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Babu Jagjivan Ram Jayanti: बचपन में थीं मुश्किलें…पर ‘बाबूजी’ बने उपप्रधानमंत्री, ऐसे तय किया स्वतंत्रता सेनानी से राजनेता का सफर

Babu Jagjivan Ram Jayanti in Hindi: हिंदुस्तान की आजादी की बात हो और बाबू जगजीवन राम का नाम न आए तो ऐसा नहीं हो सकता. उन्होंने देश की स्वतंत्रता की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाई. आजादी के बाद वे हिंदुस्तान के उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री भी बने थे. बाबू जगजीवन राम का जन्म 5 अप्रैल 1908 को हुआ था. उनके शुरुआती जीवन में कठिनाइयां थी लेकिन वह सभी चुनौतियों को पार करते हुए आगे बढ़े. हर वर्ष 5 अप्रैल को उनकी जयंती मनाई जाती है. इसलिए इस अवसर पर जानते हैं बाबू जगजीवन राम (Babu Jagjivan Ram Jayanti in Hindi) के बारे में.

बाबू जगजीवन राम का संक्षिप्त जीवन परिचय (Babu Jagjivan Ram Jayanti)

बाबू जगजीवन राम का जन्म 5 अप्रैल 1908 को बिहार के आरा (अब भोजपुर जिला) के चंदवा गांव में हुआ था. जगजीवन राम को 6 साल की उम्र में गांव के प्राथमिक स्कूल में पढ़ने भेजा गया. उसी साल उनके पिता का देहांत हो गया. उन्होंने आगे की पढ़ाई आरा के महाजनी स्कूल और टाउन स्कूल से की. 1925 में वे आरा में होने वाले एक छात्र सम्मेलन में शामिल हुए. वहां उन्हें पंडित मदन मोहन मालवीय का स्वागत भाषण देने का मौका मिला. उनका भाषण सुनकर मालवीय जी बहुत प्रभावित हुए और उन्हें आगे पढ़ाई के लिए काशी हिंदू विश्वविद्यालय बुलाया. 

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काशी विश्वविद्यालय से की पढ़ाई (Babu Jagjivan Ram in Hindi)

मैट्रिक की परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास करने के बाद जुलाई 1926 में बाबू जगजीवन राम ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, बनारस में एडमिशन लिया. 1928 में आईएससी की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से बीएससी की डिग्री प्राप्त की. इसके बाद वे स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े और महात्मा गांधी के संपर्क में आए.

गांधीजी ने कहा था ‘आग में तपा सोना’ (Babu Jagjivan Ram in Hindi)

स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान से महात्मा गांधी बहुत प्रभावित हुए और गांधी जी ने बाबू जगजीवन राम को ‘आग में तपा सोना’ कहकर सम्मानित किया. 1935 के हिंदुस्तानीय अधिनियम के तहत 1937 में चुनाव हुए जिसमें बिहार और आठ अन्य प्रांतों में कांग्रेस की जीत हुई. 

बाबू जगजीवन राम: एक संघर्षशील स्वतंत्रता सेनानी (Babu Jagjivan Ram)

  • बाबू जगजीवन राम एक साहसी स्वतंत्रता सेनानी थे
  • वे 1931 में हिंदुस्तानीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य बने
  • 1934-35 में उन्होंने “अखिल हिंदुस्तानीय शोषित वर्ग लीग” की स्थापना में अहम भूमिका निभाई
  • बाबूजी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन और हिंदुस्तान छोड़ो आंदोलन में भाग लिया.
  • जगजीवन जी को 1940 और 1942 में जेल भी जाना पड़ा.
  • जेल जाने के बाद भी वे समाज सेवा से पीछे नहीं हटे और वे हमेशा त्याग और बलिदान की भावना से देश के लिए काम करते रहे.
  • उनके कार्यों से वे सामाजिक समानता और शोषित वर्गों के अधिकारों के प्रतीक बन गए.

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बाबू जगजीवन राम: आजादी के बाद योगदान (बाबू जगजीवन राम की हिस्ट्री)

  • आजादी के बाद बनी पहली प्रशासन में बाबू जगजीवन राम को श्रम मंत्री बनाया गया.
  • यह पद उन्हें पसंद था क्योंकि उन्होंने खेत मजदूरों और मिल मजदूरों की मुश्किलें बचपन और छात्र जीवन में करीब से देखी थीं.
  • श्रम मंत्री रहते हुए उन्होंने मजदूरों के लिए बेहतर कानून बनाए, जो आज भी हमारे देश की नीतियों का हिस्सा हैं.
  • जगजीवन जी ने 1952 तक श्रम मंत्रालय का नेतृत्व किया.

बाबू जगजीवन राम: सबसे लंबे समय तक मंत्री रहने का रिकॉर्ड

  • बाबू जगजीवन राम 32 वर्षों तक कैबिनेट मंत्री रहे, जो एक रिकॉर्ड है.
  • वे पंडित नेहरू की प्रशासन में कई मंत्रालयों में कार्यरत रहे:
  • संचार मंत्रालय (1952-56)
  • परिवहन और रेलवे मंत्रालय (1956-62)
  • परिवहन और संचार मंत्रालय (1962-63)
  • 1971 हिंदुस्तान-पाक युद्ध के समय वे हिंदुस्तान के रक्षा मंत्री थे.
  • इसी युद्ध के परिणामस्वरूप बांग्लादेश का जन्म हुआ.
  • उनका निधन 6 जुलाई 1986 को हुआ.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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