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बिहार

ताजा ख़बर, बिहार

बिहार की तरह मध्य प्रदेश में भी जाम छलकाने वालों पर अब कानून की नजर, इन जगहों से हो रही शुरुआत, जानें

नया विचार पटना- शराब के मामले में मध्य प्रदेश अब बिहार की राह चलने को तैयार है। 1 अप्रैल 2025 से 19 जगहों पर शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लागू किया जाएगा। हालांकि, एमपी प्रशासन थोड़ी राहत दे रही, कहा गया है कि प्रतिबंध लागू होने के बावजूद कोई भी व्यक्ति बाहर से शराब लाकर पी सकेगा। एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि इस प्रतिबंध से प्रशासन को लगभग 450 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान होगा। एमपी के 17 धार्मिक शहरों में शराब पर प्रतिबंध मध्य प्रदेश में 17 ‘धार्मिक नगरों’ सहित 19 स्थानों पर 47 ‘संयुक्त शराब की दुकानें’ (जहां ‘हिंदुस्तान में निर्मित विदेशी शराब और देशी शराब दोनों बेची जाती हैं) 1 अप्रैल से बंद कर दी जाएंगी। नाम न बताने की शर्त पर आबकारी विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इन स्थानों पर शराब पीना अपराध नहीं होगा और इसके लिए कोई दंड नहीं दिया जाएगा। राज्य मंत्रिमंडल द्वारा प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार को इस निर्णय की घोषणा की। अधिकारियों ने बताया कि इन स्थानों पर शराब ले जाने और पीने पर रोक लगाने के लिए बिहार मद्य निषेध अधिनियम, 2016 जैसा कानून आवश्यक है। मध्य प्रदेश में ऐसा कोई कानून नहीं है। हालांकि, हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (भाजपा) की वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमा हिंदुस्तानी इसके लिए अभियान चला रही हैं। बिहार की तरह नहीं लागू होगा पूर्ण शराबबंदी एक अधिकारी ने कहा, ‘विशुद्ध कानूनी दृष्टि से यह प्रतिबंध शराब की बिक्री और बार में बैठकर शराब पीने पर रोक लगाता है। व्यक्तियों पर कोई प्रतिबंध नहीं है। लोग व्यक्तिगत रूप से शराब रख सकते हैं और उसका सेवन कर सकते हैं, लेकिन समूह में नहीं।’ पूरे मध्य प्रदेश में 3,600 शराब दुकानें हैं, जिनसे हर साल लगभग 15,200 करोड़ रुपये का अनुमानित राजस्व प्राप्त होता है। मध्य प्रदेश के आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल ने इसकी पुष्टि की और कहा कि 47 दुकानें बंद करने से राज्य को 450 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। जिन स्थानों पर शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया जाएगा उनमें एक नगर निगम, छह नगर पालिका, छह नगर परिषद और छह ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इन क्षेत्रों में उज्जैन, ओंकारेश्वर, महेश्वर, मंडलेश्वर, चित्रकूट और अमरकंटक जैसे धार्मिक केंद्र शामिल हैं। हालांकि, बिहार में अप्रैल 2016 से पूर्ण शराबबंदी कानून लागू है।

बिहार

601 फीट तिरंगा के साथ मुजफ्फरपुर में देशभक्ति का जश्न,

नया विचार मुजफ्फरपुर – 76वें गणतंत्र दिवस के मौके पर मुजफ्फरपुर के रामगढ़ परिवार द्वारा निकाली गई 601 फीट लंबी तिरंगा यात्रा ने शहर में देशभक्ति का माहौल बना दिया. सरैयागंज टावर से रामगढ़ चौक तक निकाली गई इस यात्रा में तिरंगे की भव्यता और लोगों का उत्साह देखने लायक था. तिरंगा यात्रा के दौरान छाता बाजार, दुर्गा स्थान, दीपक सिनेमा रोड, हरिसभा चौक, जवाहरलाल रोड और कंपनीबाग जैसे स्थानों पर यह यात्रा गुजरी, जहां लोगों ने तिरंगे के प्रति सम्मान जताते हुए सलामी दी. तिरंगे के साथ चल रहे लोग देश के वीर सपूतों को याद कर उनकी कुर्बानियों को नमन कर रहे थे. रामगढ़ परिवार का प्रेरक संदेश रामगढ़ परिवार के सदस्य चंदन कुमार ने बताया कि हर साल 26 जनवरी और 15 अगस्त को तिरंगा यात्रा निकालने की परंपरा है. इस बार का 601 फीट लंबा तिरंगा देश के स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद करने और देशभक्ति की भावना जागृत करने का प्रतीक है. उन्होंने उम्मीद जताई कि यह यात्रा युवाओं को देशहित के लिए प्रेरित करेगी. लोगों में दिखा उत्साह जहां-जहां यह तिरंगा पहुंचा, वहां लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। लोग इसे छूकर सम्मान व्यक्त कर रहे थे और देशभक्ति के गीत गा रहे थे. यह यात्रा मुजफ्फरपुर में देशप्रेम और एकता का प्रतीक बन गई. रामगढ़ परिवार की यह पहल देशप्रेम को नए सिरे से जागृत करने का एक शानदार प्रयास साबित हुई. तिरंगे के सम्मान और गौरव ने गणतंत्र दिवस पर शहर के हर नागरिक को एकजुट किया.  देखें वीडियो https://youtube.com/shorts/Gz2yhWHSY6I?si=w8RUrnNNXZetECG1

अपराध, ताजा ख़बर, बिहार

जिले में एक्टिव हुआ UPI फ्रॉड गिरोह, अब सीधे दुकान पर पहुंचकर करते हैं ठगी

नया विचार मुजफ्फरपुर – साइबर ठग अब एक कदम आगे आ कर ठगी को अंजाम दे रहे हैं. अब फिजिकल मोड में छोटे और फुटपाथी दुकानदारों को चूना लगाया जा रहा है. शातिर अलग-अलग तरीके से दुकानदारों से ठगी की घटना को अंजाम दे रहे हैं. यह गिरोह दिनभर शहरी क्षेत्र में घूमकर ऐसे दुकानदारों को चिह्नित करता है, जिसे आसानी से ठगी का शिकार बनाया जा सके. ये शातिर ग्रुप में दुकान पर पहुंचते हैं. सामान खरीदारी के बाद भुगतान के क्रम में दुकानदार को बातों में उलझा देते हैं. इसी क्रम में मोबाइल पर फर्जी एप के माध्यम से क्यूआर कोड को स्कैन कर उसकी मदद से फर्जी ट्रांजेक्शन आइडी क्रिएट कर सक्सेशफुल भुगतान का मैसेज दुकानदार को दिखाकर चलते बनते हैं. अपने साथ स्पीकर लेकर चलते हैं ठग इनसे बचने के लिए यूपीआइ की सुविधा देने वाली कंपनियों ने स्पीकर का विकल्प दे दिया. ताकि दुकानदार ठगें न जाएं. अब शातिरों ने इसका भी तोड़ निकाल लिया है. ये अपने साथ अलग-अलग कंपनियों का स्पीकर भी लेकर चलते हैं. ये अपने ही स्पीकर को स्कैन कर रखते हैं. भुगतान करते समय दुकानदार को उलझाकर अपने ही स्पीकर पर भुगतान कर देते हैं. भुगतान का कन्फर्मेशन स्पीकर पर होते ही ये वहां से निकल जाते हैं. जिले में साइबर ठगी का दूसरा मामला पढ़ें जिल में साइबर ठगी का दूसरा मामला सकरा थाना क्षेत्र के मीरापुर इलाके का है, जहां एक स्त्री को रिव्यू के ट्रैप में फंसाकर 7.10 लाख रुपये की ठगी कर ली गई. साइबर अपराधी स्त्री को और पैसे देने के लिए दबाव बना रहे थे, लेकिन स्त्री के पास पैसा नहीं था. इस कारण उसने ठगी को लेकर साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत की. प्रियंका ने पुलिस को बताया कि उनके टेलीग्राम और वाट्सएप पर एक मैसेज आया. उसे बताया गया कि व्यापारियों के प्रोडक्ट के लिए अच्छी रेटिंग देनी है. इसके बदले उन्हें पैसे दिये जाएंगे. किसी प्रकार का कोई प्रोडक्ट भी नहीं खरीदने की जरूरत होगी. प्रतिदिन महज 33 रिव्यु देना है. इसके बदले 300 से 400 रुपये मिलेंगे. इसे खाते में सीधे ट्रांसफर कर सकते हैं.

ताजा ख़बर, बिहार

नशे में धूत हेडमास्टर साहब झंडा फहराने पहुंचे स्कूल, ग्रामीणों ने कराया पुलिस के हवाले

नया विचार – गणतंत्र दिवस के मौके पर जहां देशभर में धूमधाम से कार्यक्रम आयोजित किए गए, वहीं बिहार से एक शर्मनाक घटना सामने आई है, जिसने राज्य की पूर्ण शराबबंदी की हकीकत को उजागर कर दिया. यह मामला मुजफ्फरपुर जिले के रामपुर हरि थाना क्षेत्र मीनापुर प्रखंड के राजकीय मध्य विद्यालय धर्मपुर पूर्वी का है. शराब के नशे में हेडमास्टर ने किया झंडा फहराने का प्रयास मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, स्कूल के हेडमास्टर संजय कुमार सिंह शराब के नशे में धुत होकर झंडा फहराने के लिए पहुंचे थे. उनका नशा इस हद तक था कि वे झंडा फहराते वक्त ठीक से खड़े भी नहीं हो पा रहे थे. उनकी यह हालत देखकर स्थानीय ग्रामीणों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी. पुलिस की त्वरित कार्रवाई घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए हेडमास्टर को स्कूल से गिरफ्तार कर लिया. उन्हें मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा गया और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई. यह घटना न केवल शराबबंदी की स्थिति पर सवाल उठाती है, बल्कि यह प्रशासनी कर्मचारियों की जिम्मेदारी और कर्तव्य के प्रति लापरवाही को भी दर्शाती है.

अपराध, बिहार

ध्वजारोहण के बाद घर लौट रहे थे शिक्षक, अचानक रास्ते में नकाबपोश अपराधियों ने मारी ताबड़तोड़ गोली

नया विचार आरा – भोजपुर जिले में गणतंत्र दिवस के दिन एक शिक्षक को गोली मार दी गई। 45 वर्षीय योगेन्द्र प्रसाद, चमरपुर प्राथमिक विद्यालय से ध्वजारोहण के बाद घर लौट रहे थे। बहोरनपुर बांध के पास बाइक सवार दो नकाबपोश अपराधी उन्हें गोली मारकर फरार हो गए। घायल शिक्षक को बाबू बाजार के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों ने गोली निकाल दी है और उनकी हालत स्थिर बताई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। बेखौफ हुए अपराधी चमरपुर प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक योगेन्द्र प्रसाद पर ये जानलेवा हमला हुआ है। योगेन्द्र प्रसाद बहोरनपुर थाना क्षेत्र के दामोदरपुर गांव के रहने वाले हैं। वह स्कूल में झंडा फहराने के बाद अपने घर वापस जा रहे थे। रास्ते में बहोरनपुर बांध रोड पर दो नकाबपोश अपराधी बाइक पर आए। उन्होंने योगेन्द्र प्रसाद को रोका और उनके सिर में गोली मार दी। गोली कनपटी के पास लगी। वारदात को अंजाम देने के बाद अपराधी मौके से फरार हो गए। शिक्षक को मारी गोली स्थानीय लोगों ने घायल शिक्षक को तुरंत बाबू बाजार स्थित एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने तुरंत इलाज शुरू किया और गोली निकाल दी। घायल शिक्षक का इलाज कर रहे डॉक्टर विकास सिंह ने बताया कि गोली को निकाल दिया गया है। मरीज का BP, पल्स सब स्टेबल है और खतरे से बाहर है। उसको अभी ऑब्जर्वेशन में रखा जाएगा। पुलिस ने शुरू की जांच घटना की सूचना मिलते ही बहोरनपुर थाना की पुलिस हरकत में आई। थानाध्यक्ष अभय शंकर मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया और स्थानीय लोगों से पूछताछ की। घायल शिक्षक योगेन्द्र प्रसाद ने पुलिस को बताया कि वह विद्यालय से झंडा तोलन करके वापस आ रहे थे तभी बहोरनपुर बांध के समीप नकाबपोश अपराधियों ने उनको गोली मार दी और फरार हो गए। पुलिस इस हमले के पीछे के कारणों का भी पता लगाने में जुटी है। पुलिस सभी पहलुओं से जांच कर रही है।

ताजा ख़बर, बिहार

बिहार भाजपा अध्यक्ष का चुनाव ‘टला’, जानिए 5 फरवरी के बाद किसके सिर सजेगा ‘ताज’?

नया विचार – बिहार भाजपा अध्यक्ष का चुनाव अब 5 फरवरी के बाद होगा। पहले यह चुनाव 19 जनवरी को होना था, लेकिन दिल्ली विधानसभा चुनाव और अन्य कारणों से इसे टाल दिया गया। नए अध्यक्ष के चुनाव के लिए बिहार भाजपा के 243 से ज्यादा प्रतिनिधि वोट करेंगे। अगर सर्वसम्मति बनती है तो वोटिंग नहीं होगी। पार्टी के केंद्रीय कार्यालय से चुनाव टालने का निर्देश आया था। बिहार भाजपा के लगभग 50 पदाधिकारी दिल्ली चुनाव में व्यस्त हैं। इसके अलावा, पार्टी ‘संविधान गौरव अभियान’ में भी व्यस्त है, जो 25 जनवरी को समाप्त हुआ। एक नाम पर सहमति बनने से नहीं पड़ेगी चुनाव की जरूरत पार्टी के एक सूत्र ने बताया कि अगर अध्यक्ष पद के लिए सभी की सहमति किसी एक नाम पर बन जाती है, तो चुनाव की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। ऐसे में नए अध्यक्ष का ऐलान बिना वोटिंग के हो जाएगा। लेकिन अगर सर्वसम्मति नहीं बनती है, तो चुनाव होगा। इस चुनाव में बिहार भाजपा के हर विधानसभा क्षेत्र से चुने गए 243 से ज्यादा प्रतिनिधि वोट करेंगे। बिहार भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि पार्टी के संविधान के मुताबिक, नए अध्यक्ष के नाम का ऐलान प्रतिनिधि परिषद की बैठक में होता है। यह बैठक 19 जनवरी को होनी थी। लेकिन 19 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘मन की बात’ कार्यक्रम होने के कारण चुनाव टाल दिया गया। इसके बाद गणतंत्र दिवस के बाद चुनाव कराने का सुझाव आया था। दिल्ली चुनाव में बिहार बीजेपी के 50 पदाधिकारी व्यस्त पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, चुनाव टालने का आदेश पार्टी के केंद्रीय कार्यालय से आया था। दिल्ली विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बिहार भाजपा के लगभग 50 पदाधिकारियों को दिल्ली भेजा गया है। ये पदाधिकारी दिल्ली में बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं। इसके अलावा पार्टी ‘संविधान गौरव अभियान’ में भी व्यस्त रहे। यह अभियान मंडल और जिला स्तर पर चला और 25 जनवरी को समाप्त हुआ। विधानसभा चुनाव को लेकर नए अध्यक्ष की होगी महत्वपूर्ण भूमिका इस चुनाव के बाद ही पता चलेगा कि बिहार भाजपा का नया नेतृत्व कौन करेगा। यह चुनाव पार्टी के लिए काफी अहम है, क्योंकि अगले साल बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं। नए अध्यक्ष के सामने पार्टी को मज़बूत करने और चुनाव की तैयारी करने की बड़ी ज़िम्मेदारी होगी।

बिहार, समस्तीपुर

समस्तीपुर के रेलवे चिकित्सक डॉ अभिषेक रंजन की प्रयागराज में मौत, महाकुंभ में रेलवे ने लगाई थी ड्यूटी.

नया विचार – समस्तीपुर रेलवे अस्पताल के चिकित्सक डॉ अभिषेक रंजन की रविवार को प्रयागराज में मौत हो गई। अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें आनन-फानन में महाकुंभ मेला स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां इलाज के दौरान डॉ अभिषेक रंजन की मौत हो गई। 28 वर्षीय डॉ अभिषेक समस्तीपुर जिले के उजियारपुर प्रखंड के सातनपुर के रहने वाले थे। उनके पिता होमियोपैथ चिकित्सक हैं। अभिषेक की अचानक मौत से उनके परिवार में कोहराम मच गया है। मिली जानकारी के अनुसार प्रयागराज में आयोजित कुंभ मेले में रेलवे की ओर से उनकी ड्यूटी लगाई गई थी। 26 जनवरी से 5 फरवरी तक उनकी ड्यूटी थी। लेकिन ड्यूटी के पहले ही दिन सुबह-सुबह उनकी तबीयत अचानक खराब हो गई। अभिषेक की मौत से उनके परिवार समेत पूरे इलाके में मातम का माहौल है। समस्तीपुर रेलवे अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक सुनील कुमार ने बताया कि डॉ अभिषेक संविदा पर बहाल हुए थे। आज सुबह प्रयागराज से पहले उनकी तबीयत खराब होने की समाचार आई। फिर बताया गया कि वे नहीं रहे। अभिषेक बहुत ही होशियार और होनहार डॉक्टर थे। उनके निधन से रेलवे अस्पताल को बहुत बड़ी क्षति हुई है। सीएमओ ने बताया कि डॉ अभिषेक 20 जुलाई 24 से रेलवे अस्पताल में तैनात थे। कुंभ के लिए रेलवे की ओर से उनकी ड्यूटी प्रयागराज में लगाई गई थी। रविवार की सुबह प्रयागराज के सीएमओ ने उनके अचानक बीमार होने और इलाज के दौरान निधन की जानकारी दी।

बिहार, विश्लेष्ण

बिहार के सबसे बड़े बाहुबली को ‘बाय-बाय’ करेंगे नीतीश, बुढ़ापा में जवानी दिखाने पर कटेगा विधानसभा टिकट!

नया विचार – बिहार के बड़े बाहुबली नेताओं में एक और मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह ने शुक्रवार को पटना की बाढ़ कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। उन्हें बेऊर जेल भेज दिया गया है। यह मामला सोनू-मोनू गिरोह से जुड़ी गोलीबारी की घटना से संबंधित है। अनंत सिंह मोकामा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा भी रखते हैं, जहां से वर्तमान में उनकी पत्नी नीलम देवी विधायक हैं। हालांकि इस घटना के बाद कयासों का बाजार गर्म है। मुंगेर सांसद ललन सिंह के बयान के बाद कयास लगाया जा रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अनंत सिंह को ‘बाय-बाय’ भी कह सकते हैं। क्या है पूरा मामला दरअसल, 22 जनवरी की शाम पटना के नौरंगा जलालपुर गांव में अनंत सिंह और सोनू-मोनू गिरोह के बीच गोलीबारी हुई थी। इस गोलीबारी में कई राउंड फायरिंग हुई, जिससे इलाके में दहशत फैल गई। इस घटना के बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए। पुलिस ने इस मामले में कई FIR दर्ज की और कुछ गिरफ्तारियां भी हुई। इस घटना के पीछे पैसों के लेन-देन का विवाद बताया जा रहा है। बता दें कि अनंत सिंह का मोकामा क्षेत्र में काफी प्रभाव है। उनके परिवार का इस सीट पर लंबे समय से दबदबा रहा है। उन पर कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। उनकी पत्नी नीलम देवी वर्तमान में मोकामा से विधायक हैं। अनंत सिंह इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव में इसी सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। फिलहाल वे पटना के बेऊर जेल में बंद हैं। सोनू-मोनू ईंट भट्टा कारोबारी वहीं, सोनू-मोनू दो भाई हैं, जिनका ईंट भट्ठा और मिट्टी का कारोबार है। उनके पिता प्रमोद सिंह वकील हैं और मां उर्मिला सिन्हा स्थानीय मुखिया हैं। सोनू-मोनू पर भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। अनंत सिंह और सोनू-मोनू के बीच पहले भी विवाद हो चुके हैं। गोलीबारी के बाद तो सोनू ने यहां तक कह दिया कि 68 की उम्र में 34 वाले से लड़ रहे हैं। वहीं, सूरजभान सिंह और पप्पू यादव ने कहा था कि इस उम्र में अनंत सिंह को ये सब करना शोभा नहीं देता है। क्यों हुई गोलीबारी बताया जा रहा है कि गोलीबारी की घटना की शुरुआत एक पैसों के विवाद से हुई। सोनू-मोनू का मुकेश कुमार सिंह नाम के व्यक्ति से 60 लाख रुपये का विवाद था। मुकेश सिंह सोनू-मोनू के ईंट भट्टे में मुंशी का काम करते थे। मुकेश सिंह ने अपनी फरियाद अनंत सिंह से की। अनंत सिंह पहले मुकेश सिंह के घर गए और फिर सोनू-मोनू से बात करने के लिए उनके पास गए। इसी दौरान दोनों गुटों के बीच गोलीबारी हो गई। मुकेश कुमार सिंह का कहना है कि सोनू मोनू हम पर 60 लाख रुपये के गबन का आरोप लगाते हैं। उन लोगों ने मेरे घर पर ताला लगा दिया था तो हम लोग थाने गए, लेकिन वहां किसी ने नहीं सुनी तो हम लोग अपनी फरियाद लेकर विधायक जी (अनंत सिंह) के पास गए। विधायक जी पहले हमारे घर (हेमजा गांव) आए और ताला खोले। बाद में वो सोनू-मोनू से मिलने नौरंगा गए। उन्होंने अपने आदमी को सोनू-मोनू को बुलाने भेजा। इसी दौरान सोनू-मोनू फायरिंग करने लगे। वहीं सोनू-मोनू के पिता प्रमोद सिंह का कहना है कि अनंत सिंह के लोगों ने पहले गोली चलाई। उनका कहना है कि चुनाव में अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी की मदद नहीं करने की वजह से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। क्या कह रहे पुलिस अधिकारी बाढ़ के ASP राकेश कुमार के अनुसार, इस गोलीबारी में 15 से 20 राउंड फायरिंग हुई। हालांकि, स्थानीय लोगों का दावा है कि 60 से 70 राउंड गोलियां चलीं। दावा किया जा रहा है कि 24 जनवरी की सुबह फिर से गोलीबारी हुई। मुकेश कुमार सिंह का कहना है कि सुबह पांच बजे सोनू और उसके समर्थकों ने उनके घर पर अंधाधुंध गोलीबारी की। हालांकि, पटना के ग्रामीण SP ने इस दावे को संदेहास्पद बताया है। उन्होंने कहा कि पुलिस की तैनाती में इस तरह की घटना होना संदेह पैदा करता है। गोलीबारी मामले में 4 एफआईआर बता दें कि 22 जनवरी को गोलीबारी के मामले में चार एफआईआर दर्ज हुई हैं। एक अनंत सिंह की तरफ से, दूसरी मुकेश सिंह की तरफ से, तीसरी पचमहला थाना और चौथी सोनू-मोनू की मां उर्मिला ने दर्ज कराई है। इस मामले में सोनू के साथ-साथ अनंत सिंह गुट की तरफ से रोशन की गिरफ्तारी हुई है। बिहार की सियासत तेज इस घटना के बाद से ही बिहार की नेतृत्व में भी हलचल मच गई है। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। वहीं, मुंगेर के सांसद ललन सिंह ने अनंत सिंह को टिकट देने के लिए तेजस्वी यादव पर ही सवाल उठाया है। दोनों नेताओं की बयानबाजी के बाद मोकामा की नेतृत्व में नए समीकरण बना दिए हैं। वहीं, इस घटना के बाद सोनू-मोनू और अनंत सिंह, दोनों ने मीडिया के सामने आकर एक-दूसरे पर आरोप लगाए। इस घटना ने बिहार की कानून-व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है। इस घटना का असर अनंत सिंह के नेतृत्वक भविष्य पर भी पड़ सकता है। संभव है कि नीतीश कुमार की पार्टी अनंत सिंह को टिकट ही न दे। शायद ललन सिंह ने ‘तेजस्वी के टिकट’ पर सवाल उठाकर इशारा कर दिया है।

बिहार

JDU MLA गोपाल मंडल ने कुर्सी पर बैठने को लेकर किया बवाल, SDPO को करना पड़ा मामले को शांत

नया विचार – भागलपुर जिले के नवगछिया अनुमंडल के कचहरी मैदान में गणतंत्र दिवस के मौके पर झंडोत्तोलन के समय कुर्सी पर बैठने को लेकर विधायक नरेंद्र कुमार नीरज उर्फ गोपाल मंडल ने एक बार फिर बवाल खड़ा कर दिया. वहीं उन्होंने कार्यकर्ताओं और आम लोगों के साथ अमर्यादित भाषा का प्रयोग भी किया. अपने बैठने के लिए कुर्सी ढूंढने लगे लेकिन उन्हें खाली कुर्सी नहीं दिखी जिसके बाद विधायक नाराज हो गए. नाराज जेडीयू विधायक गोपाल मंडल ने जिसके बाद बवाल करना शुरू कर दिया और दूसरे की कुर्सी खींचने लगे. एसडीपीओ ओम प्रकाश ने किया मामला शांत नाराज जेडीयू विधायक गोपाल मंडल को जो भी समझाने और शांत करने का कोशिश किया विधायक ने उसके साथ अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया. जिसके बाद अनुमंडल कार्यालय में कार्यपालक पदाधिकारी सुधीर कुमार, एसडीपीओ ओम प्रकाश को बीच बचाव कर के मामला शांत करना पड़ा. जिसके बाद भागलपुर जिला के गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र के नाराज जेडीयू विधायक गोपाल मंडल ने पीछे की ओर से कुर्सी और सोफा मंगवा कर मंच के बाहर बैठे और अपने परिवार के लोगों को भी बैठाया. पहले भी हुआ है बवाल विधायक गोपाल मंडल का ये कोई नया मामला नहीं है इसके पूर्व भी विधायक गोपाल मंडल कुर्सी पर बैठने को लेकर बवाल कर चुके है इसके पूर्व वर्ष 2023 में भी गणतंत्र दिवस के मौके पर नवगछिया पुलिस लाइन में सोफे पर बैठने को लेकर पूर्व सांसद अनिल यादव के साथ विवाद कर चुके है. देखें वीडियो https://youtu.be/UzbqD0eteog?si=1f6ybB8hGnPUJ7nK

ताजा ख़बर, बिहार

हरियाणा EOU की पटना में छापेमारी, दो साइबर अपराधियों की तलाश में चल रही है रेड

नया विचार पटना– हरियाणा आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की टीम पटना में दो साइबर अपराधियों की तलाश में छापेमारी कर रही है. इन अपराधियों ने दिल्ली और हरियाणा के युवकों से नौकरी दिलाने के नाम पर 50 लाख से अधिक की ठगी की है. पुलिस ने एक साइबर अपराधी को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है. जिसकी निशानदेही पर टीम पटना पहुंची है. पटना के पीरबहोर और कदमकुआं थाने की पुलिस हरियाणा EOU की टीम को सहयोग कर रही है. दो अपराधियों के ठिकानों पर चल रही छापेमारी हरियाणा EOU की टीम को GM रोड के रहने वाले रौशन सिन्हा उर्फ राजेश और लोहानीपुर के रहने वाले कृष्ण कन्हैया उर्फ कमल की तलाश है. टीम ने दोनों के कई ठिकानों पर छापेमारी की है. लेकिन दोनों वहां मिले नहीं, मौके से फरार हो गए थे. दोनों अपराधियों के परिजनों से पूछताछ की गई है. गिरफ्तार सरगना पटना का बताया जा रहा है. इसके साथ ही हरियाणा पुलिस की एक टीम उड़ीसा और झारखंड में भी छापेमारी कर रही है. अपराधी पत्रकारिता की पढ़ाई करने गए थे दिल्ली बता दें कि हेमनारायण तिवारी को हरियाणा पुलिस ने साइबर अपराध के आरोप में गिरफ्तार किया है. हेमनारायण पत्रकारिता की पढ़ाई के लिए दिल्ली गया था, लेकिन वहां वह साइबर अपराधियों के संपर्क में आया और जालसाज बन गया. पुलिस की जांच में पता चला है कि हेमनारायण ने अपने साथियों रौशन सिन्हा और कृष्ण कन्हैया के साथ मिलकर एक दर्जन से अधिक लोगों से ठगी की है. इन लोगों ने नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी की है.

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