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होलाष्टक 2025 से डरें नहीं, अपनाएं ये उपाय

Holashtak 2025 upay and remedies: हर वर्ष फाल्गुन मास में होली का त्योहार अत्यंत उत्साह के साथ मनाया जाता है. इस पर्व का लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता है. पंचांग के अनुसार, होली से आठ दिन पूर्व होलाष्टक की अवधि प्रारंभ होती है. इस समय शुभ और मांगलिक कार्यों का निषेध होता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, होलाष्टक के दौरान वर्जित कार्य करने से साधक को जीवन में अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है और मांगलिक कार्यों का शुभ फल प्राप्त नहीं होता है. होलाष्टक 2025 कब से प्रारंभ होगा? पंचांग के अनुसार, इस वर्ष होलाष्टक 7 मार्च, शुक्रवार से आरंभ होगा और 14 मार्च तक चलेगा. 13 मार्च को होलिका दहन होगा और 14 मार्च को धुरेड़ी (होली उत्सव) मनाया जाएगा. होलाष्टक के 8 दिनों के दौरान विवाह, नामकरण संस्कार, गृह प्रवेश, सगाई आदि जैसे शुभ कार्यों पर रोक रहेगी. होलाष्टक पर होती है मांगलिक कार्यों पर रोक, क्या है इसकी वजह होलाष्टक के दुष्प्रभावों से बचने के लिए कुछ उपाय किए जाते हैं. यहां जानें उन उपायों के बारे में होलाष्टक में कौन-से उपाय किए जाएं? होलाष्टक के समय कुछ विशेष उपाय करने से इसके अशुभ प्रभावों में कमी लाई जा सकती है. ये उपाय निम्नलिखित हैं- होलाष्टक के दौरान भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करना चाहिए. इससे जीवन में शांति बनी रहती है और समस्याओं से मुक्ति मिलती है. होलाष्टक में दान का भी विशेष महत्व है. इस समय जरूरतमंदों को अपनी इच्छा अनुसार कपड़े, अनाज, भोजन आदि का दान करना चाहिए. होलाष्टक में प्रतिदिन शिवलिंग पर जल चढ़ाना चाहिए. इससे भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी हो सकती हैं और समस्याओं का समाधान भी संभव है. The post होलाष्टक 2025 से डरें नहीं, अपनाएं ये उपाय appeared first on Naya Vichar.

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Canada: ट्रूडो के इस्तीफे और ट्रंप की धमकियों से बदली कनाडा की राजनीति, लिबरल पार्टी फिर मजबूत

Canada: कनाडा की नेतृत्व में हाल के महीनों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. कभी मजबूत दिखने वाली लिबरल पार्टी 2025 के आम चुनाव में हार की ओर बढ़ती नजर आ रही थी, लेकिन अब परिस्थितियां बदलती दिख रही हैं. प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के इस्तीफे और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों ने कनाडा की चुनावी रणनीति को नया मोड़ दे दिया है. लिबरल पार्टी की गिरती लोकप्रियता कुछ महीने पहले तक लिबरल पार्टी की स्थिति कमजोर हो रही थी. बढ़ती महंगाई, आवास संकट और ट्रूडो के प्रति जनता के असंतोष के कारण पार्टी की लोकप्रियता में भारी गिरावट देखी गई थी. कई जनमत सर्वेक्षणों में लिबरल पार्टी, विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी से 26 प्रतिशत अंक तक पीछे चल रही थी. ट्रूडो का इस्तीफा और नया नेतृत्व 6 जनवरी 2025 को जस्टिन ट्रूडो ने प्रधानमंत्री और लिबरल पार्टी के नेता पद से इस्तीफे की घोषणा की. लगभग एक दशक तक सत्ता में रहने के बाद ट्रूडो का यह फैसला लिबरल पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ. उनके इस्तीफे के बाद पार्टी में नए नेतृत्व की दौड़ शुरू हो गई, जिसने जनता में उत्साह और उम्मीद को फिर से जगा दिया. नेतृत्वक विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रूडो के जाने से पार्टी को एक नया अवसर मिला है, क्योंकि उनकी नीतियों और नेतृत्व से कई मतदाता असंतुष्ट हो चुके थे. हाल के जनमत सर्वेक्षणों में लिबरल पार्टी और कंजर्वेटिव्स के बीच का अंतर कम होता दिख रहा है. ट्रंप की धमकियां: चुनावी समीकरण में बदलाव 20 जनवरी 2025 को डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में अपना दूसरा कार्यकाल शुरू किया. सत्ता में आते ही उन्होंने कनाडा के प्रति सख्त रुख अपनाया. उन्होंने कनाडाई आयात पर 25% टैरिफ लगाने की धमकी दी और यहां तक कह दिया कि कनाडा “51वां अमेरिकी राज्य” बन सकता है. कनाडा अपनी 75% निर्यात वित्तीय स्थिति के लिए अमेरिका पर निर्भर है. ऐसे में ट्रंप की धमकियां कनाडा के लिए एक गंभीर आर्थिक खतरा बन गईं. हालांकि, इसने लिबरल पार्टी को फिर से एकजुट होने का मौका भी दिया. ट्रूडो ने अपने अंतिम दिनों में “टीम कनाडा” दृष्टिकोण अपनाते हुए ट्रंप के खिलाफ कड़ा रुख दिखाया, जिसे जनता ने सकारात्मक रूप से लिया. इसे भी पढ़ें: जेलेंस्की ने बदला रुख, ट्रंप के नेतृत्व में सहयोग को तैयार, रूस-यूक्रेन युद्ध पर शांति के संकेत कंजर्वेटिव पार्टी की स्थिति कंजर्वेटिव पार्टी के नेता पियरे पोइलिवरे पिछले एक साल से महंगाई और कार्बन टैक्स जैसे घरेलू मुद्दों को उठाकर जनता का समर्थन हासिल करने में सफल रहे थे. लेकिन ट्रंप की धमकियों के बाद चुनावी मुद्दे बदलने लगे हैं. अब कनाडाई मतदाता यह सोचने लगे हैं कि कौन सा नेता अमेरिका के साथ आर्थिक और कूटनीतिक मुद्दों को बेहतर ढंग से संभाल सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि पोइलिवरे का आक्रामक रवैया विपक्ष में तो कारगर साबित हुआ, लेकिन उनकी ट्रंप से समानता वाली छवि ने मतदाताओं के बीच संदेह पैदा किया है. दूसरी ओर, लिबरल पार्टी के संभावित नेता जैसे मार्क कार्नी और क्रिस्टिया फ्रीलैंड ट्रंप के खिलाफ सख्त रवैया अपनाने का वादा कर रहे हैं, जिससे जनता का झुकाव उनकी ओर बढ़ सकता है. जनमत सर्वेक्षणों में लिबरल पार्टी की वापसी हाल के जनमत सर्वेक्षणों में लिबरल पार्टी का समर्थन बढ़ता हुआ दिख रहा है. फरवरी 2025 में आईप्सोस के एक सर्वेक्षण में पहली बार लिबरल पार्टी को कंजर्वेटिव पार्टी पर बढ़त मिलती दिखी. क्यूबेक और ओंटारियो जैसे महत्वपूर्ण प्रांतों में लिबरल समर्थन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. नेतृत्वक विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप की धमकियों ने मतदाताओं का ध्यान लिबरल पार्टी की नीतियों से हटाकर अमेरिका-कनाडा संबंधों की ओर केंद्रित कर दिया है. इसके अलावा, लिबरल पार्टी का सिख समुदाय और खालिस्तानी समर्थकों के बीच मजबूत आधार भी उसे सत्ता में वापसी की उम्मीद दे रहा है. खालिस्तानी समर्थन और हिंदुस्तान के साथ संबंध ट्रूडो के कार्यकाल में खालिस्तानी समर्थकों को लेकर उनकी नीति विवादों में रही है. खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद ट्रूडो ने हिंदुस्तान पर बिना सबूत आरोप लगाए थे, जिससे हिंदुस्तान-कनाडा संबंधों में तनाव आ गया था. ट्रूडो की खालिस्तानी समर्थक नीतियों के कारण कनाडा में हिंदू और सिख समुदायों के बीच तनाव बढ़ा और उनकी प्रशासन की अंतरराष्ट्रीय छवि को भी नुकसान पहुंचा. घरेलू स्तर पर भी उनकी नीतियों से लिबरल पार्टी में असंतोष पनपने लगा, और कंजर्वेटिव पार्टी ने महंगाई व बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर ट्रूडो को घेरना शुरू कर दिया. इसे भी पढ़ें: अगले 2 दिन भयंकर बारिश-आंधी-तूफान का हाई अलर्ट   लिबरल पार्टी 9 मार्च 2025 को अपना नया नेता चुनेगी, जो तब तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री की भूमिका भी निभाएगा. पूर्व केंद्रीय बैंकर मार्क कार्नी इस दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे हैं. कुछ जनमत सर्वेक्षणों में कार्नी के नेतृत्व में लिबरल और कंजर्वेटिव पार्टियों के बीच कांटे की टक्कर दिख रही है. नेतृत्वक विशेषज्ञों का मानना है कि लिबरल पार्टी की हालिया बढ़त स्थायी होगी या नहीं, यह नए नेता के प्रदर्शन और ट्रंप की नीतियों पर निर्भर करेगा. यदि ट्रंप कनाडा के खिलाफ कड़ा रुख बनाए रखते हैं, तो लिबरल पार्टी को फायदा हो सकता है. ट्रूडो के इस्तीफे और ट्रंप की धमकियों ने कनाडा की नेतृत्व को नया आयाम दे दिया है. लिबरल पार्टी, जो कुछ महीने पहले हार की कगार पर थी, अब एक मजबूत प्रतिस्पर्धी के रूप में उभर रही है. हालांकि, यह देखना बाकी है कि क्या यह वापसी चुनाव तक कायम रह सकती है. क्या खालिस्तानी समर्थकों की पसंदीदा पार्टी फिर से सत्ता हासिल करेगी, या कंजर्वेटिव पार्टी देश की कमान संभालेगी? कनाडा के मतदाता अब ऐसे नेता की तलाश में हैं, जो घरेलू समस्याओं को हल कर सके और अमेरिका के साथ संबंधों को भी संतुलित रख सके. आने वाले महीने इस नेतृत्वक संघर्ष में निर्णायक भूमिका निभाएंगे. 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Yeh Rishta Kya Kehlata Hai: अभीरा ने शो के अपकमिंग ट्विस्ट से उठाया पर्दा, कहा- अरमान को कठिनाइयों….

Yeh Rishta Kya Kehlata Hai: ये रिश्ता क्या कहलाता है अपनी दिलचस्प कहानी से दर्शकों को खूब एंटरटेन कर रही है. लेटेस्ट कहानी अभीरा और अरमान के इर्द-गिर्द घूमती है. दोनों तमाम परेशानियों को भूलकर एक हो गए हैं. हाल ही में अरमान की मां शिवानी की एंट्री हुई. उनके आने के बाद अरमान ने पोद्दार हाउस छोड़कर अपनी मां और पत्नी के साथ अलग रहने का फैसला किया. अब समृद्धि शुक्ला ने अपकमिंग ट्विस्ट को लेकर कई राज खोले है. समृद्धि शुक्ला ने अपकमिंग ट्विस्ट से उठाया पर्दा समृद्धि शुक्ला ने इंडिया फोरम संग बात करते हुए, ”अभीरा और अरमान के रास्ते में बहुत सारा प्यार आ रहा है और मुझे लगता है कि इसका बहुत इंतजार किया जा रहा था, क्योंकि लोग अभिमान को अलग होते नहीं देखना चाहते थे. मुझे लगता है कि यह अंततः अरमान और अभीरा ही हैं, जो विपत्ति, समस्याओं और जीवन की कठिनाइयों के खिलाफ लड़ रहे हैं. वह एक टीम के तौर पर काम कर रहे हैं. इसलिए इस तरह के सीन्स करने में काफी मजा आता है. आनो वाले एपिसोड में जबरदस्त ट्विस्ट और टर्न आएंगे.” नया विचार की प्रीमियम स्टोरी: Child Mental Health : शिशु हो रहे हैं दबंग, रेप और आत्महत्या करने में भी नहीं करते संकोच, जानिए क्या है वजह चॉल में रहते हैं अरमान अभीरा ये रिश्ता क्या कहलाता है का वर्तमान ट्रैक अरमान और अभीरा के फिर से मिलने और शिवानी को पोद्दार हाउस में वापस लाने के इर्द-गिर्द घूमता है. ड्रामा तब बढ़ जाता है, जब कावेरी गुस्से से आग बबूला हो जाती है और शिवानी को घर से निकल जाने के लिए कहती है. अरमान अपनी मां की बेइज्जती बर्दाशत नहीं कर सका और पोद्दार हाउस छोड़कर चला जाता है. चैनल की ओर से जारी किए गए नए प्रोमो में, अरमान और अभीरा अब एक चॉल में चले गए हैं और उन्होंने अपना जीवन नए सिरे से शुरू करने का फैसला किया है. The post Yeh Rishta Kya Kehlata Hai: अभीरा ने शो के अपकमिंग ट्विस्ट से उठाया पर्दा, कहा- अरमान को कठिनाइयों…. appeared first on Naya Vichar.

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Russia-Ukraine War: जेलेंस्की ने बदला रुख, ट्रंप के नेतृत्व में सहयोग को तैयार, रूस-यूक्रेन युद्ध पर शांति के संकेत

Russia-Ukraine War: यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने मंगलवार को घोषणा की कि वह संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ खनिज और सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. इसके साथ ही उन्होंने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मजबूत नेतृत्व में काम करने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की. हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि हाल ही में व्हाइट हाउस में ट्रंप के साथ हुई उनकी बैठक संतोषजनक नहीं रही. इसके बावजूद, उन्होंने यूक्रेन में शांति स्थापित करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और ट्रंप द्वारा यूक्रेन को जेवेलिन मिसाइलें प्रदान करने के लिए आभार व्यक्त किया. शांति वार्ता के लिए यूक्रेन तैयार जेलेंस्की ने अपने बयान में कहा कि यूक्रेन शांति वार्ता के लिए पूरी तरह तैयार है. उन्होंने जोर देकर कहा कि कोई भी देश अनंतकाल तक युद्ध नहीं चाहता और इसलिए जल्द से जल्द एक ठोस समाधान निकालना आवश्यक है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यूक्रेन बातचीत की मेज पर आने के लिए तत्पर है ताकि स्थायी शांति स्थापित हो सके. उन्होंने आगे कहा कि युद्ध को समाप्त करने की प्रक्रिया के पहले चरण में कैदियों की रिहाई और हवाई हमलों को रोकने के लिए संघर्ष विराम जैसी पहल शामिल हो सकती हैं. अगर रूस भी इसी दिशा में कदम बढ़ाता है, तो यह युद्ध को शांत करने में मददगार साबित हो सकता है. उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ मिलकर एक मजबूत अंतिम समझौते पर सहमति बनाने के लिए यूक्रेन तेजी से काम करेगा. अमेरिका के समर्थन के लिए आभार यूक्रेनी राष्ट्रपति ने अमेरिका के समर्थन की सराहना करते हुए कहा कि वाशिंगटन ने यूक्रेन की संप्रभुता और स्वतंत्रता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. उन्होंने कहा कि वह उस पल को कभी नहीं भूल सकते जब ट्रंप ने यूक्रेन को जेवेलिन मिसाइलें प्रदान की थीं, जिससे सैन्य सुरक्षा को मजबूती मिली. जेलेंस्की ने इस सहयोग के लिए अमेरिका का आभार व्यक्त किया और उम्मीद जताई कि दोनों देशों के बीच भविष्य में सहयोग और संवाद अधिक रचनात्मक होगा. खनिज और सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर को तैयार खनिज और सुरक्षा समझौते पर बात करते हुए जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन किसी भी समय और किसी भी सुविधाजनक प्रारूप में इस समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार है. उन्होंने इस समझौते को अधिक सुरक्षा और ठोस सुरक्षा गारंटी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया. उन्होंने भरोसा जताया कि यह समझौता प्रभावी रूप से काम करेगा और यूक्रेन के लिए आर्थिक और सामरिक रूप से लाभदायक साबित होगा. इसे भी पढ़ें: मौसम में बदलाव, अगले 48 घंटे भयंकर बारिश-आंधी-तूफान का हाई अलर्ट   व्हाइट हाउस की बैठक में बढ़ा तनाव पिछले शुक्रवार को व्हाइट हाउस में ट्रंप और जेलेंस्की के बीच हुई बैठक के बाद इस समझौते पर हस्ताक्षर करने की योजना को रोक दिया गया था. इस बैठक में ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने जेलेंस्की से कहा था कि उन्हें अमेरिका से अतिरिक्त सहायता की मांग करने के बजाय अमेरिकी समर्थन के लिए धन्यवाद देना चाहिए. ट्रंप ने यह भी कहा था कि यूक्रेन की नीतियां तीसरे विश्व युद्ध को बढ़ावा देने का खतरा पैदा कर सकती हैं. खनिज समझौते को लेकर बातचीत जारी अमेरिकी अधिकारियों ने कीव में यूक्रेनी अधिकारियों से खनिज समझौते पर हस्ताक्षर करने के संबंध में चर्चा की है. हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह समझौता किस रूप में सामने आएगा और इसमें कोई बदलाव किए गए हैं या नहीं. यह समझौता यूक्रेन को प्रत्यक्ष सुरक्षा गारंटी प्रदान नहीं करता, बल्कि अमेरिका को यूक्रेन के प्राकृतिक संसाधनों से होने वाली आय तक पहुंच प्रदान करता है. इसके तहत यह प्रस्तावित किया गया था कि यूक्रेनी प्रशासन अपने राज्य-स्वामित्व वाले प्राकृतिक संसाधनों से होने वाली कमाई का 50 प्रतिशत अमेरिका-यूक्रेन संयुक्त पुनर्निर्माण निवेश कोष में योगदान करेगी. ट्रंप का रुख सोमवार को ट्रंप ने संकेत दिया कि उनकी प्रशासन इस समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि अमेरिका यूक्रेन के समर्थन में हर संभव कदम उठा रहा है और उसने यूरोपीय देशों की तुलना में यूक्रेन को कहीं अधिक सहायता प्रदान की है. उन्होंने यह भी कहा कि यूरोप को भी यूक्रेन के समर्थन में अधिक योगदान देना चाहिए था. यूक्रेन और अमेरिका के बीच खनिज और सुरक्षा समझौते को लेकर जारी चर्चाएं आगे बढ़ रही हैं. जेलेंस्की इस समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार हैं और इसे अपने देश के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं. हालांकि, व्हाइट हाउस में ट्रंप के साथ हुई उनकी पिछली बैठक के बाद कुछ मतभेद उभरे थे, लेकिन अब दोनों पक्ष इस मुद्दे को हल करने के लिए तत्पर हैं. अब यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में इस समझौते को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है और यह दोनों देशों के संबंधों को किस दिशा में ले जाता है. इसे भी पढ़ें: नोएडा में खूंखार पिटबुल ने युवक पर किया बर्बर हमला, वीडियो देख कांप जाएगी रूह The post Russia-Ukraine War: जेलेंस्की ने बदला रुख, ट्रंप के नेतृत्व में सहयोग को तैयार, रूस-यूक्रेन युद्ध पर शांति के संकेत appeared first on Naya Vichar.

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मर्डर से पहले वो आखिरी कॉल ‘भैया कुछ लड़कों ने मुझे…’, बिहार में इंटर छात्र की चाकू से गोदकर हत्या

Bihar News: बिहार के बेतिया में मंगलवार रात एक इंटर के छात्र की निर्मम हत्या कर दी गई. मुफस्सिल थाना क्षेत्र के ITI स्थित आरडी लाइब्रेरी के पास बदमाशों ने पहले छात्र के साथ मारपीट की फिर चाकू से हमला कर दिया. चाकू इतनी ताकत से घोंपा गया कि वह सीने को पार कर गया. छात्र को आनन-फानन में GMCH ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. फोन पर मांगी थी मदद, भाई के सामने हुई हत्या मृतक की पहचान पूर्वी करगहिया निवासी 17 वर्षीय दिव्यांशु कुमार के रूप में हुई है. उसके भाई प्रियांशु कुमार के मुताबिक, घटना के वक्त दिव्यांशु ने उसे फोन कर कहा, “भैया, कुछ लड़कों ने मुझे घेर लिया है और मार रहे हैं.” जब वह मौके पर पहुंचा, तो देखा कि कुछ युवक उसके भाई को बेरहमी से पीट रहे थे. इससे पहले कि वह कुछ कर पाता, एक आरोपी ने चाकू घोंप दिया जिससे दिव्यांशु की मौके पर ही मौत हो गई. हत्या के बाद इलाके में बवाल, आगजनी घटना की समाचार मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया. स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने आरोपियों के ठिकाने पर हमला बोल दिया. एक कमरे में पेट्रोल डालकर आग लगा दी गई और एक बाइक भी फूंक दी गई. पुलिस और दमकल विभाग की टीम ने पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया. नया विचार प्रीमियम स्टोरी: छत्रपति शिवाजी के साम्राज्य में क्या ‘गोवा’ भी था शामिल! अब क्यों उठा विवाद दो आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मझौलिया निवासी सरफराज और मेराज को हिरासत में लिया है. डीएसपी सदर-1 विवेक कुमार दीप ने बताया कि हत्या के पीछे के कारणों की जांच की जा रही है. शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया गया है. The post मर्डर से पहले वो आखिरी कॉल ‘भैया कुछ लड़कों ने मुझे…’, बिहार में इंटर छात्र की चाकू से गोदकर हत्या appeared first on Naya Vichar.

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तेजस्वी ने कांग्रेस शासनकाल पर खुलकर उठाए सवाल, क्या बिहार महागठबंधन में शुरू हो गयी खटर-पटर?

बिहार में इस साल ही विधानसभा चुनाव होना है. चुनावी वर्ष में विधानमंडल का बजट सत्र चल रहा है. आने वाले चुनाव में राजद और कांग्रेस के बीच के रिश्ते को लेकर कयासों का दौर चल रहा है. कांग्रेस 70 सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा ठोक रही है और राजद इस मुद्दे पर खामोशी बनाए हुए है. इस बीच तेजस्वी यादव ने 1990 से पहले की बात करते हुए कांग्रेस शासनकाल पर भी सवाल उठा दिए. कांग्रेस और मौजूदा प्रशासन पर तेजस्वी का निशाना दरअसल, तेजस्वी यादव बिहार में 1990 के बाद और पहले के हालात की बात कर रहे थे. राजद सुप्रीमो लालू यादव के कामकाजों की तारीफ करते हुए तेजस्वी यादव ने 1990 से पहले की कांग्रेस हुकूमत और मौजूदा प्रशासन की आलोचना की. तेजस्वी ने पूछा- ‘इन दोनों ने बिहार को क्या दिया? लोगों को यह पता है.’ ALSO READ: Video: बिहार विधानसभा में तेजस्वी और सम्राट खूब बमके, एक दूसरे के पिता पर पहुंच गयी बात लालू-राबड़ी शासनकाल की तारीफ की तेजस्वी यादव ने लालू-राबड़ी शासनकाल को समाज के अंतिम आदमी को आवाज देने वाला राज बताया. उन्होंने कहा कि पिछड़े, अति पिछड़े और दलित विधायक-एमएलसी, सांसद और आयोगों के चेयरमैन और सदस्य बनाये गए. मौजूदा प्रशासन को तेजस्वी ने घेरा तेजस्वी यादव ने मौजूदा प्रशासन को घेरते हुए कहा कि 2005 से पहले भी बिहार में बहुत कुछ था. लालू प्रसाद ने कभी पुरानी प्रशासन को दोष नहीं दिया. उन्होंने कहा कि मेरी चिंता प्रशासन नहीं बिहार को नये सिरे से बनाने की है. छपरा में हुए चुल्हाई तेली कांड पर पूर्व की प्रशासन को घेरा नेता प्रतिपक्ष ने 1990 से पहले छपरा में हुए चुल्हाई तेली कांड का जिक्र किया और बताया कि सामंतवादियों ने सामाजिक न्याय की लड़ाई करने वाले एक शख्स ने भोज का आयोजन करने वाले का कान काट लिया था. तेजस्वी यादव ने तब के प्रशासन को घेरते हुए कहा कि प्रशासन ने तब कुछ नहीं किया और पीड़ित को न्याय नहीं मिला. The post तेजस्वी ने कांग्रेस शासनकाल पर खुलकर उठाए सवाल, क्या बिहार महागठबंधन में शुरू हो गयी खटर-पटर? appeared first on Naya Vichar.

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Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah: भिड़े ने गुरुचरण से उनके बुरे वक्त में बात न करने पर तोड़ी चुप्पी, कहा- किसी के पास…

Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah: हिंदुस्तानीय टेलीविजन पर सबसे लोकप्रिय और लंबे समय तक चलने वाले शो में से एक, तारक मेहता का उल्टा चश्मा पिछले 17 सालों से दर्शकों का मनोरंजन कर रहा है. इस शो की सोशल मीडिया पर तगड़ी फैन-फॉलोइंग है. फैंस एक भी एपिसोड देखना मिस नहीं करते हैं. हर एक कैरेक्टर काफी पॉपपुलर है. फैंस उनकी डे टूडे लाइफ के बारे में जानना पसंद करते हैं. अब भिड़े की भूमिका निभाने वाले मंदार चंदवाडकर ने इस बात का खुलासा किया कि उन्होंने गुरुचरण सिंह से उनके बुरे वक्त में बात क्यों नहीं की. मंदार ने क्यों नहीं की गुरुचरण सिंह से बात हाल ही में, मंदार चंदवाडकर ने सुभोजित घोष के साथ एक इंटरव्यू में गुरुचरण से बात नहीं करने पर रिएक्ट किया. उन्होंने कहा कि गुरुचरण ने अपना नंबर बदल लिया था और नया नंबर मेरे पास नहीं था. एक्टर ने कहा, ”नहीं मेरी गुरुचरण से बात नहीं हो पाई, क्योंकि उसने अपना नंबर बदल लिया था. उनका दूसरा नंबर किसी के पास नहीं था.” नया विचार की प्रीमियम स्टोरी: Child Mental Health : शिशु हो रहे हैं दबंग, रेप और आत्महत्या करने में भी नहीं करते संकोच, जानिए क्या है वजह मंदार चंदवाडकर को गुरुचरण के बारे में सोशल मीडिया से मिली जानकारी मंदार ने आगे कहा, “आखिरकार हमें पता चला कि वह ठीक हैं, सोशल मीडिया का धन्यवाद, आजकल पता चल जाता है. मुझे खुशी है कि वह अब अच्छा महसूस कर रहा है और वह जो भी करे, उसके लिए मैं उसे शुभकामनाएं देता हूं.” गुरुचरण सिंह, टीएमकेओसी में सोढ़ी के रूप में जाने जाते हैं. हालांकि एकाएक समाचार आई कि वह गायब हो गए हैं. पुलिस उन्हें ढूढ़ने की कोशिश कर रही थी. तभी वह अचानक वापस आ गए और कहा कि वह आध्यात्मिक यात्रा पर निकले थे. The post Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah: भिड़े ने गुरुचरण से उनके बुरे वक्त में बात न करने पर तोड़ी चुप्पी, कहा- किसी के पास… appeared first on Naya Vichar.

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Chanakya Niti: इन 5 जगहों पर गांधी जी के बंदर की तरह मुंह बंद करने में ही भलाई, नहीं तो बढ़ जाएगी दिक्कते

Chanakya Niti: हिंदुस्तान में आदर्श शिक्षक की बात की जाए, तो चाणक्य का नाम पहले याद आता है. आचार्य चाणक्य एक महान अर्थशास्त्री होने के साथ कुशल रणनीतिकार और नीतिशास्त्री थे. उन्होंने अपने जीवन के बेहतरीन अनुभवों और शिक्षाओं के आधार पर एक ग्रंथ की रचना की, जिसे चाणक्य नीति के नाम से जाना है. ये नीतियां आज के आधुनिक युग में भी बहुत ही प्रासंगिक हैं. ये नीतियां दुनिया में लोकप्रिय है. चाणक्य नीति अपनाने वाला व्यक्ति जीवन की हर परेशानी से निपटने में सक्षम हो जाता है, क्योंकि ये नीतियां नेतृत्वक, सामाजिक, धार्मिक और निजी संबंधों से जुड़े जीवन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करती है. चाणक्य कहते हैं कि बुद्धिमान व्यक्ति बिना सोचे समझे कहीं पर कुछ भी नहीं बोलते हैं. वे काफी सोच-विचार के ही अपनी बातों को रखते हैं. ऐसे में चाणक्य नीति के एक श्लोक में लिखा है कि व्यक्ति को कुछ स्थितियों पर चुप रहना ही ठीक होता है. समझदार लोग कुछ जगहों पर अपना मुंह नहीं खोलते हैं. यह भी पढ़ें- Chanakya Niti: पैसों के लिए जीवन भर तरसते रहते हैं ये 3 लोग, फूटी कौड़ी भी नहीं होती नसीब यह भी पढ़ें- Chanakya Niti: जिंदगी भर झेलेंगे कष्ट, सुख की बजाय मिलेगा दुख, जितनी जल्दी हो सके तोड़ लें इन 3 लोगों से संबंध आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति गुस्सा हो, उसे समझाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. ऐसा व्यक्ति आपका चाहे जितना सगा हो, उसे गुस्से के वक्त समझाना ठीक नहीं होता है, क्योंकि ऐसे समय में व्यक्ति के मुंह से कुछ भी निकल सकता है, जो कि आपके दिल को ठेस पहुंचा सकता है. चाणक्य नीति के अनुसार, तनावपूर्ण स्थिति या लड़ाई झगड़े वाली जगह पर चुप रहना ही ठीक होता है. ऐसी जगहों पर बुद्धिमान व्यक्ति समझदारी दिखाते हैं और कुछ नहीं चुप रहते हैं. ऐसा इसलिए कि वे फालतू की लड़ाई-झगड़ों में नहीं फंसते हैं. चाणक्य नीति के मुताबिक, जहां आपकी प्रशंसा हो रही है, वहां चुप रहना ही ठीक होता है, क्योंकि ऐसी स्थितियों में बोलना अहंकार को दर्शाता है. इसके अलावा, दूसरों की प्रशंसा को सहर्ष स्वीकार करना चाहिए. चाणक्य नीति में बताया गया है कि मूर्खों को किसी भी बात को समझाना मूर्खता होती है, क्योंकि उन पर किसी भी बात का असर नहीं होता है. ऐसे लोगों को समझाने से सिर्फ और सिर्फ समय की बर्बादी होती है. आचार्य चाणक्य कहते हैं कि बिना मांगे किसी को सलाह नहीं देनी चाहिए. ऐसा करना दूसरों को अपमानित महसूस करा सकता है. यही वजह है कि बुद्धिमान व्यक्ति सलाह मांगने पर ही किसी को कोई बात समझाते हैं. यह भी पढ़ें- Chanakya Niti: खतरे से खाली नहीं इन 4 लोगों की मदद करना, खुद तो बर्बाद होंगे ही आपको भी कहीं का नहीं छोड़ेंगे Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारियों और मान्यताओं पर आधारित है. नया विचार इसकी पुष्टि नहीं करता है. The post Chanakya Niti: इन 5 जगहों पर गांधी जी के बंदर की तरह मुंह बंद करने में ही भलाई, नहीं तो बढ़ जाएगी दिक्कते appeared first on Naya Vichar.

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पटना एयरपोर्ट पर उड़ान भरने से ठीक पहले पायलट को लगी बड़ी भनक, 185 यात्रियों को फ्लाइट से फौरन उतारा गया

Patna Airport: पटना से दिल्ली जाने वाली स्पाइसजेट की फ्लाइट SG 729 में उड़ान भरने से पहले तकनीकी खराबी आ गई, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा. इंजन में आई इस समस्या के कारण विमान में सवार 185 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और अराइवल हॉल में भेजा गया. देरी से नाराज यात्रियों का हंगामा, सुरक्षा बलों को करना पड़ा हस्तक्षेप फ्लाइट में देरी से यात्री नाराज हो गए और उन्होंने एयरलाइंस अधिकारियों से जल्द दूसरी फ्लाइट की मांग की. इस दौरान एयरलाइंस कर्मियों और यात्रियों के बीच तीखी बहस भी हुई. स्थिति को बिगड़ता देख CISF के जवानों को हस्तक्षेप करना पड़ा और किसी तरह यात्रियों को शांत कराया गया. तीन घंटे की मशक्कत के बाद फिर रवाना हुई फ्लाइट तकनीकी टीम ने तुरंत विमान की मरम्मत शुरू की और करीब तीन घंटे की मेहनत के बाद इंजन की खराबी को ठीक कर दिया गया. इसके बाद, फ्लाइट को निर्धारित रूट पर उड़ान भरने की अनुमति दी गई. करीब 2 घंटे 24 मिनट की देरी से यह विमान 1:24 बजे दिल्ली के लिए रवाना हुआ. हालाँकि, इस दौरान 9 यात्रियों ने अपनी टिकट रद्द करा दी, जबकि 176 यात्री उड़ान में सवार हुए. नया विचार प्रीमियम स्टोरी: छत्रपति शिवाजी के साम्राज्य में क्या ‘गोवा’ भी था शामिल! अब क्यों उठा विवाद साढ़े तीन घंटे तक पटना एयरपोर्ट पर फंसे रहे यात्री फ्लाइट में देरी के कारण यात्रियों को एयरपोर्ट पर करीब साढ़े तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ा, जिससे वे बेहद परेशान हो गए. हालांकि, एयरलाइंस कर्मियों और सुरक्षा बलों की मदद से स्थिति को नियंत्रण में लाया गया और अंततः विमान ने सफलतापूर्वक उड़ान भरी. The post पटना एयरपोर्ट पर उड़ान भरने से ठीक पहले पायलट को लगी बड़ी भनक, 185 यात्रियों को फ्लाइट से फौरन उतारा गया appeared first on Naya Vichar.

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Video: बिहार विधानसभा में तेजस्वी और सम्राट खूब बमके, एक दूसरे के पिता पर पहुंच गयी बात

बिहार विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है. मंगलवार को सदन की कार्यवाही के दौरान उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव आमने-सामने हो गए. दोनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया. मुद्दा परिवारवाद बना. तेजस्वी यादव ने सम्राट चौधरी को उनका नेतृत्वक करियर याद दिलाया तो सम्राट चौधरी ने भी लालू-राबड़ी शासनकाल की याद तेजस्वी को दिलायी. दोनों के बीच तीखे हमले शुरू हुई तो बात एक-दूसरे के पिता पर पहुंच गयी. तेजस्वी-सम्राट के बीच नोकझोंक विधानसभा में उस समय अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गयी जब विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव और ट्रेजरी बेंच पर बैठे उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एक दूसरे पर हमला बोलने लगे. परिवारवाद का मुद्दा छिड़ा तो एक-दूसरे के पिता (लालू यादव और शकुनी चौधरी) पर बात पहुंच गयी. मामला यह है कि तेजस्वी राज्यपाल के अभिभाषण पर अपनी बात रख रहे थे. मंत्रियों को निशाने पर लेकर वो बता रहे थे कि परिवारवाद की नेतृत्व में किनकी भूमिका है. उन्होंने उन मंत्रियों को निशाना साधते हुए कहा कि आरोप लालू यादव पर लगते हैं. दोनों के पिता पर पहुंची बात इस दौरान तेजस्वी और सम्राट में नोकझोंक शुरू हो गयी. तेजस्वी ने सम्राट से पूछा कि ‘क्या आपने और आपके पिताजी (पूर्व मंत्री शकुनी चौधरी) ने भाजपा को गाली नहीं दी? जिसके जवाब में सम्राट चौधरी ने कहा ‘आपके पिताजी (लालू यादव) ने बिहार को लूटने का काम किया.’ जिसपर तेजस्वी ने कहा कि आप आखिरी बार राजद से ही चुनाव जीते थे, अब नहीं जीत सकेंगे. रिएक्शन में सम्राट चौधरी ने पूछा- ‘आप राजा हैं क्या?’ परिवारवाद बनेगा मुद्दा बिहार विधानसभा चुनाव इसी साल होना है. भाजपा और जदयू परिवारवाद को मुद्दा बनाकर लालू यादव को घेरती है. इस चुनाव में भी परिवारवाद मुद्दा बन सकता है, इसकी संभावना अधिक है. चुनावी से पहले नीतीश प्रशासन की कार्यकाल का यह आखिरी बजट सत्र है. जिसे सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों भुनाने की कोशिश कर रहा है. The post Video: बिहार विधानसभा में तेजस्वी और सम्राट खूब बमके, एक दूसरे के पिता पर पहुंच गयी बात appeared first on Naya Vichar.

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