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Watch Video: सहरसा सदर अस्पताल में पत्रकार को पीटने वाले डॉक्टर एसके आजाद की अकड़ अब भी कम नहीं, ऑन कैमरा फिर भड़के

Saharsa Journalist Assault Case :  सहरसा सदर अस्पताल में समाचार संकलन के दौरान नया विचार के पत्रकार अभिषेक कुमार के साथ हुई मारपीट और बदसलूकी का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. घटना के बाद नया विचार की टीम जब ग्राउंड जीरो पर अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक डॉ. एस.के. आजाद से जवाब मांगने पहुंची, तो डॉक्टर की तीखी बहस हुई. सवाल पूछने पर चुप हो गये डॉ. एसके आजाद जब डॉक्टर आजाद से पूछा गया कि 20-25 लोगों और पैरामेडिकल छात्रों की भीड़ ने पत्रकार को ओटी रूम में बंद कर क्यों पीटा, तो उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की कि “सब कुछ फ्लो-फ्लो में हो गया. हालांकि, जब उनसे गलती मानने और माफी मांगने को लेकर सवाल किया गया, तो उनकी बोलती बंद हो गई और उन्होंने चेंबर का दरवाजा बंद कर मीडिया को बाहर निकालने का प्रयास किया. डीएम ने उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की इधर, इस पूरे मामले पर सहरसा के जिलाधिकारी ने संज्ञान लेते हुए उच्चस्तरीय जांच समिति गठित कर दी है. वहीं, बिहार के स्वास्थ्य विभाग और जिले के प्रभारी मंत्री मिथिलेश तिवारी ने भी सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है. घटना के बाद अस्पताल परिसर से सीसीटीवी कैमरों के गायब होने और परिसर में पसरी भारी गंदगी को लेकर भी स्वास्थ्य प्रशासन पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. जानिए… क्या है पूरा मामला सहरसा जिले के एक प्रशासनी स्कूल में 12 सितंबर को मिड-डे-मील खाने से कई शिशु बीमर पड़ गये. स्कूल प्रबंधन द्वारा बीमार बच्चों को सहरसा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया.घटना की जानकारी पर नया विचार के पत्रकार समाचार संकलन के लिए अस्पताल पहुंचे. इस दौरान पत्रकार अभिषेक कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट, गाली-गलौज और लूटपाट की गयी. आरोप है कि पत्रकार को ऑपरेशन थियेटर स्थित एक कमरे में बंद कर मारपीट की गयी, जिससे वह घायल हुए और उन्हें उपचार कराना पड़ा. Also Read: नया विचार के पत्रकार से मारपीट मामले में मंत्री श्रवण कुमार का बयान, बोले- दोषियों को नहीं छोड़ा जाएगा नया विचार के पत्रकार से मारपीट का सवाल पूछते ही बोले डॉ. SK आजाद- फ्लो फ्लो में हो गया The post Watch Video: सहरसा सदर अस्पताल में पत्रकार को पीटने वाले डॉक्टर एसके आजाद की अकड़ अब भी कम नहीं, ऑन कैमरा फिर भड़के appeared first on Naya Vichar.

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Gurugram Biker Case: कार में नशे में 4 लोग थे सवार? अभद्रता की कोशिश की, शिया ने सबसे पहले भाई को किया फोन

गुरुग्राम में स्त्री बाइक सवार शिया को कार से टक्कर मारने के मामले में अब उसके भाई ने घटना को लेकर कई अहम बातें बताई हैं. शिया के भाई के मुताबिक, घटना रविवार सुबह करीब 7:30 से 8 बजे के बीच हुई थी. हादसे के तुरंत बाद शिया ने सबसे पहले अपने भाई को फोन किया और बताया कि उसके साथ एक्सीडेंट हुआ है. भाई ने कहा कि शुरुआत में उन्हें लगा कि शिया शायद सड़क पर फिसल गई होगी, लेकिन बाद में उसने बताया कि यह hit-and-run की घटना थी. आपत्तिजनक इशारे करने का आरोप शिया के भाई का दावा है कि एक कार में चार लोग सवार थे और सभी नशे में थे. उनके मुताबिक, इन लोगों ने पहले शिया को परेशान करने और अभद्र इशारे करने की कोशिश की. शिया ने उन्हें दूरी बनाए रखने का इशारा किया था. इसके बाद भी कार सवारों ने खिड़की से आपत्तिजनक इशारे किए और आगे जाकर उसकी बाइक को टक्कर मार दी. घटना के बाद मानसिक तनाव में शिया? भाई के मुताबिक, घटना के बाद शिया किसी तरह घर पहुंची. उसने अपने माता-पिता को तुरंत पूरी बात नहीं बताई थी और अपनी तकलीफ को जिम की वजह से होने वाले शरीर के दर्द से जोड़कर बताया था. परिवार का कहना है कि घटना के बाद वह मानसिक तनाव जैसी स्थिति से गुजर रही है. ये भी पढ़ें: Gurugram Biker Case: कौन चला रहा था गाड़ी? कार मालिक बोला- 2 दिन पहले दोस्त को दी थी गाड़ी वकील ने बताया अब क्या होगी कार्रवाई शिया के वकील अभिषेक चौहान ने कहा कि परिवार की ओर से अब शिकायत दर्ज कराई जाएगी. उन्होंने बताया कि घटना गुरुग्राम के Golf Course Road के पास हुई थी. वकील के मुताबिक, शिया ने उन्हें घर पहुंचने के बाद पूरी घटना के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि मामले में Motor Vehicles Act के साथ BNS के तहत भी कार्रवाई की जाएगी. गुरुग्राम में पहले से दर्ज FIR को लेकर भी परिवार के वकील ने SHO से आगे की कार्रवाई के संबंध में बात की है. The post Gurugram Biker Case: कार में नशे में 4 लोग थे सवार? अभद्रता की कोशिश की, शिया ने सबसे पहले भाई को किया फोन appeared first on Naya Vichar.

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Bihar MLC Election: प्रशांत किशोर की जन सुराज 20 सितंबर को खोलेगी पत्ते, इन चेहरों पर लग सकती है मुहर, RJD-JDU भी तैयार

Bihar MLC Election: बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है. पार्टी 20 सितंबर को अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान करेगी. जन सुराज सभी संबंधित सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है. ऐसे में यह चुनाव पार्टी के लिए बड़ा सियासी टेस्ट माना जा रहा है. उम्मीदवारों के नाम पर चल रहा मंथन जन सुराज ने उम्मीदवारों के चयन को लेकर पिछले कुछ दिनों से मंथन तेज कर दिया है. कई सीटों पर उम्मीदवारों के नाम लगभग तय बताए जा रहे हैं. हालांकि, पार्टी ने अभी किसी नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है. पार्टी इस बार आखिरी चरण में उम्मीदवारों के नाम सामने लाने की रणनीति पर काम कर रही है. पटना में पार्टी स्तर पर लगातार बैठकें हो रही हैं. उम्मीदवारों के नाम पर अंतिम मुहर लगाने की तैयारी है. मतदाता सूची में गड़बड़ी का मुद्दा भी उठाया विधान परिषद चुनाव से पहले जन सुराज ने मतदाता सूची का मुद्दा भी उठाया है. पार्टी ने 1668 डुप्लीकेट नाम होने का दावा किया था. इसे लेकर निर्वाचन आयोग के सामने मामला रखा गया. पार्टी की ओर से बताया गया कि आयोग ने अंतिम मतदाता सूची में गड़बड़ियां दूर करने का आश्वासन दिया है. जन सुराज लगातार इस मुद्दे को चुनावी प्रक्रिया से जोड़कर उठा रहा है. पटना शिक्षक सीट पर डॉ. दिव्या ज्योति का नाम चर्चा में पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र को लेकर भी जन सुराज के संभावित उम्मीदवार की चर्चा तेज है. डॉ. दिव्या ज्योति का नाम संभावित उम्मीदवार के तौर पर सामने आया है. हालांकि, अंतिम फैसला 20 सितंबर को ही साफ होगा. उसी दिन पता चलेगा कि प्रशांत किशोर की पार्टी किन चेहरों पर भरोसा जताती है. RJD ने छह सीटों पर उतारे उम्मीदवार वहीं, RJD ने विधान परिषद की आठ सीटों के चुनाव के लिए छह उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं. पार्टी ने 11 सितंबर को उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी. पटना शिक्षक सीट से डॉ. संजीव कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया गया है. पटना स्नातक से दिलीप कुमार को टिकट मिला है. कोसी स्नातक से नितेश कुमार और दरभंगा स्नातक से अनिल कुमार झा को उम्मीदवार बनाया गया है. सारण शिक्षक सीट से प्रो. जयराम यादव और तिरहुत स्नातक से डॉ. रश्मि विनायक गौतम को मैदान में उतारा गया है. RJD ने अभी तिरहुत शिक्षक और दरभंगा शिक्षक सीट के लिए उम्मीदवार के नाम घोषित नहीं किए हैं. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें JDU के उम्मीदवारों के नाम भी लगभग तय दूसरी ओर JDU ने भी अपने उम्मीदवारों के नाम लगभग तय कर लिए हैं. हालांकि, पार्टी की ओर से अभी औपचारिक घोषणा नहीं हुई है. चर्चा के मुताबिक पटना स्नातक सीट से नीरज कुमार, तिरहुत स्नातक से अभिषेक झा, सारण शिक्षक से पुष्कर आनंद और दरभंगा शिक्षक सीट से दिलीप चौधरी का नाम आगे चल रहा है. पटना स्नातक सीट पर मुकाबला दिलचस्प हो सकता है. यहां नीरज कुमार के सामने RJD के दिलीप कुमार और जन सुराज की संभावित उम्मीदवार डॉ. दिव्या ज्योति के नाम की चर्चा है. अनुज कुमार का नाम भी संभावित दावेदार के तौर पर सामने आ रहा है. BJP के पत्ते अभी नहीं खुले विधान परिषद चुनाव को लेकर BJP ने अभी अपने उम्मीदवारों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं. ऐसे में जन सुराज की 20 सितंबर की घोषणा पर भी सबकी नजर है. उम्मीदवारों की घोषणा के बाद चुनावी तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है. Also Read: नया विचार के पत्रकार से मारपीट पर RJD सांसद बोले- खराब व्यवस्था छिपाने के लिए पीटा जा रहा, IP गुप्ता ने कहा- फ्रस्ट्रेशन में ऐसा कर रहे डॉक्टर The post Bihar MLC Election: प्रशांत किशोर की जन सुराज 20 सितंबर को खोलेगी पत्ते, इन चेहरों पर लग सकती है मुहर, RJD-JDU भी तैयार appeared first on Naya Vichar.

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Asia Cup Trophy Controversy: मोहसिन नकवी के ACC चीफ बनने से अब तक कैसे उलझते गए भारत-पाकिस्तान के क्रिकेट रिश्ते?

Asia Cup Trophy Controversy: हिंदुस्तान और पाकिस्तान के रिश्ते पहले से ही बेहद संवेदनशील रहे हैं. दोनों देशों के बीच नेतृत्वक तनाव का असर कई बार क्रिकेट पर भी दिखाई देता है. लेकिन अप्रैल 2025 के बाद क्रिकेट से जुड़े कई ऐसे घटनाक्रम सामने आए, जिन्होंने दोनों देशों के बीच स्पोर्ट्स संबंधों को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया. इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के चेयरमैन और पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी लगातार केंद्र में रहे. अप्रैल 2025 में नकवी ने एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के अध्यक्ष का पद संभाला था. उन्होंने श्रीलंका के शम्मी सिल्वा की जगह ली. यह जिम्मेदारी उन्हें तय रोटेशन के तहत मिली थी. उस समय उनके सामने 2025 पुरुष एशिया कप के आयोजन के साथ-साथ हिंदुस्तान-पाकिस्तान क्रिकेट संबंधों को संभालने की चुनौती भी थी. इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव और क्रिकेट से जुड़े विवाद एक के बाद एक सामने आते गए. पहलगाम हमले के बाद बदले हालात मोहसिन नकवी के ACC अध्यक्ष बनने के कुछ ही हफ्ते बाद 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला हुआ. इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई. इसके बाद हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव तेजी से बढ़ गया. नकवी उस समय PCB चेयरमैन के साथ पाकिस्तान के गृह मंत्री भी थे. ऐसे में दोनों देशों के बीच बढ़ते नेतृत्वक और सुरक्षा तनाव का असर क्रिकेट संबंधों पर भी दिखाई देने लगा. यहां यह समझना जरूरी है कि दोनों देशों के बीच तनाव की वजह नकवी का ACC अध्यक्ष बनना नहीं था. पहलगाम हमले और उसके बाद के नेतृत्वक घटनाक्रम ने रिश्तों को ज्यादा तनावपूर्ण बनाया. नकवी की दोहरी भूमिका ने बाद में क्रिकेट से जुड़े विवादों को जरूर ज्यादा संवेदनशील बना दिया. सैन्य तनाव का असर क्रिकेट पर भी पड़ा अप्रैल के हमले के बाद मई 2025 में हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव हुआ. दोनों देशों के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण दौर में पहुंच गए. इसका असर स्पोर्ट्स गतिविधियों पर भी पड़ा. हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय क्रिकेट पहले से ही लगभग बंद था. ऐसे माहौल में दोनों देशों के बीच ICC और ACC के आयोजनों से जुड़े मुकाबले और फैसले भी नेतृत्वक नजरिए से देखे जाने लगे. एशिया कप की ट्रॉफी बनी विवाद की वजह 2025 पुरुष एशिया कप के दौरान हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव का असर क्रिकेट के मैदान पर भी साफ दिखाई दिया. टूर्नामेंट UAE में आयोजित किया गया और हिंदुस्तान ने 28 सितंबर को फाइनल में पाकिस्तान को हराकर खिताब अपने नाम किया. फाइनल के बाद विवाद तब बढ़ा जब हिंदुस्तानीय टीम ने ACC अध्यक्ष मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया. नकवी PCB चेयरमैन होने के साथ पाकिस्तान के गृह मंत्री भी थे. हिंदुस्तान-पाकिस्तान के बीच पहले से चल रहे तनाव के बीच हिंदुस्तानीय टीम ने उनके हाथों ट्रॉफी लेने से परहेज किया. हिंदुस्तानीय खिलाड़ियों ने असली ट्रॉफी के बिना ही पोडियम पर जश्न मनाया. नकवी ने कहा, ACC ऑफिस से ले सकते हैं ट्रॉफी ट्रॉफी विवाद के बाद मोहसिन नकवी ने अपना रुख साफ किया. उन्होंने कहा कि वह फाइनल के दिन भी हिंदुस्तानीय टीम को ट्रॉफी देने के लिए तैयार थे और आगे भी ट्रॉफी देने के लिए तैयार हैं. नकवी ने यह भी कहा कि अगर हिंदुस्तानीय टीम या BCCI ट्रॉफी लेना चाहती है तो वह ACC के दुबई स्थित मुख्यालय से इसे ले सकती है. वहीं, BCCI की ओर से नकवी के ट्रॉफी अपने साथ ले जाने के फैसले पर आपत्ति जताई गई. इस पूरे मामले ने हिंदुस्तान-पाकिस्तान क्रिकेट संबंधों में चल रहे तनाव को और चर्चा में ला दिया. ये भी पढ़ें: Women’s Asia Cup: एशिया कप चैंपियन बनकर भी टीम इंडिया ने क्यों नहीं ली ट्रॉफी, जानिए BCCI के फैसले पर क्या बोले कोच वर्ल्ड कप में पाकिस्तान की भागीदारी पर सवाल जनवरी 2026 में पाकिस्तान की T20 वर्ल्ड कप में भागीदारी को लेकर भी अनिश्चितता पैदा हुई. ICC ने बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को टूर्नामेंट में शामिल करने का फैसला किया था. इसके बाद पाकिस्तान की ओर से भी टूर्नामेंट में भाग लेने को लेकर सवाल उठने लगे. 26 जनवरी को मोहसिन नकवी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की. इस बैठक में T20 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान की भागीदारी और हिंदुस्तान में होने वाले मुकाबलों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई. नकवी ने ICC पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया. उनका कहना था कि बांग्लादेश के हिंदुस्तान में मुकाबले स्पोर्ट्सने से इनकार करने के बाद उसके खिलाफ कार्रवाई की गई, जबकि पाकिस्तान के मामले को अलग नजरिए से देखा जा रहा था. हिंदुस्तान आने के बजाय ICC बैठक में ऑनलाइन जुड़े नकवी मई 2026 में IPL फाइनल के दौरान अहमदाबाद में ICC बोर्ड की बैठक हुई. मोहसिन नकवी इस बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए जुड़े. यह उस समय हुआ जब हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच भू-नेतृत्वक तनाव अभी भी बना हुआ था. ICC की बैठकों में रिमोट भागीदारी की व्यवस्था उपलब्ध होने के कारण नकवी ने ऑनलाइन बैठक में हिस्सा लिया. स्त्री एशिया कप में भी टीम ने नहीं ली ट्रॉफी 13 सितंबर 2026 को स्त्री एशिया कप के फाइनल में हिंदुस्तान ने श्रीलंका को हराकर खिताब अपने नाम किया. इसके बाद हिंदुस्तानीय स्त्री टीम ने भी मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया. पुरुष एशिया कप 2025 के बाद यह दूसरी बड़ी घटना थी, जब हिंदुस्तानीय टीम ने नकवी के हाथों ट्रॉफी लेने से परहेज किया. ये भी पढ़ें: मोहसिन नकवी की विदाई का काउंटडाउन! हिंदुस्तान को जल्द ही मिल सकती हैं एशिया कप की दोनों ट्रॉफियां The post Asia Cup Trophy Controversy: मोहसिन नकवी के ACC चीफ बनने से अब तक कैसे उलझते गए हिंदुस्तान-पाकिस्तान के क्रिकेट रिश्ते? appeared first on Naya Vichar.

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TMC के बागी सांसद बसुनिया का दावा- भाजपा में शामिल होंगे 17 सांसद, शमिक भट्टाचार्य का इनकार

तृणमूल कांग्रेस के बागी नेता एवं कूचबिहार से लोकसभा सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने सोमवार को दावा किया कि टीएमसी छोड़कर एनसीपीआई में शामिल होने वाले 20 में से 17 सांसद हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो जायेंगे. उन्होंने कहा कि अक्टूबर में दुर्गा पूजा से पहले या उसके बाद ये सभी लोग बीजेपी का झंडा थामेंगे. हालांकि, पश्चिम बंगाल प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने उनके दावे को खारिज कर दिया है. ‘दलबदल रोधी कानून के दायरे में नहीं आयेंगे’ बसुनिया ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि इन 17 सांसदों ने एक साथ भाजपा में शामिल होने की योजना को अंतिम रूप दे दिया है. टीएमसी के बागी सांसद ने दावा किया कि सामूहिक रूप से दल बदलने पर वे दलबदल रोधी कानून के दायरे में नहीं आयेंगे. हम 17 सांसद एक साथ भाजपा में जा रहे हैं. चूंकि 20 सदस्यों में से दो-तिहाई से अधिक सांसद दल बदल रहे हैं. इसलिए दलबदल रोधी कानून हम पर लागू नहीं होगा. -जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया, टीएमसी छोड़कर एनसीपीआई में शामिल हुए सांसद ‘कार्रवाई से बचने के लिए 14 सांसदों का साथ आना जरूरी’ तृणमूल के 20 असंतुष्ट सांसदों ने 14 जून 2026 को नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय की घोषणा की थी. इसके साथ ही इन सांसदों ने सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को समर्थन देने का ऐलान कर दिया था. दो-तिहाई का आंकड़ा पूरा करने के लिए बागी 20 सांसदों में से कम से कम 14 सांसदों का साथ जाना जरूरी है. तभी वे अयोग्यता का सामना करने से बच पायेंगे. ये भी पढ़ें: तृणमूल के बागी सांसदों के एनसीपीआई में शामिल होने के बाद संकराईल में पार्टी कार्यालय की सुरक्षा बढ़ी 3 अल्पसंख्यक सांसद बाहर से करेंगे एनडीए का समर्थन : बसुनिया बसुनिया ने कहा कि हालांकि, इन 20 सांसदों में से अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले 3 सांसद औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल नहीं होंगे, क्योंकि उनके निर्वाचन क्षेत्रों में नेतृत्वक और प्रशासनिक परिस्थितियां इसके अनुकूल नहीं हैं. उन्होंने दावा किया कि सांसद अबू ताहेर खान, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान बाहर से एनडीए को समर्थन देंगे. बदले में उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां या विभाग दिये जा सकते हैं. विरोध झेल चुके हैं उत्तर बंगाल के बागी टीएमसी सांसद बसुनिया का यह बयान उनके और उनकी पत्नी तृणमूल विधायक संगीता रॉय के कूचबिहार के सिताई स्थित पैतृक घर लौटने पर विरोध-प्रदर्शन का सामना किये जाने के कुछ दिन बाद आया है. बसुनिया के नेतृत्वक रुख में बदलाव की आलोचना के बीच स्थानीय लोगों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने दंपती के खिलाफ प्रदर्शन किया था. ये भी पढ़ें: ममता बनर्जी को बड़ा झटका, सुदीप बनर्जी भी हुए बागी, बोले- दीदी को सिर्फ सलाहकार बनायेंगे लगातार सफाई दे रहे हैं बसुनिया इस दौरान उनके आवास के पास स्थित तृणमूल के एक कार्यालय में भी कथित तौर पर आग लगा दी गयी थी. बसुनिया लगातार यह कहते रहे हैं कि अब उनका तृणमूल से कोई संबंध नहीं है और वह एनडीए के साथ हैं. TMC के बागी सांसदों भाजपा में शामिल करने का इरादा नहीं : शमिक पश्चिम बंगाल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा है कि हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (भाजपा) की ऐसी कोई योजना नहीं है. वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद जिन लोगों ने भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या की, उन्हें प्रताड़ित किया, पार्टी की स्त्री कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार किया, वैसे लोगों को पार्टी में शामिल नहीं किया जायेगा. The post TMC के बागी सांसद बसुनिया का दावा- भाजपा में शामिल होंगे 17 सांसद, शमिक भट्टाचार्य का इनकार appeared first on Naya Vichar.

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सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद उठे सवालों में क्यों आए सूरज, डीनो, रिया और आदित्य ठाकरे? पढ़िए पूरी कहानी

Sushant Singh Rajput Case: सुशांत सिंह राजपूत की मौत सिर्फ एक्टर की मौत की समाचार बनकर नहीं रह गई थी. 14 जून 2020 के बाद बॉलीवुड से लेकर नेतृत्व तक कई बड़े नाम इस मामले से जुड़ी चर्चाओं का हिस्सा बने. किसी का नाम कथित पार्टी से जोड़कर लिया गया, किसी पर सोशल मीडिया पर सवाल उठे, तो किसी के खिलाफ शिकायतों और याचिकाओं में आरोपों का जिक्र हुआ. दूसरी तरफ कई लोगों ने इन दावों को सिरे से खारिज किया और कानूनी रास्ता भी अपनाया. सुशांत की मौत के साथ ही 8 जून 2020 को हुई दिशा सालियान की मौत को लेकर भी कई तरह के सवाल और थ्योरी सामने आती रहीं. यही वजह रही कि अलग-अलग समय पर सूरज पंचोली, डीनो मोरिया, रिया चक्रवर्ती, अरबाज खान, सलमान खान और आदित्य ठाकरे जैसे नाम सुर्खियों में रहे. लेकिन इन नामों का जिक्र किस संदर्भ में हुआ था और आधिकारिक तौर पर क्या सामने आया? ‘सुशांत : सुसाइड या हत्या?’ सीरीज की इस कड़ी में इसी की पड़ताल. 13 जून की कथित पार्टी और सूरज पंचोली सुशांत की मौत से ठीक एक रात पहले यानी 13 जून 2020 को सूरज पंचोली के घर कथित पार्टी होने की समाचारें सामने आई थीं. इसके बाद सोशल मीडिया और नेतृत्वक बयानों में इस पार्टी को सुशांत की मौत से जोड़कर सवाल उठाए गए. उस समय बीजेपी नेता नारायण राणे ने भी कथित पार्टी में शामिल लोगों से पूछताछ को लेकर सवाल खड़े किए थे. इसके बाद सूरज पंचोली का नाम सुशांत केस की चर्चाओं में प्रमुखता से लिया जाने लगा. सूरज ने इन दावों को खारिज किया था. उन्होंने कहा था कि उनका नाम बेवजह मामले में घसीटा जा रहा है. उन्होंने आदित्य ठाकरे के साथ किसी तरह के संपर्क से जुड़े दावों से भी इनकार किया था. डीनो मोरिया के घर जाने की समाचारों का क्या था सच? इसी कथित पार्टी से जुड़ी चर्चाओं में अभिनेता डीनो मोरिया का नाम भी सामने आया. कुछ रिपोर्ट में दावा किया गया कि सूरज के घर से निकलने के बाद कुछ लोग डीनो के घर गए थे. डीनो मोरिया ने इन समाचारों को गलत बताया था. उनका कहना था कि उनके घर ऐसी कोई पार्टी नहीं हुई थी. इस तरह उनके नाम को लेकर चल रही चर्चाओं पर उन्होंने सार्वजनिक तौर पर सफाई दी. रिया चक्रवर्ती पर क्यों केंद्रित हुई जांच? सुशांत की एक्स गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती का मामला बाकी नामों से अलग था. सुशांत के पिता केके सिंह की शिकायत के बाद रिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई और जांच एजेंसियों ने उनसे पूछताछ की. मामला आगे बढ़ा तो ड्रग्स एंगल की जांच में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने रिया को गिरफ्तार किया. हालांकि, सुशांत की मौत के मामले में आपराधिक साजिश को लेकर कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया. रिया के मामले ने सुशांत केस को एक अलग दिशा दी और उनकी निजी जिंदगी, पैसों और ड्रग्स से जुड़े सवाल भी जांच का हिस्सा बने. अरबाज खान के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट सुशांत की मौत के बाद सोशल मीडिया पर बॉलीवुड के कई सितारों को लेकर तरह-तरह के दावे किए जा रहे थे. इसी दौरान अभिनेता और निर्माता अरबाज खान का नाम भी कुछ पोस्ट और वीडियो में सुशांत और दिशा सालियान की मौत से जोड़कर पेश किया गया. अरबाज ने इन दावों को लेकर कानूनी कार्रवाई की. सितंबर 2020 में उन्होंने मानहानि का मुकदमा दायर किया और कथित तौर पर आपत्तिजनक पोस्ट और वीडियो हटाने की मांग की. सलमान खान का नाम किस वजह से चर्चा में आया? सुशांत की मौत के बाद बॉलीवुड में नेपोटिज्म, गुटबाजी और इंडस्ट्री में कथित भेदभाव को लेकर बहस तेज हो गई. इस बहस के केंद्र में कई बड़े सितारों के नाम आए, जिनमें सलमान खान भी शामिल थे. जून 2020 में सलमान ने अपने फैंस से सुशांत के परिवार और उनके प्रशंसकों की भावनाओं का सम्मान करने की अपील की थी. उनके भाई अरबाज खान ने भी सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग और नफरत को लेकर प्रतिक्रिया दी थी. इसलिए सलमान का नाम मुख्य रूप से उस दौर में चल रही बॉलीवुड की अंदरूनी नेतृत्व और नेपोटिज्म की बहस के संदर्भ में चर्चा में रहा. आदित्य ठाकरे तक कैसे पहुंचा मामला? सुशांत केस को लेकर महाराष्ट्र की नेतृत्व में भी काफी हलचल रही. इसी दौरान महाराष्ट्र के तत्कालीन मंत्री आदित्य ठाकरे का नाम भी नेतृत्वक आरोपों के बीच लिया गया. आदित्य ठाकरे ने इन आरोपों को खारिज किया और इसे नेतृत्वक साजिश बताया. बाद में दिशा सालियान की मौत से जुड़े मामलों में दाखिल शिकायतों और याचिकाओं में भी उनका नाम शामिल किया गया. ये भी पढ़ें: सुशांत सुसाइड या हत्या? ‘2-3 बार दबाया गया था गला’… पोस्टमार्टम स्टाफ के दावे से फिर गरमाया मामला सुशांत और दिशा सालियान की मौत को क्यों जोड़ा जाता रहा? दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को हुई थी, जबकि सुशांत की मौत 14 जून को हुई. इन दोनों घटनाओं के बीच छह दिनों का अंतर था. इसी वजह से दोनों मामलों को जोड़कर कई सवाल और थ्योरी सामने आती रहीं. दिशा मामले से जुड़ी किसी भी नई शिकायत, जांच या नेतृत्वक बयान के बाद सुशांत केस भी फिर चर्चा में आ जाता था. इसी सिलसिले में सूरज पंचोली, डीनो मोरिया और आदित्य ठाकरे जैसे नाम अलग-अलग दावों और चर्चाओं के संदर्भ में सामने आते रहे. लेकिन दोनों घटनाओं के बीच संबंध को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए हर दावे को जांच में साबित तथ्य नहीं माना जा सकता. एक केस, कई नाम और कई अलग-अलग कहानियां सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद सामने आए नामों को एक ही नजर से देखना सही नहीं होगा. रिया चक्रवर्ती के खिलाफ एफआईआर और जांच हुई, सूरज पंचोली और डीनो मोरिया ने अपने बारे में किए गए दावों को खारिज किया, अरबाज खान ने कथित सोशल मीडिया आरोपों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की, जबकि सलमान खान का नाम मुख्य रूप से नेपोटिज्म और बॉलीवुड की अंदरूनी नेतृत्व की बहस में आया. आदित्य ठाकरे ने भी अपने खिलाफ लगाए गए नेतृत्वक आरोपों से इनकार किया. सुशांत केस की कहानी में इन नामों का बार-बार जिक्र इसी वजह से हुआ, लेकिन हर चर्चा

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अमेरिकी खुफिया एजेंसी का दावा-तालिबान ने कंधार विमान अपहरण के बाद लादेन को सुरक्षा बढ़ाने की दी थी चेतावनी

अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए की ओर से जारी खुफिया दस्तावेजों से इस बात का खुलासा हुआ है कि तालिबान ने 1999 में अलकायदा के आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को अपनी सुरक्षा बढ़ाने के लिए आगाह किया था. यह चेतावनी उस वक्त जारी की गई थी, जब उसी साल इंडियन एयरलाइंस के एक विमान का अपहरण कर उसे कंधार ले जाया गया था. प्रेसिडेंशियल डेली ब्रीफ्स में किया गया था प्रस्तुत तालिबान की ओर से आगाह किये जाने का उल्लेख जनवरी 2000 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के समक्ष प्रस्तुत किए गए प्रेसिडेंशियल डेली ब्रीफ्स (पीडीबी) में किया गया था. ये दस्तावेज 11 सितंबर 2001 के हमलों की 25वीं बरसी के मौके पर जारी किए गए ऐसे 71 दस्तावेजों में शामिल हैं. तीन जनवरी, 2000 के इस दस्तावेज में कहा गया कि तालिबान ने पिछले हफ्ते लादेन को अपनी सुरक्षा बढ़ाने के लिए आगाह किया था, जो यह साबित करता है कि वो लादेन का समर्थक बना हुआ है. 1999 में हुआ था इंडियन एयरलाइंस के विमान का अपहरण काठमांडू से नयी दिल्ली जा रहे इंडियन एयरलाइंस के एक विमान का 24 दिसंबर, 1999 को हरकत-उल-मुजाहिदीन के आतंकवादियों ने अपहरण कर लिया था और उसे जबरन कंधार ले जाया गया था. उड़ान संख्या आईसी 814 से जुड़ा यह संकट 31 दिसंबर, 1999 को उस समय खत्म हुआ, जब हिंदुस्तान ने तीन आतंकवादियों को रिहा कर उन्हें तालिबान को सौंप दिया. कई देशों पर हमले की साजिश रच रहा था लादेन क्लिंटन के समक्ष 28 अगस्त, 1998 को प्रस्तुत एक अन्य पीडीबी में संकेत दिया गया था कि लादेन मिस्र, अरब प्रायद्वीप विशेषकर कुवैत, सऊदी अरब और यमन, हिंदुस्तान, पाकिस्तान, युगांडा और संभवतः नाइजीरिया में हमले करने की साजिश रच रहा था. इसमें कहा गया था कि उत्तरी अमेरिका, यूरोप और पूर्वी एशिया में लादेन के मजबूत नेटवर्क से संकेत मिलता है कि वह इन क्षेत्रों में भी अमेरिका से जुड़े प्रतिष्ठानों को निशाना बना सकता है. पेंटागन पर हमले की जानकारी अफगानिस्तान के पास थी सबसे शुरुआती दस्तावेज 13 फरवरी, 1998 का था, जिसमें कहा गया था कि बिन लादेन और अन्य इस्लामी चरमपंथियों ने खुले बाजार से अज्ञात रासायनिक, जैविक और परमाणु पदार्थ हासिल करने पर सहमति जताई. रिपोर्ट में कहा गया था कि लादेन के पास वैध कंपनियां, कारोबारी संबंध और एक वित्तीय साम्राज्य है, जो उसे ऐसे हथियार हासिल करने के प्रयास में मदद कर सकते हैं. सीआईए द्वारा जारी किए गए कुछ पीडीबी तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के लिए 12 अक्टूबर, 2000 को यमन के अदन बंदरगाह में युद्धपोत यूएसएस कोल पर हुए बम हमले की अमेरिका-यमन जांच के शुरुआती नतीजों के आधार पर तैयार किए गए थे. सीआईए की ओर से जारी दस्तावेजों में आखिरी दस्तावेज 12 सितंबर, 2001 का है. यह तारीख वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और पेंटागन से विमानों के टकराने के अगले दिन की है. स्थिति रिपोर्ट में हमले से पहले लादेन से जुड़ी नवीनतम खुफिया जानकारी का विवरण दिया गया था, जिसमें उसकी संभावित संलिप्तता से जुड़े ब्योरे भी शामिल थे. रिपोर्ट में कहा गया कि उपलब्ध साक्ष्यों से संकेत मिलता है कि अफगानिस्तान और फारस की खाड़ी क्षेत्र के सुन्नी चरमपंथियों को लादेन के निर्देश पर होने वाले हमलों की जानकारी थी. ये भी पढ़ें: असदुद्दीन ओवैसी ने कहा-बराबरी के लिए नहीं, देश के मुसलमानों को टारगेट करने के लिए बीजेपी कर रही UCC की बात The post अमेरिकी खुफिया एजेंसी का दावा-तालिबान ने कंधार विमान अपहरण के बाद लादेन को सुरक्षा बढ़ाने की दी थी चेतावनी appeared first on Naya Vichar.

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Gurugram Biker Case: कौन चला रहा था गाड़ी? कार मालिक बोला- 2 दिन पहले दोस्त को दी थी गाड़ी

Gurugram Hit-and-Run Case: गुरुग्राम के Golf Course Road पर स्त्री बाइकर को कार से टक्कर मारने का मामला अब एक नए सवाल पर पहुंच गया है- आखिर उस समय कार कौन चला रहा था? जिस सफेद कार का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, उसके मालिक ने दावा किया है कि घटना के वक्त वह खुद गाड़ी में नहीं था. उसने बताया कि उसने अपनी कार करीब दो दिन पहले एक दोस्त को दी थी. गुरुग्राम पुलिस ने वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर केस दर्ज किया है और कथित ड्राइवर की पहचान की कोशिश कर रही है. कार मालिक बोला- मैंने दोस्त को दी थी गाड़ी कार के मालिक की पहचान मनीष के तौर पर हुई है. उसने मीडिया से बातचीत में कहा कि उसने अपनी कार दो दिन पहले एक दोस्त को दी थी. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक उसका कहना है कि जिस समय स्त्री बाइकर को टक्कर लगी, उस वक्त वह खुद गाड़ी नहीं चला रहा था. वह सेना में काम करता है और घटना के समय शहर में नहीं होने की बात भी सामने आई है. वहीं, कुछ रिपोर्टों में कार मालिक के हवाले से दोस्त का नाम कल्याण बैसला बताया गया है. फिलहाल पुलिस भी कथित ड्राइवर की पहचान और भूमिका की जांच कर रही है. ये भी पढ़ें: Emergency Landing: भोपाल से दिल्ली जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट की जयपुर में इमरजेंसी लैंडिंग, उड़ान के दौरान आई तकनीकी खराबी स्त्री बाइकर ने क्या आरोप लगाया? यह घटना रविवार को गुरुग्राम के Golf Course Road पर हुई. स्त्री बाइकर की पहचान सिया के रूप में हुई है. वह अपने कुछ साथियों के साथ बाइक राइड पर थीं. उनके मुताबिक, एक कार काफी देर से उनके ग्रुप के पीछे चल रही थी. सिया ने अपने वीडियो बयान में आरोप लगाया कि उन्होंने कार सवारों से दूरी बनाए रखने को कहा था. इसके बाद कार सवार कथित तौर पर उनके पीछे आते रहे और उन्हें रास्ते में रोकने की कोशिश की. वीडियो में कार को बाइक के पास आते और फिर टक्कर मारते हुए देखा जा सकता है. टक्कर के बाद सिया सड़क पर गिर गईं और उनकी बाइक कुछ दूरी तक घिसटती हुई चली गई. घटना के बाद कार वहां से निकल गई. सिया ने इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिसके बाद मामला तेजी से वायरल हुआ. सिया ने कार में बैठे लोगों के नशे में होने का भी आरोप लगाया है. ये भी पढ़ें: Doni Bal Gang के 2 शूटर एनकाउंटर में ढेर, Blood Donation Camp पर करने वाले थे हमला पुलिस अब किसकी तलाश कर रही है? गुरुग्राम पुलिस ने वायरल वीडियो का खुद संज्ञान लिया है और कथित ड्राइवर के खिलाफ FIR दर्ज की है. पुलिस का कहना है कि वीडियो और दूसरे उपलब्ध सबूतों के आधार पर आरोपी की पहचान कर उसे गिरफ्तार करने की कोशिश की जा रही है. वहीं, स्त्री बाइकर सिया ने भी कहा है कि वह अपने वकील के साथ FIR दर्ज कराकर कानूनी कार्रवाई करेंगी. The post Gurugram Biker Case: कौन चला रहा था गाड़ी? कार मालिक बोला- 2 दिन पहले दोस्त को दी थी गाड़ी appeared first on Naya Vichar.

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FATF से पहले पाकिस्तान का नया दांव? मसूद अजहर पर 70 लाख का इनाम, 26/11 से जुड़े 19 नाम Red Book में शामिल

पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) ने 2026 के लिए मोस्ट वांटेड आतंकियों की नई Red Book जारी की है. इस सूची में जैश-ए-मोहम्मद (JeM) प्रमुख मसूद अजहर का नाम भी शामिल है. FIA ने अजहर को भगोड़ा बताते हुए उस पर घोषित इनाम 20 लाख पाकिस्तानी रुपये बढ़ाकर 70 लाख रुपये कर दिया है. नई सूची में 26/11 मुंबई हमलों से जुड़े 19 लोगों के नाम भी शामिल किए गए हैं. अक्टूबर में होने वाली Financial Action Task Force (FATF) की बैठक से पहले जारी इस सूची की टाइमिंग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. मसूद अजहर पर इनाम 50 लाख से बढ़ाकर 70 लाख रुपये FIA ने 2021 में मसूद अजहर पर 50 लाख पाकिस्तानी रुपये का इनाम घोषित किया था. पांच साल बाद 2026 की नई Red Book में इसे बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये कर दिया गया है. अजहर को पाकिस्तान के मोस्ट वांटेड आतंकियों की सूची में रखा गया है. सूत्रों का दावा है कि यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब अक्टूबर में FATF की बैठक होनी है. सूत्र इसे पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद और टेरर फाइनेंसिंग के खिलाफ कार्रवाई दिखाने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं. मसूद अजहर को अफगानिस्तान में बताता रहा है पाकिस्तान पाकिस्तान2021 से यह दावा करता रहा है कि मसूद अजहर उसके देश में मौजूद नहीं है और वह अफगानिस्तान जा चुका है. इसी दौरान FIA ने उसके खिलाफ 50 लाख पाकिस्तानी रुपये का इनाम भी घोषित किया था. अब पांच साल बाद इनाम बढ़ाए जाने से उसके ठिकाने को लेकर पाकिस्तान के पुराने दावों पर फिर सवाल उठ रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक हिंदुस्तानीय खुफिया एजेंसियों ने पिछले छह महीने के तकनीकी विश्लेषण में ऐसे संकेत पाए हैं कि मसूद अजहर पाकिस्तान के सिंध प्रांत के नवाबशाह शहर में मौजूद हो सकता है. हालांकि पाकिस्तान ने इस दावे को स्वीकार नहीं किया है. नई रेड बुक में 26/11 से जुड़े 19 नाम FIA की 2026 रेड बुक में 26 नवंबर 2008 के मुंबई आतंकी हमलों से जुड़े 19 लोगों के नाम भी शामिल हैं. इन लोगों पर हमलावरों की मदद करने, आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने या समुद्री रास्ते से मुंबई पहुंचाने के लिए नावों की व्यवस्था करने जैसी भूमिकाओं के आरोप हैं. सूत्रों के मुताबिक इनमें से 17 लोगों के नाम के साथ तस्वीरें और 26/11 हमले में उनकी कथित भूमिकाओं का विवरण दिया गया है. वहीं दो लोगों के मामले में 2021 की सूची की तुलना में कुछ जानकारियां नई रेड बुक में दिखाई नहीं देती हैं. दो नामों से तस्वीर और LeT कनेक्शन हटाने का दावा सूत्रों के मुताबिक 2021 और 2026 की FIA सूचियों की तुलना में तुर्बत के मोहम्मद खान से जुड़ी कुछ जानकारियों में बदलाव नजर आता है. नई सूची में उसका नाम मौजूद है, लेकिन तस्वीर, लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से कथित जुड़ाव और मुंबई हमलों में उसकी भूमिका का विवरण नहीं है. मोहम्मद खान पर अल-हुसैनी नाव उपलब्ध कराने का आरोप रहा है, जिसका इस्तेमाल हमलावरों को मुंबई तक पहुंचाने में किए जाने का दावा है. इसी तरह बहावलनगर के अब्दुल रहमान का नाम भी सूची में है, लेकिन सूत्रों के अनुसार उसकी तस्वीर और LeT से कथित संबंध का उल्लेख नई सूची में नहीं है. सूत्रों का कहना है कि 2021 की सूची में इन दोनों से जुड़ी अधिक विस्तृत जानकारी उपलब्ध थी. समुद्री रास्ते से मदद के आरोप वाले 11 नाम नई रेड बुक में ऐसे 11 लोगों के नाम भी दिए गए हैं, जिन पर अल-हुसैनी और अल-फौज नावों के जरिए मुंबई हमलावरों की समुद्री यात्रा में मदद करने का आरोप है. इनमें मोहम्मद अमजद खान, शाहिद गफूर, मोहम्मद उस्मान, अतीक-उर-रहमान, रियाज अहमद, मोहम्मद मुश्ताक, मोहम्मद नईम, अब्दुल शकूर, मोहम्मद साबिर सल्फी, मोहम्मद उस्मान और शकील अहमद के नाम शामिल हैं. 26/11 की फंडिंग से जुड़े छह नाम FIA की सूची में छह ऐसे लोगों के नाम भी शामिल हैं, जिन पर मुंबई हमलों के लिए आर्थिक मदद उपलब्ध कराने के आरोप हैं. इनमें मोहम्मद इफ्तिखार अली, मोहम्मद जिया, मोहम्मद अब्बास नासिर, जावेद इकबाल, मुख्तार अहमद और अहमद सईद शामिल हैं.सूची में दिए गए विवरण के मुताबिक मोहम्मद इफ्तिखार अली पर 70 हजार पाकिस्तानी रुपये खर्च कर VOIP कनेक्शन तैयार कराने का आरोप है. दावा है कि इन कनेक्शनों के जरिए हमलावर अपने हैंडलर्स से संपर्क में थे. अन्य नामों पर भी अलग-अलग रकम उपलब्ध कराने के आरोप दर्ज हैं. 18 साल से फरार बताए जा रहे आरोपी FIA के मुताबिक 26/11 से जुड़े 17 आरोपी पिछले 18 साल से फरार हैं. दूसरी ओर, हिंदुस्तानीय खुफिया सूत्रों का दावा है कि ये लोग पाकिस्तान में ही मौजूद हैं. सूत्र इसी आधार पर नई रेड बुक में उनके नाम शामिल किए जाने की टाइमिंग पर सवाल उठा रहे हैं. यह दावा हिंदुस्तानीय खुफिया सूत्रों पर आधारित है और FIA ने आधिकारिक तौर पर इन लोगों की मौजूदा लोकेशन की पुष्टि नहीं की है. पांच साल में 1,330 से बढ़कर 1,804 हुई संख्या उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, FIA की 2021 Red Book में 1,330 मोस्ट वांटेड आतंकियों के नाम थे. 2026 की नई सूची में यह आंकड़ा बढ़कर 1,804 हो गया है. इस तरह पांच वर्षों में संख्या में करीब 35 फीसदी की वृद्धि हुई है. ऑपरेशन सिंदूर में निशाने पर था बहावलपुर का JeM ठिकाना मसूद अजहर का नाम ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी चर्चा में आया था. हिंदुस्तान की कार्रवाई में पाकिस्तान के बहावलपुर स्थित जैश-ए-मोहम्मद के मरकज सुभान अल्लाह को निशाना बनाया गया था. हिंदुस्तानीय सशस्त्र बलों के मुताबिक यह ठिकाना पाकिस्तान के अंदर करीब 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित था. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 2015 से सक्रिय मरकज सुभान अल्लाह को JeM के प्रशिक्षण, वैचारिक तैयारी और ऑपरेशनल गतिविधियों के प्रमुख केंद्रों में गिना जाता रहा है. इसे पुलवामा आतंकी हमले की साजिश से भी जोड़ा गया है. इस परिसर में मसूद अजहर और उसके परिवार से जुड़े लोगों के आवास होने की जानकारी भी सामने आती रही है. FATF बैठक से पहले Red Book की टाइमिंग पर क्यों उठ रहे सवाल? पाकिस्तान की नई Red Book की टाइमिंग इसलिए चर्चा में है क्योंकि FATF की अगली Plenary अक्टूबर 2026 में

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असदुद्दीन ओवैसी ने कहा-बराबरी के लिए नहीं, देश के मुसलमानों को टारगेट करने के लिए बीजेपी कर रही UCC की बात

असदुद्दीन ओवैसी ने एएनआई से बात करते हुए कहा कि सबसे पहले आपको यह समझना होगा कि UCC क्यों लाई जा रही है. बीजेपी देश के नागरिकों के बीच भेदभाव की बात करती है और कहती है कि यह सभी नागरिकों को बराबरी का अधिकार दिलाने की पहल है, लेकिन सच्चाई यह है कि बीजेपी देश के 18 लाख मुसलमानों को टारगेट कर रही है. हिंदुस्तानीय संविधान के आर्टिकल 25 (धर्म की आजादी), 14 (बराबरी का अधिकार), 26 और 29 का उल्लंघन कर रहे हैं. देश की रूह ही प्लूरलिज्म है असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि हमारे देश की रूह ही प्लूरलिज्म है, लेकिन बीजेपी गैर हिंदुओं पर हिंदुओं का कानून थोपना चाहती है. अमित शाह और उनके सहयोगी इसी प्रयास में हैं. मोदी प्रशासन द्वारा खुद बनाए गए लॉ कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि UCC हिंदुस्तान के लिए न तो जरूरी है और न ही सही. गोवा में चुनाव आ रहे हैं, मैं अमित शाह, BJP और RSS को चुनौती देता हूं कि वे यहां UCC लागू करके दिखाएं, वे ऐसा नहीं कर सकते हैं. गोवा में कई ऐसे कानून हैं, जो देश के अन्य राज्यों में नहीं हैं. वहां कैथोलिक चर्च एक कपल को तलाक दे सकता है. वहीं वहां यह कानून भी है कि हिंदू स्त्री अगर 30 साल की उम्र तक बेटे को जन्म ना दे पाए, तो उसके पति को दूसरी शादी करने की आजादी है. अमित शाह का दावा 2029 तक 21 राज्यों में लागू होगा UCC असदुद्दीन ओवैसी ने यह बयान तब दिया है जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 13 सितंबर को समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले NDA शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू हो जाएगी. शाह ने कहा कि कई राज्यों में इसे पहले ही लागू किया जा चुका है और बाकी राज्यों में भी काम जारी है. उन्होंने कहा कि ट्रिपल तलाक को समाप्त कर मुस्लिम स्त्रीओं को समान अधिकार देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. ये भी पढ़ें: 2029 से पहले 21 राज्यों में लागू होगा UCC, अमित शाह बोले- घुसपैठियों की पहचान कर डिपोर्ट करेंगे The post असदुद्दीन ओवैसी ने कहा-बराबरी के लिए नहीं, देश के मुसलमानों को टारगेट करने के लिए बीजेपी कर रही UCC की बात appeared first on Naya Vichar.

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