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Author name: Vinod Jha

nayavichar.com पर संपादक हैं। पटना स्थित स्वतंत्र पत्रकार और लेखक व एक दशक से अधिक का व्यापक अनुभव है। पत्रकारिता, प्रकाशन और विज्ञापन में अनुभव सभी प्रकार की सामग्री के साथ काम करने में सक्षम बनाता है: ब्लॉग पोस्ट, सोशल मीडिया सामग्री अच्छी तरह से शोध किए गए लेख और साथ ही प्रेस विज्ञप्तियाँ। यदि आप उच्च-गुणवत्ता वाली सामग्री की तलाश में हैं, तो nayavicharnews@gmail.com पर संपर्क करें। विशेषताएँ: रिपोर्टिंग, पत्रकारिता, लेखन और संचार, सोशल मीडिया

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क्रूड ऑयल 2% से अधिक महंगा, US-ईरान तनाव से तेल सप्लाई बाधित होने की आशंका

ब्रेंट क्रूड 2.1 फीसदी की बढ़त के साथ 89.80 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमरीकी क्रूड (WTI) 2.3 फीसदी की तेजी के साथ 84.38 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था. तेल सप्लाई बाधित होने की आशंका बढ़ी तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने, अमरीकी प्रतिबंधों को हटाने और नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करने की शर्तों के साथ युद्ध क्षतिपूर्ति की मांग की है. जबकि अमेरिका ने भी ईरान से हर्जाना मांगा है. दोनों देशों के बीच बढ़ते टकराव से वैश्विक तेल बाजार में आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई हैं. कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का क्या होगा असर ? कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर केवल पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पूरी वित्तीय स्थिति और आम आदमी की जेब पर असर डालता है. महंगाई में बढ़ोतरी: हिंदुस्तान अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है. तेल महंगा होने से माल ढुलाई महंगी हो जाती है. पेट्रोल, डीजल, और रसोई गैस (LPG/CNG) के दाम बढ़ सकते हैं. एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) महंगा होने से हवाई यात्रा के टिकट महंगे हो सकते हैं. विदेशी मुद्रा में तेल खरीदने के लिए हिंदुस्तान को अधिक डॉलर चुकाने पड़ते हैं, जिससे देश का व्यापार घाटा बढ़ जाता है. जब डॉलर की मांग बढ़ती है, तो अमेरिकी डॉलर के मुकाबले हिंदुस्तानीय रुपया कमजोर होता है. ये भी पढ़ें: ट्रेन मिस हुई तो टिकट लेकर अगली ट्रेन पकड़ना पड़ेगा भारी, जान लें रेलवे का नियम The post क्रूड ऑयल 2% से अधिक महंगा, US-ईरान तनाव से तेल सप्लाई बाधित होने की आशंका appeared first on Naya Vichar.

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सीएम योगी को लोगों ने खून से लिखी चिट्ठी, फरियाद नहीं सुनी तो दी आंदोलन की चेतावनी!

UP News: आगरा प्रशासनी दफ्तरों में बार-बार फरियाद के बाद भी जब सुनवाई नहीं हुई तो लोगों ने विरोध का ऐसा रास्ता चुना, जिसने सभी का ध्यान खींच लिया. आगरा के एत्मादपुर तहसील के खंदौली ब्लॉक स्थित ग्राम पंचायत चौकड़ा में प्राचीन शिव मंदिर और शहीद स्मारक के आसपास फैली गंदगी से नाराज लोगों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को खून से पत्र लिखा. आक्रोशित लोगों ने सीएम योगी को खून से चिट्ठी लिखकर अपनी पीड़ा बताई. लोगों का कहना है कि कई शिकायतों और तहसील दिवस में प्रार्थना पत्र देने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है. शिकायतों के बाद भी नहीं हुई सफाई गांव के लोगों और समाजसेवियों का आरोप है कि मंदिर और शहीद स्मारक जैसे महत्वपूर्ण स्थान के आसपास लंबे समय से गंदगी फैली हुई है. कई बार अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई और तहसील दिवस में भी शिकायत की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. इससे लोगों में स्थानीय ब्लॉक अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यशैली को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है. समाजसेवियों ने ग्राम पंचायत सेक्रेटरी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित करने की मांग की है. शनिवार तक सफाई नहीं हुई तो आंदोलन लोगों ने अब प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है. उनका कहना है कि यदि शनिवार तक मंदिर और शहीद स्मारक के आसपास सफाई नहीं कराई गई, तो सैकड़ों लोग दोबारा खून से पत्र लिखकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे. इसके साथ ही बड़े आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है. लोगों का कहना है कि धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले स्थानों की ऐसी स्थिति प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है. अब देखना होगा कि चेतावनी के बाद प्रशासन कितनी जल्दी सफाई व्यवस्था दुरुस्त करता है. Also Read: कानपुर से लखनऊ सिर्फ 186 रुपये में: 15 अगस्त से शुरू होगी नई AC ई-बस सेवा, प्रयागराज भी जुड़ेगा The post सीएम योगी को लोगों ने खून से लिखी चिट्ठी, फरियाद नहीं सुनी तो दी आंदोलन की चेतावनी! appeared first on Naya Vichar.

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क्या आपके बच्चे की उम्र 10 से 13 साल के बीच है? भूलकर भी न कहें ये 5 बातें, वरना आपसे दूर होने लगेगा बच्चा

Parenting Tips: जब शिशु की उम्र 10 से 13 साल के बीच होती है, तो यह उनकी जिंदगी का एक ऐसा दौर होता है जिसमे वे न तो बहुत छोटे रह जाते हैं और न ही पूरी तरह से बड़े होते हैं. इस समय शिशु के शरीर, सोच और इमोशंस में बहुत सारे बदलाव आने लगते हैं. यह उम्र ऐसी होती है जिसमे वे खुद को समझने की कोशिश कर रहे होते हैं और कई बार तो छोटी छोटी बातों पर भी हद से ज्यादा इमोशनल हो जाते हैं. अगर आपके घर पर भी ऐसे शिशु हैं जिनकी उम्र 10 से 13 साल के बीच है, तो आपको उनका खास ख्याल रखना शुरू कर देना चाहिए. कई बार ऐसा भी हो सकता है कि आप अपने शिशु की भलाई के लिए या फिर अनजाने में ही कुछ ऐसी बातें कह देते हैं, जो सीधे जाकर उनके दिल पर चोट करती हैं. ऐसे में बच्चा ऊपर से तो शांत दिखता है, लेकिन अंदर ही अंदर हर समय परेशान और उदास रहने लगता है. आज के इस आर्टिकल में हम आपको ऐसी 5 बातों के बारे में बताने जा रहे हैं जो आपको कभी भी इस उम्र में अपने शिशु से नहीं कहनी चाहिए. चलिए इनके बारे में विस्तार से जानते हैं. things you must not say to your kids दूसरों से कंपेयर करना अगर आपके शिशु की उम्र 10 से 13 साल के बीच है, तो आपको कभी भी उसकी तुलना दूसरों से नहीं करनी चाहिए. कई बार माता पिता अपने शिशु से कह देते हैं “देखो उस लड़के के कितने अच्छे मार्क्स आए हैं” या फिर “तुम्हारा दोस्त कितना समझदार है, तुम कब उससे कुछ सीखोगे?”. इस तरह की बातें आपके शिशु के कॉन्फिडेंस को पूरी तरह से खत्म कर देती हैं. जब आप अपने शिशु की तुलना किसी और से करते हैं, तो उसे ऐसा लगने लगता है कि वह कभी आपकी नजरों में परफेक्ट नहीं बन पाएगा. आपके ऐसा कहने की वजह से आपके शिशु के मन में अपने ही दोस्तों या फिर भाई बहनों के लिए जलन और खुद के लिए निराशा भर जाती है. ये भी पढ़ें: मां की ये 5 आदतें तय करती हैं बेटी का भविष्य, इन्हीं से बनती है उसकी सोच और पर्सनालिटी उनकी प्रॉब्लम को छोटा समझना या इग्नोर करना कई बार जब बच्चा स्कूल या फिर दोस्तों से जुड़ी कोई प्रॉब्लम लेकर पैरेंट्स के पास आता है, तो उसे अक्सर यह सुनने को मिलता है कि “अरे, यह तो कोई बड़ी बात नहीं है” या फिर “तुम बिना किसी बात के ओवररियेक्ट कर रहे हो”. हो सकता है कि आपके लिए यह बहुत ही छोटी बात हो, लेकिन एक 10 से 13 साल के शिशु के लिए यह दुनिया की सबसे बड़ी प्रॉब्लम हो सकती है. जब आप अपने शिशु की बातों को सीरियसली नहीं लेते हैं, तो वह अकेला महसूस करने लगता है और आपसे अपने दिल की बातों को शेयर करना भी बंद कर देता है. दोस्तों या सबके सामने डांटना या मजाक उड़ाना इस उम्र में बच्चों के अंदर सेल्फ रिस्पेक्ट की भावना आने लगती है. अगर आप सबके सामने, खासकर उनके दोस्तों या रिश्तेदारों के सामने उनकी गलती बताते हैं, डांटते हैं या मजाक उड़ाते हैं, तो उन्हें बहुत ज्यादा शर्मिंदगी महसूस होती है. यह शर्मिंदगी आगे चलकर गुस्से या चिड़चिड़ेपन में बदल जाती है और बच्चा पैरेंट्स से दूरी बनाने लगता है. ये भी पढ़ें: सिर्फ पढ़ाई नहीं, 5 से 10 साल की उम्र में बच्चों को जरूर सिखाएं ये आदतें, जो बनाएंगी उन्हें जिंदगी में सफल और जिम्मेदार हर बात पर ओवर कंट्रोल करना और भरोसा न करना एक पैरेंट होने के नाते अपने शिशु का ख्याल रखना बहुत ही अच्छी बात है, लेकिन हर छोटी-छोटी चीज पर रोक-टोक करना जैसे कि, “वहां क्यों जा रहे हो?”, “उससे बात मत करो”, या “तुमसे यह काम ठीक से नहीं हो पाएगा” कहना शिशु को अंदर से परेशान कर देता है. जब पैरेंट्स हर बात पर शक करते हैं या कम भरोसा दिखाते हैं, तो बच्चों को लगता है कि वे किसी काम के नहीं हैं. इस उम्र में बच्चों को थोड़ा स्पेस देना और छोटी-छोटी जिम्मेदारियां देना बहुत जरूरी होता है. हर समय सिर्फ पढ़ाई और मार्क्स का प्रेशर बनाना आज के समय में बच्चों पर पढ़ाई करने का और अच्छे मार्क्स लाने का प्रेशर वैसे ही बहुत ज्यादा होता है. ऐसे में अगर आप घर पर भी उसे हर समय सिर्फ “पढ़ाई कर लो” या “मार्क्स कम लाओगे तो क्या होगा?” जैसी बातें कहेंगे, तो आपका बच्चा मेंटली थक जाएगा. बच्चों की तारीफ सिर्फ उनके रिजल्ट से मत कीजिए, बल्कि उन्होंने कितनी मेहनत की है इसकी भी कद्र कीजिए. जब पैरेंट्स सिर्फ मार्क्स पर फोकस करते हैं, तो शिशु को लगने लगता है कि उनका प्यार सिर्फ अच्छे रिजल्ट्स से जुड़ा है. ये भी पढ़ें: क्या आपका बच्चा नए लोगों के सामने चुप हो जाता है? उसकी झिझक दूर करने के लिए अपनाएं ये आसान तरीके The post क्या आपके शिशु की उम्र 10 से 13 साल के बीच है? भूलकर भी न कहें ये 5 बातें, वरना आपसे दूर होने लगेगा बच्चा appeared first on Naya Vichar.

समस्तीपुर

साइबर अपराध से बचाव को लेकर स्कूली बच्चों को किया जागरूक

नया विचार न्यूज़ सरायरंजन : प्रखंड अंतर्गत आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय सरायरंजन में मंगलवार को समस्तीपुर साइबर थाना के सौजन्य से साइबर जागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान पुलिस अधिकारियों ने छात्र-छात्राओं को बढ़ते साइबर अपराध और उससे बचाव के उपायों की जानकारी दी।इस अवसर पर पुलिस उपनिरीक्षक सूरज कुमार ने कहा कि मोबाइल और इंटरनेट के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर ठगी का खतरा भी बढ़ा है। थोड़ी-सी सावधानी बरतकर इससे बचा जा सकता है। पुलिस उपनिरीक्षक राहुल कुमार ने ऑनलाइन ठगी, फर्जी लिंक, ओटीपी, एटीएम पिन, पासवर्ड और बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति से साझा नहीं करने की सलाह दी। वहीं पुलिस उपनिरीक्षक अभिषेक कुमार ने भी सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने की अपील की। कार्यक्रम में प्रधानाध्यापक रवींद्र कुमार ठाकुर संतोष कुमार सुमन मदन कुमार भगत रंजीत कुमार सुनील कुमार सहित सभी शिक्षक– शिक्षिकाएं एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। विद्यार्थियों ने साइबर अपराध से बचाव के उपाय अपनाने का संकल्प लिया।

समस्तीपुर

सरायरंजन में मोबाइल व बाइक चोरों का आतंक, आमजन परेशान

नया विचार न्यूज़ सरायरंजन : सरायरंजन थाना क्षेत्र के विभिन्न हाट-बाजारों में लगातार हो रही मोबाइल एवं बाइक चोरी की घटनाओं से आम लोगों में दहशत का माहौल है। आए दिन हो रही चोरी की घटनाओं के बावजूद पुलिस अब तक चोरों के गिरोह तक पहुंचने में सफल नहीं हो सकी है। जानकारी के अनुसार, विगत सोमवार की शाम सरायरंजन हाट में खरीदारी करने पहुंचे स्थानीय पत्रकार बब्बन गिरि की मोबाइल चोरी हो गई। इससे पूर्व भगवतपुर स्थित मंगल हाट से गावपुर निवासी सुनील कुमार राय की बेशकीमती मोबाइल चोरी कर ली गई थी। वहीं, हाल ही में प्रखंड मुख्यालय स्थित बुधवार एवं शनिवार हाट से दो बाइक भी चोरी होने की घटनाएं सामने आई हैं।पीड़ितों द्वारा संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज कराए जाने के बावजूद अब तक चोरी की घटनाओं का उद्भेदन नहीं हो सका है। लगातार हो रही वारदातों से हाट-बाजारों में आने वाले लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ती जा रही है। स्थानीय लोगों ने पुलिस प्रशासन से नियमित गश्ती बढ़ाने तथा चोरों की गिरफ्तारी की मांग की है।

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Video: पीएम मोदी ने शेयर किया 30 सेकेंड का वीडियो संदेश, देशवासियों से की खास अपील

अपने वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा, “आइये 15 अगस्त को आन-बान-शान के साथ मनाएं. हमारे स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दें और विकसित हिंदुस्तान का संकल्प लें.” अभियान के मुख्य मंत्र को दोहराते हुए उन्होंने आगे कहा, “हर घर तिरंगा, घर-घर तिरंगा, हर मन तिरंगा. आइये, हर घर पर तिरंगा लहराइये.” गृह मंत्रालय ने दिया ध्वज संहिता का पालन करने का निर्देश केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ध्वज संहिता का पालन करने का निर्देश दिया. मंत्रालय ने कहा कि हालांकि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय, सांस्कृतिक और स्पोर्ट्स आयोजनों के दौरान आम लोग कागज से बने झंडे लहरा सकते हैं, लेकिन कार्यक्रमों के बाद उन्हें फेंका या जमीन पर नहीं डाला जाना चाहिए. मंत्रालय ने राज्यों से कहा कि वे इस संबंध में बड़े पैमाने पर जागरूकता कार्यक्रम चलाएं और इलेक्ट्रॉनिक तथा प्रिंट मीडिया में विज्ञापनों के जरिए इनका व्यापक प्रचार-प्रसार करें. गृह मंत्री अमित शाह ने तिरंगा फहराते हुए अपनी सेल्फी साझा करने की अपील की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नागरिकों से तिरंगा यात्राओं, तिरंगा रैलियों और ‘वंदे मातरम’ के सामूहिक गायन के माध्यम से इस अभियान में भाग लेने और इसे मनाने तथा हर घर तिरंगा की आधिकारिक वेबसाइट पर तिरंगा फहराते हुए अपनी सेल्फी साझा करने की अपील की. “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा शुरू किया गया ‘हर घर तिरंगा’ अभियान हमारे राष्ट्र की सामूहिक ताकत का प्रतिबिंब है, जो हमें एक ‘विकसित हिंदुस्तान’ के निर्माण के हमारे प्रयास में एकजुट करता है. इस वर्ष ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ का अवसर इस अभियान के साथ मिलकर हर देशभक्त के लिए इस पल को और भी भावुक और खास बना देता है.” – अमित शाह कैसा होना चाहिए राष्ट्रीय ध्वज? गृह मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज हाथ से काता और बुना हुआ या मशीन से बना होना चाहिए, और इसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री सूती, पॉलिएस्टर, ऊन, रेशम या खादी की होनी चाहिए. ध्वज संहिता क्या है? ध्वज संहिता में कहा गया, “कोई भी आम नागरिक, निजी संस्था या शिक्षण संस्थान राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा और सम्मान को ध्यान में रखते हुए, किसी भी दिन या अवसर पर-चाहे वह औपचारिक हो या कोई अन्य-राष्ट्रीय ध्वज फहरा सकता है या प्रदर्शित कर सकता है. 19 जुलाई, 2022 के आदेश के जरिए ‘हिंदुस्तानीय झंडा संहिता, 2002’ में संशोधन किया गया था… यदि तिरंगा खुले स्थान पर या किसी आम नागरिक के घर पर प्रदर्शित किया जाता है तो उसे दिन-रात फहराया जा सकता है.” इसमें स्पष्ट किया गया कि जब कभी राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाए तो उसकी स्थिति सम्मानजनक होनी चाहिए, और फटा हुआ एवं मैला-कुचैला झंडा प्रदर्शित न किया जाए. झंडे को किसी झंडों के साथ एक ही ध्वज दंड से नहीं फहराया जाना चाहिए झंडे को किसी अन्य झंडे अथवा झंडों के साथ एक ही ध्वज दंड से नहीं फहराया जाए. इसमें कहा गया, “संहिता के भाग-3 की धारा-9 में उल्लखित गणमान्य व्यक्तियों जैसे राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल आदि, के सिवाय झंडे को किसी वाहन पर नहीं लगाया जाएगा. किसी दूसरे झंडे या पताका को राष्ट्रीय झंडे से ऊंचाई पर या उससे ऊपर या उसके बराबर में नहीं लगाना चाहिए.” ये भी पढ़ें: राहुल गांधी ने अमित शाह से पूछा, पैलेट गन और छात्रों को लाठियों से पीटने का आदेश किसने दिया? The post Video: पीएम मोदी ने शेयर किया 30 सेकेंड का वीडियो संदेश, देशवासियों से की खास अपील appeared first on Naya Vichar.

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विधानसभा में सीएम हेमंत सोरेन का बड़ा ऐलान, 14वीं JPSC और दो बैकलॉग परीक्षाएं होंगी रद्द

रांची से नवीन शर्मा की रिपोर्ट CM Hemant Soren Statement: झारखंड विधानसभा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बुधवार को JPSC परीक्षाओं को लेकर बड़ा ऐलान किया. उन्होंने सदन में कहा कि 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द किया जाएगा. इसके साथ ही दो बैकलॉग JPSC परीक्षाओं को भी रद्द करने की बात कही. मुख्यमंत्री ने TDPL के माध्यम से करायी गयी परीक्षा की जांच कराने की भी घोषणा की. छात्रों के आंदोलन और परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर विधानसभा में चल रहे सियासी घमासान के बीच प्रशासन की ओर से यह महत्वपूर्ण घोषणा की गयी. छात्रों से बातचीत पर गंभीरता से प्रशासन कर ही विचार मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों के प्रतिनिधिमंडल और प्रशासन के प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई बातचीत में सामने आये मुद्दों पर प्रशासन गंभीरता से विचार कर रही है. प्रशासन छात्रों की समस्याओं को समझ रही है और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है. हाल के दिनों में JPSC और JSSC परीक्षाओं को लेकर छात्रों के आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री का यह बयान प्रशासन के रुख में महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है. JPSC परीक्षा को लेकर सीएम ने सदन में क्या कहा? मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा में JPSC परीक्षाओं से जुड़े मुद्दे पर प्रशासन का पक्ष रखा. उन्होंने स्पष्ट किया कि 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द किया जाएगा. इसके अलावा दो बैकलॉग JPSC परीक्षाओं को भी रद्द करने की बात कही. उन्होंने TDPL के माध्यम से करायी गयी परीक्षा की जांच कराने की बात भी सदन में कही. प्रशासन के इस फैसले से उन छात्रों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जो परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं. प्रशासन और छात्रों के बीच हाल में हुई बातचीत में भी TDPL के माध्यम से आयोजित परीक्षाओं की जांच का मुद्दा सामने आया था. रिपोर्टों के अनुसार प्रशासन ने TDPL से करायी गयी परीक्षाओं की जांच के लिए सहमति जतायी है. बीजेपी पर सीएम का तीखा तंज छात्रों के मुद्दे पर विपक्ष के हमले के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बीजेपी पर भी तीखा नेतृत्वक हमला किया. उन्होंने कहा कि पहले बीजेपी के लोग गेरुआ वेश में लोगों को ठगते थे और अब छात्रों के वेश में लोगों को ठगने का प्रयास कर रहे हैं. मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली. छात्रों की मांगों और परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर बीजेपी विधायक लगातार प्रशासन को घेरने की कोशिश कर रहे थे. मुख्यमंत्री ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए प्रशासन की ओर से छात्रों के मुद्दे पर संवेदनशीलता बरतने की बात कही. छात्रों का आंदोलन अभी जारी विधानसभा में नेतृत्वक बयानबाजी का यह दौर ऐसे समय में हुआ, जब छात्र लंबे समय से JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. प्रशासन और छात्रों के बीच बातचीत के बावजूद आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. छात्रों की प्रमुख मांगों में परीक्षाओं की पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई शामिल रही है. सीपी सिंह ने सदन में दिखाई नोटों की गड्डी विधानसभा की कार्यवाही के दौरान बीजेपी विधायक सीपी सिंह ने भी प्रशासन पर निशाना साधा. उन्होंने सदन में नोटों की गड्डी दिखायी. इसके जरिए उन्होंने राज्य में प्रशासनी नौकरियों और परीक्षा प्रक्रिया में कथित लेन-देन की ओर इशारा करते हुए प्रशासन पर सवाल उठाने की कोशिश की. सीपी सिंह के इस कदम का सत्ता पक्ष के विधायकों और मंत्रियों ने जोरदार विरोध किया. इसके बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच माहौल और गरमा गया. छात्रों की परीक्षा संबंधी मांग पहले से नेतृत्वक विवाद का केंद्र बनी हुई थी, ऐसे में नोटों की गड्डी दिखाने की घटना ने विधानसभा की कार्यवाही को और हंगामेदार बना दिया. प्रशासन ने छात्रों की मांगों पर कार्रवाई का दिया भरोसा मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन छात्रों के मुद्दे पर संवेदनशील है और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है. उन्होंने बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात दोहरायी. प्रशासन की ओर से 14वीं JPSC और दो बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने तथा TDPL से जुड़ी परीक्षाओं की जांच की घोषणा को आंदोलन के बीच अहम कदम माना जा रहा है. हालांकि, छात्रों की ओर से पहले से उठायी जा रही सभी मांगों पर अंतिम सहमति बनना अभी अलग विषय है. प्रशासन की घोषणाओं के बाद भी आंदोलन को लेकर छात्रों का रुख पूरी तरह बदलने की स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है. हाल की वार्ताओं में प्रशासन और छात्रों के बीच कुछ मुद्दों पर सहमति बनी, लेकिन कुछ प्रमुख मांगों को लेकर गतिरोध कायम रहा. हंगामे के बीच अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुआ सदन विधानसभा में हंगामे और सत्ता पक्ष-विपक्ष के बीच लगातार तीखी नोकझोंक के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया. सदन की कार्यवाही 12 अगस्त तक प्रस्तावित थी, लेकिन निर्धारित समय से एक दिन पहले ही कार्यवाही समाप्त हो गयी. सत्र के अंतिम दिन विपक्षी विधायक छात्रों के मुद्दे और परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर प्रशासन पर हमलावर रहे. वहीं, प्रशासन ने छात्रों की मांगों पर बातचीत और आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया. हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई और अंततः अध्यक्ष ने इसे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया. इसे भी पढ़ें: विधानसभा में हेमंत सोरेन का विपक्ष पर तीखा हमला, बोले- छात्रों की आड़ में की जा रही नेतृत्व JPSC परीक्षा विवाद पर प्रशासन के कदमों पर नजर विधानसभा में मुख्यमंत्री की घोषणाओं के बाद अब JPSC परीक्षा विवाद में प्रशासन के अगले कदम पर नजर रहेगी. खासकर 14वीं JPSC और दो बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने की प्रक्रिया तथा TDPL से जुड़ी परीक्षाओं की जांच किस स्तर पर और किस तरीके से होती है, यह आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण होगा. छात्रों के आंदोलन के बीच प्रशासन के इन फैसलों से विवाद को शांत करने की कोशिश जरूर दिखती है, लेकिन नेतृत्व में घोषणा और उसके क्रियान्वयन के बीच जो लंबा गलियारा होता है, उसमें ही असली परीक्षा होती है. इसे भी पढ़ें: Jharkhand Vidhan Sabha March: छात्रों पर लाठी

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VIDEO : पटना में BPSC-BSSC की लापरवाही पर छात्रों का महाआंदोलन, विधायक संदीप सौरभ ने किया ऐलान, सुनिए क्या कह रहे हैं

राजधानी पटना में एक बार फिर छात्र आंदोलन हो सकता है. BPSC-BSSC में लापरवाही को लेकर छात्र आंदोलन कर सकते हैं. माले विधायक संदीप सौरभ ने छात्र आंदोलन का ऐलान किया है. साथ ही प्रशासन और बीपीएससी और बीएसएससी पर गंभीर आरोप भी लगाया है. उन्होंने छात्रों से अपील की है कि वो पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर पहुंचे और आंदोलन में शामिल हो. उन्होंने दावा किया कि प्रशासन छात्रों के हित को लेकर कोई कदम नहीं उठा रही है. सुनिए संदीप सौरभ क्या कह रहे हैं? Also Read : PHOTOS : थावे धाम से लेकर भोरे के शिवालय तक, गोपालगंज के इन सात प्रसिद्ध मंदिरों का वैभव देखिए The post VIDEO : पटना में BPSC-BSSC की लापरवाही पर छात्रों का महाआंदोलन, विधायक संदीप सौरभ ने किया ऐलान, सुनिए क्या कह रहे हैं appeared first on Naya Vichar.

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Jharkhand Bandh Live Updates: रामगढ़ के सुभाष चौक पर JCB लगाकर चक्का जाम, BJP बोली- ‘छात्रों पर लाठीचार्ज बर्दाश्त नहीं’

जेपीएससी नियुक्ति में गड़बड़ी को लेकर झारखंड बीजेपी ने राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया है. रांची में पार्टी कार्यकर्ताओं ने टायर जलाकर और रोड ब्लॉक कर अपना विरोध जताया है. The post Jharkhand Bandh Live Updates: रामगढ़ के सुभाष चौक पर JCB लगाकर चक्का जाम, BJP बोली- ‘छात्रों पर लाठीचार्ज बर्दाश्त नहीं’ appeared first on Naya Vichar.

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सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर को मौत की सजा, युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराधों में दोषी

सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद को दमिश्क की एक आपराधिक अदालत ने मौत की सजा सुनाई है. अदालत ने उन्हें देश में चले लंबे गृहयुद्ध के दौरान हुए युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी माना. दिसंबर 2024 में असद प्रशासन के पतन और उनके रूस भाग जाने के बाद यह मौत की सजा दी गई है. इस फैसले को सीरिया में सत्ता परिवर्तन के बाद पूर्व शासन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के बड़े कदम के तौर पर देखा जा रहा है. 24 साल तक सीरिया पर किया शासन बशर अल-असद ने वर्ष 2000 में अपने पिता हाफिज अल-असद के निधन के बाद सीरिया की सत्ता संभाली थी. उनके पिता करीब तीन दशक तक देश के राष्ट्रपति रहे थे. बशर अल-असद ने करीब 24 वर्षों तक देश पर शासन किया. लेकिन दिसंबर 2024 में इस्लामवादी नेतृत्व वाले विद्रोही गुटों के दमिश्क की ओर बढ़ने के बाद उनकी प्रशासन गिर गई. इसके बाद असद अपने परिवार के साथ रूस चले गए. सत्ता परिवर्तन के बाद अहमद अल-शरा के नेतृत्व में संक्रमणकालीन प्रशासन का गठन हुआ. असद के भाईयों को भी मौत की सजा अदालत ने असद के भाई माहेर अल असद और उनके चचेरे भाई और दक्षिणी प्रांत दारा में नेतृत्वक सुरक्षा निदेशालय के पूर्व प्रमुख आतिफ नजीब को भी मृत्युदंड सुनाया है. नजीब अदालत में मौजूद होकर मुकदमे का सामना कर रहे थे. उन्हें जानबूझकर हत्या और यातना देने का दोषी पाया गया. 2011 में शुरू हुआ था सीरियाई गृहयुद्ध सीरिया में गृहयुद्ध की शुरुआत 2011 में दारा शहर से हुई थी. प्रशासन विरोधी प्रदर्शनों को सुरक्षा बलों ने बलपूर्वक दबाने की कोशिश की, जिसके बाद आंदोलन पूरे देश में फैल गया. आगे चलकर यह संघर्ष प्रशासन, सशस्त्र विद्रोही समूहों और विदेशी शक्तियों के बीच बड़े युद्ध में बदल गया. इस संघर्ष में लाखों लोगों की मौत हुई और बड़ी संख्या में लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा. ये भी पढ़ें:- हिंदुस्तान ही नहीं, 15 अगस्त को एक और देश आजाद हुआ था, लेकिन अफसोस… आजादी के बाद वह दो देशों में बंट गया असद प्रशासन पर गंभीर आरोप गृहयुद्ध के दौरान असद प्रशासन पर आम नागरिकों की हत्या, यातना, जबरन गायब करने, मनमानी गिरफ्तारी और रिहायशी इलाकों पर हमले जैसे गंभीर आरोप लगे. संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने प्रशासनी बलों के साथ-साथ अन्य सशस्त्र गुटों द्वारा किए गए कथित उल्लंघनों को भी दर्ज किया. असद प्रशासन पर रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल का आरोप भी लगा. रासायनिक हथियार निषेध संगठन (OPCW) और संयुक्त राष्ट्र से जुड़े जांच तंत्रों ने कई हमलों के लिए सीरियाई प्रशासनी बलों को जिम्मेदार ठहराया. पूर्व शासन के खिलाफ जारी है कानूनी कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय जांच में सीरिया की जेलों में यातना और हिरासत के दौरान लोगों की मौत के मामले भी सामने आए. यूरोप की कुछ अदालतों में असद प्रशासन से जुड़े पूर्व सुरक्षा अधिकारियों पर भी कथित मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर मुकदमे चल चुके हैं. मौत की सजा ऐसे समय आई है जब सीरिया की संक्रमणकालीन प्रशासन पूर्व शासन के अधिकारियों और सुरक्षा तंत्र से जुड़े लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ा रही है. कुछ आरोपी अदालत में पेश हो रहे हैं, जबकि बशर अल-असद जैसे कुछ लोगों का मुकदमा उनकी गैरमौजूदगी में चलाया जा रहा है. ये भी पढ़ें:- पहले ईरान को बर्बाद किया, अब उसी से हर्जाना मांग रहे ट्रंप, 50 साल के नुकसान और 52 हजार मौतों का मांगा हिसाब The post सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर को मौत की सजा, युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराधों में दोषी appeared first on Naya Vichar.

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