Hot News

मुख्य खबर

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

क्या भारत में गाली देने पर हो सकती है जेल? नोएडा में दर्ज केस के बहाने समझिए पूरा कानून

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने के मामले में 25 वर्षीय एक युवती के खिलाफ नोएडा पुलिस ने FIR दर्ज की है. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने हिंदुस्तानीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है. इस कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर इस सवाल को लेकर चर्चा की जा रही है कि क्या हिंदुस्तान में किसी को गाली देने या किसी नेता के खिलाफ अपमानजनक भाषा इस्तेमाल करने पर जेल हो सकती है? कई यूजर इसको लेकर कानून के बारे में भी जानना चाह रहे हैं. पहले समझिए नोएडा में क्यों दर्ज हुआ केस? मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने के आरोप में नोएडा पुलिस ने एक युवती के खिलाफ जीरो FIR दर्ज किया है. यानी कानून सिर्फ शब्द नहीं देखता, बल्कि यह भी देखता है कि वे किस संदर्भ में बोले गए, उनका उद्देश्य क्या था और उनका असर क्या पड़ा. यदि कोई मामला अदालत तक पहुंचता है, तो न्यायालय कई पहलुओं पर विचार करता है. जैसे बयान किस परिस्थिति में दिया गया? उसका उद्देश्य क्या था? क्या उससे किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को वास्तविक नुकसान पहुंचा? क्या उससे सार्वजनिक शांति भंग होने की संभावना थी? क्या बयान संविधान द्वारा संरक्षित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आता है? इन सभी तथ्यों के आधार पर ही तय होता है कि मामला आपराधिक अपराध बनता है या नहीं. कुल मिलाकर ऐसे मामलों में कार्रवाई इस बात पर निर्भर करती है कि कथित बयान का संदर्भ क्या था, उसका उद्देश्य क्या था, उससे सार्वजनिक व्यवस्था या किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा पर क्या प्रभाव पड़ा और संबंधित कानून की सभी आवश्यक शर्तें पूरी होती हैं या नहीं. अंतिम निर्णय हमेशा अदालत ही करती है. इसलिए, अश्लीलता और गाली से संंबंधित सवाल का जवाब ‘हां’ या ‘नहीं’ में नहीं दिया जा सकता. क्योंकि हिंदुस्तानीय कानून हर अपमानजनक शब्द को अपराध नहीं मानता. यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह टिप्पणी किस परिस्थिति में की गई, उसका उद्देश्य क्या था और उससे क्या परिणाम निकल सकते थे. The post क्या हिंदुस्तान में गाली देने पर हो सकती है जेल? नोएडा में दर्ज केस के बहाने समझिए पूरा कानून appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

स्पेन की सीमा पर माइग्रेंट सुनामी! 18 मौत के बाद सेना तैनात, यूरोप में मचा हड़कंप

यूरोप और अफ्रीका की सीमा पर स्थित स्पेन के स्वायत्त क्षेत्र सेउटा (Ceuta) और मेलिला (Melilla) में बड़ी संख्या में प्रवासियों के पहुंचने के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए हैं.टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, सीमा पार करने की कोशिश के दौरान पुलिस और प्रवासियों के बीच हुई झड़प कम से कम 18 प्रवासियों की मौत हो गई. कई लोग समुद्र के रास्ते तैरकर और कई ऊंची बाड़ पार कर स्पेन पहुंचने की कोशिश कर रहे थे. इस दौरान अफरा-तफरी मच गई और राहत एजेंसियों पर भी भारी दबाव पड़ गया. स्पेन के अफ्रीकी क्षेत्र स्यूटा में हजारों प्रवासी मोरक्को से सीमा पार कर पहुंचे. कई प्रवासी समुद्र तैरकर और बॉर्डर फेंस पार कर स्पेन में दाखिल हुए. हालात बिगड़ने पर स्पेन प्रशासन ने सेना और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया. सीमा पार करने के दौरान कई लोगों की मौत की भी समाचार सामने आई है. मेलिला बॉर्डर पर भी प्रवासियों और सुरक्षा बलों के बीच तनाव बढ़ गया. सेउटा के मेयर ने हालात को गंभीर बताते हुए आपातकाल जैसे कदम उठाने की मांग की. स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने का फैसला किया है. स्पेन का कहना है कि मानव तस्कर नए कानूनी नियमों का फायदा उठाकर प्रवासियों को सीमा पार करा रहे हैं. मोरक्को और स्पेन के बीच स्यूटा और मेलिला को लेकर पहले से ही नेतृत्वक और कूटनीतिक विवाद चलता रहा है. इस घटनाक्रम ने यूरोप में अवैध प्रवास और सीमा सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है. सेना संभालेगी सुरक्षा की कमान हालात पर काबू पाने के लिए स्पेन ने सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों को सेउटा भेजा है. प्रशासन का कहना है कि स्थानीय प्रशासन के संसाधन जवाब देने की स्थिति में नहीं थे. वहीं, स्पेन और मोरक्को दोनों देशों के अधिकारी सीमा पर नियंत्रण और अवैध घुसपैठ रोकने के लिए संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं. सेउटा संकट केवल स्पेन की नहीं, बल्कि पूरे यूरोप की सेउटा संकट केवल स्पेन की समस्या नहीं, बल्कि पूरे यूरोपीय संघ के लिए चुनौती बन सकता है. साल 2021 के बाद यह सेउटा में सबसे गंभीर प्रवासी संकटों में से एक माना जा रहा है, जिस पर यूरोपीय देशों की नजर बनी हुई है. यह भी पढ़ें- पाकिस्तान : बलूचिस्तान के कोयला खदान में विस्फोट, 32 की मौत; 5-5 लाख मुआवजे की घोषणा The post स्पेन की सीमा पर माइग्रेंट सुनामी! 18 मौत के बाद सेना तैनात, यूरोप में मचा हड़कंप appeared first on Naya Vichar.

बिहार, मुख्य खबर, समस्तीपुर

आधुनिक रेल अवसंरचना विकास के लिए समस्तीपुर मंडल प्रयासरत, 04 अगस्त 2026 को ककरघट्टी यार्ड में होगी फुट ओवर ब्रिज गर्डर लॉन्चिंग

फुट ओवर ब्रिज गर्डर लॉन्चिंग कार्य से बढ़ेगी सुरक्षा और परिचालन क्षमता नया विचार न्यूज़ समस्तीपुर–   पूर्व मध्य रेल के समस्तीपुर मंडल में यात्रियों को सुरक्षित, सुगम एवं विश्वस्तरीय रेल सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा रेलवे अवसंरचना को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से विभिन्न महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग कार्य युद्धस्तर पर किए जा रहे हैं। इसी क्रम में 04 अगस्त 2026 को ककरघट्टी यार्ड में फुट ओवरब्रिज गर्डर लॉन्चिंग की जाएगी।जिसके लिए 11:20 बजे से 15:15 बजे तक (03 घंटे 55 मिनट) ट्रैफिक एवं पावर ब्लॉक लिया जाएगा। रेल प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि ये ब्लॉक यात्रियों की सुविधा एवं सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिए जा रहे हैं। इन कार्यों के पूर्ण होने के बाद प्लेटफॉर्मों के बीच आवागमन अधिक सुरक्षित एवं सुगम होगा, भीड़भाड़ में कमी आएगी, परिचालन क्षमता बढ़ेगी, ट्रेनों के समयपालन में सुधार होगा तथा भविष्य में अधिक ट्रेनों के संचालन का मार्ग भी प्रशस्त होगा। यह कार्य समस्तीपुर मंडल के रेल नेटवर्क को और अधिक आधुनिक एवं सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। 04 अगस्त 2026 को ककरघट्टी यार्ड में होगी फूट ओवर ब्रिज गर्डर लॉन्चिंग दिनांक 04 अगस्त 2026 (मंगलवार) को ककरघट्टी यार्ड की लाइन संख्या 01, 02, 03 एवं 04 पर फुट ओवर ब्रिज गर्डर लॉन्चिंग के लिए 11:20 बजे से 15:15 बजे तक (03 घंटे 55 मिनट) ट्रैफिक एवं पावर ब्लॉक लिया जाएगा। यह ब्लॉक ट्रेन संख्या 13212 के गुजरने के बाद प्रभावी होगा। इस दौरान निम्नलिखित ट्रेनों के परिचालन में अस्थायी परिवर्तन रहेगा— पुनर्निर्धारित (Rescheduled) ट्रेनें 13225 जयनगर–आरा एक्सप्रेस : जयनगर से 120 मिनट विलंब से प्रस्थान करेगी। 13226 आरा–जयनगर एक्सप्रेस : आरा से 120 मिनट विलंब से प्रस्थान करेगी। 63377 लहेरियासराय– सहरसा मेमू पैसेंजर : लहेरियासराय से 90 मिनट विलंब से प्रस्थान करेगी। नियंत्रित (Regulated) ट्रेनें 15553 भागलपुर–जयनगर एक्सप्रेस : समस्तीपुर जंक्शन–दरभंगा जंक्शन के मध्य 45 मिनट नियंत्रित कर चलाई जाएगी। 11062 जयनगर–लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस : जयनगर–तारसराय रेलखंड के मध्य 50 मिनट नियंत्रित कर चलाई जाएगी। यात्रियों को होंगे ये महत्वपूर्ण लाभ इन विकास कार्यों के पूर्ण होने के बाद— * रेलवे संरक्षा मानकों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। * रेल परिचालन अधिक सुचारु एवं समयबद्ध होगा। * भविष्य में अधिक ट्रेनों के सुरक्षित संचालन एवं बेहतर परिचालन क्षमता विकसित होगी। * आधुनिक रेल अवसंरचना के माध्यम से यात्रियों को बेहतर यात्रा अनुभव प्राप्त होगा। समस्तीपुर मंडल रेल प्रशासन यात्रियों से अनुरोध करता है कि उपर्युक्त अवधि में यात्रा करने से पूर्व अपनी ट्रेन की अद्यतन स्थिति रेलवे के अधिकृत माध्यमों तथा 139 से अवश्य प्राप्त कर लें। यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा एवं भविष्य में और अधिक बेहतर रेल सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लिए जा रहे इन अस्थायी परिचालन परिवर्तनों में सहयोग प्रदान करें।

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर हुसैन समेत पांचों दोषियों को उम्रकैद, कोर्ट ने लगाया 5 लाख का जुर्माना

अंकित शर्मा हत्याकांड: दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने खुफिया ब्यूरो (IB) अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व MCD पार्षद ताहिर हुसैन समेत सभी दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. अदालत ने दोषियों को हिंदुस्तानीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत हत्या के अपराध में दोषी ठहराते हुए यह सजा दी. कोर्ट ने दोषियों को दंगा करने, घातक हथियारों के साथ दंगा करने, अपहरण और हत्या जैसे गंभीर अपराधों के लिए भी अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई. इसके अलावा अदालत ने ताहिर हुसैन पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. यह फैसला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के दौरान दयालपुर इलाके में हुई अंकित शर्मा की हत्या से जुड़े मामले में आया है. अंकित शर्मा का क्षत-विक्षत शव एक नाले से बरामद किया गया था.मामले में अदालत ने ताहिर हुसैन और चार अन्य आरोपियों को दोषी करार दिया था. 13 जुलाई को दोषी ठहराए गए थे ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपी अदालत ने 13 जुलाई को ताहिर हुसैन और चार अन्य आरोपियों को अंकित शर्मा हत्याकांड में दोषी करार दिया था. इसके बाद 27 जुलाई को अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद सजा पर फैसला सुरक्षित रख लिया था. अभियोजन पक्ष ने मांगी थी फांसी की सजा सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने ताहिर हुसैन और अन्य दोषियों के लिए मौत की सजा की मांग की थी. विशेष लोक अभियोजक (SPP) मधुकर पांडे ने दलील दी थी कि यह बेहद गंभीर और निर्मम अपराध है, जिसे दुर्लभतम मामलों की श्रेणी में रखा जा सकता है. अभियोजन ने कहा था कि हत्या जानबूझकर की गई थी और इसमें धारदार हथियार का इस्तेमाल किया गया. दलील दी गई कि अंकित शर्मा के शरीर पर 51 चोटों के निशान थे, जिनमें से कई चोटें जानलेवा थीं. अभियोजन पक्ष ने अदालत में कहा था कि इस हत्या को केवल एक अलग घटना के तौर पर नहीं देखा जा सकता. इसे उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की पृष्ठभूमि में देखा जाना चाहिए, जिनमें 53 लोगों की मौत हुई थी. अभियोजन ने दोषियों के व्यवहार को देखते हुए कड़ी से कड़ी सजा की मांग की थी. बचाव पक्ष ने की सजा में नरमी की अपील वहीं, ताहिर हुसैन के वकील राजीव मोहन ने अदालत से सजा में नरमी बरतने की अपील की थी. उन्होंने कहा कि हर हत्या के मामले में मौत की सजा नहीं दी जा सकती और सजा तय करते समय अपराध से जुड़े सभी पहलुओं पर विचार किया जाना चाहिए. बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि इस मामले में 11 आरोपियों में से छह को अदालत ने बरी कर दिया है. वकील ने कहा कि ताहिर हुसैन को सामान्य इरादे और अन्य अपराधों के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है. Also Read:निलंबित IAS अधिकारी विनय कुमार चौबे को सुप्रीम कोर्ट ने दी जमानत, वन भूमि की अवैध खरीद-बिक्री से जुड़ा है मामला The post अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर हुसैन समेत पांचों दोषियों को उम्रकैद, कोर्ट ने लगाया 5 लाख का जुर्माना appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

युद्ध का सबसे खामोश हथियार: क्या Russia यौन हिंसा को बना रहा है युद्ध की रणनीति?

कल्पना कीजिए. कोई सैनिक युद्ध में हार जाए तो… वह कैदी बन सकता है.  उससे पूछताछ हो सकती है. उसे जेल में रखा जा सकता है. लेकिन अगर युद्ध के दौरान उसके शरीर को ही प्रताड़ना का हथियार बना दिया जाए, तो यह केवल हिंसा नहीं रह जाती, बल्कि इंसान की गरिमा पर हमला बन जाती है. Russia-Ukraine War को तीन साल से ज्यादा हो चुके हैं. इस दौरान मिसाइल, ड्रोन, टैंक और बमों की चर्चा सबसे ज्यादा हुई. लेकिन संयुक्त राष्ट्र (UN) और अंतरराष्ट्रीय जांचकर्ताओं की हालिया रिपोर्ट एक ऐसे पहलू की ओर इशारा करती है, जिसकी चर्चा अपेक्षाकृत कम हुई है. रिपोर्ट के अनुसार, रूसी हिरासत केंद्रों में कई यूक्रेनी युद्धबंदियों और नागरिकों के साथ यौन हिंसा और यौन यातना (Sexual Torture) के गंभीर आरोप सामने आए हैं. रूस इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है और उन्हें नेतृत्वक रूप से प्रेरित बताता है. युद्ध में गोलियां शरीर को घायल करती हैं, लेकिन यौन हिंसा का उद्देश्य अक्सर शरीर से ज्यादा मन को तोड़ना होता है. युद्ध का नया चेहरा या पुरानी रणनीति? युद्ध के दौरान स्त्रीओं के खिलाफ यौन हिंसा के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं. बोस्निया, रवांडा, कांगो और इराक जैसे कई संघर्षों में यह देखा गया है कि स्त्रीओं के साथ बलात्कार को समुदाय को डराने और अपमानित करने के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया. लेकिन यूक्रेन युद्ध में सामने आ रही तस्वीर एक अलग सवाल खड़ा करती है. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, जिन 310 मामलों की जांच चल रही है, उनमें 280 पीड़ित पुरुष, 26 स्त्रीएं और 4 लड़कियां हैं. यानी इस बार सबसे अधिक निशाने पर पुरुष युद्धबंदी बताए जा रहे हैं. यह आंकड़ा बताता है कि आधुनिक युद्ध में यौन हिंसा केवल स्त्रीओं तक सीमित नहीं रह गई है. इसका इस्तेमाल किसी भी बंदी को मानसिक रूप से तोड़ने के लिए किया जा सकता है. रिपोर्ट में क्या कहा गया है? अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने कई पूर्व यूक्रेनी युद्धबंदियों, यूक्रेनी अभियोजकों और संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं से बातचीत के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है. रिपोर्ट के अनुसार, कई पूर्व कैदियों ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान उनके साथ यौन यातना की गई. इन आरोपों में शामिल हैं- बलात्कार या बलात्कार का प्रयास निजी अंगों पर हमला और गंभीर चोट पहुंचाना बिजली का झटका देना निर्वस्त्र कर घंटों खड़ा रखना यौन अपमान के जरिए मानसिक प्रताड़ना कुछ पूर्व कैदियों ने यह भी दावा किया कि उन्हें धमकी दी गई कि वे भविष्य में संतान पैदा नहीं कर सकेंगे. इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से हर मामले में पुष्टि करना संभव नहीं है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र ने भी कई मामलों की जांच जारी होने की बात कही है. आखिर ऐसा क्यों किया जाता है? युद्ध में किसी सैनिक को मार देना आसान है. लेकिन कई बार उद्देश्य केवल दुश्मन को हराना नहीं होता. उसे मानसिक रूप से इस तरह तोड़ देना होता है कि वह अपने समाज में लौटने के बाद भी सामान्य जीवन न जी सके. यौन यातना का सबसे बड़ा उद्देश्य यही माना जाता है. यह पीड़ित को केवल शारीरिक दर्द नहीं देती, बल्कि शर्म, भय, अपराधबोध और सामाजिक अलगाव की भावना भी पैदा करती है. युद्ध के बाद भी यह घाव वर्षों तक बना रहता है. युद्ध खत्म हो सकता है, लेकिन यातना की याद अक्सर युद्ध से भी लंबी चलती है. नया विचार IR & Geopolitics स्पेशल : Qatar : जब रेगिस्तान से निकला पेट्रोल और गैस से भी बड़ा खजाना… कहानी Qatar, Al-Jazeera और Sheikh Hamad की नया विचार IR & Geopolitics स्पेशल : Pacific : चीन के खिलाफ, हिंदुस्तान के लिए क्यों हैं Australia और New Zealand खास नया विचार IR & Geopolitics स्पेशल : Indonesia : पीएम मोदी की यात्राएं टूरिज्म ट्रिप नहीं, चीन के लिए जाल ‌बिछा रहे हैं नया विचार IR & Geopolitics स्पेशल : क्या कर रहे हो पाकिस्तान : पहले बसंत मनाए, फिर ‘बाबरी मस्जिद चौक’ का नाम ‘जैन मंदिर चौक’ कर दिए… नया विचार IR & Geopolitics स्पेशल : अमेरिका-ईरान में फिर बमबारी… दूसरा ‘रूस-यूक्रेन’ बनाने पर आमादा क्यों है अमेरिका? पुरुष पीड़ितों पर कम चर्चा क्यों होती है? जब भी युद्ध में यौन हिंसा की बात होती है, तो सबसे पहले स्त्रीओं की तस्वीर सामने आती है. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि पुरुषों के साथ होने वाली यौन हिंसा पर अक्सर बहुत कम चर्चा होती है. इसके पीछे कई कारण हैं. पहला, सामाजिक शर्म. दूसरा, पुरुषों द्वारा शिकायत दर्ज कराने में झिझक. तीसरा, यह धारणा कि पुरुष ऐसे अपराधों के शिकार नहीं हो सकते. इसी वजह से कई मामले कभी सामने ही नहीं आते. यही कारण है कि विशेषज्ञ मानते हैं कि वास्तविक संख्या आधिकारिक आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकती है. संयुक्त राष्ट्र क्या कहता है? संयुक्त राष्ट्र की जांच टीमों ने कई पूर्व युद्धबंदियों और नागरिकों से बातचीत की है. उनके अनुसार, जिन मामलों की जांच चल रही है, उनमें अधिकांश पीड़ितों ने हिरासत के दौरान यौन हिंसा का आरोप लगाया है. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि कई मामलों में पीड़ितों के बयान एक-दूसरे से मेल खाते हैं. हालांकि जांच अभी पूरी नहीं हुई है. इसलिए सभी मामलों पर अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है. रूस का पक्ष भी समझना जरूरी इन सभी आरोपों पर रूस ने लगातार इनकार किया है. मॉस्को का कहना है कि ये आरोप नेतृत्वक रूप से प्रेरित हैं और इनके पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं. रूस ने यह भी कहा है कि उसके खिलाफ लगाए गए कई आरोप युद्ध प्रचार (Propaganda) का हिस्सा हैं. दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र ने कई बार कहा है कि उसे रूसी नियंत्रण वाले कुछ इलाकों तक जांच के लिए पूरी पहुंच नहीं मिली. यही वजह है कि स्वतंत्र जांच कई मामलों में चुनौती बनी हुई है. किसी भी युद्ध में एक पक्ष के आरोप और दूसरे पक्ष के इनकार के बीच सच्चाई तक पहुंचना आसान नहीं होता. इसलिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की निष्पक्ष जांच बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. असली संख्या शायद कहीं ज्यादा हो यूक्रेनी अभियोजकों का कहना है कि उनके पास सैकड़ों मामलों की जांच चल रही है. लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है. कारण साफ है.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

The Traitors Season 2: ट्रेटर बन धोखे और माइंड गेम का खेल खेलेंगे ये 21 कंटेस्टेंट, कंफर्म लिस्ट आउट

The Traitors Season 2 Contestants: प्राइम वीडियो का पॉपुलर रियलिटी शो ‘द ट्रेटर्स’ अब अपने दूसरे सीजन के साथ वापसी करने जा रहा है. पहले सीजन को दर्शकों का शानदार प्यार मिला था. अब मेकर्स ने ‘द ट्रेटर्स सीजन 2’ के 21 कंफर्म कंटेस्टेंट्स के नाम भी बता दिए हैं. एक बार फिर इस शो को करण जौहर होस्ट करेंगे. इस बार भी शो में भरोसा, चालाकी, झूठ और बड़े-बड़े ट्विस्ट देखने को मिलेंगे. The Traitors Season 2 Contestant List: कौन-कौन होगा शो का हिस्सा? इस बार शो में फिल्म, टीवी, सोशल मीडिया, म्यूजिक, स्पोर्ट्स और फूड इंडस्ट्री से जुड़े कई बड़े चेहरे नजर आएंगे. कंटेस्टेंट्स की पूरी लिस्ट इस तरह है: रिया चक्रवर्ती क्रिस्टल डिसूजा रणवीर बरार मल्लिका शेरावत शाहनील गिल अभिषेक मल्हान (फुकरा इंसान) मुनव्वर फारूकी रिदा थराना तान्या पुरी शालिनी पासी साउंडस मौफाकिर हरमन सिंघा अंश चोपड़ा कुल्लू करण सिंह मैजिक इक्का पारुल गुलाटी श्वेता तिवारी प्रिश साहिल सलाथिया दलीप ताहिल The Traitors Season 2 Game: आखिर शो में होता क्या है? ‘द ट्रेटर्स’ एक ऐसा रियलिटी शो है, जिसमें 20 से ज्यादा कंटेस्टेंट एक साथ स्पोर्ट्स शुरू करते हैं. इनमें से कुछ लोगों को चुपके से ‘ट्रेटर’ यानी गद्दार चुना जाता है. इन ट्रेटर्स का काम होता है कि वे बिना अपनी पहचान बताए बाकी खिलाड़ियों को स्पोर्ट्स से बाहर करें. वहीं, बाकी कंटेस्टेंट्स को मिलकर यह पता लगाना होता है कि ट्रेटर कौन है. अगर वे सही समय पर ट्रेटर को नहीं पकड़ पाए, तो वे गेम हार सकते हैं. यही वजह है कि इस शो में हर एपिसोड के साथ सस्पेंस और धोखा बढ़ता जाता है. The Traitors Season 2 Release Date: कब और कहां देखें? ‘द ट्रेटर्स सीजन 2’ का प्रीमियर 13 अगस्त 2026 से प्राइम वीडियो पर होगा. नए एपिसोड हर गुरुवार रात 12 बजे स्ट्रीम किए जाएंगे. The Traitors Season 1 Winners: पहले सीजन का विनर कौन था? ‘द ट्रेटर्स’ के पहले सीजन ने अपने सस्पेंस और गेम प्लान की वजह से काफी सुर्खियां बटोरी थीं. शो की विनर उर्फी जावेद और निकिता लूथर बनी थीं. दोनों ने मिलकर आखिरी ट्रेटर हर्ष गुजराल को पहचान लिया था और 70.5 लाख रुपये की प्राइज मनी अपने नाम की थी. यह भी पढ़ें– इंटेंस आंखें, स्टनिंग चेहरा… कियारा आडवाणी के बर्थडे पर मेकर्स ने शेयर किया ‘Toxic’ का नया पोस्टर The post The Traitors Season 2: ट्रेटर बन धोखे और माइंड गेम का स्पोर्ट्स स्पोर्ट्सेंगे ये 21 कंटेस्टेंट, कंफर्म लिस्ट आउट appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

125 km की रेंज, 22 लीटर का स्टोरेज स्पेस… डेली यूज के लिए परफेक्ट है ये फैमिली इलेक्ट्रिक स्कूटर

ग्रीव्स इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (Greaves Electric Mobility) ने हिंदुस्तान में नया Ampere Magnus Neo इलेक्ट्रिक स्कूटर कुछ महीने पहले ही लॉन्च किया है. इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 90,999 रुपये है. कंपनी ने इस स्कूटर को रोजमर्रा के इस्तेमाल को ज्यादा आसान और यूजर-फ्रेंडली बनाने के लिए कई छोटे-छोटे लेकिन काम के अपडेट दिए हैं. अगर आप इस बाइक को खरीदने की सोच रहे हैं, तो पहले इसके बारे में पूरी जानकारी जान लेना जरूरी है. नीचे हमने इसकी बैटरी, रेंज, चार्ज होने में कितना समय लगता है जैसी चीजों के बारे में बताया है. आइए देखते हैं. Ampere Magnus Neo के फीचर्स Ampere Magnus Neo में 3.5 इंच का LCD इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर दिया गया है. इसमें आप राइडिंग से जुड़ी जरूरी डिटेल्स एक ही नजर में देख सकते हैं. स्कूटर में LED हेडलाइट, LED टेललाइट और LED टर्न इंडिकेटर्स के साथ पूरी तरह LED लाइटिंग सेटअप मिलता है. इसके अलावा, फोन चार्ज करने के लिए USB चार्जिंग पोर्ट भी दिया गया है. वहीं, सीट के नीचे 22 लीटर का स्टोरेज स्पेस मिलता है. बैटरी, रेंज और चार्जिंग इस स्कूटर में 2.3 kWh की LFP बैटरी दी गई है. कंपनी का दावा है कि यह इलेक्ट्रिक स्कूटर एक बार फुल चार्ज होने पर 125 km तक की IDC रेंज दे सकता है. हालांकि, रोजमर्रा के इस्तेमाल में Eco मोड पर इससे करीब 85 से 90 km की रेंज मिलने की उम्मीद है. इसकी टॉप स्पीड 65 km/h है. वहीं, इसकी बैटरी 0 से 80% तक चार्ज होने में करीब 5 घंटे का समय लेती है. कंपनी इस बाइक के साथ 5 साल या 75,000 किलोमीटर (जो पहले पूरा हो) तक की वारंटी भी दे रही है. ये भी पढ़ें: हिंदुस्तान में लॉन्च से पहले जानिए Honda ADV 160 की 5 खूबियां, क्यों है यह स्कूटर सबसे अलग? सस्पेंशन और ब्रेकिंग सिस्टम मैकेनिकल सेटअप की बात करें तो Ampere Magnus Neo में ड्यूल-फ्रेम चेसिस दिया गया है. बेहतर राइडिंग के लिए इसके फ्रंट में टेलिस्कोपिक फोर्क और पीछे मोनोशॉक सस्पेंशन मिलता है. वहीं, ब्रेकिंग की जिम्मेदारी आगे और पीछे दोनों पहियों पर दिए गए ड्रम ब्रेक संभालते हैं. कम सीट हाइट और हल्के वजन का फायदा कंपनी ने इस इलेक्ट्रिक स्कूटर में 10-इंच का रियर व्हील दिया है. इसकी वजह से सीट की ऊंचाई घटकर 777 mm रह गई है, जो पहले के मॉडल के मुकाबले 25 mm कम है. इतना ही नहीं, स्कूटर का वजन भी 5 किलो कम होकर सिर्फ 104 kg रह गया है. कम वजन और नई डिजाइन की बदौलत अब यह स्कूटर ट्रैफिक में निकालना और तंग गलियों या कम जगह पर मोड़ना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है. ये भी पढ़ें: 10 से 14 साल के बच्चों के लिए लॉन्च हुई TVS Apache RR 200 Mini, दौड़ती है 110 km/h की स्पीड से The post 125 km की रेंज, 22 लीटर का स्टोरेज स्पेस… डेली यूज के लिए परफेक्ट है ये फैमिली इलेक्ट्रिक स्कूटर appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

CWG 2026 Live Day 9: प्रीति पवार का दमदार पंच, जाम्बिया की कैथरीन म्वापे को हराकर फाइनल में पहुंचीं

स्कॉटलैंड में CWG 2026 का नौवां दिन हिंदुस्तान के लिए रोमांचक होगा. नीरज चोपड़ा गोल्ड जीतने के दावेदार हैं, वहीं 10 हिंदुस्तानीय मुक्केबाज सेमीफाइनल में उतरेंगे. वेटलिफ्टर लवप्रीत और डिस्कस थ्रोअर सीमा ने पदक जीतकर टीम का उत्साह बढ़ाया है. The post CWG 2026 Live Day 9: प्रीति पवार का दमदार पंच, जाम्बिया की कैथरीन म्वापे को हराकर फाइनल में पहुंचीं appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

सावन 2026: अगस्त में कब हैं सोम और भौम प्रदोष व्रत? नोट करें तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा का महत्व

Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत हिंदू धर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है. यह व्रत प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है. भक्त यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने के लिए करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष काल में विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने पर सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन के कष्ट दूर होते हैं. वर्ष 2026 का अगस्त महीना विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस दौरान पवित्र सावन मास रहेगा. सावन में पड़ने वाले प्रदोष व्रत का पुण्य और फल कई गुना अधिक माना जाता है. अगस्त 2026 में प्रदोष व्रत की तिथियां और शुभ मुहूर्त पहला प्रदोष व्रत: सोम प्रदोष (10 अगस्त 2026) सावन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर सोम प्रदोष व्रत रखा जाएगा. त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 9 अगस्त 2026, रात 9:30 बजे त्रयोदशी तिथि समाप्त: 10 अगस्त 2026, शाम 6:24 बजे सोम प्रदोष व्रत महत्व: सोमवार के दिन पड़ने के कारण इसे सोम प्रदोष कहा जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन व्रत और भगवान शिव की पूजा करने से मानसिक शांति, उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि तथा मनचाहा वरदान प्राप्त होता है. दूसरा प्रदोष व्रत: भौम प्रदोष (25 अगस्त 2026) सावन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर भौम प्रदोष व्रत रखा जाएगा. त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 24 अगस्त 2026, रात 7:50 बजे त्रयोदशी तिथि समाप्त: 25 अगस्त 2026, रात 9:29 बजे भौम प्रदोष का महत्व: मंगलवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को भौम प्रदोष कहा जाता है. इस दिन भगवान शिव की पूजा के साथ हनुमान जी और मंगल ग्रह की आराधना का भी विशेष महत्व माना गया है. मान्यता है कि इस व्रत को करने से मंगल दोष के अशुभ प्रभाव कम होते हैं, साहस और ऊर्जा में वृद्धि होती है तथा जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं. यह भी पढ़ें: श्रावणी मेला 2026: देवघर के आसमान में ड्रोन शो ने बिखेरा शिवमय नजारा, पहले दिन 74,987 श्रद्धालुओं ने किया जलार्पण The post सावन 2026: अगस्त में कब हैं सोम और भौम प्रदोष व्रत? नोट करें तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा का महत्व appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

BMC नेताओं को क्यों झटकेदार लगी Mahindra Scorpio-N? आखिर Toyota Innova Crysta में ऐसा क्या है जो सफर को बना देता है ज्यादा आरामदायक

महिंद्रा Scorpio-N हिंदुस्तानीय बाजार की सबसे लोकप्रिय एसयूवी में गिनी जाती है. दमदार रोड प्रेजेंस, ऊंचा ग्राउंड क्लीयरेंस और शानदार ऑफ-रोड क्षमता इसकी सबसे बड़ी पहचान है. लेकिन हाल ही में मुंबई महानगरपालिका (BMC) में इसे लेकर एक अलग ही बहस शुरू हो गई. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ वरिष्ठ नेताओं ने शिकायत की कि Scorpio-N की पिछली सीट पर सफर के दौरान ज्यादा झटके महसूस होते हैं, जिससे कमर दर्द की परेशानी हो रही है. इसके बाद Toyota Innova Crysta को विकल्प के तौर पर लेने का प्रस्ताव चर्चा में आ गया. सवाल यह है कि जब दोनों गाड़ियां मजबूत लैडर-फ्रेम प्लैटफॉर्म पर बनी हैं, तब आखिर आराम के मामले में इतना बड़ा फर्क क्यों महसूस होता है? इसके पीछे वाहन इंजीनियरिंग और डिजाइन से जुड़े कई अहम कारण हैं. ऊंचा डिजाइन बनाता है Scorpio-N को ज्यादा हिलने वाला वाहन Scorpio-N एक पारंपरिक एसयूवी है, जिसे खराब रास्तों, ऊबड़-खाबड़ इलाकों और ऑफ-रोड ड्राइविंग को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. इसी वजह से इसका ग्राउंड क्लीयरेंस ज्यादा है और पूरी बॉडी जमीन से काफी ऊंची रहती है. जब कोई ऊंची एसयूवी गड्ढों, स्पीड ब्रेकर या तेज मोड़ से गुजरती है, तो उसका सेंटर ऑफ ग्रैविटी भी ऊपर होने के कारण गाड़ी में साइड-टू-साइड मूवमेंट ज्यादा महसूस होता है. पीछे बैठने वाले यात्रियों को सिर और शरीर में ज्यादा झटके महसूस हो सकते हैं. यही वजह है कि लंबे सफर में कुछ लोगों को यह अनुभव कम आरामदायक लग सकता है. इसके मुकाबले Toyota Innova Crysta एक एमपीवी है, जिसकी बॉडी जमीन के ज्यादा करीब रहती है. इसका सेंटर ऑफ ग्रैविटी नीचे होने से गाड़ी कम डोलती है और पीछे बैठे यात्रियों को ज्यादा स्थिर अनुभव मिलता है. सस्पेंशन ट्यूनिंग भी दोनों गाड़ियों के अनुभव को बदल देती है किसी भी वाहन की राइड क्वालिटी केवल उसके प्लैटफॉर्म पर निर्भर नहीं करती, बल्कि सस्पेंशन ट्यूनिंग भी उतनी ही अहम भूमिका निभाती है. Mahindra ने Scorpio-N के सस्पेंशन को इस तरह तैयार किया है कि यह खराब रास्तों और ऑफ-रोड परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन करे. मजबूत सेटअप होने की वजह से छोटे गड्ढों और सड़क की हल्की अनियमितताओं का असर केबिन के अंदर थोड़ा ज्यादा महसूस हो सकता है. दूसरी ओर Toyota Innova Crysta का पूरा फोकस आरामदायक सफर पर रखा गया है. इसका सस्पेंशन शहर की सड़कों, स्पीड ब्रेकर और गड्ढों के झटकों को काफी हद तक सोख लेता है. यही कारण है कि टैक्सी ऑपरेटर, कॉर्पोरेट फ्लीट और लंबी दूरी तक पीछे बैठकर सफर करने वाले लोग अक्सर Innova Crysta को प्राथमिकता देते हैं. पीछे की सीट का डिजाइन भी आराम में निभाता है बड़ी भूमिका सिर्फ सस्पेंशन ही नहीं, सीट का डिजाइन भी सफर को आरामदायक या थकाऊ बना सकता है. Scorpio-N की दूसरी पंक्ति में सामान्य बेंच सीट मिलती है. ऊंची एसयूवी होने की वजह से बैठने की पोजिशन अलग होती है और लंबे समय तक यात्रा करने पर कुछ लोगों को कमर या पीठ पर दबाव महसूस हो सकता है. वहीं Innova Crysta अपने आरामदायक कैप्टन सीट विकल्प के लिए जानी जाती है. इनमें अलग-अलग आर्मरेस्ट, बेहतर अंडर-थाई सपोर्ट और पीछे झुकने की सुविधा मिलती है. इससे शरीर को बेहतर सहारा मिलता है और लंबे सफर में थकान कम महसूस होती है. इसके अलावा गाड़ी की ऊंचाई कम होने से अंदर बैठना और बाहर निकलना भी आसान होता है, जो बुजुर्ग यात्रियों के लिए अतिरिक्त सुविधा देता है. क्या Scorpio-N खराब एसयूवी है? जवाब बिल्कुल नहीं BMC में उठे इस विवाद का मतलब यह नहीं है कि Scorpio-N किसी तरह से खराब वाहन है. दोनों गाड़ियों का उद्देश्य अलग-अलग है. अगर आपकी प्राथमिकता ऑफ-रोड ड्राइविंग, मजबूत रोड प्रेजेंस, ऊंचा ग्राउंड क्लीयरेंस और एडवेंचर है, तो Scorpio-N बेहतरीन विकल्प मानी जाती है. लेकिन अगर आपकी रोजाना की यात्रा शहर में होती है, अक्सर पीछे बैठकर सफर करते हैं और सबसे ज्यादा महत्व आरामदायक राइड को देते हैं, तो Innova Crysta जैसी एमपीवी ज्यादा उपयुक्त साबित हो सकती है. इसलिए वाहन चुनते समय केवल कीमत या फीचर्स नहीं, बल्कि अपनी जरूरत और उपयोग का तरीका भी जरूर ध्यान में रखना चाहिए. ये भी पढ़ें: जुलाई में लॉन्च हुई ये 8 नई कारें, किसी में 526Km की रेंज तो किसी में नया टर्बो इंजन, देखें पूरी लिस्ट The post BMC नेताओं को क्यों झटकेदार लगी Mahindra Scorpio-N? आखिर Toyota Innova Crysta में ऐसा क्या है जो सफर को बना देता है ज्यादा आरामदायक appeared first on Naya Vichar.

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

About Us

नयाविचार एक आधुनिक न्यूज़ पोर्टल है, जो निष्पक्ष, सटीक और प्रासंगिक समाचारों को प्रस्तुत करने के लिए समर्पित है। यहां राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, तकनीक, शिक्षा और मनोरंजन से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जाता है। नयाविचार का उद्देश्य पाठकों को विश्वसनीय और गहन जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे सही निर्णय ले सकें और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

Quick Links

Who Are We

Our Mission

Awards

Experience

Success Story

© 2025 Developed By Socify

Scroll to Top