल मैदान में गूंजे मांदर-नगाड़े, राष्ट्रीय मागे महोत्सव में झूमे संस्कृति के रंग appeared first on Naya Vichar.

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Jamshedpur news. टेल्को रिक्रेएशन क्लब टाटा मोटर्स प्रबंधन व यूनियन का होली मिलन समारोह

Jamshedpur news. टाटा मोटर्स प्रबंधन और टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन की ओर से टेल्को रिक्रेएशन क्लब परिसर में शुक्रवार की शाम होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के दौरान ‘गोरिया करके सिंगार, अंगना में पिसेली हरदिया…’ होली गीत की प्रस्तुति के दौरान सब झूमते नजर आये. कार्यक्रम के दौरान प्रबंधन और यूनियन के सदस्यों ने एक दूसरे को अबीर, गुलाल समेत फूलों की होली स्पोर्ट्सी. इस दौरान गीत संगीत का दौर भी चला. प्लांट हेड सुनील कुमार, यूनियन अध्यक्ष गुरमीत सिंह व महामंत्री आरके सिंह ने सबों को अबीर लगाकर होली की शुभकामनाएं दी. कार्यक्रम में प्लांट हेड सुनील तिवारी, टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष गुरमीत सिंह, महामंत्री आरके सिंह, जुगराज सिंह संधु, पीके सिन्हा, जीएम शुभाशीष दास, एससीएम हेड मनीष झा, इआर हेड सौमिक राॅय, एचआर हेड प्रणव कुमार, रजत सिंह सहित यूनियन के पदाधिकारी, कमेटी मेंबर, आरके सिंह फैंस क्लब के सदस्यों ने हिस्सा लिया. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post Jamshedpur news. टेल्को रिक्रेएशन क्लब टाटा मोटर्स प्रबंधन व यूनियन का होली मिलन समारोह appeared first on Naya Vichar.

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Vidur Niti: इस समय होती है अपने-पराये की पहचान, विदूर नीति क्या कहती है?

Vidur Niti: विदूर नीति महाहिंदुस्तान के भीष्म पर्व में विदूर द्वारा युधिष्ठिर को दी गई उपदेशों का संग्रह है. इस नीति में जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर गहरी बात बताई गई है, जिसमें रिश्तों की पहचान, पराये और अपने का अंतर और सही आचरण को समझाने के लिए विदूर ने कई महत्वपूर्ण बातें कही हैं. विदूर नीति के अनुसार, अपने और पराये की पहचान समय और परिस्थितियों पर निर्भर करती है. विदूर के अनुसार, जब किसी व्यक्ति को असली रूप में परखा जाता है, तो वह व्यक्ति के आचरण, वचन और कार्यों के आधार पर ही अपनी पहचान होती है. संकट के समय: विदूर के अनुसार, जब व्यक्ति संकट में फंसा हो, तब उसकी असली पहचान होती है. संकट की घड़ी में ही यह साफ होता है कि कौन व्यक्ति आपके साथ खड़ा है और कौन नहीं. असल में संकट का समय ही यह पहचानने का सबसे सही समय होता है कि कौन आपका अपना है और कौन पराया. स्वार्थी व्यवहार: पराये लोग अक्सर अपने स्वार्थ के लिए रिश्ते निभाते हैं. जब उनका स्वार्थ समाप्त होता है, तो वे किसी भी रिश्ते से मुंह मोड़ सकते हैं. जबकि अपने लोग स्वार्थ से परे होकर आपको संकट में भी समर्थन देते हैं और आपके सुख-दुःख में समान रूप से सहभागी होते हैं. सच्चाई और निष्ठा: विदूर के अनुसार, एक व्यक्ति का आचरण और उसकी निष्ठा यह तय करती है कि वह आपका अपना है या पराया. यदि कोई व्यक्ति सच्चाई और निष्ठा के साथ आपके साथ रहता है, तो वह आपका अपना है. पराये लोग अक्सर झूठ, धोखा और चालाकी का सहारा लेते हैं. समय और परिस्थितियां: जब समय बदलता है, तो व्यक्ति की सोच और कार्यशैली भी बदल सकती है. एक व्यक्ति जो किसी विशेष समय में आपका अपना लगता है, वही बाद में पराया हो सकता है. इसीलिए, विदूर नीति में समय की महत्ता को रेखांकित किया गया है, क्योंकि वक्त के साथ किसी की असलियत सामने आती है. नोट: विदूर नीति के अनुसार, अपने और पराये की पहचान समय, संकट, निष्ठा और आचरण के आधार पर होती है. हमें अपने रिश्तों को पहचानने के लिए केवल सतर्क और सचेत रहना चाहिए, क्योंकि कभी भी किसी के असली चेहरे को सामने लाने के लिए परिस्थितियां बदल सकती हैं. नया विचार इसका दावा नहीं करता है. यह जानकारी इंटरनेट से ली गई है. ALSO READ: Numerology: अपने पार्टनर पर कंट्रोल रखती हैं इस मूलांक की लड़कियां, कूट-कूटकर भरा होता है कॉन्फिडेंस The post Vidur Niti: इस समय होती है अपने-पराये की पहचान, विदूर नीति क्या कहती है? appeared first on Naya Vichar.

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