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चमोली टनल हादसे में झारखंड के दो मजदूरों की मौत, पांच घायलों का अस्पताल में चल रहा इलाज

बिपिन की रिपोर्ट Uttarakhand Tunnel Accident: उत्तराखंड के चमोली टनल हादसे में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है. मरनेवालों में दो मजदूर झारखंड के हैं. टीएचडीसी द्वारा निर्माणाधीन विष्णुगढ़ पीपलकोटि जल विद्युत परियोजना की गुरुवार की शाम करीब सात बजे अचानक सुरंग में भू-धंसाव होने से कई मजदूर अंदर फंस गए थे. रात भर चले रेस्क्यू ऑपरेशन में 21 लोगों को बाहर निकाला जा सका है. सुरंग हादसे में 21 मजदूर रेस्क्यू बीती रात मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उत्तराखंड के सीएम से फोन पर बात कर जानकारी ली थी. साथ ही हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया था. सीएम पुष्कर सिंह धामी भी हालात पर नजर रखे हुए हैं. सुरंग में भू धंसाव होने से काफी मात्रा में मलवा आ गया था जिससे राहत कार्य चलाने में परेशानी हो रही है. राज्य आपातकालीन सेवा के ड्यूटी ऑफिसर अनिल काला ने बताया कि अभी तक कुल 21 मजदूर रेस्क्यू कर लिए गए हैं, जिनमें 7 की मौत की पुष्टि हो गयी है, जबकि 14 मजदूरों का इलाज उत्तराखंड के गोपेश्वर जिला अस्पताल में चल रहा है. हादसे में झारखंड के दो मजदूरों की मौत झारखंड से जिनकी मौत हुई है, उनमें 28 वर्षीय विजय कुमार और दूसरे मजदूर का नाम जितेंद्र कुमार का नाम शामिल है. कुछ मजदूरों के अभी भी टीआरटी टनल के अंदर फंसे होने की बात कही जा रही है. अस्पताल में भर्ती मजदूरों को हल्की तो कुछ को गंभीर चोटें आई हैं. मृतकों का विवरण विजय कुमार, उम्र 28 वर्ष, झारखंड जितेंद्र कुमार, उम्र ज्ञात नहीं, झारखंड यह भी पढ़ें: चमोली सुरंग हादसा: सात लोगों की मौत, कई घायल, रेस्क्यू जारी जिला चिकित्सालय गोपेश्वर में भर्ती कराये गये कर्मचारियों का विवरण हाबिल गुडिया, पिता रेजन गुडिया, उम्र-27 वर्ष, गांव तपरा कमड़ा थाना तपकरा, जिला खूंटी निस्तर भिगंरा, पिता-राफेल भिगरां उम्र-24 वर्ष, पायरा किन्सू-टोली, थाना-तपकरा जिला खूंटी विनोद रावना, पिता- तुनिया रवाना, उम्र-46 वर्ष, गुमला दीना बेगरा, पिता-श्री केला बैगरा, उम्र-26 वर्ष, श्रोने थाना तोरपा जिला खूंटी स्पोर्ट्सा राम बिसरा, पिता श्री मोनसा बिसरा, उम्र-22 वर्ष, थाना डुमरिया, पूर्वी सिंहभूम ये भी पढ़ें: चमोली में भारी बारिश के बाद HCC टनल में अचानक घुसा पानी, 18 मजदूर बचाए गए; राहत-बचाव कार्य जारी The post चमोली टनल हादसे में झारखंड के दो मजदूरों की मौत, पांच घायलों का अस्पताल में चल रहा इलाज appeared first on Naya Vichar.

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बिहार : स्कूल बढ़े पर 38.5% ही 12वीं तक पहुंचे, पढ़ाई छोड़कर कहां जा रहे हैं बच्चे?

Bihar Education System: बिहार की शिक्षा व्यवस्था को लेकर UDISE 2025-26 रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि बिहार में प्रशासनी स्कूलों की संख्या तो बढ़ी है, लेकिन बड़ी संख्या में स्कूल आज भी बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहे हैं और स्कूल से शिशु काफी संख्या में ड्रॉपआउट कर रहे हैं. पहले की तुलना में स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर कुछ हद तक सही हुआ, लेकिन अभी भी कई स्कूलों के अपने भवन नहीं हैं. शिक्षकों की संख्या कुछ स्कूलों में सही है लेकिन कई ऐसे हैं जहां अभी भी कमी है. स्थिति ऐसी है कि एक शिक्षक के भरोसे सैकड़ों शिशु हैं. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि माध्यमिक स्तर तक पहुंचने वाले बच्चों में सिर्फ 38.5 प्रतिशत ही 12वीं तक पहुंच पाते हैं. काफी संख्या में शिशु ड्रॉपआउट कर रहे हैं. ऐसे में सवाल है कि आखिर स्कूल तक बच्चों के नहीं पहुंचने और ड्रॉपआउट करने की वजह क्या हो सकती है? स्कूल के बच्चों की तस्वीर बच्चों के स्कूल छोड़ने पर क्या कहना है जानकारों का? पूर्व आईएएस अधिकारी और बिहार विद्यापीठ के अध्यक्ष विजय प्रकाश का कहना है कि जिस तरह से स्कूलों में बच्चों को नियमित तरीके से मिड डे मील, साइकिल, कपड़े और किताब उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ठीक वैसे ही पढ़ाई पर भी फोकस करने की जरूरत है. ऐसा नहीं होने से शिशु स्कूल छोड़ रहे. ऐसे में नॉन-एकेडमिक चीजों पर भी ध्यान दिया जा सकता है. रोचक तरीके से बच्चों के स्कूल जाने के लिए प्ररित किए जाने की जरूरत है. आगे उन्होंने यह भी बताया कि शैक्षणिक आवश्यकता के अनुसार स्कूलों में व्यवस्था नहीं की गई. स्कूलों में अगर रीजनल लैंग्वेज यानी कि बच्चों की जो अपनी भाषा है उसी में पढ़ाई (जैसे कि- भोजपुरी, मैथिली, मगही या अन्य) में की जाए तो शिशु स्कूल में टिके रह सकते हैं. इसके साथ ही स्कूलों में गांव के स्पोर्ट्सों को भी शामिल किए जाने की जरूरत है. उनका यह भी कहना है कि कई स्कूलों में लैब की स्थिति सही नहीं है. कुछ स्कूलों में कंप्यटर लैब नहीं है और जहां हैं वहां बच्चों को पढ़ाया नहीं जा रहा है. लैब में कंप्यूटर ऐसे ही पड़े हैं. इस तरह से पढ़ाई पर फोकस और कई तरह के स्पोर्ट्स प्रतियोगिताओं के आयोजन करने से भी बच्चों के ड्रॉपआउट को काफी हद तक रोका जा सकता है. इसी तरह से एएन सिन्हा इंस्टीच्यूट के पूर्व निदेशक डीम दिवाकर ने प्रशासनी स्कूलों में बच्चों के नहीं पहुंचने की कई वजहें बताईं. उनका कहना है कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी, जो शिक्षक हैं उनमें प्रशिक्षण का अभाव, अरुचिकर पाठ्यक्रम, शिक्षकों को कई अन्य काम में शामिल करना, बीईओ और डीईओ की उदासीनता और उनमें पारदर्शिता की कमी, संवेदनशील प्रशासन का अभाव, तकनीकी प्रशासन पर अधिक जोर, प्रशासनी सेवक और शिक्षक के बच्चों का प्राइवेट स्कूलों में नामांकन, साईकिल पोशाक, पुस्तक प्रकाशन और वितरण में व्याप्त भ्रष्टाचार, अकुशल शिक्षकों की नियुक्ति, निष्ठावान शिक्षकों पर भरोसा की कमी, नौकरशाही का प्रभुत्व समेत कई कारण हो सकते हैं, जिसकी वजह से प्रशासनी स्कूलों की यह स्थिति है. प्रशासनी स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम अब भी सपना बिहार के केवल 8,892 स्कूलों यानी करीब 11.6% स्कूलों में ही स्मार्ट बोर्ड उपलब्ध हैं. यानी करीब 88% स्कूल अभी भी स्मार्ट बोर्ड की सुविधा से बाहर हैं. लेकिन बिहार के प्रशासनी स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम और तकनीक आधारित शिक्षा को लेकर प्रशासन लगातार जोर दे रही है. शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के मुताबिक, डिजिटल बोर्ड, ई-कंटेंट और ऑनलाइन मॉड्यूल के बाद अब AI आधारित लाइव स्मार्ट क्लास की भी शुरुआत की गई है. धीरे-धीरे राज्य के ज्यादातर प्रशासनी स्कूलों में मॉडर्न सुविधाएं होंगी. मिथिलेश तिवारी ने की थी 7900 करोड़ के विशेष पैकेज की मांग बिहार में शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने केंद्र से मदद मांगी थी. शिक्षा मंत्री ने केंद्र से 7,900 करोड़ रुपये के विशेष शिक्षा पैकेज की मांग की थी. जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी इंप्लीटेशन और बिहार की बढ़ती शैक्षणिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए यह मांग की गई. नई दिल्ली के आईसीएआर सभागार में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की अध्यक्षता में दो दिवसीय प्रगति समीक्षा बैठक हुई थी. बैठक में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने मांग रखते हुए कहा था कि बिहार में शिक्षा व्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए केंद्र के विशेष सहयोग की आवश्यकता है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लक्ष्यों को समय से हासिल करने के लिए आधारभूत संरचना, डिजिटल शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण और संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र में बड़े निवेश की जरुरत है. आगे उन्होंने माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों के भवनों, अतिरिक्त कक्षाओं, कंप्यूटर प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों आदि के विकास के लिए 3000 करोड़ रुपये की विशेष केंद्रीय सहायता मांगी थी. आकांक्षी जिलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, स्मार्ट क्लास आदि को मजबूत करने के लिए 2000 करोड़ रुपये का अनुरोध किया था. डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 1000 करोड़ रुपये की सहायता की मांग और संस्कृत शिक्षा के सुदृढ़ीकरण पर भी बिहार प्रशासन ने विशेष जोर दिया था. सम्राट चौधरी, मुख्यमंत्री प्रशासन के सामने ये है चुनौती बिहार प्रशासन की तरफ से छात्रों और युवाओं के लिए कई जरूरी योजनाओं के ऐलान किए गए हैं. इसमें स्मार्ट क्लासरूम से लेकर एआई ट्रेनिंग तक शामिल है. लेकिन ये सभी योजनाएं धरातल पर उतारना ही प्रशासन की बड़ी चुनौती मानी जा रही है. जानकारों का मानना है कि जिस तरह से प्रशासन बिहार की शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने की प्लानिंग कर रही है, अगर उसे सही तरीक से इंप्लीमेंट किया जाए तो काफी हज तक शिक्षा व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है. दूसरी तरफ UDISE के आंकड़ों को भी इग्नोर नहीं किया जा सकता है. आंकड़ों से साफ है कि शिशु शुरुआत में स्कूली शिक्षा ही सही तरीके से नहीं ले पा रहे हैं. खासकर बच्चों का ड्रॉपआउट करना बड़ा चिंता का विषय माना जा रहा है. ऐसे में बिहार प्रशासन अपनी योजनाओं के जरिए किस हद तक बच्चों को स्कूल जाने के लिए मोटिवेट और शिक्षा में सुधार कर पाती है, यह देखने वाली बात होगी. 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बिहार पंचायत चुनाव: परिसीमन के बाद ही तय होगी चुनाव की तारीख, जानिए कब तक हो सकता है मतदान

Panchayat Chunav : बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं, लेकिन चुनाव की तारीख को लेकर तस्वीर अभी साफ नहीं है. पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के मुताबिक परिसीमन के बाद ही चुनाव कराए जाएंगे. परिसीमन के बाद पंचायतों की संख्या में बदलाव हो सकता है. परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने में कम से कम एक साल लगने की संभावना है. ऐसे में इस साल चुनाव होने की संभावना नहीं दिख रही है. जानकारी के अनुसार, पंचायत चुनाव अगले साल यानी 2027 के जुलाई-अगस्त से पहले संभव नहीं माना जा रहा है. पंचायतों के परिसीमन का आधार 2011 की जनगणना के आंकड़े पर होंगे. साथ ही इसी के अनुसार पंचायतों की सीमाओं और जनसंख्या से जुड़े बदलाव तय किए जाएंगे. पंचायतों का जीआईएस मैपिंग का काम चल रहा फिलहाल राज्य में पंचायतों का जीआईएस मैपिंग का काम चल रहा है. जनगणना 2011 के आंकड़ों के आधार पर पंचायतों की मैपिंग के साथ कम्युनिकेशन प्लान भी तैयार किया जा रहा है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 8 अगस्त तक पंचायतों का जीआईएस मैपिंग का काम पूरा किया जा चुका है. अब पंचायतों के परिसीमन की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की तैयारी चल रही है. परिसीमन के बाद ही चुनाव की तस्वीर होगी साफ पंचायतों के परिसीमन को लेकर जारी हालिया दिशा-निर्देशों के अनुसार राजस्व ग्रामों की सीमाओं, जनसंख्या में अंतर और मानचित्रों से जुड़ी त्रुटियों को दूर करने के लिए विभागीय स्तर पर समय-सीमा तय कर दी गई है. इन कामों के पूरा होने के बाद ही परिसीमन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. परिसीमन के दौरान राजस्व ग्रामों की वास्तविक स्थिति और जनसंख्या के आंकड़ों का मिलान किया जाएगा. इसके साथ ही नक्शे में दर्ज नहीं होने या सीमा से जुड़ी गड़बड़ियों को भी ठीक किया जाएगा. प्रशासन की कोशिश है कि परिसीमन की पूरी प्रक्रिया को तय समय के भीतर पूरा किया जाए, ताकि आगे की चुनावी तैयारी में किसी तरह की परेशानी न हो. बिहार राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से भी इस संबंध में जल्द ही पूरी जानकारी जारी किए जाने की उम्मीद है. हालांकि मौजूदा स्थिति को देखते हुए अगले साल जुलाई-अगस्त से पहले पंचायत चुनाव कराना संभव नहीं दिख रहा है. मुखिया की सीटों की संख्या में भी होगा बदलाव माना जा रहा है कि मुखिया की सीटों की संख्या भी बढ़ सकती है. इसमें करीब 60 फीसदी तक बढ़ोतरी की बात कही जा रही है. मौजूदा व्यवस्था में परिसीमन के लिए जनगणना के आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे में मुखिया की कुल संख्या करीब 13 हजार तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है. जीआईएस मैपिंग से लेकर डेटाबेस तैयार करने तक का काम परिसीमन की तैयारी के लिए जीआईएस मैप की त्रुटियों को ठीक करने का काम प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है. राजस्व ग्राम की जनसंख्या और मैप पर अंकित सीमाओं से जुड़ी कमियों की पहचान कर उन्हें दूर किया जा रहा है. जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समेत कुल जनसंख्या का सटीक संकलन कर डेटाबेस तैयार किया जा रहा है. इसका इस्तेमाल पंचायतों की सीमाओं और परिसीमन से जुड़ी आगे की प्रक्रिया में किया जाएगा. इसके साथ ही परिसीमन की ऐतिहासिक स्थिति और जातिगत सर्वेक्षण 2022-2023 के आंकड़ों के बीच भी समन्वय स्थापित किया जा रहा है. संबंधित अभिलेखों की प्रविष्टि सुनिश्चित करने पर भी काम चल रहा है. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी निगरानी परिसीमन की पूरी प्रक्रिया को सुचारु तरीके से लागू करने के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विस्तृत कम्युनिकेशन प्लान तैयार किया जा रहा है. इसका मकसद अलग-अलग स्तर पर चल रहे काम की निगरानी और जरूरी निर्देशों को समय पर संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाना है प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार प्रशिक्षण, जन-जागरूकता, प्रशासनिक अनुमोदन, सत्यापन और प्रकाशन से जुड़े सभी जरूरी अभिलेखों को क्रमबद्ध तरीके से तैयार किया जा रहा है. इससे परिसीमन की प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी. उम्मीदवारों ने अभी से तैयारी शुरू कर दी इसके बावजूद संभावित उम्मीदवारों ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है. गांवों में लोगों से संपर्क बढ़ाया जा रहा है. बैठकों का दौर भी शुरू हो गया है. कई लोग अपनी उम्मीदवारी को लेकर चर्चा कर रहे हैं. मुखिया बनने के लिए तैयार कर ले दस्तावेज अगर आप भी मुखिया का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं तो दस्तावेज अभी से तैयार कर लें. नामांकन के समय कागजों की कमी परेशानी बढ़ा सकती है. आखिरी समय में प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए भागदौड़ करनी पड़ सकती है.  जैसे- मतदाता सूची में नाम, प्रस्तावक का नाम, उम्र का प्रमाण, शपथ-पत्र, फोटो और पहचान पत्र, आरक्षित सीट है तो जाति प्रमाण-पत्र रखें, निवास प्रमाण-पत्र भी रखें. पंचायत चुनाव से पहले परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है. यही वजह है कि फिलहाल चुनाव से ज्यादा जोर पंचायतों की सीमाओं, जनसंख्या के आंकड़ों और जीआईएस मैपिंग से जुड़ी तैयारियों को पूरा करने पर है. परिसीमन का काम अंतिम रूप लेने के बाद ही पंचायत चुनाव को लेकर अगली बड़ी तस्वीर सामने आएगी. Also Read: पटना: बेली रोड पर दौड़ने लगीं 10 नई इलेक्ट्रिक बसें, पीएम ई-बस योजना के पहले चरण में शुरू हुआ परिचालन The post बिहार पंचायत चुनाव: परिसीमन के बाद ही तय होगी चुनाव की तारीख, जानिए कब तक हो सकता है मतदान appeared first on Naya Vichar.

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महिला एशिया कप 2026 के लिए श्रीलंका टीम का ऐलान, चमारी अटापट्टू को मिली कप्तानी

Sri Lanka Women Asia Cup Team: आगामी एशिया कप के लिए श्रीलंका ने अपनी 15 सदस्यीय स्त्री टीम का ऐलान कर दिया है. डिफेंडिंग चैंपियन श्रीलंका इस बार भी खिताब बचाने के इरादे से मैदान में उतरेगा. टीम की कमान अनुभवी ऑलराउंडर चमारी अटापट्टू के हाथों में रहेगी, जबकि हर्षिता समरविक्रमा उपकप्तान की भूमिका निभाएंगी. मिथाली अयोध्या की टीम में वापसी श्रीलंका की टीम में तेज गेंदबाज मिथाली अयोध्या की वापसी हुई है. अप्रैल में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने वाली अयोध्या ने कम समय में अपनी गेंदबाजी से प्रभावित किया है. 2026 स्त्री टी20 विश्व कप में उन्होंने चार विकेट हासिल किए थे और वह श्रीलंका की दूसरी सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली गेंदबाज रही थीं. उनके प्रदर्शन को देखते हुए चयनकर्ताओं ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया है. देवमी विहंगा को पहली बार टी20 टीम में मौका लेग स्पिनर और ऑलराउंडर देवमी विहंगा को पहली बार टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम में शामिल किया गया है. वह इससे पहले श्रीलंका की ओर से 12 वनडे मैच स्पोर्ट्स चुकी हैं. उनकी स्पिन गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी करने की क्षमता टीम के लिए अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध कराएगी. इसके अलावा गेंदबाजी आक्रमण को मजबूत करने के लिए चेतना विमुक्ति की भी टीम में वापसी हुई है. इसे भी पढ़े- फ्लेमिंग के बाद कौन होगा CSK का नया कोच? धोनी को लेकर अश्विन ने बताया पूरा प्लान बल्लेबाजी में अटापट्टू और समरविक्रमा पर जिम्मेदारी श्रीलंका की बल्लेबाजी की अगुवाई कप्तान चमारी अटापट्टू और उपकप्तान हर्षिता समरविक्रमा करेंगी. इनके अलावा हसिनी परेरा, विष्मी गुणारत्ने और निलाक्षिका सिल्वा जैसे बल्लेबाज टीम को मजबूती देंगे. 17 वर्षीय संजना कविंदी को भी टीम में बरकरार रखा गया है. उन्होंने हाल ही में पाकिस्तान के खिलाफ सीरीज में अपना टी20 अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया था. वहीं इमेशा दुलानी ने भी टीम में अपनी जगह बनाए रखी है. पाकिस्तान के खिलाफ उसी सीरीज में दुलानी ने शानदार शतक जड़कर इतिहास रचा था और वह टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शतक बनाने वाली श्रीलंका की केवल दूसरी स्त्री खिलाड़ी बनी थीं. चमारी अटापट्टू (कप्तान) ग्रुप बी में श्रीलंका के साथ बांग्लादेश, इंडोनेशिया और यूएई एशिया कप में श्रीलंका को ग्रुप बी में रखा गया है. इस ग्रुप में उसके साथ बांग्लादेश, इंडोनेशिया और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की टीमें हैं. श्रीलंका अपने अभियान की शुरुआत 29 अगस्त को यूएई के खिलाफ करेगा. डिफेंडिंग चैंपियन होने के कारण श्रीलंका पर खिताब बचाने का दबाव भी होगा. अटापट्टू की अगुवाई में टीम का अनुभव और युवा खिलाड़ियों का उत्साह उसे एक बार फिर मजबूत दावेदार बनाता है. श्रीलंका की 15 सदस्यीय टीम चमारी अटापट्टू (कप्तान), मिथाली अयोध्या, कविशा दिलहारी, इमेशा दुलानी, विष्मी गुणारत्ने, काव्या कविंदी, संजना कविंदी, सुगंधिका कुमारी, कौशिनी नुथ्यांगना, हसिनी परेरा, चामुडी प्रभोदा, हर्षिता समरविक्रमा, निलाक्षिका सिल्वा, देवमी विहंगा और चेथना विमुक्ति. इसे भी पढ़े- विश्व कप के लिए तैयार है हिंदुस्तानीय स्त्री हॉकी टीम, गोलकीपर सविता पूनिया ने कहा- मैदान पर आत्मविश्वास से उतरेंगे The post स्त्री एशिया कप 2026 के लिए श्रीलंका टीम का ऐलान, चमारी अटापट्टू को मिली कप्तानी appeared first on Naya Vichar.

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एक साल में मिलेगी MA की डिग्री, IGNOU के इन 9 विषय के लिए फटाफट करें अप्लाई

IGNOU One Year MA Course: इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) ने चार साल का ग्रेजुएशन कार्यक्रम (FYUP) पूरा कर चुके छात्रों के लिए एक साल का मास्टर्स डिग्री शुरू किया है. टोटल 9 विषय में एक साल की डिग्री ऑफर की जाएगी. IGNOU ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत ये पहल की, जिसका उद्देश्य है तेजी से पोस्टग्रेजुएट डिग्री कराना. इस कोर्स का फायदा उन कैंडिडेट्स को मिलेगा जो वर्किंग प्रोफेशनल हैं और डिग्री हासिल करके किसी अन्य नौकरी के लिए अप्लाई करना चाहते हैं. कब तक कर सकते हैं अप्लाई? इस प्रोग्राम के लिए आवेदन किए जा रहे हैं. अप्लाई करने की लास्ट डेट 16 अगस्त 2026 है. अप्लाई करने से पहले अपनी APAAR ID तैयार रखें. वहीं एलिजिबल कैंडिडेट्स नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल पर जाकर स्कॉलरशिप के लिए अप्लाई कर सकते हैं. किन छात्रों को मिलेगा फायदा? ये कार्यक्रम खासतौर पर उन छात्रों के लिए हैं जिन्होंने Four-Year Undergraduate Programme (FYUP) पूरा किया है. इसके जरिए छात्र सिर्फ एक वर्ष में मास्टर्स डिग्री प्राप्त कर सकेंगे. IGNOU के अनुसार यह व्यवस्था NEP 2020 के तहत उच्च शिक्षा को अधिक लचीला बनाने की दिशा में एक कदम है. ऑफिशियल रिकॉर्ड और साइन में नहीं हो पाएगा बदलाव IGNOU ने साफ किया है कि एक बार ऑफिशियल डॉक्यूमेंट्स, फोटो और साइन अपलोड हो जाने के बाद इसमें कोई बदलाव नहीं होगा. संस्थान ने क्लियर किया है कि इन डिटेल्स को भरने से पहले अच्छी तरह से जांच लें. ये भी पढ़ें: सितंबर में होगी UPSC NDA NA परीक्षा, देखें पूरा शेड्यूल कौन-कौन से कोर्स शुरू किए गए हैं? IGNOU ने कुल 9 वन-ईयर मास्टर्स प्रोग्राम लॉन्च किए हैं- MA Economics MA Sociology MA History M Com MA Journalism & Mass Communication MA English MA Hindi MA Sanskrit MA Urdu इन प्रोग्राम्स की खास बातें FYUP ग्रेजुएट्स के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए. सिर्फ एक साल में मास्टर्स डिग्री पूरी करने का अवसर. NEP 2020 के अनुरूप लचीला और छात्र-केंद्रित मॉडल. मल्टीडिसिप्लिनरी और लर्नर-सेंट्रिक अप्रोच. UGC के दिशा-निर्देशों के अनुसार संचालित. क्यों खास है यह पहल? नई शिक्षा नीति 2020 में चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम पूरा करने वाले छात्रों के लिए एक वर्षीय मास्टर्स का प्रावधान किया गया है. इसी दिशा में IGNOU ने यह कदम उठाया है, जिससे छात्रों को कम समय में उच्च शिक्षा हासिल करने और करियर में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा. ये भी पढ़ें: UPSSSC Auditor और Assistant Accountant का फाइनल रिजल्ट जारी, ऐसे करें चेक The post एक साल में मिलेगी MA की डिग्री, IGNOU के इन 9 विषय के लिए फटाफट करें अप्लाई appeared first on Naya Vichar.

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VIDEO: भरत तिवारी के परिवार को मिलेगी सरकारी नौकरी, जांच आयोग ने सौंपी रिपोर्ट, जानिए अब आगे क्या?

Bharat Tiwari Encounter : भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में अब नया मोड़ सामने आया है. सीएम सम्राट चौधरी ने पीड़ित परिवार को लेकर फैसला लिया है कि भरत तिवारी केे परिवार को आर्थिक सहायता और एक परिजन को प्रशासनी नौकरी दी जाएगी. वीडियो में सुनिए अब इस मामले में आगे क्या होगा? सीएम सम्राट का ऐलान भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में गठित जांच आयोग ने अपनी अंतरिम (इंटरिम) रिपोर्ट सौंप दी है. रिपोर्ट सामने आने के बाद बिहार की सम्राट प्रशासन ने पीड़ित परिवार के हित में बड़ा फैसला लिया है. बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने X पर लिखा, “न्यायिक जांच के अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर बिहार प्रशासन द्वारा दिवंगत भरत तिवारी के परिवार को आर्थिक सहायता एवं एक परिजन को प्रशासनी नौकरी प्रदान की जाएगी.” क्या है मामला बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में 17 जून 2026 को भरत भूषण तिवारी की पुलिस कार्रवाई में मौत हुई थी. पुलिस का कहना था कि भरत ने पुलिस टीम पर अवैध हथियार से हमला किया. इसके बाद आत्मरक्षा में गोली चलाई गई. परिवार और कुछ ग्रामीणों ने इस कहानी पर सवाल उठाए और इसे कथित फर्जी एनकाउंटर बताया था. The post VIDEO: भरत तिवारी के परिवार को मिलेगी प्रशासनी नौकरी, जांच आयोग ने सौंपी रिपोर्ट, जानिए अब आगे क्या? appeared first on Naya Vichar.

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“हम गर्मी से मर रहे हैं, तो आप भी पंखे में नहीं रहेंगे”, गुस्साए छात्रों ने काटी प्रिंसिपल रूम की बिजली

Behera College News: बहेड़ा महाविद्यालय, दरभंगा में बुधवार को डिग्री फोर्थ सेमेस्टर की परीक्षा के दौरान भीषण गर्मी से परेशान परीक्षार्थियों ने जमकर हंगामा किया. जिस कमरे में परीक्षा ली जा रही थी, वहां पंखे की व्यवस्था नहीं होने के कारण परीक्षार्थियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. गर्मी और उमस के बीच पसीने से बेहाल परीक्षार्थियों ने परीक्षा छोड़ने के बजाय व्यवस्था के खिलाफ विरोध जताया. View on Instagram बिना पंखे के परीक्षा देने को मजबूर हुए परीक्षार्थी परीक्षार्थियों ने बताया कि जिस भवन में उनकी परीक्षा ली जा रही थी, वहां पंखे की व्यवस्था नहीं है. भीषण गर्मी के बीच बिना पंखे के परीक्षा देने में काफी परेशानी हो रही थी. पसीने के कारण परीक्षार्थियों का बुरा हाल था और उनका ध्यान परीक्षा से अधिक गर्मी की परेशानी पर जा रहा था. इससे नाराज परीक्षार्थी प्रधानाचार्य कक्ष में पहुंचे और उसका घेराव कर दिया. उन्होंने परीक्षा हॉल में पंखे की व्यवस्था कराने की मांग की. प्रधानाचार्य कक्ष की बिजली भी काटी पंखे की व्यवस्था नहीं होने से आक्रोशित परीक्षार्थियों ने कुछ देर के लिए प्रधानाचार्य कक्ष की बिजली आपूर्ति भी काट दी. इससे कॉलेज परिसर में अफरातफरी की स्थिति बन गयी. परीक्षार्थियों का कहना था कि जब परीक्षा केंद्र में पर्याप्त संख्या में परीक्षार्थियों को बैठाया गया है तो परीक्षा देने के लिए मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध करायी जानी चाहिए. क्षमता से अधिक परीक्षार्थी बने परेशानी की वजह बहेड़ा महाविद्यालय के प्रभारी प्रधानाचार्य विनोदानंद चौधरी ने बताया कि नेहरा महाविद्यालय, प्रशासनी डिग्री महाविद्यालय बेनीपुर और गोय मिश्र लगमा महाविद्यालय के करीब 2000 परीक्षार्थियों का परीक्षा केंद्र बहेड़ा महाविद्यालय को बनाया गया है. उन्होंने बताया कि क्षमता से अधिक परीक्षार्थियों के आवंटन के कारण नए भवन में भी परीक्षा ली जा रही है. नए भवन में फिलहाल पंखे की व्यवस्था नहीं है. इसी वजह से परीक्षार्थियों को परेशानी हुई. सचिव को दी गयी जानकारी, पंखा लगवाने का आग्रह प्रभारी प्रधानाचार्य ने बताया कि मामले की जानकारी महाविद्यालय के सचिव को दे दी गयी है. संबंधित भवन में पंखा लगवाने का आग्रह किया गया है, ताकि आगे होने वाली परीक्षाओं के दौरान विद्यार्थियों को गर्मी के कारण परेशानी का सामना न करना पड़े. यह भी पढ़ें दरभंगा में 17 अगस्त से पूरी तरह डिजिटल होगी जमीन-मकान की रजिस्ट्री, जानिए नई व्यवस्था The post “हम गर्मी से मर रहे हैं, तो आप भी पंखे में नहीं रहेंगे”, गुस्साए छात्रों ने काटी प्रिंसिपल रूम की बिजली appeared first on Naya Vichar.

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झारखंड के युवाओं का महासर्वे: 49.5% की पहली पसंद सरकारी नौकरी, 31.6% चाहते हैं स्टार्टअप

डॉ सौरव स्नेहव्रत (एसोसिएट प्रोफेसर, एक्सएलआरआइ, जमशेदपुर) Jharkhand Youth Survey: नया विचार का महासर्वे बताता है कि राज्य का शिक्षित युवा जहां एक ओर प्रशासनी नौकरी की सुरक्षा चाहता है, तो दूसरी ओर वह उद्यमिता (Entrepreneurship) की ओर भी आकर्षित है. साथ ही बड़ी संख्या में युवा मानसिक तनाव और दबाव से भी जूझ रहे हैं. यह संकेत देता है कि राज्य के युवा भविष्य को लेकर काफी चिंतित हैं. ऐसे में यह महासर्वे नीति-निर्माताओं के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है. सुरक्षित रोजगार की तलाश में युवा जब झारखंड के शिक्षित युवाओं से उनके सपनों के करियर के बारे में पूछा गया, तो लगभग आधे यानी 49.5 प्रतिशत ने प्रशासनी नौकरी को प्राथमिकता दी. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण नौकरी की सुरक्षा है. 23 से 28 वर्ष आयु वर्ग में यह प्रतिशत 62.2 तक पहुंच जाता है. यही वह आयु वर्ग है, जो पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने करियर को स्थिर बनाने की कोशिश करता है. प्रशासनी नौकरी के बाद 31.6 प्रतिशत युवा अपना व्यवसाय या स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं. वहीं, 14 प्रतिशत युवा कॉरपोरेट नौकरी और केवल 4.8 प्रतिशत युवा फ्रीलांस या गिग वर्क को पसंद करते हैं. प्रशासनी नौकरी की यह चाहत झारखंड के रोजगार बाजार की वास्तविकता को भी दिखाती है. युवाओं को लगता है कि अन्य विकल्प उतने सुरक्षित नहीं हैं. ये भी पढ़ें- झारखंड के मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन की प्रक्रिया शुरू, 14 अगस्त को आएगी मेरिट लिस्ट दिलचस्प यह है कि आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, राज्य की बेरोजगारी दर देश में (राज्यों में) सबसे कम है. वित्तीय वर्ष 2024 में युवा बेरोजगारी दर लगभग 3.6 प्रतिशत थी, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग में यह 9.9 प्रतिशत रही. फिर भी युवाओं में चिंता क्यों है ? इसका कारण है कि रोजगार की संख्या से अधिक महत्वपूर्ण उसकी गुणवत्ता है. कम वेतन वाले या अस्थिर रोजगार को लोग मजबूरी में स्वीकार कर लेते हैं, इसलिए समस्या रोजगार की उपलब्धता से अधिक अच्छे और सम्मानजनक रोजगार की है. स्टार्टअप को देना होगा बढ़ावा प्रशासनी नौकरी की भारी मांग के बावजूद, राज्य में स्वरोजगार और स्टार्टअप का इकोसिस्टम भी धीरे-धीरे जड़ें जमा रहा है. महासर्वे के अनुसार, 31.6 प्रतिशत युवा जोखिम उठाकर अपना स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं और इसे अपना ‘ड्रीम प्लान’ मानते हैं. 23 से 28 वर्ष के युवाओं में से 30.1 प्रतिशत स्टार्टअप के जरिए स्वावलंबन का रास्ता तलाश रहे हैं. इसके अतिरिक्त, 29 से 35 वर्ष के 33 प्रतिशत युवा स्टार्टअप या स्वरोजगार में लगे हुए हैं. दिलचस्प बात यह है कि 35 वर्ष से अधिक उम्र के परिपक्व युवाओं में यह आंकड़ा सर्वाधिक है. इस वर्ग के 51.1 प्रतिशत लोग स्टार्टअप और रिस्क टेकिंग को प्राथमिकता देते हैं. भले ही एक बड़ा वर्ग अपना व्यवसाय शुरू करना चाहता है, लेकिन पूंजी की कमी, बाजार का सही ज्ञान न होना और सही मार्गदर्शन का अभाव युवाओं को सफलता को लेकर भयभीत करता है. ये भी पढ़ें- रांची यूनिवर्सिटी: दीक्षांत समारोह के लिए 14 अगस्त तक आवेदन, एमए इन एजुकेशन में भी नामांकन शुरू 55% युवा राज्य में ही चाहते हैं रोजगार झारखंड के युवाओं के जीवन की एक बड़ी सच्चाई अवसरों की कमी है. 34.9 प्रतिशत युवाओं का मानना है कि प्रशासन को राज्य में ही रोजगार के अवसर बढ़ाने चाहिए, जबकि 20.5 प्रतिशत युवा अपने घर के आसपास ही रोजगार चाहते हैं. इससे स्पष्ट है कि अधिकांश युवा झारखंड में रहना चाहते हैं, लेकिन परिस्थितियां उन्हें बाहर जाने के लिए मजबूर करती हैं. झारखंड माइग्रेशन सर्वे 2023 के अनुसार, राज्य के लगभग 45 लाख लोग रोजगार के लिए बाहर काम कर रहे हैं. ये प्रवासी हर महीने करीब 2,549 करोड़ रुपए अपने परिवारों को भेजते हैं. यह राशि राज्य के हजारों परिवारों की आर्थिक जीवन रेखा बनी हुई है. पलायन करने वालों में अधिकांश युवा है. लगभग 80 प्रतिशत प्रवासी 40 वर्ष से कम आयु के हैं. महाराष्ट्र, गुजरात और पश्चिम बंगाल इनके प्रमुख स्थान है. झारखंड प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण राज्य है. प्रतिभाओं के हो रहे ‘ब्रेन ड्रेन’ को रोकने के लिए नीति-निर्माताओं को विशेष पहल करने की जरूरत है. 46% : आर्थिक स्थिरता के बाद ही शादी महासर्वे के आंकड़े बताते हैं कि शादी और जीवनसाथी को लेकर युवाओं की सोच तेजी से बदल रही है. सर्वे के अनुसार, 46 प्रतिशत युवा 28 से 32 वर्ष की उम्र के बीच, आर्थिक रूप से स्थिर होने के बाद ही शादी करना चाहते हैं. इससे स्पष्ट होता है कि आज का युवा शादी को केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जीवन के एक महत्वपूर्ण निर्णय के रूप में देखता है. वह पहले करियर, आय और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहता है. वहीं, 27 प्रतिशत युवा 25 से 28 वर्ष की उम्र तक शादी के पक्ष में हैं. दूसरी ओर 20.5 प्रतिशत युवाओं ने कहा कि वे अभी शादी के बारे में सोच ही नहीं रहे हैं. यह आंकड़ा बताता है कि शिक्षा, करियर और व्यक्तिगत विकास जैसे मुद्दे फिलहाल उनकी प्राथमिकता में हैं. केवल 6.5 प्रतिशत युवा ऐसे हैं जो मानते हैं कि शादी जरूरी नहीं है और वे जीवन भर अविवाहित रह सकते हैं. ये भी पढ़ें- JPSC-JSSC अभ्यर्थी 15 अगस्त को निकालेंगे तिरंगा यात्रा, जानें कहां से शुरू होगी और क्या है पूरा कार्यक्रम 36% युवा बोले, अच्छी सैलरी मिले तो बाहर जाने को तैयार महासर्वे के नतीजे राज्य के नीति-निर्माताओं के लिए संदेश म लेकर आए हैं. सर्वे में 36 प्रतिशत युवाओं ने कहा कि यदि बेहतर वेतन मिले, तो वे तुरंत राज्य छोड़कर दूसरे स्थान पर काम करने चले जाएंगे. सबसे कम उम्र के युवाओं में यह प्रतिशत 55.9 तक पहुंच जाता है. शिक्षा औक रोजगार के बीच बढ़ती दूरी दरअसल, सर्वे में शामिल लगभग दो-तिहाई युवा स्नातक या स्नातकोत्तर हैं. यह बताता है कि झारखंड में उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं की संख्या बढ़ रही है, लेकिन शिक्षा व रोजगार के अवसरों के बीच अंतर भी बढ़ रहा है. 2011 की जनगणना के अनुसार, झारखंड की साक्षरता दर 66.4 प्रतिशत थी, जो राष्ट्रीय औसत 74 प्रतिशत से कम थी. स्त्री साक्षरता दर केवल 55.4 प्रतिशत थी. विभिन्न शैक्षणिक सर्वेक्षणों से यह भी सामने आया है कि प्राथमिक स्तर पर सीखने

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Exclusive: जॉनी लीवर का 13 साल का दर्द: बोले- स्पॉटलाइट हटी तो अंधेरा दिखा, बुरे वक्त में कोई तस्वीर तक नहीं खिंचवाता

एक वक्त था, जब जॉनी लीवर के पास वक्त नहीं था. महीने में चार-पांच फिल्में रिलीज होती थीं और एक दिन में पांच फिल्मों की शूटिंग करना भी उनके लिए आम बात थी. एक प्रोड्यूसर को दो घंटे दिए, फिर दूसरे सेट पर पहुंचे, रात में डबिंग की और वहीं से अगली सुबह शूटिंग के लिए निकल गए. कई-कई दिन ऐसे बीते, जब मुंबई में रहते हुए भी घर जाने का वक्त नहीं मिला. फिर जिंदगी ने करवट ली और करीब 13 साल तक काम उनके पास नहीं आया. 70 साल के जॉनी लीवर जब उस दौर को याद करते हैं, तो उनका गला भर आता है. वह कहते हैं,’जब आपसे स्पॉटलाइट हटती है, तो एक अंधेरा नजर आता है.’ जिस कलाकार को देखते ही कभी भीड़ घेर लेती थी, लोग उससे तस्वीरें खिंचवाने से बचने लगे.जिन लोगों के साथ सालों काम किया, उनके फोन और मैसेज आने बंद हो गए.जॉनी के लिए यह वक्त आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने खुद को कमजोर नहीं होने दिया. जन्मदिन के मौके पर नया विचार के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में जॉनी लीवर ने अपने करियर के सबसे मुश्किल दौर से लेकर पहली फीस, कॉमेडी के बदलते अंदाज, आज के स्टैंडअप कॉमेडियन्स, सोशल मीडिया, गोविंदा और इंडस्ट्री में बदलते रिश्तों पर खुलकर बात की. उन्होंने यह भी बताया कि 70 की उम्र में उनकी एक पुरानी ख्वाहिश अब पूरी होने जा रही है. 70 के हो गए, कोई ख्वाहिश अब भी अधूरी है? वैसे 70 का हो गया हूं, लेकिन बिल्कुल 50 का लगता हूं. रही बात अधूरी ख्वाहिश की, तो हां, एक बहुत इच्छा थी कि किसी फिल्म में लीड हीरो के रूप में परफॉर्म करूं. हालांकि ऊपरवाले की दुआ है कि अब यह भी पूरी हो जाएगी.फरवरी में मेरी फिल्म रिलीज होगी, जिसमें मैंने मेन लीड का किरदार निभाया है. इसमें सलमान खान, आमिर खान, अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी और तब्बू जैसे एक्टर्स गेस्ट अपीयरेंस में होंगे. कहानी बहुत अलग है. इसमें एक डिफरेंट जॉनी लीवर फैंस को दिखेगा. लगा था कभी यह इच्छा पूरी नहीं हो पाएगी, लेकिन सब उसका करम है.फिल्म का नाम है ‘सबसे बड़ा रुपया’. आपकी असल जिंदगी से इंस्पायर है? नहीं, इसका मेरी जिंदगी से कोई वास्ता नहीं है. लोग आए थे प्रपोजल लेकर कि जॉनी, आपका बायोपिक बनाते हैं, लेकिन मेरा ऐसा कोई शौक नहीं है. मैं इसलिए भी बचता हूं कि कहीं मजाक न बन जाए.जीते जी खुद का बायोपिक बनाना बेतुका है.मैंने देखा है कि सालों के बाद एक्टर को खुद से प्यार हो जाता है. ये खुद की फिल्म प्रोड्यूस भी करते हैं. हालांकि इसमें उनका नुकसान ही हुआ है. आपके करियर में एक दौर ऐसा भी आया, जब 13 साल तक काम नहीं मिला? अरे वो तो मत पूछो. मेरा डाउनफॉल पूरे 13 साल का रहा. मैंने इन तेरह साल में चार फिल्में कीं, वो भी घर चलाने की मजबूरी में बेबस होकर. उस दौरान मेरी बीवी परेशान हो गई थीं.वो कहती थीं कि तुमने कमा कर सारे पैसे चैरिटी और लोगों की मदद में बांट दिए और अब काम नहीं कर पा रहे हो, तो कोई मदद को नहीं आ रहा है. हालांकि मैंने किसी से मदद की उम्मीद रखी भी नहीं थी. समय किसी को नहीं छोड़ता. उस वक्त किस्मत ऐसी पलटी थी कि शोज भी नहीं मिल रहे थे. हालांकि मैंने कभी खुद को कमजोर होने नहीं दिया. ऑप्शन भी नहीं था, क्योंकि मेरा परिवार मेरे सहारे बैठा था.उन दिनों खुद को बिजी रखने के लिए ऑस्कर विनिंग फिल्में देखा करता था. मूड लाइट करने के लिए अपनी कुछ अच्छी फिल्में भी देख लिया करता था. मैंने मंटो को पांच साल पढ़ा. लेकिन सीखने से पेट नहीं भरता. पति और पिता के तौर पर फ्रस्ट्रेशन नहीं होता था? सच कह रहा हूं, मुझे तकलीफ नहीं होती थी.बल्कि मेरी वाइफ काफी फ्रस्ट्रेट हो जाती थीं.मैंने उन्हें याद दिलाया कि जब मैं लगातार काम किया करता था, तो तुम शिकायत करती थीं कि वक्त नहीं देता. मैं तुमसे कहता था कि अच्छा टाइम आएगा, तो जरूर वक्त दूंगा.जब 2010 से काम मिलना बंद हुआ, तो मैं घर पर ही रहा. मैंने उनसे कहा कि देखो, अच्छा टाइम आ गया है और मैं परिवार के साथ लंदन घूमने चला गया. यही अच्छा टाइम है, इसे इंजॉय करो.जो पैसे मेरे पास बचे थे, उसे मैंने खत्म कर दिया. फिर बीच में जो चार फिल्में मिली थीं, उसी से मेरे 13 साल गुजरे. उस वक्त जरूरत के हिसाब से ही खर्च करता था. फालतू खर्चे कम कर दिए थे. मैं शराब पीता था, लेकिन वो भी बंद कर दी थी. एक वक्त था जब आप दिन में पांच फिल्मों की शूटिंग करते थे? हम दिन में पांच फिल्में शूट किया करते थे. एक-एक प्रोड्यूसर को हम दो-दो घंटे का शेड्यूल दिया करते थे. रात में जब वक्त बचता, तो भी किसी न किसी फिल्म की डबिंग में जाता था.रात डबिंग स्टूडियो में गुजारकर हम फिर सीधा सेट पर जाते थे. कितने दिनों तक शहर में होते हुए भी मैं घर नहीं जा पाता था. मजबूरी में फिल्में कीं, लेकिन क्या काम और फीस के साथ समझौता किया? हां, लेकिन काम के साथ समझौता नहीं किया. पैसे के साथ भी समझौता नहीं किया.लोगों ने ताने भी मारे कि जॉनी, जो मिल रहा है रख लो, चला लो. मैं इसके सख्त खिलाफ था.लोगों ने यहां तक कहा कि मैं आउट हो जाऊंगा. जॉनी, आप कुछ भी फीस मांग रहे हैं, अपनी हालत तो देखो.आपका वक्त अच्छा नहीं है, तो मन की फीस मत मांगो.वैसे बता दूं,जिन्होंने मुझसे ये बातें कही थीं, वो अब इंडस्ट्री से आउट हो चुके हैं.मैंने 2014 में ‘गोलमाल’ से वापसी की और जितनी फीस थी मेरी, उससे डबल ही लिया था. जॉनी लीवर की पहली फीस कितनी थी? मेरी पहली फीस तो मुझे कभी मिली ही नहीं. 1979 में एक फिल्म की थी, उसके पैसे मिले ही नहीं.’दर्द का रिश्ता’ में मुझे प्रति दिन के हिसाब से 300 रुपये मिलते थे. फिर बढ़कर 500 हुआ. ‘बाजीगर’ फिल्म में मेरी फीस बढ़कर प्रति दिन 5 हजार हो गई.वहां से टर्निंग पॉइंट शुरू हुआ था. यह फिल्म केवल मेरे लिए नहीं, बल्कि शाहरुख

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चमोली सुरंग हादसा: सात लोगों की मौत, कई घायल, रेस्क्यू जारी

Chamoli Tunnel Accident: उत्तराखंड के चमोली जिले के पिपलकोटी में टिहरी जल विकास निगम लिमिटेड (THDC) की निर्माणाधीन सुरंग में पानी और मलबा घुसने से बड़ा हादसा हो गया. हादसे के समय सुरंग के अंदर कई मजदूर काम कर रहे थे. बचाव दल ने कई मजदूरों को बाहर निकालकर गोपेश्वर जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां सात लोगों को मृत घोषित कर दिया गया. अस्पताल पहुंचाए गए मजदूर, कई का इलाज जारी डॉ. आयुष ने बताया कि टीएचडीसी परियोजना से बचाए गए मजदूरों को अस्पताल लाया गया. इनमें सात लोगों को मृत घोषित किया गया, जबकि कई मजदूरों की हालत स्थिर बताई गई है. कुछ मजदूरों को अस्पताल में भर्ती कर इलाज दिया जा रहा है. एक मजदूर की हालत गंभीर होने के कारण उसे बेहतर इलाज के लिए श्रीनगर स्थित बेस अस्पताल रेफर किया गया है. सुरंग में तेजी से बढ़ा पानी एनडीआरएफ टीम कमांडर अमृत लाल मीना ने बताया कि बचाव दल जब मौके पर पहुंचा, तब सुरंग के अंदर काफी मात्रा में पानी भर चुका था. सुरंग की दीवारों और किनारों से भी लगातार पानी रिस रहा था, जिससे बचाव अभियान में मुश्किलें आईं. उन्होंने बताया कि समय बीतने के साथ सुरंग के अंदर पानी का स्तर और बढ़ गया. एनडीआरएफ के जवान विशेष उपकरणों की मदद से अंदर पहुंचे और बचाव अभियान शुरू किया. एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर सुरंग में फंसे अन्य मजदूरों की तलाश के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार अभियान चला रही हैं. बचाव कर्मी पानी और मलबे के बीच सुरंग के अंदर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं. अधिकारियों के मुताबिक, अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक सुरंग के अंदर मौजूद सभी मजदूरों का पता नहीं चल जाता. हादसे के समय अंदर थे करीब 20 से 22 मजदूर टीएचडीसी के कार्यकारी निदेशक (परियोजनाएं) कुमार शरद ने बताया कि हादसे के समय सुरंग के अंदर करीब 20 से 22 मजदूर मौजूद थे. उन्होंने कहा कि हादसे की जानकारी मिलने के तुरंत बाद राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया. एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को मौके पर तैनात किया गया और फंसे मजदूरों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया. बचाए गए मजदूरों में कुछ की हालत गंभीर बताई गई है. प्रशासन और बचाव एजेंसियां फिलहाल सुरंग के अंदर फंसे बाकी लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं. Also Read: चमोली में भारी बारिश के बाद HCC टनल में अचानक घुसा पानी, 18 मजदूर बचाए गए; राहत-बचाव कार्य जारी The post चमोली सुरंग हादसा: सात लोगों की मौत, कई घायल, रेस्क्यू जारी appeared first on Naya Vichar.

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